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ईरान हमले के बाद कुम शहर में फंसे छात्रों को लेकर बाराबंकी के परिवारों में बढ़ी चिंता!

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AIN NEWS 1: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान पर हुए हमलों ने भारत के उत्तर प्रदेश के कई परिवारों की नींद उड़ा दी है। खासकर बाराबंकी जिले के वे परिवार गहरी चिंता में हैं, जिनके बेटे-बेटियां ईरान के धार्मिक शहर कुम में पढ़ाई कर रहे हैं।

अमेरिका और इज़रायल की ओर से ईरान पर की गई सैन्य कार्रवाई के बाद कुम सहित कई इलाकों में हालात अस्थिर बताए जा रहे हैं। इसी बीच वहां मौजूद भारतीय छात्रों और इस्लामिक स्कॉलर्स से संपर्क टूटने की खबरों ने परिजनों की बेचैनी और बढ़ा दी है।

कुम शहर क्यों है अहम?

कुम ईरान का एक प्रमुख धार्मिक और शैक्षणिक केंद्र है। यहां बड़ी संख्या में विदेशी छात्र इस्लामिक स्टडीज़ और धार्मिक शिक्षा के लिए जाते हैं। बाराबंकी समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों के छात्र वर्षों से यहां तालीम हासिल कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, बाराबंकी जिले के कई परिवारों के बच्चे कुम की विभिन्न मदरसों और विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे हैं। अचानक युद्ध जैसे हालात बनने और संचार सेवाओं के प्रभावित होने से परिजनों की चिंता बढ़ गई है।

संपर्क टूटने से बढ़ी घबराहट

हमलों के बाद इंटरनेट और फोन सेवाओं के प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं। बाराबंकी के कई परिवारों ने बताया कि पिछले 24–48 घंटों से उनका अपने बच्चों से सीधा संपर्क नहीं हो पा रहा है।

एक अभिभावक ने बताया,

“हमने कई बार कॉल और मैसेज किए, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। टीवी पर हमले की खबरें देखकर दिल घबरा रहा है। बस यही दुआ है कि बच्चे सुरक्षित हों।”

कुछ परिवारों को बीच-बीच में व्हाट्सऐप या सोशल मीडिया के जरिए छोटे संदेश मिले हैं, जिनमें छात्रों ने खुद को सुरक्षित बताया है, लेकिन नेटवर्क की समस्या के कारण नियमित संपर्क संभव नहीं हो पा रहा।

प्रशासन से मदद की उम्मीद

परिजन अब जिला प्रशासन और केंद्र सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो भारतीय छात्रों को सुरक्षित वापस लाने की व्यवस्था की जानी चाहिए।

भारत सरकार पहले भी अंतरराष्ट्रीय संकट के समय अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए विशेष अभियान चला चुकी है। ऐसे में बाराबंकी के परिवारों को उम्मीद है कि जरूरत पड़ने पर सरकार तत्परता से कदम उठाएगी।

युद्ध के असर से चिंतित स्थानीय समाज

बाराबंकी में मस्जिदों और घरों में विशेष दुआओं का सिलसिला शुरू हो गया है। लोग अपने बच्चों और सभी निर्दोष नागरिकों की सलामती की कामना कर रहे हैं।

स्थानीय उलेमा और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने लोगों से अफवाहों से बचने और आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करने की अपील की है। उनका कहना है कि तनावपूर्ण माहौल में गलत खबरें स्थिति को और बिगाड़ सकती हैं।

छात्रों की दिनचर्या पर असर

कुम में पढ़ रहे छात्रों के परिजनों के अनुसार, हालात सामान्य नहीं हैं। कई शिक्षण संस्थानों में कक्षाएं अस्थायी रूप से रोक दी गई हैं। छात्रों को एहतियात बरतने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।

कुछ छात्रों ने संदेश भेजकर बताया कि वे अपने हॉस्टल या आवास में ही हैं और बाहर निकलने से बच रहे हैं। हालांकि, उन्हें भोजन और अन्य जरूरी सामान मिल रहा है, लेकिन माहौल में तनाव साफ महसूस किया जा सकता है।

विदेश में पढ़ाई और परिवार की चिंता

विदेश में पढ़ाई करना जहां एक ओर गर्व और अवसर की बात होती है, वहीं संकट के समय यह दूरी परिवारों के लिए बेहद भारी पड़ती है। बाराबंकी के कई माता-पिता पहली बार इस तरह की अंतरराष्ट्रीय स्थिति का सामना कर रहे हैं।

एक अन्य अभिभावक ने कहा,

“बच्चों को बेहतर तालीम के लिए भेजा था, लेकिन अब हालात देखकर दिल दहल जाता है। हम सरकार से अपील करते हैं कि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।”

विशेषज्ञों की राय

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि मौजूदा तनाव का असर केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। यदि संघर्ष लंबा चलता है तो वहां रह रहे विदेशी नागरिकों की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।

भारत सरकार आमतौर पर ऐसे मामलों में अपने दूतावास के जरिए नागरिकों से संपर्क बनाए रखती है। जरूरत पड़ने पर एडवाइजरी जारी की जाती है और निकासी अभियान भी चलाया जा सकता है।

अफवाहों से बचने की अपील

सोशल मीडिया पर कई तरह की अपुष्ट खबरें भी वायरल हो रही हैं। प्रशासन और सामाजिक संगठनों ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी पुष्टि कर लें।

बाराबंकी में फिलहाल माहौल संवेदनशील जरूर है, लेकिन लोग संयम बनाए हुए हैं और एक-दूसरे का हौसला बढ़ा रहे हैं।

उम्मीद और दुआओं का सहारा

हालांकि हालात तनावपूर्ण हैं, लेकिन परिवारों को उम्मीद है कि उनके बच्चे सुरक्षित हैं और जल्द ही उनसे संपर्क हो जाएगा। मस्जिदों और घरों में दुआओं का दौर जारी है।

बाराबंकी के एक बुजुर्ग ने भावुक होकर कहा,

“जंग किसी के लिए अच्छी नहीं होती। सबसे ज्यादा तकलीफ उन परिवारों को होती है जिनके बच्चे दूर देशों में फंसे होते हैं। हम बस अमन और सलामती की दुआ कर रहे हैं।”

ईरान पर हुए हमलों ने हजारों किलोमीटर दूर बसे बाराबंकी के परिवारों को भी चिंता में डाल दिया है। कुम शहर में पढ़ रहे छात्रों से संपर्क टूटने की खबरों ने बेचैनी बढ़ा दी है। हालांकि अभी तक किसी बड़े नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, फिर भी परिवार सतर्क और चिंतित हैं।

सभी की निगाहें अब हालात पर और सरकार की संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही स्थिति स्पष्ट होगी और छात्र सुरक्षित रहेंगे।

Families in Barabanki, Uttar Pradesh are deeply worried after reports of attacks on Iran amid rising US-Israel-Iran tensions, especially as several Indian students are studying in Qom city, a major religious hub. Communication disruptions following the Iran attack have heightened concerns among relatives who are seeking updates about the safety of students stranded in Qom. The developing Iran conflict and its impact on Indian nationals abroad remain a key concern for authorities and families alike.

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