AIN NEWS 1: देश के सबसे बड़े शिक्षा बोर्डों में शामिल केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी CBSE इस बार अपनी कॉपी जांच प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। 10वीं और 12वीं के रिजल्ट आने के बाद हजारों छात्रों ने अपने नंबरों को लेकर आपत्ति जताई, लेकिन अब पहली बार कॉपियां जांचने वाले एक एग्जामिनर ने अंदर की पूरी कहानी सामने रखी है।
एग्जामिनर के मुताबिक, इस बार उत्तर पुस्तिकाओं की डिजिटल जांच प्रक्रिया इतनी खराब रही कि कई बार शिक्षकों को मजबूरी में “विवेक” के आधार पर नंबर देने पड़े। धुंधली स्कैन कॉपियां, फटे पन्ने, अधूरी इमेज और बार-बार सिस्टम हैंग होने जैसी समस्याओं ने मूल्यांकन प्रक्रिया को बुरी तरह प्रभावित किया।
“स्क्रीन पर कॉपी जांचना आसान नहीं था”
एग्जामिनर ने बताया कि कॉपियों को कंप्यूटर स्क्रीन पर स्क्रोल करते हुए जांचना बेहद मुश्किल हो रहा था। कई बार एक पेज खुलने के बाद दूसरा पेज आने में दो-दो मिनट तक का समय लग जाता था। कई बार जो पेज खुला होता था, वह अचानक गायब हो जाता था और फिर से लोड करना पड़ता था।
उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया ने शिक्षकों को मानसिक रूप से परेशान कर दिया। शांत माहौल में कॉपी जांचने के बजाय लगातार तकनीकी समस्याओं के कारण चिड़चिड़ापन बढ़ता गया।
एग्जामिनर के अनुसार, “कई बार ऐसा लग रहा था कि हम कॉपी जांचने से ज्यादा सिस्टम से लड़ रहे हैं।”
धुंधली स्कैनिंग बनी सबसे बड़ी समस्या
कॉपी जांचने वाले शिक्षकों ने बताया कि कई उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन क्वालिटी बेहद खराब थी। कहीं लिखावट धुंधली दिख रही थी तो कहीं पन्ने कटे हुए नजर आ रहे थे। कुछ कॉपियों में शब्द साफ दिखाई ही नहीं दे रहे थे।
ऐसी स्थिति में छात्रों ने क्या लिखा है, यह समझना भी मुश्किल हो गया। कई जगह अनुमान लगाकर उत्तर पढ़ना पड़ा और उसी आधार पर अंक देने पड़े।
कुछ मामलों में तो कॉपी के पन्ने अधूरे स्कैन हुए थे। किसी उत्तर का आधा हिस्सा दिखाई दे रहा था तो बाकी हिस्सा गायब था। ऐसे में शिक्षकों के सामने बड़ा सवाल था कि छात्र को कितने नंबर दिए जाएं।
“हमने विवेक से दिए नंबर”
एग्जामिनर ने माना कि कई बार परिस्थितियां ऐसी थीं कि सटीक मूल्यांकन संभव नहीं था। ऐसे में शिक्षकों ने अपने अनुभव और समझ के आधार पर नंबर दिए।
उन्होंने कहा कि यदि उत्तर साफ दिखाई नहीं दे रहा था लेकिन छात्र की लिखावट और संदर्भ से उत्तर का अंदाजा लग रहा था, तो शिक्षकों ने छात्र के हित में अंक देने की कोशिश की।
हालांकि इससे मूल्यांकन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्योंकि अलग-अलग एग्जामिनर अलग तरीके से अनुमान लगा सकते हैं।
छात्रों का गुस्सा क्यों बढ़ रहा है?
