AIN NEWS 1 नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस और वकीलों के बीच शाहदरा थाने से शुरू हुआ विवाद अब पुलिस विभाग के भीतर भी बड़े प्रशासनिक घटनाक्रम का कारण बन गया है। वकीलों के विरोध के बाद दो पुलिस अधिकारियों के तबादले हुए तो उनके समर्थन में सोमवार, 2 नवंबर को दिल्ली पुलिस मुख्यालय (PHQ) के बाहर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी एकत्र हो गए। इस प्रदर्शन का नेतृत्व एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने किया। अब इस मामले में गृह मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाते हुए एसीपी मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित कर दिया है।
3 नवंबर को सामने आई जानकारी के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने यह कार्रवाई पुलिस मुख्यालय के बाहर हुए प्रदर्शन और एसीपी की भूमिका को लेकर की है। बताया गया है कि एक अनुशासित पुलिस बल में इस तरह सार्वजनिक प्रदर्शन और अधिकारियों के नेतृत्व में आंदोलन को गंभीरता से लिया गया। इस कार्रवाई के बाद दिल्ली पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है।
इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस और वकीलों के बीच संबंधों, पुलिसकर्मियों की कार्यस्थल पर सुरक्षा और विभागीय अनुशासन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
शाहदरा थाने में 23 अक्टूबर को शुरू हुआ था विवाद
इस पूरे मामले की शुरुआत 23 अक्टूबर 2026 को पूर्वी दिल्ली के शाहदरा थाने में हुई एक घटना से हुई थी। इस घटना में अधिवक्ता ललित बंसल के सिर में गंभीर चोट आने की बात सामने आई थी। मामले को लेकर पुलिस और वकीलों के बीच तनाव बढ़ गया।
अधिवक्ता अमूल्य रतन की शिकायत पर शाहदरा थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। इसके बाद कुछ वकील मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर थाने पहुंचे थे।
वकीलों का आरोप था कि पुलिस अधिकारियों ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और गिरफ्तारी का भरोसा दिया था, लेकिन बाद में उन्हें जानकारी मिली कि संबंधित आरोपियों को बिना गिरफ्तार किए छोड़ दिया गया। इसी बात को लेकर पुलिस अधिकारियों और अधिवक्ताओं के बीच विवाद बढ़ गया।
वकीलों ने आरोप लगाया कि थाने में मौजूद एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और तत्कालीन एसएचओ इंस्पेक्टर अरुण कुमार ने उनके साथ उचित व्यवहार नहीं किया। कुछ अधिवक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि एसीपी ने विवाद के दौरान अपनी सर्विस पिस्टल निकालकर उन्हें धमकाया।
दूसरी तरफ एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने पिस्टल से धमकाने के आरोप को खारिज किया। उनका कहना था कि उन्होंने किसी को धमकाने के लिए हथियार नहीं निकाला था। इस तरह दोनों पक्षों के आरोपों के बीच मामला लगातार गंभीर होता चला गया।
वकीलों ने शुरू की अनिश्चितकालीन हड़ताल
शाहदरा थाने की घटना के बाद दिल्ली की विभिन्न जिला अदालतों में वकीलों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। अधिवक्ताओं की मांग थी कि मामले में जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और घायल वकील को न्याय मिले।
वकीलों ने एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के तत्कालीन एसएचओ इंस्पेक्टर अरुण कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई।
लगातार बढ़ते विरोध और विवाद को देखते हुए दिल्ली पुलिस मुख्यालय ने 28 अक्टूबर को दोनों अधिकारियों के तबादले के आदेश जारी किए।
एसीपी मनस्वी वशिष्ठ को गांधी नगर सब-डिवीजन से हटाकर स्पेशल पुलिस यूनिट फॉर वुमेन एंड चिल्ड्रेन (SPUWAC) में भेज दिया गया। वहीं, इंस्पेक्टर अरुण कुमार को शाहदरा थाने से हटाकर दिल्ली पुलिस की सुरक्षा इकाई में स्थानांतरित कर दिया गया।
इन तबादलों के बाद वकीलों ने अपनी अनिश्चितकालीन हड़ताल समाप्त कर दी। हालांकि, पुलिस विभाग के कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों में इन तबादलों को लेकर नाराजगी बनी रही।
2 नवंबर को पुलिस मुख्यालय के बाहर जुटे पुलिसकर्मी
दोनों अधिकारियों के तबादले के विरोध में 2 नवंबर को दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर असामान्य स्थिति देखने को मिली। पुलिसकर्मी अपने ही विभाग के मुख्यालय के बाहर एकत्र हुए और अधिकारियों के समर्थन में अपनी मांगें उठाने लगे।
इस प्रदर्शन में महिला पुलिसकर्मियों सहित अलग-अलग रैंक के जवान और अधिकारी शामिल हुए। मीडिया रिपोर्टों में प्रदर्शनकारियों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए। कुछ रिपोर्टों में करीब 500 पुलिसकर्मियों के जुटने का उल्लेख किया गया, जबकि अन्य रिपोर्टों में इससे कम संख्या बताई गई।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग थी कि एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और इंस्पेक्टर अरुण कुमार के तबादले वापस लिए जाएं और उन्हें पहले की तैनाती पर बहाल किया जाए।
एसीपी मनस्वी वशिष्ठ भी प्रदर्शन में मौजूद रहे और उन्होंने पुलिसकर्मियों को संबोधित किया। उनके भाषण के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए। एक वीडियो में वह पुलिसकर्मियों के बीच एकजुटता और न्याय की बात करते दिखाई दिए।
