AIN NEWS 1 नई दिल्ली। सनातन धर्म में दीपावली को सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहारों में से एक माना जाता है। यह केवल दीप जलाने, मिठाइयां बांटने और घरों को सजाने का पर्व नहीं है, बल्कि धर्म, सत्य, ज्ञान, सकारात्मकता और समृद्धि का प्रतीक है। दीपावली हमें सिखाती है कि जीवन में चाहे कितना भी अंधकार क्यों न हो, सत्य और अच्छाई का प्रकाश हमेशा रास्ता दिखाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार दीपावली का संबंध भगवान श्रीराम के 14 वर्षों का वनवास पूरा करके अयोध्या लौटने से है। वहीं, इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने की भी विशेष परंपरा है। देशभर में लोग अपने घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों की सफाई करके दीप जलाते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
साल 2026 में दीपावली का मुख्य पर्व 8 नवंबर, रविवार को मनाया जा रहा है। इस बार अमावस्या तिथि और नरक चतुर्दशी की कुछ धार्मिक परंपराओं के समय में विशेष संयोग होने के कारण पर्व की तारीखों को लेकर भी लोगों में सवाल हैं। आइए जानते हैं दीपावली का धार्मिक महत्व, पूजा का सही तरीका, शुभ मुहूर्त, इस दिन किए जाने वाले कार्य और जरूरी सावधानियां।

दीपावली शब्द का क्या अर्थ है?
दीपावली दो शब्दों से मिलकर बना है। दीप का अर्थ प्रकाश और आवली का अर्थ पंक्ति होता है। इस प्रकार दीपावली का अर्थ दीपों की पंक्ति है।
सनातन परंपरा में दीपक को ज्ञान, सकारात्मकता, पवित्रता और आशा का प्रतीक माना गया है। दीप जलाने का आध्यात्मिक संदेश है कि मनुष्य अपने भीतर मौजूद अज्ञान, क्रोध, अहंकार, ईर्ष्या और नकारात्मक विचारों को दूर करके अच्छे विचारों को अपनाए।
इस पर्व का वास्तविक उद्देश्य केवल घर को रोशन करना नहीं, बल्कि अपने आचरण और व्यवहार से दूसरे लोगों के जीवन में भी खुशियां लाना है।
भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने से जुड़ी है दीपावली की मान्यता
दीपावली की सबसे प्रसिद्ध धार्मिक मान्यता रामायण से जुड़ी हुई है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने 14 वर्षों का वनवास पूरा करने और रावण का वध करने के बाद माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या वापसी की थी।
भगवान श्रीराम के आगमन की खुशी में अयोध्यावासियों ने पूरे नगर को दीपों से सजाया था। इसी परंपरा को दीपावली के उत्सव से जोड़ा जाता है।
यह प्रसंग हमें संदेश देता है कि अन्याय और अधर्म चाहे कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है।
दीपावली पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा क्यों होती है?
दीपावली की रात माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व है।
माता लक्ष्मी को धन, वैभव, ऐश्वर्य और समृद्धि की देवी माना जाता है। वहीं भगवान गणेश बुद्धि, विवेक, शुभारंभ और विघ्नों को दूर करने वाले देवता के रूप में पूजे जाते हैं।
कई परिवारों में माता सरस्वती की पूजा भी की जाती है। धार्मिक दृष्टि से इसका संदेश है कि जीवन में धन के साथ ज्ञान और बुद्धि का होना भी जरूरी है।
दीपावली पर घर और प्रतिष्ठान की सफाई करने की परंपरा भी इसी भावना से जुड़ी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार स्वच्छ और व्यवस्थित वातावरण माता लक्ष्मी को प्रिय होता है। हालांकि इसका वास्तविक संदेश स्वच्छता, अनुशासन और अच्छे कर्मों को अपनाना है।
दीपावली 2026: लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार दिल्ली के लिए 8 नवंबर 2026 को लक्ष्मी पूजा का प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार है:
– दीपावली: 8 नवंबर 2026, रविवार
– अमावस्या तिथि प्रारंभ: सुबह 11:27 बजे
– अमावस्या तिथि समाप्त: 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे
– प्रदोष काल: शाम 5:31 से रात 8:09 बजे तक
– लक्ष्मी-गणेश पूजा मुहूर्त: शाम 5:54 से रात 7:50 बजे तक।
ये समय नई दिल्ली की पंचांग गणना पर आधारित हैं। गाजियाबाद, नोएडा और अन्य शहरों में स्थानीय सूर्योदय-सूर्यास्त के अनुसार कुछ मिनटों का अंतर संभव है। इसलिए अपने स्थानीय पंचांग को भी देखना उचित रहेगा।
घर पर कैसे करें माता लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा?
