AIN NEWS 1 नई दिल्ली। दिल्ली-NCR में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए दिल्ली सरकार का विंटर एक्शन प्लान 1 नवंबर 2026 से लागू हो गया है। अभियान के पहले ही दिन प्रशासन ने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों, वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) के बिना चलने वाले वाहनों और निर्माण स्थलों पर नियमों के उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई की। रविवार शाम 5 बजे तक सामने आए आंकड़ों के अनुसार, कुल 68.4 लाख रुपये का जुर्माना और पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया। इस दौरान 14,930 वाहनों की जांच की गई, जबकि 1,539 वाहनों को दिल्ली की सीमाओं से वापस भेज दिया गया।
सर्दियों में हवा की गति कम होने, तापमान गिरने और प्रदूषक तत्वों के वातावरण में जमा होने के कारण दिल्ली की वायु गुणवत्ता अक्सर खराब हो जाती है। इसे देखते हुए इस बार वाहन प्रदूषण, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, ईंधन और कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति से जुड़े कई नियम लागू किए गए हैं। सरकार का उद्देश्य प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर एक साथ कार्रवाई करना और राजधानी की हवा को बेहतर बनाना है।
पहले दिन कहां और कितनी कार्रवाई हुई?
विंटर एक्शन प्लान के पहले दिन की कार्रवाई में सबसे अधिक जुर्माना वैध PUCC नहीं रखने वाले वाहनों पर लगाया गया। इसके अलावा दिल्ली में प्रवेश संबंधी नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों और निर्माण स्थलों पर भी कार्रवाई हुई।
प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, कुल 68.4 लाख रुपये की कार्रवाई का ब्योरा इस प्रकार है:
– PUCC उल्लंघन: 566 चालान काटे गए और 56.6 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
– वाहनों की एंट्री के नियम: 127 चालान काटे गए और 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। इसके अलावा 62 वाहन जब्त किए गए।
– निर्माण स्थलों पर नियमों का उल्लंघन: 9.8 लाख रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया।
ये आंकड़े रविवार शाम 5 बजे तक की कार्रवाई पर आधारित हैं। इनसे स्पष्ट है कि अभियान के शुरुआती दिन प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र से जुड़े उल्लंघन प्रशासन की कार्रवाई का सबसे बड़ा हिस्सा रहे।
दिल्ली बॉर्डर पर 14,930 वाहनों की जांच, 1,539 को लौटाया
दिल्ली में बाहर से आने वाले गैर-बीएस-VI मानक वाले वाहनों पर प्रतिबंध लागू होने के बाद यातायात पुलिस और परिवहन विभाग ने सीमावर्ती प्रवेश मार्गों पर जांच अभियान चलाया। इस दौरान कुल 14,930 वाहनों की जांच की गई।
जांच में नियमों के दायरे में आने वाले 1,539 वाहनों को वापस भेज दिया गया। यह जांच किए गए वाहनों का लगभग 10.3 प्रतिशत है। कार्रवाई के दौरान 62 वाहन जब्त किए गए और प्रवेश संबंधी उल्लंघनों पर 127 चालान काटे गए।
इस प्रतिबंध का मुख्य उद्देश्य पुराने उत्सर्जन मानकों वाले वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करना है। नियमों के तहत दिल्ली के बाहर पंजीकृत और BS-VI से कम उत्सर्जन मानक वाले वाहनों की एंट्री पर 31 जनवरी 2027 तक रोक लगाई गई है। हालांकि, CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों सहित अधिसूचित छूट वाली श्रेणियों तथा आवश्यक सेवाओं के वाहनों को निर्धारित नियमों के अनुसार राहत दी गई है।
दिल्ली आने वाले वाहन चालकों को यात्रा से पहले अपने वाहन का उत्सर्जन मानक, पंजीकरण और लागू छूट की स्थिति जांच लेनी चाहिए। केवल वाहन का निजी या व्यावसायिक होना अपने आप में प्रवेश की अनुमति की गारंटी नहीं है।
वैध PUC सर्टिफिकेट नहीं होने पर 56.6 लाख रुपये का जुर्माना
पहले दिन की कार्रवाई में प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र यानी PUCC सबसे प्रमुख विषय रहा। जिन वाहनों के पास वैध प्रमाणपत्र नहीं था, उनके खिलाफ 566 चालान जारी किए गए। इन मामलों में कुल 56.6 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने 493 चालान काटकर 49.3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। वहीं, परिवहन विभाग ने 73 चालान काटे और 7.3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
दिल्ली सरकार की योजना के तहत वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र नहीं होने पर ईंधन देने से भी रोकने की व्यवस्था लागू की गई है। इसके लिए राजधानी के लगभग 500 पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों के जरिए वाहनों की पहचान और जांच की व्यवस्था की जा रही है।
