AIN NEWS 1: बरेली में सोशल मीडिया पर फर्जी पहचान बनाकर आपत्तिजनक पोस्ट करने का मामला सामने आया है। साइबर क्राइम पुलिस ने एक ऐसे युवक को गिरफ्तार किया है, जिस पर आरोप है कि उसने कुछ महीने पहले सड़क हादसे में जान गंवाने वाले उपनिरीक्षक आकाश यादव की वर्दी वाली तस्वीर का इस्तेमाल कर Instagram पर फर्जी प्रोफाइल बनाई। इस प्रोफाइल में आरोपी ने अपना नाम ‘दीपक जाट बरेली’ बताया और खुद को पुलिस से जुड़ा हुआ प्रदर्शित किया।
पुलिस के मुताबिक, इसी फर्जी Instagram अकाउंट से एक समाजसेवी महिला समेत अन्य लोगों के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणियां और पोस्ट की गईं। मामला सामने आने के बाद जब लोगों ने पोस्ट को देखा तो बरेली पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल और अभद्र टिप्पणियां सामने आने लगीं। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और जांच को साइबर क्राइम थाने भेज दिया।

14 सितंबर को सामने आया मामला
पुलिस के अनुसार, यह मामला पहली बार 14 सितंबर 2026 को सामने आया। एक महिला से संबंधित Instagram पोस्ट के बाद पुलिस के संज्ञान में मामला आया। इसके बाद कोतवाली क्षेत्र में अज्ञात Instagram यूजर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई। शुरुआती स्तर पर पुलिस के सामने अकाउंट चलाने वाले व्यक्ति की पहचान स्पष्ट नहीं थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर जांच साइबर क्राइम थाने को सौंप दी गई। इसके बाद साइबर टीम ने Instagram अकाउंट से जुड़े तकनीकी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच शुरू की।
मृत दरोगा की तस्वीर का किया गया इस्तेमाल
जांच में पुलिस को पता चला कि जिस फर्जी Instagram प्रोफाइल से पोस्ट की जा रही थीं, उसमें पुलिस की वर्दी पहने एक दरोगा की तस्वीर लगी हुई थी। बाद में तस्वीर की पहचान उपनिरीक्षक आकाश यादव के रूप में हुई।
पुलिस के मुताबिक, आकाश यादव मूल रूप से मिर्जापुर जिले के रहने वाले थे और अयोध्या में तैनात रहे थे। कुछ महीने पहले सड़क हादसे में उनकी मृत्यु हो गई थी। आरोपी ने सोशल मीडिया से उनकी वर्दी वाली तस्वीर लेकर अपनी कथित फर्जी पहचान में इस्तेमाल की।
इस तरह एक मृत पुलिसकर्मी की तस्वीर का इस्तेमाल कर ऐसी प्रोफाइल तैयार की गई, जिसे देखने वाले लोग उसे वास्तविक पुलिसकर्मी का अकाउंट समझ सकते थे।
‘दीपक जाट बरेली’ नाम से बनाई गई थी प्रोफाइल
साइबर पुलिस की जांच में सामने आया कि फर्जी Instagram अकाउंट ‘दीपक जाट बरेली’ नाम से बनाया गया था। प्रोफाइल के जरिए आरोपी ने खुद को बरेली में तैनात पुलिसकर्मी के तौर पर प्रदर्शित किया।
पुलिस का कहना है कि इस अकाउंट से महिला के संबंध में आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट की गई। पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बरेली पुलिस के खिलाफ भी टिप्पणियां होने लगीं। पुलिस ने इसे गंभीरता से लेते हुए अकाउंट संचालित करने वाले व्यक्ति की पहचान के लिए तकनीकी जांच तेज की।
मोबाइल और दो सिम कार्ड बरामद
तकनीकी जांच के दौरान पुलिस आरोपी तक पहुंची। पुलिस के मुताबिक, आरोपी की पहचान दीपक कौशिक, उम्र करीब 28 वर्ष, निवासी बिजनौर के रूप में हुई। वह वर्तमान में बरेली में रह रहा था और मीरगंज स्थित डीबीओएल शुगर मिल में केमिकल एनालिसिस अधिकारी के तौर पर काम करता था।
साइबर क्राइम पुलिस ने उसे 24 सितंबर 2026 को झुमका चौराहे से गिरफ्तार किया। पुलिस ने उसके कब्जे से घटना में इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन और दो सिम कार्ड बरामद किए। एक अन्य रिपोर्ट में मोबाइल को Samsung Galaxy F15 बताया गया है।
पुलिस के अनुसार पूछताछ में क्या सामने आया?
