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दिल्ली में राहुल गांधी की रैली से कारोबार पर संकट? CTI ने जताई चिंता, सोनिया गांधी से भी की हस्तक्षेप की अपील

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AIN NEWS 1 नई दिल्ली, 31 अक्टूबर 2026। दिल्ली में दिवाली के त्योहार से पहले बाजारों में खरीदारी की तैयारियां तेज हो रही हैं। इसी बीच 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित INDIA गठबंधन की रैली को लेकर व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। व्यापारियों के संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) का कहना है कि बड़ी संख्या में लोगों और वाहनों के दिल्ली पहुंचने से राजधानी के प्रमुख बाजारों में यातायात प्रभावित हो सकता है। इसका असर दुकानों तक ग्राहकों की पहुंच, माल की आवाजाही और त्योहार से पहले होने वाले कारोबार पर पड़ने की आशंका है।

CTI ने पहले कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से रैली की तारीख बदलने की अपील की थी। अब संगठन ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। व्यापारियों की मांग है कि रैली दिवाली के बाद आयोजित की जाए या फिर इसे ऐसे स्थान पर स्थानांतरित किया जाए, जहां आसपास के व्यस्त बाजारों में आवाजाही बाधित न हो।

10 लाख लोगों के पहुंचने का अनुमान, हजारों वाहनों को लेकर चिंता

CTI के अनुसार, रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली में करीब 10 लाख लोगों के शामिल होने का अनुमान जताया गया है। संगठन का आकलन है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के लिए लगभग 15,000 से 20,000 वाहन दिल्ली आ सकते हैं। इनमें बसों के अलावा कारें, मिनी बसें और अन्य यात्री वाहन शामिल होने की संभावना है।

हालांकि, ये आंकड़े व्यापारियों के संगठन के अनुमान हैं। वास्तविक भीड़ और वाहनों की संख्या रैली के दिन ही स्पष्ट होगी।

व्यापारियों की मुख्य चिंता यह है कि यदि इतनी बड़ी संख्या में वाहन मध्य दिल्ली की सड़कों पर पहुंचते हैं, तो पार्किंग और यातायात प्रबंधन की समस्या गंभीर हो सकती है। रामलीला मैदान के आसपास की सड़कें पहले से ही व्यस्त रहती हैं। ऐसे में बैरिकेडिंग, संभावित मार्ग परिवर्तन और यातायात प्रतिबंधों से बाजारों तक पहुंचने में लोगों को परेशानी हो सकती है।

CTI का कहना है कि इस स्थिति का असर केवल स्थानीय दुकानदारों पर ही नहीं, बल्कि दिल्ली के थोक बाजारों से सामान खरीदने आने वाले दूसरे शहरों के व्यापारियों पर भी पड़ सकता है।

दिवाली से पहले कारोबार के लिए अहम समय

दिवाली भारतीय व्यापार जगत के लिए साल के सबसे महत्वपूर्ण अवसरों में से एक मानी जाती है। त्योहार से पहले कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, सजावटी सामान, पूजा सामग्री, बर्तन, मिठाइयों और घरेलू उपयोग की वस्तुओं की मांग बढ़ जाती है। दिल्ली के कई थोक बाजार दूसरे राज्यों और आसपास के शहरों के दुकानदारों को सामान उपलब्ध कराते हैं।

ऐसे में व्यापारियों के लिए बाजारों तक ग्राहकों और मालवाहक वाहनों की निर्बाध आवाजाही बेहद जरूरी है।

CTI ने आशंका जताई है कि अगर 31 अक्टूबर और 1 नवंबर को सड़कों पर आवाजाही प्रभावित होती है, तो इसका असर त्योहार की खरीदारी पर पड़ सकता है। व्यापारियों को चिंता है कि ग्राहक जाम और पार्किंग की समस्या के कारण बाजारों में आने से बच सकते हैं। दूसरी ओर, थोक कारोबारियों को माल की आपूर्ति और समय पर डिलीवरी में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

