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अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: SIT जांच तेज, आरोपियों पर बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी, ट्रस्ट में आरोप-प्रत्यारोप, जानिए अब तक की पूरी अपडेट!

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अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: SIT जांच तेज, आरोपियों पर बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी, ट्रस्ट में बढ़ी सियासी हलचल, जानिए अब तक की पूरी कहानी

AIN NEWS 1: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की धनराशि में कथित गड़बड़ी का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। विशेष जांच दल (SIT) की जांच तेज हो चुकी है, कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और अब प्रशासन आरोपियों की अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी में जुट गया है। दूसरी ओर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के भीतर भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

इस पूरे मामले ने धार्मिक, प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है। जांच एजेंसियां आर्थिक लेन-देन, नियुक्तियों और मंदिर में चढ़ावे की गणना से जुड़े प्रत्येक पहलू की गहराई से जांच कर रही हैं।

आरोपियों के अवैध निर्माण पर बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी

सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले में सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) ने उन मकानों की पहचान कर ली है, जिन्हें आरोपियों ने कथित रूप से मंदिर में नौकरी मिलने के बाद बनवाया और जिनमें निर्माण संबंधी नियमों का पालन नहीं किया गया।

जानकारी के मुताबिक आरोपी लवकुश मिश्रा का शहादतगंज स्थित निर्माणाधीन मकान तथा अनुकल्प मिश्रा का कौशलपुरी स्थित मकान प्रशासन की जांच के दायरे में हैं। यदि जांच में निर्माण नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित मकानों पर बुलडोजर कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन की ओर से दोनों को नोटिस भेजने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

ट्रस्ट के भीतर शुरू हुआ आरोप-प्रत्यारोप

मामले ने अब ट्रस्ट के अंदर भी विवाद खड़ा कर दिया है। पहली बार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास महाराज ने पूर्व पदाधिकारी गोपाल राव पर खुलकर सवाल उठाए हैं।

महंत दिनेंद्र दास ने कहा कि पूरे विवाद की जिम्मेदारी गोपाल राव पर है। उनके अनुसार गोपाल राव लगातार राजनीति करते हैं और लोगों को उलझाने का काम करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि गोपाल राव राम की परंपरा का पालन नहीं करते।

हालांकि इन आरोपों पर गोपाल राव की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आज ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा से पूछताछ संभव

SIT अब जांच को अगले चरण में ले जा रही है। पुलिस पहले ही आरोपी अविनाश शुक्ला से जेल में पूछताछ कर चुकी है। इसके अलावा ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय से भी लगभग तीन घंटे तक पूछताछ की जा चुकी है।

अब जांच एजेंसी ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा से पूछताछ कर सकती है। जांच का प्रमुख उद्देश्य यह पता लगाना है कि आरोपियों की नियुक्ति प्रक्रिया में उनकी क्या भूमिका रही और क्या किसी स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही या मिलीभगत हुई थी।

कैसे सामने आया पूरा मामला

राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला पहली बार 7 जून को सामने आया था। शुरुआती जांच के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया।

इसके बाद 25 जून को श्रीराम जन्मभूमि थाने में एफआईआर दर्ज की गई। इसी दिन पुलिस ने रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू सहित कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया।

मामले के सामने आने के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि जांच एजेंसियां यह स्पष्ट करने में जुटी हैं कि इस पूरे मामले में किसकी क्या जिम्मेदारी बनती है।

लगभग 80 लाख रुपये की बरामदगी

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में नकदी, विदेशी मुद्रा और आभूषण बरामद किए हैं।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार बरामदगी का विवरण इस प्रकार है—

अविनाश शुक्ला से 20,39,220 रुपये, 1121 अमेरिकी डॉलर, दो सोने की चेन, एक सोने की अंगूठी और चांदी जैसी धातु बरामद हुई।

अनुकल्प मिश्रा से 16,82,040 रुपये मिले।

लवकुश मिश्रा के पास से 14,25,000 रुपये बरामद हुए।

रमाशंकर मिश्रा से 7,32,170 रुपये मिले।

रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास से एक लाख रुपये बरामद किए गए।

करुणेश पांडेय से 18,07,063 रुपये बरामद हुए।

मनीष यादव के पास से दो लाख रुपये मिले।

कुल मिलाकर पुलिस ने करीब 79.85 लाख रुपये, 1121 अमेरिकी डॉलर तथा सोने-चांदी के आभूषण बरामद करने का दावा किया है।