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में दीपक कौशिक ने बताया कि वह बीएससी पास है। पुलिस का दावा है कि उसने मृत दरोगा की तस्वीर सोशल मीडिया से लेकर फर्जी Instagram प्रोफाइल में इस्तेमाल की थी। उसे लगा था कि तस्वीर और नाम बदलकर अपनी वास्तविक पहचान छिपाई जा सकती है।
पुलिस के अनुसार, बाद में आरोपी ने कथित Instagram अकाउंट को डिलीट कर दिया था। हालांकि, साइबर जांच में डिजिटल गतिविधियों और उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंच गई।
यह मामला इस बात का भी उदाहरण है कि सोशल मीडिया अकाउंट डिलीट कर देने के बाद भी उससे जुड़े डिजिटल साक्ष्य जांच का हिस्सा बन सकते हैं। किसी व्यक्ति की तस्वीर और पहचान का इस्तेमाल करके फर्जी प्रोफाइल तैयार करना पुलिस के लिए गंभीर जांच का विषय बन सकता है।
किन धाराओं में कार्रवाई हुई?
शुरुआत में पुलिस ने मामले में आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत कार्रवाई की थी। बाद में जांच के दौरान आईटी एक्ट की धारा 66C और बीएनएस की धारा 319(2) तथा 356 भी जोड़ी गईं।
धारा 66C पहचान से जुड़ी धोखाधड़ी के मामलों से संबंधित है। वहीं बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत पुलिस ने फर्जी पहचान और कथित आपत्तिजनक गतिविधियों के पहलुओं को जांच में शामिल किया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जांच और अदालत की प्रक्रिया के अनुसार होगी।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि पुलिस द्वारा लगाए गए आरोप और जांच में सामने आए तथ्य न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। आरोपी को अदालत में पेश किए जाने के बाद उसके खिलाफ आगे की कार्रवाई कानून के अनुसार होगी।
साइबर अपराध में बढ़ रही फर्जी पहचान की चुनौती
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किसी दूसरे व्यक्ति की तस्वीर लगाकर अकाउंट बनाना केवल सामान्य फर्जी प्रोफाइल का मामला नहीं रह जाता, खासकर जब उस पहचान का इस्तेमाल किसी महिला को परेशान करने, आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करने या किसी संस्था की छवि प्रभावित करने के लिए किया जाए।
बरेली के इस मामले में भी पुलिस की जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना रहा कि फर्जी अकाउंट वास्तव में किस व्यक्ति ने बनाया और उसका संचालन किस डिवाइस से किया गया। मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच के जरिए पुलिस आरोपी तक पहुंची।
मामले में मृत दरोगा की तस्वीर के इस्तेमाल ने इसे और संवेदनशील बना दिया, क्योंकि सोशल मीडिया पर अकाउंट देखने वाले लोग उसे वास्तविक पुलिसकर्मी का अकाउंट समझ सकते थे। पुलिस के मुताबिक, इसी फर्जी पहचान के जरिए आपत्तिजनक पोस्ट की गईं और इससे बरेली पुलिस की छवि को लेकर भ्रम की स्थिति बनी।
फिलहाल साइबर क्राइम पुलिस ने आरोपी दीपक कौशिक को गिरफ्तार कर लिया है। उसके खिलाफ दर्ज मुकदमे में बढ़ाई गई धाराओं के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। मामले से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच और अदालत में होने वाली सुनवाई के बाद ही आरोपों की अंतिम कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।
Bareilly Cyber Crime Police have arrested Deepak Kaushik in connection with an alleged fake Instagram profile created using the photograph of deceased Sub-Inspector Akash Yadav. The account, reportedly created under the name “Deepak Jat Bareilly,” allegedly featured objectionable posts concerning a woman and presented the user as a police officer. Police said technical investigation, mobile phone analysis and SIM-related evidence helped identify the accused. The case involves provisions of the Information Technology Act and Bharatiya Nyaya Sanhita.



