चांदनी चौक से सदर बाजार तक कई बाजारों पर असर की आशंका

व्यापारियों के संगठन ने दिल्ली के कई प्रमुख बाजारों का उल्लेख करते हुए कहा है कि रैली के दौरान यातायात प्रभावित होने की स्थिति में इन क्षेत्रों में कारोबार करना मुश्किल हो सकता है।

इन बाजारों में चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली, भागीरथ पैलेस, चावड़ी बाजार, कश्मीरी गेट, नई सड़क, दरियागंज, करोल बाग और अन्य व्यावसायिक क्षेत्र शामिल हैं।

पुरानी दिल्ली के कई बाजारों में सड़कें संकरी हैं और यहां रोजाना बड़ी संख्या में खरीदार, दुकानदार, मालवाहक वाहन और स्थानीय निवासी आते-जाते हैं। ऐसे में किसी प्रमुख सड़क पर यातायात रुकने से आसपास के दूसरे रास्तों पर भी दबाव बढ़ सकता है।

हालांकि, इन बाजारों में वास्तव में कितनी देर तक यातायात प्रभावित होगा या कारोबार बंद करने की नौबत आएगी, यह प्रशासन की व्यवस्था और रैली के दिन की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

कारोबार को हजारों करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका

CTI ने अपने पत्रों और सार्वजनिक बयानों में रैली के कारण संभावित आर्थिक नुकसान को लेकर भी चिंता जताई है। संगठन का दावा है कि यदि प्रमुख बाजारों तक ग्राहकों की पहुंच बाधित होती है, तो त्योहार से पहले होने वाले कारोबार को बड़ा नुकसान हो सकता है।

व्यापारियों ने पहले मध्य दिल्ली में आयोजित एक अन्य प्रदर्शन का उदाहरण देते हुए दावा किया था कि कम संख्या में लोगों के जुटने पर भी यातायात और बाजारों की गतिविधियां प्रभावित हुई थीं। इसी आधार पर संगठन ने बड़े स्तर की रैली के संभावित असर पर सवाल उठाए हैं।

कुछ रिपोर्टों में CTI की ओर से संभावित नुकसान का अनुमान 10,000 से 12,000 करोड़ रुपये तक बताया गया है। लेकिन यह व्यापारियों के संगठन का अनुमान है, किसी सरकारी एजेंसी की ओर से प्रमाणित नुकसान का आंकड़ा नहीं। वास्तविक आर्थिक नुकसान का आकलन घटना के बाद ही किया जा सकता है।

राहुल गांधी से पहले भी की गई थी अपील

CTI ने इससे पहले राहुल गांधी को पत्र लिखकर रैली की तारीख बदलने का अनुरोध किया था। संगठन की मांग थी कि कार्यक्रम को दिवाली के बाद आयोजित किया जाए, ताकि व्यापारियों को त्योहार के महत्वपूर्ण दिनों में किसी तरह की बाधा का सामना न करना पड़े।

व्यापारियों ने वैकल्पिक स्थानों पर भी विचार करने का सुझाव दिया। इनमें बुराड़ी मैदान और जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम जैसे स्थानों का उल्लेख किया गया, जहां आयोजकों और प्रशासन की योजना के अनुसार भीड़ तथा वाहनों का प्रबंधन किया जा सकता है।

राहुल गांधी ने व्यापारियों की चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया पर कहा था कि वे दिल्ली के व्यापारियों की बात सुनते हैं। उन्होंने प्रदर्शन को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग से जोड़ते हुए केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। इस तरह रैली को लेकर राजनीतिक मतभेद के साथ-साथ व्यापारिक हितों का सवाल भी चर्चा में आ गया है।

अब सोनिया गांधी से हस्तक्षेप की मांग

रैली की तारीख नजदीक आने के साथ CTI ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी अपील की है। संगठन चाहता है कि पार्टी नेतृत्व व्यापारियों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम की तारीख या स्थान पर दोबारा विचार करे।