दीपावली की पूजा श्रद्धा, स्वच्छता और पवित्र मन से करनी चाहिए। सामान्य पूजा के लिए निम्नलिखित सामग्री रख सकते हैं:
– माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर
– लाल या पीला कपड़ा और पूजा की चौकी
– रोली, कुमकुम और अक्षत
– फूल और माला
– धूप, अगरबत्ती और घी का दीपक
– फल, मिठाई और नैवेद्य
– कलश और स्वच्छ जल
– पूजा की थाली और घंटी।
सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके चौकी पर कपड़ा बिछाएं और भगवान गणेश तथा माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
परंपरा के अनुसार सबसे पहले भगवान गणेश का पूजन करें। इसके बाद माता लक्ष्मी को फूल, अक्षत, रोली और मिठाई अर्पित करें। धूप और दीप जलाकर मंत्रों का जाप करें और अंत में आरती करें।
माता लक्ष्मी के लिए ‘ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः’ और भगवान गणेश के लिए ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप किया जा सकता है।
पूजा के बाद परिवार के सभी सदस्य मिलकर सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना करें।
दीपावली पर क्या-क्या करना शुभ माना जाता है?
सनातन धर्म में दीपावली को अच्छे कार्यों और नई शुरुआत का पर्व भी माना गया है। इस दिन कुछ विशेष कार्यों को अपनाना चाहिए।
1. घर और आसपास सफाई रखें: घर, रसोई, पूजा स्थल और आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखें।
2. दीपक जलाएं: घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल, आंगन और तुलसी के पास दीपक जलाने की परंपरा है।
3. जरूरतमंदों की सहायता करें: गरीब परिवारों को भोजन, कपड़े और मिठाइयां दें। अपनी क्षमता के अनुसार दान-पुण्य करें।
4. बुजुर्गों का आशीर्वाद लें: माता-पिता और परिवार के वरिष्ठ सदस्यों का सम्मान करें।
5. व्यापारिक प्रतिष्ठान में पूजा करें: व्यापारी वर्ग अपनी परंपरा के अनुसार बही-खातों और व्यापारिक साधनों का पूजन करता है।
6. परिवार में प्रेम बनाए रखें: पुराने विवाद समाप्त करने और रिश्तों को मजबूत बनाने का प्रयास करें।
7. पशु-पक्षियों का ध्यान रखें: पटाखों के शोर और धुएं से उन्हें बचाएं।
दीपावली पर किन कामों से बचना चाहिए?
दीपावली को सात्विकता, संयम और सकारात्मकता का पर्व माना जाता है। इसलिए इस दिन कुछ गलतियों से बचना चाहिए।
– घर में झगड़ा, अपशब्द और अपमानजनक व्यवहार न करें।
– किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति का अपमान न करें।
– नशे की हालत में पूजा करने से बचें।
– जुआ और सट्टेबाजी में धन बर्बाद न करें।
– दिखावे के लिए कर्ज लेकर अनावश्यक खर्च न करें।
– भोजन और मिठाइयों की बर्बादी न करें।
– किसी दूसरे व्यक्ति को पटाखों से परेशान न करें।
– जानवरों के पास तेज आवाज वाले पटाखे न जलाएं।
कई सनातनी परिवारों में दीपावली पर सात्विक भोजन करने और मांस-मदिरा से दूर रहने की परंपरा है। परिवार की धार्मिक परंपरा के अनुसार संयम और पवित्रता बनाए रखना उचित माना जाता है।
दीपावली के पांच दिवसीय पर्व का महत्व
दीपावली से जुड़े उत्सव कई दिनों तक चलते हैं। इनके पीछे अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं हैं।
धनतेरस – 6 नवंबर 2026: इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। स्वास्थ्य, आरोग्य और समृद्धि की कामना की जाती है। सोना, चांदी और बर्तन खरीदने की परंपरा भी प्रचलित है।
काली चौदस – 7 नवंबर 2026: कुछ क्षेत्रों में इस दिन मां काली और हनुमान जी की विशेष पूजा की जाती है। इसे नरक चतुर्दशी से जुड़ी परंपराओं से भी जोड़ा जाता है।
नरक चतुर्दशी और दीपावली – 8 नवंबर 2026: इस दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध की मान्यता जुड़ी है। इसी दिन शाम को मुख्य लक्ष्मी-गणेश पूजा की जा रही है।
गोवर्धन पूजा – 10 नवंबर 2026: भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा करने की कथा से यह पर्व जुड़ा है। इस दिन गोवर्धन पूजा और अन्नकूट की परंपरा है।
