AIN NEWS 1 नई दिल्ली। दिल्ली की जिला अदालतों में पिछले दो दिनों से जारी वकीलों का न्यायिक कार्य बहिष्कार 28 अक्टूबर 2026 को समाप्त हो गया। शाहदरा के सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाना प्रभारी (SHO) इंस्पेक्टर अरुण कुमार के तबादले के आदेश जारी होने के बाद वकीलों की समन्वय समिति ने आंदोलन वापस लेने का फैसला किया। दिल्ली पुलिस, बार काउंसिल ऑफ दिल्ली और विभिन्न जिला अदालतों की बार एसोसिएशनों के पदाधिकारियों के बीच हुई बैठक में सहमति बनने के बाद यह निर्णय लिया गया।
वकीलों ने संबंधित पुलिस अधिकारियों पर कथित दुर्व्यवहार और धमकी देने के आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की थी। आंदोलन के दौरान दिल्ली की जिला अदालतों में न्यायिक कार्य प्रभावित हुआ। अब हड़ताल समाप्त होने के बाद अदालतों में नियमित कामकाज बहाल होने की उम्मीद है। हालांकि, इस पूरे मामले में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों की जांच और दोनों पक्षों से जुड़ी FIR पर आगे की कार्रवाई अभी महत्वपूर्ण है।
ACP मनस्वी वशिष्ठ और SHO अरुण कुमार का तबादला
दिल्ली पुलिस मुख्यालय ने 28 अक्टूबर को ACP मनस्वी वशिष्ठ और इंस्पेक्टर अरुण कुमार के तबादले के आदेश जारी किए। ACP मनस्वी वशिष्ठ गांधी नगर उपमंडल में तैनात थे। उन्हें अब स्पेशल पुलिस यूनिट फॉर वुमेन एंड चिल्ड्रेन (SPUWAC) में भेजा गया है। वहीं, शाहदरा थाने के प्रभारी इंस्पेक्टर अरुण कुमार को दिल्ली पुलिस की सुरक्षा इकाई में स्थानांतरित किया गया है।
इन दोनों अधिकारियों के तबादले की मांग वकीलों के आंदोलन के प्रमुख मुद्दों में शामिल थी। बार एसोसिएशनों ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई थी।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि तबादला अपने आप में निलंबन या किसी आरोप के साबित होने के समान नहीं है। पुलिस अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जा सकेगा।
क्या है पूरा विवाद?
मामले की शुरुआत 23 अक्टूबर 2026 को अधिवक्ता ललित बंसल पर कथित हमले की घटना से हुई। इस घटना में उनके सिर पर गंभीर चोट आने की बात सामने आई। अधिवक्ता अमूल्य रतन की शिकायत के आधार पर शाहदरा थाने में FIR दर्ज की गई थी।
बार एसोसिएशन के अनुसार, घटना के बाद कई अधिवक्ता शाहदरा थाने पहुंचे थे। उनका उद्देश्य मामले में नामजद व्यक्तियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित कराना था। वकीलों का आरोप है कि पुलिस अधिकारियों ने आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में उन्हें जानकारी मिली कि संबंधित व्यक्तियों को गिरफ्तार नहीं किया गया और कथित तौर पर छोड़ दिया गया।
इसके बाद 24 अक्टूबर को कुछ अधिवक्ता मामले की कार्रवाई के संबंध में अपनी आपत्ति और नाराजगी जताने के लिए दोबारा थाने पहुंचे। इसी दौरान पुलिस अधिकारियों और वकीलों के बीच विवाद बढ़ गया।
ACP पर रिवॉल्वर दिखाकर धमकाने का आरोप
वकीलों की ओर से आरोप लगाया गया कि थाने में हुई बहस के दौरान ACP मनस्वी वशिष्ठ ने अपना रिवॉल्वर दिखाया और वहां मौजूद अधिवक्ताओं को धमकाया। बार एसोसिएशन ने इस आरोप को गंभीर बताते हुए संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग की।
वकीलों का कहना था कि वे अपने साथी अधिवक्ता पर हुए कथित हमले के मामले में कार्रवाई की मांग कर रहे थे। ऐसे में पुलिस अधिकारियों का व्यवहार जांच का विषय होना चाहिए।
दूसरी ओर, पुलिस की तरफ से भी थाने में हुए घटनाक्रम को लेकर आरोप लगाए गए। पुलिसकर्मियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और ड्यूटी में बाधा डालने से संबंधित शिकायतों के आधार पर अधिवक्ताओं के खिलाफ भी FIR दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