व्यापारियों का तर्क है कि वे किसी राजनीतिक कार्यक्रम के विरोध में नहीं हैं, बल्कि चाहते हैं कि त्योहार के समय बाजारों में सामान्य गतिविधियां जारी रह सकें। उनका कहना है कि रैली का आयोजन ऐसे तरीके से होना चाहिए, जिससे लोगों के राजनीतिक अधिकारों और व्यापारियों की आजीविका, दोनों का सम्मान हो।

प्रशासन की यातायात व्यवस्था पर भी रहेगी नजर

ऐसे बड़े कार्यक्रमों के दौरान दिल्ली पुलिस और यातायात विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। वाहनों के लिए निर्धारित पार्किंग, वैकल्पिक मार्ग, बैरिकेडिंग, सार्वजनिक परिवहन और आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही जैसे इंतजाम स्थिति को संभालने में मदद कर सकते हैं।

व्यापारियों और ग्राहकों के लिए यह जानना भी जरूरी होगा कि किन रास्तों पर प्रतिबंध लागू होंगे और बाजारों तक पहुंचने के लिए कौन से मार्ग खुले रहेंगे। हालांकि, किसी खास बाजार के बंद रहने या सभी दुकानों को बंद कराने की पुष्टि बिना आधिकारिक आदेश के नहीं की जानी चाहिए।

क्या टलेगी रैली या तय कार्यक्रम के अनुसार होगी?

31 अक्टूबर तक उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, CTI की ओर से रैली स्थगित करने या स्थान बदलने की मांग जारी है। संगठन ने राहुल गांधी के बाद सोनिया गांधी से भी हस्तक्षेप की अपील की है। दूसरी ओर, रैली को लेकर अंतिम स्थिति का आकलन आयोजकों और प्रशासन की आधिकारिक घोषणाओं के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

फिलहाल व्यापारियों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि दिवाली से पहले के महत्वपूर्ण कारोबारी दिनों में बाजारों तक ग्राहकों और सामान की आवाजाही प्रभावित न हो। आने वाले समय में रैली के आयोजन, यातायात प्रतिबंधों और पार्किंग व्यवस्था को लेकर जारी होने वाले निर्देशों पर व्यापारियों, ग्राहकों और स्थानीय निवासियों की नजर रहेगी।

AIN NEWS 1 की नजर: दिल्ली में रैली और बाजारों से जुड़ी आगे की अपडेट, प्रशासन की ओर से जारी यातायात निर्देश और व्यापारियों की प्रतिक्रिया सामने आने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।

Delhi traders have urged Congress leader Rahul Gandhi and senior Congress leader Sonia Gandhi to reconsider the proposed November 1, 2026, rally at Ramlila Maidan. The Chamber of Trade and Industry (CTI) has raised concerns about traffic congestion, parking arrangements and possible disruption to major Delhi markets, including Chandni Chowk, Sadar Bazaar, Khari Baoli and Bhagirath Palace, during the pre-Diwali shopping season. Traders estimate that around 10 lakh people and 15,000 to 20,000 vehicles could attend the rally, although these figures remain estimates. The association has suggested postponing the event until after Diwali or considering an alternative venue to minimise the impact on Delhi’s wholesale and retail businesses.

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Pawan Chaudhary
Pawan Chaudhary
पवन चौधरी एक सक्रिय पत्रकार एवं समाचार लेखक हैं, जो जनहित से जुड़े मुद्दों, स्थानीय घटनाक्रम और सामाजिक सरोकारों को प्रमुखता से अपनी पत्रकारिता में स्थान देते हैं। वे जमीनी स्तर की खबरों को तथ्यपरक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के माध्यम से पवन चौधरी आम लोगों की समस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों, सामाजिक मुद्दों और क्षेत्रीय घटनाओं को सामने लाने का प्रयास करते हैं। उनका उद्देश्य निष्पक्ष एवं जिम्मेदार पत्रकारिता के जरिए समाज में जागरूकता बढ़ाना और महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों की आवाज बनाना है।

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