AIN NEWS 1 मेरठ: सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक और भड़काऊ बयान से जुड़े मामले में मेरठ के थाना रेलवे रोड पुलिस ने आखिरकार मुकदमा दर्ज कर लिया है। यह कार्रवाई अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा संगठन के अध्यक्ष सचिन सिरोही की शिकायत और उनके द्वारा दिए गए 24 घंटे के अल्टीमेटम के बाद हुई है। शिकायत में सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया था कि उसमें समाज में तनाव और वैमनस्य बढ़ाने वाला कथित बयान दिया गया।
पुलिस ने तहरीर के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 353(2), 197 और 190 के अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 67 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। अब पुलिस वीडियो की सत्यता, उसके कंटेंट और उसमें दिखाई देने वाले व्यक्ति की भूमिका समेत अन्य तथ्यों की जांच कर रही है।

सोशल मीडिया वीडियो से शुरू हुआ मामला
शिकायत के मुताबिक, 30 अगस्त 2026 की रात करीब साढ़े दस बजे सचिन सिरोही ने फेसबुक पर एक वीडियो देखा। आरोप है कि इस वीडियो में एक व्यक्ति चुनावी संदर्भ में कथित तौर पर ऐसा बयान देता दिखाई दे रहा था, जिससे समाज में तनाव और आपसी वैमनस्य पैदा होने की आशंका जताई गई।
सचिन सिरोही ने वीडियो को अपने मोबाइल फोन में सुरक्षित किया और इसके बाद पुलिस को लिखित शिकायत दी। शिकायत में संबंधित वीडियो की जांच कर कार्रवाई की मांग की गई थी।
तहरीर में यह भी आरोप लगाया गया कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति खुद को आजाद समाज से जुड़े चुनावी संदर्भ में पेश करते हुए कथित रूप से भड़काऊ बातें कर रहा था। शिकायतकर्ता का कहना था कि सोशल मीडिया पर इस तरह की सामग्री तेजी से प्रसारित होने की स्थिति में इसका असर सामाजिक माहौल पर पड़ सकता है।
हालांकि, वीडियो में कही गई बातों का वास्तविक संदर्भ क्या था और उसमें लगाए गए आरोप कानूनी रूप से कितने सही हैं, यह पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
24 घंटे का दिया था अल्टीमेटम
मामले में मुकदमा दर्ज कराने को लेकर सचिन सिरोही ने पुलिस और प्रशासन को 24 घंटे का समय दिया था। उन्होंने कहा था कि यदि निर्धारित अवधि में एफआईआर दर्ज नहीं की गई तो संगठन की ओर से आंदोलन किया जाएगा।
इस अल्टीमेटम के बाद पुलिस ने शिकायत की जांच करते हुए संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया। एफआईआर दर्ज होने के बाद अब मामला केवल शिकायत तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि पुलिस के स्तर पर इसकी विधिवत जांच शुरू हो गई है।
पुलिस की कार्रवाई के बाद शिकायतकर्ता पक्ष ने इसे अपनी मांग पर हुई कार्रवाई के तौर पर देखा है। वहीं, अब आगे की जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो कब और कहां बनाया गया, वीडियो में मौजूद व्यक्ति कौन है और वीडियो में कही गई बातों का पूरा संदर्भ क्या था।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा?
रेलवे रोड थाने में दर्ज मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता की तीन धाराओं के साथ आईटी एक्ट की धारा 67 लगाई गई है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मामले में BNS की धारा 353(2), 197 और 190 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 शामिल की गई हैं।
इन धाराओं का इस्तेमाल मामले की प्रकृति और पुलिस द्वारा दर्ज किए गए आरोपों के आधार पर किया गया है। हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज होना अपने आप में आरोप साबित होने के बराबर नहीं है। आरोपों की पुष्टि जांच, उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों और अन्य तथ्यों के आधार पर होगी।
वीडियो की होगी जांच
मामले में सोशल मीडिया वीडियो सबसे अहम साक्ष्य माना जा रहा है। पुलिस वीडियो की मूल स्रोत से लेकर उसके प्रसार तक की जानकारी जुटा सकती है। इसके अलावा वीडियो में कही गई बातों को पूरे संदर्भ में देखा जाएगा।
डिजिटल सामग्री से जुड़े मामलों में यह भी महत्वपूर्ण होता है कि वीडियो मूल है या उसमें किसी तरह की एडिटिंग की गई है। इसी तरह यह भी जांच का विषय होगा कि वीडियो कब रिकॉर्ड हुआ और इसे सोशल मीडिया पर किस अकाउंट या माध्यम से प्रसारित किया गया।
पुलिस जांच के दौरान वीडियो से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों और उपलब्ध अन्य जानकारी को भी खंगाल सकती है। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, यदि किसी आरोप की पुष्टि नहीं होती है तो उसका भी जांच में स्पष्ट होना जरूरी है।
सचिन सिरोही ने कार्रवाई का स्वागत किया
एफआईआर दर्ज होने के बाद सचिन सिरोही ने पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई का स्वागत किया। उनका कहना है कि सोशल मीडिया के माध्यम से समाज में तनाव पैदा करने वाले कथित बयानों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका जोर इस बात पर है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली सामग्री को लेकर प्रशासन गंभीरता से जांच करे, ताकि किसी भी तरह की भ्रामक या आपत्तिजनक सामग्री से सामाजिक माहौल प्रभावित न हो।
अब आगे क्या होगा?
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस के सामने अगला कदम आरोपों की जांच करना है। जांच में वीडियो की वास्तविकता, उसकी सामग्री, वीडियो में मौजूद व्यक्ति की पहचान और कथित बयान के पूरे संदर्भ की पड़ताल की जा सकती है।
पुलिस यह भी देखेगी कि वीडियो वास्तव में उसी समय का है या पुराना वीडियो किसी नए संदर्भ में प्रसारित किया गया। इसके अलावा सोशल मीडिया पर इसके प्रसार से संबंधित डिजिटल साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया जा सकता है।
यदि जांच में पर्याप्त साक्ष्य सामने आते हैं तो पुलिस आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाएगी। वहीं, जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर धाराओं में बदलाव या अन्य कानूनी कदम भी संभव हो सकते हैं।
फिलहाल रेलवे रोड थाने में मुकदमा दर्ज होने के बाद यह मामला एक नए चरण में पहुंच गया है। शिकायतकर्ता की ओर से कार्रवाई की मांग के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है और अब पूरे मामले की सच्चाई जांच के आधार पर सामने आएगी।
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी वीडियो या बयान को उसके पूरे संदर्भ के साथ देखना जरूरी है। एफआईआर में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि पुलिस जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया से ही होगी। अब पुलिस की जांच और उसके बाद होने वाली कानूनी कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।
The Badr Ali case in Meerut has taken a new turn after Railway Road Police registered an FIR following a complaint by Sachin Sirohi. The case concerns an allegedly inflammatory social media video and includes provisions under BNS Sections 353(2), 197 and 190, along with Section 67 of the Information Technology Act. Police are now investigating the authenticity, context and circulation of the video, while further legal action will depend on the evidence collected during the investigation.



