प्रदर्शन के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर कर्मचारियों को समझाने का प्रयास किया। नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा सहित अन्य अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और उन्हें मुख्यालय के भीतर वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा करने के लिए कहा।
पुलिस कमिश्नर के सामने रखीं पांच प्रमुख मांगें
प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों ने केवल दोनों अधिकारियों की बहाली की मांग नहीं की, बल्कि पुलिस और वकीलों के बीच भविष्य में होने वाले विवादों से निपटने के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाने की भी मांग रखी।
दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने बाद में पुलिसकर्मियों के साथ संपर्क सभा की। इसमें वरिष्ठ अधिकारियों ने कर्मचारियों की समस्याएं सुनीं। प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने पांच प्रमुख मांगें सामने रखीं।
इनमें एसीपी की शिकायत पर दर्ज एफआईआर को रद्द नहीं करने, पुलिसकर्मियों की शिकायतों के समाधान के लिए समिति बनाने, पुलिस और वकीलों के बीच विवाद की स्थिति में स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने, थाने में अधिकारियों के कार्यालय में एक समय पर आने वाले वकीलों की संख्या को लेकर नियम बनाने और अदालत परिसरों में पुलिसकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग शामिल थी।
पुलिस कमिश्नर ने कर्मचारियों को उनकी समस्याओं पर उचित और समयबद्ध कार्रवाई का भरोसा दिया। दिल्ली पुलिस की ओर से भी कहा गया कि पुलिसकर्मियों का मनोबल बनाए रखने के लिए उनकी शिकायतों पर ध्यान दिया जाएगा।
प्रदर्शन के बाद एसीपी मनस्वी वशिष्ठ पर गिरी गाज
सोमवार को कई घंटे तक चले इस घटनाक्रम के बाद 3 नवंबर को एसीपी मनस्वी वशिष्ठ के निलंबन की खबर सामने आई।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने प्रदर्शन में उनकी भूमिका और पुलिस अनुशासन से जुड़े पहलुओं को गंभीरता से लेते हुए यह कदम उठाया।
एसीपी के निलंबन से यह मामला और संवेदनशील हो गया है। हालांकि, निलंबन आदेश में दर्ज विस्तृत आरोपों और विभागीय जांच की पूरी जानकारी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हुई है। इसलिए निलंबन को अंतिम दोषसिद्धि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभागीय जांच में किन तथ्यों को आधार बनाया जाता है और इस पूरे प्रकरण में आगे क्या प्रशासनिक निर्णय लिए जाते हैं।
दिल्ली पुलिस के इतिहास में पहले भी हो चुका है ऐसा प्रदर्शन
दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर पुलिसकर्मियों का प्रदर्शन असामान्य जरूर है, लेकिन इसे इतिहास की पहली घटना बताना सही नहीं होगा।
नवंबर 2019 में तीस हजारी कोर्ट में पुलिस और वकीलों के बीच टकराव के बाद दिल्ली पुलिस के हजारों जवानों और उनके परिवारों ने पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था। उस समय भी पुलिसकर्मियों ने अपने साथियों के समर्थन और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए थे।
इसलिए नवंबर 2026 का प्रदर्शन पिछले कई वर्षों में पुलिस विभाग के भीतर सामने आए बड़े सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों में से एक है।
पुलिस और वकीलों के बीच समन्वय की बड़ी चुनौती
शाहदरा थाने से शुरू हुआ यह विवाद अब केवल दो अधिकारियों के तबादले या एक एसीपी के निलंबन तक सीमित नहीं रह गया है। इसने पुलिस और वकीलों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत को फिर सामने ला दिया है।
पुलिस और न्यायिक व्यवस्था से जुड़े दोनों पक्षों की जिम्मेदारी कानून के दायरे में काम करना और आम लोगों को न्याय दिलाने में सहयोग करना है। ऐसे में किसी भी विवाद की निष्पक्ष जांच और शिकायतों का उचित निस्तारण बेहद जरूरी है।
फिलहाल पूरे मामले में सबकी नजर गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस के अगले कदम पर है। एसीपी मनस्वी वशिष्ठ के निलंबन के बाद विभागीय जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और पुलिसकर्मियों की उठाई गई मांगों पर कितना अमल होता है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।
Delhi Police ACP Manasvi Vashistha has been suspended following a protest by police personnel outside Delhi Police Headquarters in New Delhi. The protest was linked to the Shahdara police station dispute between Delhi Police officers and lawyers following an incident involving advocate Lalit Bansal on October 23, 2026. The controversy led to the transfer of ACP Manasvi Vashistha and Shahdara SHO Inspector Arun Kumar on October 28. Delhi Police personnel subsequently raised five demands concerning police safety, departmental discipline, grievance redressal and standard operating procedures for police-lawyer disputes. The latest development has brought renewed attention to Delhi Police administration and police-lawyer relations.



