इन कैमरों की मदद से वाहन की नंबर प्लेट पढ़कर संबंधित जानकारी की जांच की जा सकती है। इसलिए वाहन चालकों के लिए केवल प्रदूषण जांच कराना ही नहीं, बल्कि प्रमाणपत्र की वैधता बनाए रखना भी जरूरी है।
PUCC का अर्थ Pollution Under Control Certificate है। यह प्रमाणपत्र बताता है कि जांच के समय वाहन का उत्सर्जन निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं। इसकी वैधता समाप्त होने पर वाहन मालिक को दोबारा निर्धारित जांच करानी चाहिए।
300 निर्माण स्थलों की जांच, 32 जगहों पर मिली गड़बड़ी
वाहनों के साथ-साथ प्रशासन ने निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाली धूल पर भी कार्रवाई की। पहले दिन कुल 300 निर्माण स्थलों का निरीक्षण किया गया। इनमें 32 स्थानों पर धूल नियंत्रण से जुड़े नियमों का उल्लंघन पाया गया।
इन मामलों में कुल 9.8 लाख रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया। साथ ही 17 बंदी आदेश और 19 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए।
निर्माण स्थलों पर उड़ती धूल दिल्ली के वायु प्रदूषण की प्रमुख समस्याओं में शामिल है। निर्माण सामग्री को खुले में रखना, मलबे का उचित प्रबंधन नहीं करना और धूल रोकने के उपायों की अनदेखी करना आसपास की हवा को प्रभावित कर सकता है।
इसी वजह से निर्माण स्थलों पर धूल दबाने के लिए पानी का छिड़काव, निर्माण सामग्री को ढकना, मलबे का नियमानुसार परिवहन और अन्य निर्धारित उपाय अपनाना जरूरी है। नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित एजेंसियां जुर्माना लगाने के साथ काम बंद करने के आदेश भी जारी कर सकती हैं।
1 नवंबर से 31 जनवरी तक निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध
विंटर एक्शन प्लान के तहत 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक धूल पैदा करने वाली तोड़फोड़ और खुले में होने वाली निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध लागू किया गया है। निर्धारित नियमों के अनुसार आवश्यक सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को छूट मिल सकती है।
इसके अतिरिक्त, 10 दिसंबर 2026 से 20 जनवरी 2027 तक निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर और सख्त, व्यापक प्रतिबंध लागू रहेंगे। इस अवधि में भी संबंधित आदेशों में निर्धारित छूट और आवश्यक परियोजनाओं की शर्तें देखना जरूरी होगा।
निर्माण कार्य कराने वाले लोगों, ठेकेदारों और बिल्डरों को सलाह दी जाती है कि वे काम शुरू करने या जारी रखने से पहले लागू आदेशों की जांच कर लें। नियमों की अनदेखी से आर्थिक नुकसान के साथ परियोजना का काम भी रुक सकता है।
28 फरवरी तक दोगुनी पार्किंग फीस
प्रदूषण नियंत्रण की योजना में निजी वाहनों के इस्तेमाल और सड़क यातायात को कम करने के उपाय भी शामिल हैं। इसके तहत दिल्ली में अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक दोगुना रखने का प्रावधान किया गया है।
इसका उद्देश्य लोगों को निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने और जहां संभव हो, सार्वजनिक परिवहन अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। हालांकि, पार्किंग शुल्क से जुड़े किसी विशेष स्थान के नियम और छूट संबंधित पार्किंग संचालक या आधिकारिक आदेश से जांचे जाने चाहिए।
दिल्ली मेट्रो और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का इस्तेमाल करने से सड़क पर निजी वाहनों की संख्या कम करने में मदद मिल सकती है। इससे यातायात जाम और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने में भी योगदान मिल सकता है।
सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारी करेंगे वर्क फ्रॉम होम
विंटर एक्शन प्लान के तहत सरकारी और निजी कार्यालयों में कर्मचारियों की भौतिक उपस्थिति सीमित करने का भी प्रावधान है। 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक अधिकतम 50 प्रतिशत कर्मचारियों को कार्यालय बुलाने और शेष कर्मचारियों से घर से काम कराने की व्यवस्था लागू की गई है।
इस नियम का उद्देश्य रोजाना कार्यालय आने-जाने वाले लोगों की संख्या और पीक आवर्स में यातायात का दबाव कम करना है। आवश्यक सेवाओं को निर्धारित छूट दी गई है।
कार्यालयों को अपनी श्रेणी, लागू सरकारी निर्देशों और छूट की शर्तों के अनुसार व्यवस्था बनानी होगी। कर्मचारियों को भी अपने संस्थान से लागू वर्क फ्रॉम होम नियमों की जानकारी लेनी चाहिए।
क्या है GRAP और कैसे काम करता है?