भाई दूज – 11 नवंबर 2026: इस दिन बहनें अपने भाइयों के सुख, स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना करती हैं।
इस वर्ष अमावस्या 9 नवंबर को दोपहर तक रहने के कारण पारंपरिक पर्वों की गणना में एक दिन का अंतर दिखाई देता है। कुछ क्षेत्रीय परंपराओं में नरक चतुर्दशी और दीपावली के अनुष्ठान भी अलग-अलग समय पर किए जाते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के पटाखों को लेकर 2026 के महत्वपूर्ण निर्देश
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को देखते हुए पटाखों के उपयोग पर विशेष नियम लागू किए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने 2026 में सीमित अवधि के लिए प्रमाणित ग्रीन पटाखों के उपयोग की अनुमति दी है। इसके अनुसार 7 और 8 नवंबर को सुबह 6 से 7 बजे तथा रात 8 से 10 बजे तक ही निर्धारित शर्तों के साथ पटाखे जलाए जा सकते हैं।
अदालत ने अस्पतालों, नर्सिंग होम, स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों और अधिसूचित साइलेंस जोन के 300 मीटर के दायरे में पटाखे जलाने पर रोक लगाई है। शिक्षण संस्थानों के आसपास भी यही प्रतिबंध लागू है।
इसके अलावा बमों की लड़ियां, बेरियम वाले पटाखे और गैर-प्रमाणित पारंपरिक पटाखों की बिक्री तथा उपयोग पर रोक लगाई गई है। 9 नवंबर से दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध फिर लागू होना है।
इसलिए लोगों को स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए। ग्रीन पटाखे भी पूरी तरह प्रदूषण मुक्त नहीं होते।
दीपावली पर स्वास्थ्य और सुरक्षा का भी रखें ध्यान
दीपावली की खुशियां मनाते समय सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
बच्चों को अकेले पटाखे न जलाने दें। जलते पटाखों को हाथ में न पकड़ें और उन्हें दोबारा जलाने की कोशिश न करें। घर में पानी की बाल्टी और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था रखें।
दीपक और मोमबत्तियों को पर्दों, कागज तथा अन्य ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें। बुजुर्गों, छोटे बच्चों और सांस संबंधी परेशानी से जूझ रहे लोगों को धुएं से बचाएं।
पालतू जानवरों के लिए घर में शांत जगह रखें। तेज आवाज और धुएं से उन्हें गंभीर परेशानी हो सकती है।
दीपावली का सबसे बड़ा संदेश: अपने साथ दूसरों के जीवन में भी लाएं प्रकाश
दीपावली का वास्तविक महत्व केवल धन और वैभव की प्राप्ति तक सीमित नहीं है। भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा और सत्य का संदेश देता है। माता लक्ष्मी की पूजा समृद्धि के साथ सदाचार की प्रेरणा देती है और भगवान गणेश की आराधना बुद्धि तथा विवेक का महत्व समझाती है।
इस अवसर पर गरीबों की मदद करना, भूखे को भोजन कराना, बुजुर्गों का सम्मान करना और समाज में प्रेम तथा भाईचारे को बढ़ावा देना भी बेहद महत्वपूर्ण है।
इस दीपावली संकल्प लें कि हम ईमानदारी से जीवन जीएंगे, किसी का अहित नहीं करेंगे, पर्यावरण की रक्षा करेंगे और जरूरतमंद लोगों की सहायता करेंगे।
दीपावली का असली उत्सव तभी सार्थक होगा, जब हमारे घरों के साथ-साथ हमारे विचारों और व्यवहार में भी प्रकाश होगा। हजारों दीपक जलाने से घर रोशन होता है, लेकिन किसी जरूरतमंद के जीवन में खुशियां लाने से पूरा समाज रोशन होता है।
AIN NEWS 1 की ओर से सभी देशवासियों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।
Diwali 2026, also known as Deepavali, is one of the most significant Hindu festivals celebrating the victory of light over darkness and good over evil. The festival is associated with Lord Rama’s return to Ayodhya and the worship of Goddess Lakshmi and Lord Ganesha for wealth, wisdom and prosperity. Learn about Diwali religious significance, Lakshmi Ganesh Puja Vidhi, auspicious Diwali Puja Muhurat 2026, traditional rituals, important do’s and don’ts, Dhanteras, Naraka Chaturdashi, Govardhan Puja, Bhai Dooj and the latest Supreme Court guidelines on green firecrackers in Delhi-NCR.



















