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दिल्ली पुलिस मुख्यालय पर वर्दी वालों का प्रदर्शन, ACP और इंस्पेक्टर के तबादले पर भड़के 150 जवान; पुलिस कमिश्नर के सामने रखीं 5 बड़ी मांगें

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AIN NEWS 1 नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में सोमवार, 2 नवंबर को एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसने पुलिस विभाग के भीतर चल रही नाराजगी को सार्वजनिक कर दिया। आमतौर पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने और प्रदर्शनों को नियंत्रित करने वाली दिल्ली पुलिस के अपने ही जवान इस बार सड़क पर उतर आए। पूर्वी दिल्ली में तैनात रहे एक ACP और एक इंस्पेक्टर के तबादले के विरोध में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों ने दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। जवानों का कहना था कि उनके साथियों के खिलाफ की गई प्रशासनिक कार्रवाई उचित नहीं है और इससे पूरे पुलिस बल का मनोबल प्रभावित हो सकता है।

प्रदर्शन की शुरुआत दिल्ली पुलिस मुख्यालय के गेट नंबर-1 के बाहर हुई। शुरुआती रिपोर्टों में लगभग 80 पुलिसकर्मियों के जुटने की जानकारी सामने आई, जबकि देर रात आई रिपोर्टों के मुताबिक प्रदर्शन में करीब 150 पुलिसकर्मी शामिल हुए। इनमें महिला पुलिसकर्मी भी थीं। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में पोस्टर और तख्तियां लेकर नारेबाजी की तथा अपने साथियों को पहले की तैनाती पर वापस भेजने की मांग उठाई।

ACP मनस्वी वशिष्ठ और इंस्पेक्टर अरुण कुमार के तबादले से शुरू हुआ विवाद

पूरा मामला पूर्वी दिल्ली के शाहदरा थाने में 23 अक्टूबर को हुई एक घटना से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक, उस दिन थाने में पुलिसकर्मियों और वकीलों के बीच विवाद तथा हाथापाई हुई थी। इस दौरान अधिवक्ता ललित बंसल के सिर में गंभीर चोट लगने की बात सामने आई थी।

घटना के बाद वकीलों ने पुलिस के रवैये पर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि थाने में मौजूद पुलिस अधिकारियों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और मामले में उचित कार्रवाई नहीं की। कुछ वकीलों ने ACP मनस्वी वशिष्ठ पर धमकी देने और रिवॉल्वर दिखाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही निकाला जा सकता है।

दूसरी तरफ पुलिसकर्मियों का कहना था कि थाने में वकीलों की ओर से भी हंगामा और दबाव बनाया गया। पुलिस बल के कुछ सदस्यों ने दावा किया कि थाने में हुई घटना के दौरान उनके अधिकारियों के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया था।

इस विवाद ने धीरे-धीरे बड़ा रूप ले लिया। दिल्ली की जिला अदालतों से जुड़े वकीलों ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी।

28 अक्टूबर को जारी हुए तबादले के आदेश

वकीलों की हड़ताल और लगातार बढ़ते विवाद के बीच दिल्ली पुलिस प्रशासन ने 28 अक्टूबर को दोनों अधिकारियों के तबादले कर दिए।

ACP मनस्वी वशिष्ठ, जो गांधी नगर सब-डिवीजन में तैनात थे, उन्हें स्पेशल पुलिस यूनिट फॉर वुमेन एंड चिल्ड्रेन (SPUWAC) भेज दिया गया। वहीं शाहदरा थाने के तत्कालीन SHO इंस्पेक्टर अरुण कुमार को सिक्योरिटी यूनिट में स्थानांतरित कर दिया गया।

इन तबादलों के बाद वकीलों ने अपनी हड़ताल समाप्त कर दी। लेकिन पुलिस विभाग के भीतर एक अलग तरह की नाराजगी सामने आने लगी। पुलिसकर्मियों के एक वर्ग का मानना था कि शाहदरा थाने की घटना में दोनों अधिकारियों का पक्ष भी सुना जाना चाहिए था और बिना पूरी स्थिति स्पष्ट हुए उनके खिलाफ कार्रवाई से गलत संदेश जा सकता है।

यही नाराजगी 2 नवंबर को दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन के रूप में सामने आई।

वरिष्ठ अधिकारियों ने जवानों को समझाने की कोशिश की

सोमवार सुबह जैसे ही पुलिसकर्मी मुख्यालय के गेट नंबर-1 पर एकत्र हुए, विभाग में हलचल बढ़ गई। नई दिल्ली के DCP सचिन शर्मा भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शन में शामिल ACP मनस्वी वशिष्ठ और अन्य पुलिसकर्मियों से बातचीत की।