GRAP का पूरा नाम ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान है। यह दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता बिगड़ने पर प्रदूषण के स्तर के अनुसार चरणबद्ध प्रतिबंध लागू करने की व्यवस्था है। इसे जनवरी 2017 में लागू किया गया था। इसके तहत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) और संबंधित आधिकारिक निर्देशों के आधार पर कार्रवाई की जाती है।
GRAP के चार चरण हैं:
GRAP-1: खराब हवा — AQI 201 से 300
इस चरण में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए शुरुआती उपाय किए जाते हैं। इनमें धूल नियंत्रण, सड़कों की सफाई और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर निगरानी जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।
GRAP-2: बहुत खराब हवा — AQI 301 से 400
इस स्तर पर प्रदूषण कम करने के उपायों को और तेज किया जाता है। संबंधित आदेशों के अनुसार यातायात, धूल और अन्य प्रदूषण स्रोतों पर अतिरिक्त कदम उठाए जा सकते हैं।
GRAP-3: गंभीर हवा — AQI 401 से 450
इस चरण में अधिक सख्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। निर्माण गतिविधियों और प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर अतिरिक्त पाबंदियां लागू हो सकती हैं।
GRAP-4: अत्यंत गंभीर स्थिति — AQI 450 से अधिक
यह सबसे सख्त चरण है। इसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति के अनुसार अतिरिक्त आपातकालीन प्रतिबंध लागू किए जा सकते हैं।
ध्यान देने वाली बात यह है कि विंटर एक्शन प्लान और GRAP एक ही व्यवस्था नहीं हैं। विंटर एक्शन प्लान के कई नियम निर्धारित तारीखों के अनुसार लागू होते हैं, जबकि GRAP के अतिरिक्त प्रतिबंध वायु गुणवत्ता और संबंधित प्राधिकरणों के आदेशों पर निर्भर करते हैं।
पर्यावरण मंत्री ने की नियमों के पालन की अपील
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मंजींदर सिंह सिरसा ने लोगों से वैध PUCC बनवाने, वाहन प्रवेश संबंधी प्रतिबंधों का पालन करने और निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपाय अपनाने की अपील की है।
प्रशासन की कार्रवाई के साथ आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है। वाहन चालकों को अपने प्रमाणपत्र की वैधता जांचनी चाहिए, निर्माण एजेंसियों को धूल रोकने के उपाय करने चाहिए और कार्यालयों को लागू निर्देशों के अनुसार कर्मचारियों की उपस्थिति तय करनी चाहिए।
दिल्ली-NCR के लोगों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
अगर आप दिल्ली में वाहन लेकर आने की योजना बना रहे हैं, तो सबसे पहले अपने वाहन का BS उत्सर्जन मानक और पंजीकरण की स्थिति जांचें। वैध PUCC अपने पास रखें और बिना प्रमाणपत्र के वाहन चलाने से बचें।
निर्माण कार्य कराने से पहले प्रतिबंधित गतिविधियों और लागू छूट की जानकारी लें। कार्यालय जाने वाले कर्मचारी अपने संस्थान से वर्क फ्रॉम होम संबंधी निर्देशों की पुष्टि करें। प्रदूषण बढ़ने पर GRAP के नए आदेशों पर भी नजर रखें। दिल्ली विंटर एक्शन प्लान के पहले दिन 68.4 लाख रुपये का जुर्माना और पर्यावरणीय मुआवजा लगाया जाना बताता है कि प्रशासन इस बार प्रदूषण नियंत्रण के नियमों को सख्ती से लागू करने की कोशिश कर रहा है। 1,539 वाहनों को लौटाने, 566 PUCC चालान काटने और 300 निर्माण स्थलों की जांच के साथ अभियान की शुरुआत हुई है। हालांकि, इसका वास्तविक असर तभी दिखाई देगा जब सरकारी एजेंसियों के साथ वाहन मालिक, निर्माण कंपनियां, कार्यालय और आम नागरिक भी नियमों का लगातार पालन करेंगे।
Delhi Winter Action Plan 2026 came into effect on November 1 to tackle rising winter air pollution in the national capital. On the first day, authorities imposed ₹68.4 lakh in fines and environmental compensation, checked 14,930 vehicles, turned back 1,539 vehicles at Delhi border checkpoints and issued 566 challans for violations of Pollution Under Control Certificate (PUCC) requirements. Officials also inspected 300 construction sites and imposed ₹9.8 lakh in environmental compensation for dust-control violations. Key measures include restrictions on non-Delhi vehicles below BS-VI emission standards, the No PUC No Fuel policy, construction and demolition restrictions, doubled parking charges and a 50% work-from-home arrangement for eligible offices. The Delhi pollution control measures will remain in force for different periods through February 2027, alongside the Graded Response Action Plan (GRAP).



