इस प्रकार, मामले में दोनों पक्षों के आरोप शामिल हैं। ACP द्वारा रिवॉल्वर दिखाकर धमकाने के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी भी पक्ष के आरोप को अंतिम रूप से प्रमाणित तथ्य मानना उचित नहीं होगा।
मंगलवार से शुरू हुआ था न्यायिक कार्य बहिष्कार
दिल्ली की जिला अदालतों की बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर 27 अक्टूबर को न्यायिक कार्य से दूर रहने का आह्वान किया था। मांगों पर समाधान नहीं निकलने के बाद आंदोलन को अनिश्चितकालीन करने का फैसला लिया गया।
वकीलों की प्रमुख मांगों में ACP, शाहदरा SHO और संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच तथा अधिवक्ता पर कथित हमले के मामले में आरोपियों के खिलाफ प्रभावी कदम उठाना शामिल था।
आंदोलन के कारण अदालतों में आने वाले उन लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा, जिनके मुकदमों की सुनवाई निर्धारित थी। इनमें विभिन्न मामलों के पक्षकार, जमानत की सुनवाई का इंतजार कर रहे लोग और अन्य न्यायिक कार्यों के लिए अदालत पहुंचने वाले नागरिक शामिल थे।
बैठक के बाद हड़ताल वापस लेने पर सहमति
28 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस के प्रतिनिधियों, बार काउंसिल ऑफ दिल्ली और विभिन्न जिला अदालतों की बार एसोसिएशनों के अध्यक्षों तथा सचिवों के बीच बैठक हुई। बातचीत के दौरान अधिकारियों के तबादले और आगे की जांच प्रक्रिया को लेकर सहमति बनने के बाद समन्वय समिति ने तत्काल प्रभाव से न्यायिक कार्य बहिष्कार वापस लेने की घोषणा की।
समिति ने सभी अधिवक्ताओं से अदालतों में अपने नियमित न्यायिक कार्य पर लौटने की अपील की। इसके साथ ही, आंदोलन के दौरान प्रस्तावित विरोध मार्च को भी रद्द कर दिया गया।
समिति ने यह भी संकेत दिया कि हड़ताल वापस लेने के बावजूद मामले से जुड़े शेष मुद्दों की निगरानी जारी रहेगी। यानी आंदोलन समाप्त होने का अर्थ यह नहीं है कि पूरे विवाद का कानूनी और प्रशासनिक समाधान हो चुका है।
दो FIR की जांच के लिए अलग-अलग समय-सीमा
इस घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात दोनों FIR से जुड़ी आगे की कार्रवाई है। समन्वय समिति की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, पुलिस और बार प्रतिनिधियों के बीच बनी सहमति में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
1. पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों की जांच: शाहदरा बार एसोसिएशन के सदस्यों की ओर से संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ दी गई शिकायतों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करने की बात कही गई है।
2. FIR संख्या 248/2026 में कार्रवाई: शाहदरा थाने में दर्ज इस FIR में नामजद आरोपियों को पकड़ने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने पर जोर दिया गया है। यदि आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार नहीं किया जाता है, तो कानून के अनुसार गैर-जमानती वारंट और लुक-आउट सर्कुलर जैसी प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कही गई है। इन प्रक्रियाओं का लागू होना संबंधित कानूनी शर्तों और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय पर निर्भर करेगा।
3. FIR संख्या 252/2026 की जांच: अधिवक्ताओं के खिलाफ दर्ज इस FIR की जांच एक सप्ताह के भीतर पूरी करने की समय-सीमा तय किए जाने की जानकारी सामने आई है।
इन समय-सीमाओं का उद्देश्य विवाद से जुड़े मामलों में जांच को आगे बढ़ाना और दोनों पक्षों की शिकायतों पर कार्रवाई सुनिश्चित करना है। वास्तविक प्रगति का आकलन संबंधित जांच एजेंसियों की कार्रवाई और आधिकारिक अपडेट के आधार पर किया जाएगा।
क्या अब अदालतों में कामकाज सामान्य होगा?