बरामदगी को लेकर पुलिस का दावा

जांच के दौरान पुलिस का कहना है कि आरोपी अविनाश शुक्ला ने पूछताछ में स्वीकार किया कि मंदिर में चढ़ावे की गिनती के दौरान धनराशि में हेराफेरी की गई थी। इसके बाद उसकी निशानदेही पर नकदी और अन्य सामान बरामद किया गया।

बरामदगी की पूरी प्रक्रिया को गवाहों की मौजूदगी में पूरा किया गया और संबंधित पंचनामा भी तैयार किया गया।

हालांकि इन दावों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और आगे की जांच के बाद ही होगी।

आरोपी के भाई का वीडियो भी जांच के दायरे में

मामले के बीच आरोपी अविनाश शुक्ला के भाई अमित शुक्ला का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह कथित रूप से नोटों की गड्डियां हाथ में लिए दिखाई दे रहा है।

पुलिस इस वीडियो की सत्यता, समय और परिस्थितियों की जांच कर रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वीडियो का इस मामले से सीधा संबंध है या नहीं।

RSS तक पहुंची जांच रिपोर्ट

सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले की एक विस्तृत रिपोर्ट राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत को भी भेजी गई है।

बताया जा रहा है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रचारक अनिल कुमार ने अयोध्या में तीन दिन प्रवास कर मंदिर की व्यवस्थाओं, ट्रस्ट की कार्यप्रणाली तथा चढ़ावा चोरी मामले से संबंधित जानकारी एकत्र की थी।

6 जुलाई को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इस बैठक में जांच रिपोर्ट और भविष्य की प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।

बार एसोसिएशन भी दर्ज कराएगा मुकदमा

अयोध्या बार एसोसिएशन ने भी इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाने का निर्णय लिया है।

एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्र ने घोषणा की है कि संगठन थाना रामजन्मभूमि पहुंचकर अलग से तहरीर देगा। यदि पुलिस मुकदमा दर्ज नहीं करती है तो संगठन न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगा।

SIT जांच की समय-सीमा बढ़ाई गई

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विशेष जांच दल की समय-सीमा बढ़ाकर 15 जुलाई कर दी है।

बताया गया है कि SIT ने जांच के लिए अतिरिक्त समय मांगा था क्योंकि कई वित्तीय दस्तावेज, नियुक्तियां, बैंक रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण अभी बाकी है।

सरकार का कहना है कि जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने के बजाय सभी तथ्यों की गहन जांच कर दोषियों की पहचान सुनिश्चित की जाएगी।

मंत्रियों की प्रतिक्रिया

मामले पर उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार के कई नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।

केंद्रीय मंत्री एस.पी. सिंह बघेल ने कहा कि यह भावनाओं से जुड़ा गंभीर मामला है और SIT की जांच पूरी होने के बाद सच्चाई सामने आ जाएगी।

उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने कहा कि जांच निष्पक्ष तरीके से चल रही है और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।

मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है, इसलिए जांच पूरी गंभीरता और पारदर्शिता के साथ की जा रही है।

वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि जांच रिपोर्ट में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।

आगे क्या होगा?

अब पूरे मामले में कई अहम कदमों पर नजर बनी हुई है—

ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा से संभावित पूछताछ।

आरोपियों की संपत्तियों पर प्रशासनिक कार्रवाई।

SIT की अंतिम रिपोर्ट।

6 जुलाई को ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक।

जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला अब केवल आर्थिक अनियमितता तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, नियुक्तियों की प्रक्रिया, प्रशासनिक जवाबदेही और मंदिर प्रबंधन से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल उठ रहे हैं।

फिलहाल SIT की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस पूरे मामले में किसकी कितनी भूमिका रही, किन लोगों की जिम्मेदारी तय होगी और कानून के तहत आगे क्या कार्रवाई की जाएगी। वहीं प्रशासन अवैध संपत्तियों, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच के आधार पर अगले कदम उठाने की तैयारी में जुटा हुआ है।

The Ayodhya Ram Mandir donation theft case has become one of the biggest controversies surrounding the Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust. The ongoing SIT investigation, recovery of nearly ₹80 lakh cash, alleged misuse of temple donations, possible bulldozer action against illegally constructed properties, questioning of trust officials, and political reactions have kept the issue in national focus. Authorities are continuing the investigation to identify everyone involved while ensuring accountability and transparency in the management of temple donations.

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