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CBSE रिजल्ट पर बढ़ा छात्रों का अविश्वास, हर चौथे स्टूडेंट ने मांगी स्कैन कॉपी, क्या शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने वाला है?

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CBSE Result 2026: हर चौथे छात्र ने मांगी स्कैन कॉपी, क्या बोर्ड की मूल्यांकन प्रणाली पर उठ रहे हैं बड़े सवाल?

AIN NEWS 1: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम इस बार केवल अंकों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने देश की शिक्षा व्यवस्था और मूल्यांकन प्रक्रिया पर भी गंभीर बहस छेड़ दी है। इस वर्ष लाखों छात्रों और अभिभावकों ने बोर्ड की कॉपी जांच प्रणाली पर सवाल उठाते हुए रिकॉर्ड संख्या में अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी और मार्क्स वेरिफिकेशन के लिए आवेदन किया है। स्थिति इतनी असामान्य हो चुकी है कि शिक्षा जगत में इसे लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

दरअसल, इस बार CBSE की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली यानी ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) को लेकर छात्रों के बीच भारी असंतोष देखने को मिला। रिजल्ट जारी होने के तुरंत बाद देशभर के छात्रों ने अपने अंकों पर संदेह जताना शुरू कर दिया। कई छात्रों का कहना है कि उन्हें उम्मीद से बेहद कम नंबर मिले हैं, जबकि परीक्षा के दौरान उनका प्रदर्शन बेहतर रहा था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी हजारों छात्रों और पेरेंट्स ने अपने अनुभव साझा करते हुए बोर्ड की मूल्यांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए।

CBSE द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं के दौरान कुल 98 लाख 60 हजार उत्तर पुस्तिकाओं का डिजिटल मूल्यांकन किया गया। बोर्ड परीक्षा में करीब 17.68 लाख छात्र शामिल हुए थे। लेकिन रिजल्ट घोषित होते ही जो स्थिति बनी, उसने बोर्ड प्रशासन को भी हैरान कर दिया।

जैसे ही री-इवैल्युएशन और मार्क्स वेरिफिकेशन के लिए ऑनलाइन पोर्टल खोला गया, शुरुआती तीन घंटे के भीतर ही 1.26 लाख से अधिक आवेदन दर्ज हो गए। अचानक आए भारी ट्रैफिक के कारण वेबसाइट धीमी पड़ गई और कई बार सर्वर पूरी तरह ठप हो गया। बोर्ड को लाइव डेटा अपडेट रोकना पड़ा ताकि तकनीकी व्यवस्था संभाली जा सके।

अब तक सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, 4 लाख से अधिक छात्रों ने 11.31 लाख उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी और मार्क्स वेरिफिकेशन के लिए आवेदन किया है। यह संख्या कुल परीक्षार्थियों का लगभग 23 प्रतिशत से अधिक है। आसान शब्दों में कहें तो हर चौथे छात्र ने अपने रिजल्ट पर संदेह जताते हुए बोर्ड से अपनी कॉपी दोबारा देखने की मांग की है।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक सामान्य प्रक्रिया नहीं, बल्कि छात्रों के भरोसे में आई बड़ी गिरावट का संकेत है। इससे पहले किसी भी भारतीय शिक्षा बोर्ड में इतनी बड़ी संख्या में छात्रों द्वारा स्कैन कॉपी मांगने का रिकॉर्ड सामने नहीं आया था। यही वजह है कि अब ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को कुछ साल पहले मूल्यांकन प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से लागू किया गया था। इसमें परीक्षकों को उत्तर पुस्तिकाओं की डिजिटल कॉपी ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाती है और वे कंप्यूटर स्क्रीन पर ही नंबर देते हैं। बोर्ड का दावा है कि इससे मानवीय गलतियां कम होती हैं और रिजल्ट जल्दी जारी हो पाते हैं। हालांकि, इस बार बड़ी संख्या में छात्रों की नाराजगी ने इस दावे को चुनौती दे दी है।

कई शिक्षकों और शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल मूल्यांकन में तकनीकी दबाव, समय सीमा और स्क्रीन आधारित जांच के कारण कॉपियों की गुणवत्ता से समझौता हो सकता है। कुछ विशेषज्ञों ने यह भी सवाल उठाया कि क्या परीक्षकों को पर्याप्त प्रशिक्षण दिया गया था या नहीं। दूसरी ओर कुछ लोग मानते हैं कि छात्रों के बढ़ते प्रतिस्पर्धी दबाव और उच्च अपेक्षाओं के कारण भी री-चेकिंग की मांग बढ़ रही है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं। कुछ यूजर्स यह तक कह रहे हैं कि यदि बड़ी संख्या में मूल्यांकन त्रुटियां सामने आती हैं तो भविष्य में बोर्ड को अपनी मूल्यांकन नीति में बड़ा बदलाव करना पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल CBSE की ओर से परीक्षा दोबारा कराने जैसी किसी संभावना की पुष्टि नहीं की गई है और न ही आधिकारिक तौर पर ऐसी कोई मांग सामने आई है।

फिर भी शिक्षा जगत में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि आखिर इतने बड़े स्तर पर छात्रों का भरोसा क्यों डगमगाया। क्या मौजूदा मूल्यांकन प्रणाली छात्रों की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर पा रही? क्या डिजिटल जांच प्रक्रिया में सुधार की जरूरत है? और क्या आने वाले समय में बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन मॉडल में कोई बड़ा परिवर्तन देखने को मिल सकता है?

अभिभावकों की चिंता भी लगातार बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि बोर्ड परीक्षा केवल नंबरों का खेल नहीं है, बल्कि छात्रों के भविष्य, कॉलेज एडमिशन और करियर से सीधा जुड़ा मामला है। ऐसे में मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वास बनाए रखना बेहद जरूरी है।

वहीं छात्रों का कहना है कि यदि उन्हें अपनी उत्तर पुस्तिका देखने और समझने का पूरा अवसर मिलेगा, तो इससे शिक्षा प्रणाली में भरोसा बढ़ेगा। कई छात्र यह भी मांग कर रहे हैं कि भविष्य में बोर्ड को अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत व्यवस्था तैयार करनी चाहिए ताकि इस तरह के विवाद कम हों।

फिलहाल देशभर के लाखों छात्र अब री-इवैल्युएशन और स्कैन कॉपी के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि छात्रों की शिकायतें कितनी सही साबित होती हैं और क्या CBSE अपनी मूल्यांकन प्रणाली में कोई बदलाव करता है या नहीं। लेकिन इतना तय है कि इस बार का रिजल्ट केवल परीक्षा परिणाम नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल बनकर सामने आया है।

CBSE Result 2026 has sparked nationwide discussion after a record number of students applied for answer sheet copies and re-evaluation. More than 4 lakh students have questioned the CBSE digital evaluation system and on-screen marking process. The controversy around CBSE board exam results, marks verification, and transparency in answer sheet checking has raised serious concerns among students, parents, and education experts across India.

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