DCP ने जवानों से कहा कि पुलिस बल एक अनुशासित संगठन है और उन्हें प्रदर्शनकारियों जैसा व्यवहार नहीं करना चाहिए। उन्होंने पुलिसकर्मियों से मुख्यालय के अंदर चलकर वरिष्ठ अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने का आग्रह भी किया।

हालांकि, प्रदर्शनकारी बाहर ही पुलिस कमिश्नर से बातचीत करने और संपर्क सभा आयोजित कराने की मांग पर अड़े रहे। उनका कहना था कि वे किसी तरह का अनुशासनहीन व्यवहार नहीं करना चाहते, बल्कि अपने साथियों के साथ हुई कार्रवाई और पुलिसकर्मियों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपना पक्ष रखना चाहते हैं।

इस दौरान पुलिस मुख्यालय के बाहर नारेबाजी होती रही। प्रदर्शन में शामिल जवानों ने पुलिस एकता और वर्दी के सम्मान से जुड़े नारे लगाए।

ACP मनस्वी वशिष्ठ ने उठाए पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के सवाल

प्रदर्शन के दौरान ACP मनस्वी वशिष्ठ ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों की ओर से प्रदर्शन का आह्वान स्वाभाविक रूप से हुआ था और वह अपने साथियों के समर्थन में वहां पहुंचे थे।

उनका मुख्य सवाल पुलिस थानों की सुरक्षा और ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ होने वाले कथित दुर्व्यवहार को लेकर था।

उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार काम करते हैं। ऐसे में यदि पुलिस थानों के भीतर ही अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े होने लगें, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।

उनका तर्क था कि पुलिसकर्मियों को भी अपनी समस्याएं रखने और निष्पक्ष तरीके से अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए।

पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार के सामने रखीं पांच मांगें

प्रदर्शन के बाद मामला दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा। पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने पुलिस मुख्यालय में संपर्क सभा आयोजित की, जिसमें उन्होंने विभिन्न रैंक के पुलिसकर्मियों की शिकायतें और समस्याएं सुनीं।

इसके बाद ACP मनस्वी वशिष्ठ के नेतृत्व में लगभग सात पुलिसकर्मियों का प्रतिनिधिमंडल पुलिस कमिश्नर से मिला। इस दौरान पांच प्रमुख मांगें रखी गईं।

पुलिसकर्मियों की पांच प्रमुख मांगें इस प्रकार थीं:

1. शाहदरा थाने की घटना में कथित रूप से शामिल वकीलों के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।

2. यदि पांच से अधिक वकील किसी पुलिस थाने में घुसकर हंगामा, दुर्व्यवहार या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करते हैं, तो उनके खिलाफ FIR दर्ज करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

3. पुलिसकर्मियों को थानों के बाहर भी धमकाने या उनके साथ दुर्व्यवहार करने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।

4. यदि जांच में किसी वकील की गंभीर संलिप्तता साबित होती है, तो संबंधित बार काउंसिल के समक्ष उसका लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई के लिए मामला उठाया जाए।

5. शाहदरा थाने की घटना से संबंधित दर्ज FIR की जांच पूरी कर जल्द चार्जशीट दाखिल की जाए।

पुलिसकर्मियों का कहना था कि कानून सभी के लिए बराबर होना चाहिए। यदि किसी पुलिसकर्मी से गलती होती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन यदि कोई व्यक्ति पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार करता है तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कदम उठाए जाने चाहिए।

पुलिस कमिश्नर ने दिया समस्याओं के समाधान का भरोसा

दिल्ली पुलिस की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और वरिष्ठ अधिकारियों ने अलग-अलग रैंक के पुलिसकर्मियों की बात धैर्यपूर्वक सुनी। उन्होंने पुलिस बल के अनुशासन, कार्यक्षमता और समर्पण की सराहना की तथा वास्तविक शिकायतों पर उचित और शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया।

इस दौरान पुलिसकर्मियों की समस्याओं के समाधान के लिए एक संयुक्त समन्वय समिति गठित करने का निर्णय भी सामने आया। यह समिति जिला स्तर और पुलिस मुख्यालय स्तर पर काम करेगी।

इसका उद्देश्य पुलिसकर्मियों और बार एसोसिएशन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना तथा ड्यूटी के दौरान उत्पन्न होने वाले विवादों को बातचीत के माध्यम से सुलझाना है।