इस साल CBSE रिजल्ट आने के बाद बड़ी संख्या में छात्रों ने अपनी स्कैन कॉपियां देखने के लिए आवेदन किया। शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहली बार है जब इतने बड़े स्तर पर छात्र अपनी उत्तर पुस्तिकाएं देखने की मांग कर रहे हैं।
कई छात्रों का कहना है कि उन्हें उम्मीद से काफी कम अंक मिले हैं। कुछ छात्रों ने दावा किया कि जिन विषयों में वे हमेशा अच्छे नंबर लाते थे, उनमें इस बार अचानक अंक गिर गए।
अब जब एग्जामिनर की ओर से तकनीकी खामियों की बात सामने आई है, तो छात्रों और अभिभावकों की चिंता और बढ़ गई है।
डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम पर उठे सवाल
CBSE ने कॉपी जांच प्रक्रिया को तेज और आधुनिक बनाने के लिए डिजिटल सिस्टम अपनाया था। इसका उद्देश्य था कि देशभर में कॉपियों का मूल्यांकन जल्दी और पारदर्शी तरीके से हो सके।
लेकिन इस बार सामने आई शिकायतों ने पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्कैनिंग क्वालिटी सही नहीं होगी और सॉफ्टवेयर स्थिर तरीके से काम नहीं करेगा, तो लाखों छात्रों के भविष्य पर असर पड़ सकता है।
शिक्षकों पर भी बढ़ा दबाव
एग्जामिनर ने यह भी बताया कि कॉपी जांचने के लिए समय सीमा बहुत कम थी। ऊपर से लगातार तकनीकी दिक्कतों के कारण एक कॉपी जांचने में सामान्य से कहीं ज्यादा समय लग रहा था।
कई शिक्षकों को देर रात तक सिस्टम पर काम करना पड़ा। लगातार स्क्रीन देखने से आंखों में दर्द और मानसिक तनाव भी बढ़ा।
कुछ शिक्षकों ने यह तक कहा कि पारंपरिक तरीके से कॉपी जांचना डिजिटल प्रक्रिया की तुलना में ज्यादा आसान और भरोसेमंद था।
CBSE की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
इन खुलासों के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या CBSE इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देगा? अभी तक बोर्ड की ओर से तकनीकी खामियों को लेकर कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।
हालांकि शिक्षा जगत में यह मांग तेज हो रही है कि बोर्ड को:
स्कैनिंग प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच करानी चाहिए
मूल्यांकन सॉफ्टवेयर को बेहतर बनाना चाहिए
छात्रों को दोबारा सत्यापन का निष्पक्ष मौका देना चाहिए
कॉपी जांच में पारदर्शिता बढ़ानी चाहिए
क्या छात्रों को मिलेगा न्याय?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन छात्रों की कॉपियां खराब स्कैन हुईं या जिनका मूल्यांकन तकनीकी गड़बड़ियों के बीच हुआ, क्या उन्हें न्याय मिल पाएगा?
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तकनीकी समस्याओं की पुष्टि होती है, तो बोर्ड को प्रभावित छात्रों के लिए विशेष पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया शुरू करनी पड़ सकती है।
फिलहाल इस पूरे मामले ने देश की शिक्षा व्यवस्था और डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।
CBSE के इस मूल्यांकन विवाद ने यह साफ कर दिया है कि केवल तकनीक लागू कर देना पर्याप्त नहीं है। जब तक सिस्टम पूरी तरह भरोसेमंद, पारदर्शी और छात्र हित में न हो, तब तक ऐसी खामियां लाखों छात्रों के भविष्य पर गंभीर असर डाल सकती हैं।
CBSE’s digital evaluation system has come under serious scrutiny after an examiner revealed major issues including blurry scanned answer sheets, torn pages, missing content, server lag, and unfair marking conditions during the CBSE Class 10 and 12 board exam evaluation process. The controversy has raised concerns among students and parents over transparency, accuracy, and fairness in the CBSE result system. Thousands of students have already applied for scanned copies and re-evaluation, making this one of the biggest CBSE result controversies in recent years.


