हड़ताल वापस लिए जाने के बाद दिल्ली की जिला अदालतों में नियमित न्यायिक कार्य बहाल होने की उम्मीद है। हालांकि, जिन मामलों की सुनवाई हड़ताल के कारण प्रभावित हुई, उनमें अगली तारीख या कार्यवाही की स्थिति संबंधित अदालत के आदेश और केस की सूची के अनुसार ही स्पष्ट होगी।
मुकदमों के पक्षकारों को सलाह है कि वे अपनी सुनवाई की तारीख और मामले की स्थिति की जानकारी संबंधित अदालत या अपने अधिवक्ता से प्राप्त करें। हड़ताल समाप्त होने का अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक स्थगित मामले की सुनवाई उसी दिन स्वतः हो जाएगी।
तबादले के बाद भी जांच पर रहेगी नजर
दिल्ली के जिला अदालतों में वकीलों और पुलिस के बीच हुए इस विवाद का तत्काल समाधान अधिकारियों के तबादले और बातचीत के बाद हड़ताल वापस लेने के रूप में सामने आया है। लेकिन मामले का अंतिम परिणाम पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों, अधिवक्ता पर कथित हमले और वकीलों के खिलाफ दर्ज FIR की जांच पर निर्भर करेगा।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित जांच निर्धारित समय-सीमा में पूरी होती है या नहीं और शिकायतों के आधार पर कानून के अनुसार क्या कार्रवाई की जाती है। निष्पक्ष जांच से ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
AIN NEWS 1 के लिए निष्कर्ष: दिल्ली की जिला अदालतों में वकीलों की हड़ताल 28 अक्टूबर को ACP मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा SHO इंस्पेक्टर अरुण कुमार के तबादले तथा पुलिस-बार प्रतिनिधियों के बीच बनी सहमति के बाद समाप्त हुई। पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों की जांच के लिए दो महीने और अधिवक्ताओं के खिलाफ दर्ज FIR की जांच के लिए एक सप्ताह की समय-सीमा तय होने की जानकारी सामने आई है। अब सभी की नजर जांच की प्रगति और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर रहेगी।
SEO Title: Delhi Lawyers Strike Ends After ACP, SHO Transfer | Shahdara Case Update
SEO Description: Delhi district court lawyers end their strike after ACP Manasvi Vashisht and Shahdara SHO Arun Kumar are transferred. Read the latest update on the FIRs, investigation deadlines and court proceedings.
SEO Keywords: Delhi lawyers strike, Delhi district court news, ACP Manasvi Vashisht transfer, Shahdara SHO Arun Kumar, Delhi Police news, Shahdara police station case, Delhi lawyers protest, Delhi court latest news, advocate Lalit Bansal assault case, FIR 248/2026, FIR 252/2026, Delhi Bar Association, Delhi court strike ends
Delhi district court lawyers have called off their indefinite strike following the transfer of ACP Manasvi Vashisht and Shahdara SHO Inspector Arun Kumar. The decision came after discussions between Delhi Police representatives, the Bar Council of Delhi and district court bar associations. The dispute followed allegations relating to the assault on advocate Lalit Bansal and a subsequent confrontation at Shahdara police station. The agreed steps include an inquiry into complaints against police personnel within two months and completion of the investigation into the FIR registered against advocates within one week. The latest Delhi lawyers’ strike update also highlights the importance of impartial investigation, police accountability and the resumption of judicial proceedings.
Permalink: “delhi-lawyers-strike-ends-acp-sho-transfer-shahdara-case-update”



















