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अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से लिया संन्यास, मायावती की शर्त के बाद बड़ा फैसला; आकाश आनंद को लेकर कही ये बात

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AIN NEWS 1 लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से चल रहा घमासान अब एक बड़े मोड़ पर पहुंच गया है। बसपा सुप्रीमो मायावती की ओर से आकाश आनंद की पार्टी में सक्रिय भूमिका को लेकर रखी गई शर्त के बाद उनके ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर दी है। अशोक सिद्धार्थ ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी।

अशोक सिद्धार्थ ने कहा कि वह बसपा सुप्रीमो मायावती के निर्देश का पालन करते हुए राजनीति और सामाजिक जीवन से संन्यास ले रहे हैं। उन्होंने अपने पोस्ट में मायावती के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने उन्हें विधान परिषद से लेकर राज्यसभा तक जाने का अवसर दिया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनका जीवन हमेशा मायावती के प्रति ऋणी रहेगा।

मायावती के बयान के बाद आया अशोक सिद्धार्थ का फैसला

दरअसल, 9 सितंबर को मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक विस्तृत पोस्ट कर अशोक सिद्धार्थ पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए थे। मायावती ने कहा था कि अशोक सिद्धार्थ ने पार्टी और बहुजन आंदोलन के हितों की तुलना में निजी और पारिवारिक हितों को अधिक महत्व दिया। उन्होंने यह भी कहा कि अगर अशोक सिद्धार्थ राजनीति से पूरी तरह संन्यास ले लेते हैं तो आकाश आनंद को पार्टी में स्वतंत्र रूप से काम करने का रास्ता खुल सकता है। इसके बाद आकाश आनंद को उनकी पुरानी जिम्मेदारियां वापस देने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा सकता है।

मायावती का यह बयान ऐसे समय आया जब कुछ दिन पहले ही आकाश आनंद को बसपा के संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से हटाया गया था। इसके बाद से पार्टी के भीतर उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर लगातार चर्चा चल रही थी। अब अशोक सिद्धार्थ के संन्यास की घोषणा को इसी पूरे घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।

अशोक सिद्धार्थ ने क्या कहा?

अपने सोशल मीडिया पोस्ट में अशोक सिद्धार्थ ने मायावती के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि उनका आदेश उनके लिए अंतिम शब्द है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें जीवन में कई महत्वपूर्ण अवसर दिए और वह इसके लिए हमेशा आभारी रहेंगे।

अशोक सिद्धार्थ ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी पार्टी विरोधी काम नहीं किया। उनके मुताबिक पार्टी के भीतर ही कुछ लोग विरोधी गतिविधियां कर रहे हैं और उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश रची गई है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके ऊपर लगाए जा रहे आरोप सच्चाई पर आधारित नहीं हैं। अशोक सिद्धार्थ ने कहा कि समय आने पर वास्तविकता सबके सामने आ जाएगी।

आकाश आनंद को लेकर भी दिया स्पष्टीकरण

अशोक सिद्धार्थ ने अपने पोस्ट में आकाश आनंद को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि वह काफी लंबे समय से आकाश आनंद से मिले तक नहीं हैं। इस बयान के जरिए उन्होंने उन चर्चाओं को खारिज करने की कोशिश की, जिनमें उनके ऊपर आकाश आनंद के राजनीतिक फैसलों को प्रभावित करने के आरोप लगाए जाते रहे हैं।

बसपा के भीतर पिछले कुछ समय से यह चर्चा लगातार होती रही है कि आकाश आनंद के राजनीतिक फैसलों और संगठन में उनकी भूमिका पर उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ का प्रभाव रहा है। मायावती ने भी अपने ताजा बयान में इसी तरह की आशंकाओं और पार्टी के भीतर निजी प्रभाव को लेकर सवाल उठाए थे। हालांकि अशोक सिद्धार्थ ने इन आरोपों को गलत बताते हुए खुद को पार्टी के प्रति समर्पित कार्यकर्ता बताया है।

‘आपने मुझे मेरी हैसियत से ज्यादा महत्व दिया’

अशोक सिद्धार्थ ने अपने संदेश में मायावती के प्रति काफी भावुक अंदाज अपनाया। उन्होंने कहा कि मायावती ने उन्हें एक सामान्य कार्यकर्ता होने के बावजूद उनकी हैसियत से ज्यादा महत्व दिया।

उन्होंने मायावती द्वारा दिए गए राजनीतिक अवसरों को याद करते हुए विधान परिषद और राज्यसभा तक पहुंचने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पार्टी और मायावती ने उन्हें जो सम्मान दिया, उसके लिए वह हमेशा कृतज्ञ रहेंगे।

अशोक सिद्धार्थ ने यह भी कहा कि मायावती की हर नसीहत और आदेश उनके लिए अंतिम शब्द है। इसी क्रम में उन्होंने राजनीति से दूर होने का फैसला सार्वजनिक किया।

क्या आकाश आनंद को फिर मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी?

अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास की घोषणा के बाद अब सबसे बड़ा सवाल आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य को लेकर है। मायावती ने अपने बयान में संकेत दिया था कि अशोक सिद्धार्थ के पूरी तरह राजनीति से अलग होने के बाद आकाश आनंद को पार्टी में स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर मिल सकता है। साथ ही उनकी पुरानी जिम्मेदारियां बहाल करने पर पार्टी सहानुभूतिपूर्वक विचार कर सकती है।

हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि आकाश आनंद को तुरंत कौन सी जिम्मेदारी दी जाएगी या उनकी पार्टी में वापसी किस रूप में होगी। मायावती ने फिलहाल इसे पार्टी के व्यापक हित और संगठन की सहमति से जोड़कर रखा है।

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अहम घटनाक्रम

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच बसपा के लिए यह घटनाक्रम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी एक तरफ अपने संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर आकाश आनंद को लेकर नेतृत्व स्तर पर लगातार बदलाव देखने को मिले हैं।

आकाश आनंद को पहले बसपा में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई थी और उन्हें मायावती के संभावित राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर भी देखा गया। लेकिन पिछले कुछ समय में उनकी राजनीतिक भूमिका में कई बार बदलाव हुए। सितंबर 2026 में एक बार फिर उन्हें संगठन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से हटाए जाने के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व और भविष्य को लेकर सवाल उठे।

अब अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के ऐलान के बाद घटनाक्रम एक नए चरण में पहुंच गया है।

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‘एक दिन सच्चाई सामने आएगी’

अशोक सिद्धार्थ ने अपने संदेश के अंत में अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को लेकर कहा कि सच्चाई एक न एक दिन सामने जरूर आएगी। उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी के खिलाफ कभी कोई काम नहीं किया और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीतिक विरोधियों की साजिश हैं।

उन्होंने मायावती के निर्देश को स्वीकार करते हुए कहा कि उनका राजनीति से हटना उनके लिए आदेश का पालन करने जैसा है। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अब आकाश आनंद को लेकर फैसला पूरी तरह मायावती और पार्टी नेतृत्व पर निर्भर है।

इस पूरे घटनाक्रम में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि मायावती ने आकाश आनंद की सक्रिय राजनीतिक भूमिका को अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से पूरी तरह अलग होने से जोड़ दिया था और उसके तुरंत बाद अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास की घोषणा कर दी। अब देखना होगा कि बसपा सुप्रीमो आकाश आनंद को लेकर अगला कदम क्या उठाती हैं और क्या उन्हें पार्टी में फिर से कोई बड़ी जिम्मेदारी मिलती है।

Ashok Siddharth, the father-in-law of BSP leader Akash Anand and a former Rajya Sabha MP, has announced his retirement from active politics following Mayawati’s recent statement linking Akash Anand’s future responsibilities in the Bahujan Samaj Party with Siddharth’s complete withdrawal from politics. Ashok Siddharth thanked Mayawati for giving him opportunities in the Legislative Council and Rajya Sabha and rejected allegations of anti-party activities and political influence over Akash Anand. The development is significant for BSP politics ahead of the 2027 Uttar Pradesh Assembly elections.

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Pawan Chaudhary
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पवन चौधरी एक सक्रिय पत्रकार एवं समाचार लेखक हैं, जो जनहित से जुड़े मुद्दों, स्थानीय घटनाक्रम और सामाजिक सरोकारों को प्रमुखता से अपनी पत्रकारिता में स्थान देते हैं। वे जमीनी स्तर की खबरों को तथ्यपरक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के माध्यम से पवन चौधरी आम लोगों की समस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों, सामाजिक मुद्दों और क्षेत्रीय घटनाओं को सामने लाने का प्रयास करते हैं। उनका उद्देश्य निष्पक्ष एवं जिम्मेदार पत्रकारिता के जरिए समाज में जागरूकता बढ़ाना और महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों की आवाज बनाना है।

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