इसके अलावा प्रमोशन, MACP, आवास और अन्य सेवा संबंधी समस्याओं पर भी ध्यान देने की बात कही गई। जिला और यूनिट प्रमुखों को नियमित संपर्क सभाएं आयोजित करने तथा पुलिसकर्मियों की शिकायतों का समयबद्ध समाधान करने के निर्देश दिए गए।

दिल्ली पुलिस में 2019 के प्रदर्शन की यादें भी हुईं ताजा

इस घटनाक्रम ने वर्ष 2019 में दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर हुए बड़े प्रदर्शन की यादें भी ताजा कर दीं। उस समय तीस हजारी कोर्ट परिसर में पुलिसकर्मियों और वकीलों के बीच विवाद के बाद दो हजार से अधिक पुलिसकर्मी और उनके परिवार के सदस्य मुख्यालय के बाहर जुटे थे।

उस समय भी पुलिसकर्मियों ने अपने साथियों के सम्मान और सुरक्षा का मुद्दा उठाया था। मौजूदा घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पुलिस और वकीलों के बीच बढ़ते टकराव को रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था क्यों जरूरी है।

3 नवंबर को उपराज्यपाल भी करेंगे पुलिसकर्मियों से संवाद

इस पूरे घटनाक्रम के बीच दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू का पुलिसकर्मियों के साथ संवाद कार्यक्रम भी महत्वपूर्ण हो गया है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 3 नवंबर को शाम 4 बजे किंग्सवे कैंप स्थित उत्सव सदन में यह संवाद आयोजित होना है।

इसमें कांस्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर रैंक तक के पुलिसकर्मियों को शामिल किया जाना है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि पुलिसकर्मी अपनी सेवा संबंधी समस्याओं और कार्यस्थल पर आने वाली चुनौतियों को वरिष्ठ प्रशासनिक नेतृत्व के सामने रख सकेंगे।

अब आगे क्या होगा?

दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर हुआ यह प्रदर्शन केवल दो अधिकारियों के तबादले का विरोध नहीं था। इसने पुलिस बल के भीतर सम्मान, सुरक्षा, प्रशासनिक फैसलों और शिकायतों के समाधान की व्यवस्था से जुड़े कई सवाल सामने रख दिए हैं।

पुलिस कमिश्नर के साथ संपर्क सभा और संयुक्त समन्वय समिति बनाने का फैसला निश्चित रूप से महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, प्रदर्शनकारी अधिकारियों की बहाली की मांग पर क्या निर्णय होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि पुलिस प्रशासन पांच मांगों पर क्या कार्रवाई करता है और पुलिस-वकील विवाद को भविष्य में रोकने के लिए कितनी प्रभावी व्यवस्था तैयार की जाती है।

इस घटनाक्रम ने एक बात साफ कर दी है कि पुलिस बल के भीतर भी संवाद, निष्पक्ष सुनवाई और जवानों के सम्मान का सवाल उतना ही महत्वपूर्ण है जितना आम नागरिकों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना।

Delhi Police personnel staged a major protest at Delhi Police Headquarters on November 2, 2026, opposing the transfer of ACP Manasvi Vashistha and Shahdara SHO Inspector Arun Kumar following a confrontation between police officers and lawyers at Shahdara Police Station. Around 150 police personnel reportedly participated in the demonstration and submitted five demands to Delhi Police Commissioner Anurag Kumar. The demands included action against those involved in the incident, better police personnel security at police stations and court complexes, and completion of the investigation. The latest Delhi Police protest highlights concerns over police morale, administrative decisions, police officers’ safety and coordination between Delhi Police and bar associations.

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Pawan Chaudhary
Pawan Chaudhary
पवन चौधरी एक सक्रिय पत्रकार एवं समाचार लेखक हैं, जो जनहित से जुड़े मुद्दों, स्थानीय घटनाक्रम और सामाजिक सरोकारों को प्रमुखता से अपनी पत्रकारिता में स्थान देते हैं। वे जमीनी स्तर की खबरों को तथ्यपरक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के माध्यम से पवन चौधरी आम लोगों की समस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों, सामाजिक मुद्दों और क्षेत्रीय घटनाओं को सामने लाने का प्रयास करते हैं। उनका उद्देश्य निष्पक्ष एवं जिम्मेदार पत्रकारिता के जरिए समाज में जागरूकता बढ़ाना और महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों की आवाज बनाना है।

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