spot_imgspot_img

E20 पेट्रोल विवाद: राहुल गांधी ने मोदी सरकार को घेरा, कर्नाटक की जांच में 31.2% तक एथेनॉल मिलने का दावा, केंद्र ने आंकड़ों के साथ दिया जवाब

spot_img

Date:

AIN NEWS 1 | नई दिल्ली | 7 नवंबर 2026

देश में पेट्रोल के साथ एथेनॉल मिलाने की नीति एक बार फिर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस के केंद्र में आ गई है। इस बार विवाद की वजह कर्नाटक सरकार की ओर से कराई गई पेट्रोल के नमूनों की जांच है। राज्य सरकार ने दावा किया है कि कुछ पेट्रोल पंपों से लिए गए नमूनों में एथेनॉल की मात्रा निर्धारित 20 प्रतिशत से काफी अधिक पाई गई। कुछ नमूनों में यह मात्रा 31.2 प्रतिशत तक बताई गई है।

इस मामले को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि जनता की गाड़ियों में निर्धारित मात्रा से ज्यादा एथेनॉल मिलाकर पेट्रोल दिया जा रहा है। उन्होंने E20 पर तंज कसते हुए इसे ‘420’ बताया और सवाल किया कि जब उपभोक्ता पेट्रोल की पूरी कीमत चुका रहे हैं तो उन्हें वास्तव में टंकी में क्या दिया जा रहा है?

हालांकि, केंद्र सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तीन बड़ी तेल कंपनियों ने इन आरोपों को चुनौती दी है। उनका कहना है कि कर्नाटक में सामने आए जांच परिणाम निर्धारित तकनीकी और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार प्रमाणित नहीं हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने अपनी ओर से 893 नमूनों की जांच का हवाला देते हुए दावा किया है कि सभी निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाए गए।

इस तरह E20 पेट्रोल को लेकर अब दो अलग-अलग जांच के निष्कर्ष आमने-सामने हैं। सवाल यह है कि आखिर पेट्रोल में एथेनॉल की वास्तविक मात्रा कितनी है और इस विवाद में आम वाहन चालकों की चिंता कितनी जायज है?

कर्नाटक के सात जिलों से जुटाए गए थे पेट्रोल के नमूने

कर्नाटक सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री रिजवान अरशद ने 6 नवंबर को इस मामले की जानकारी सार्वजनिक की थी। उनके अनुसार राज्य के सात जिलों में पेट्रोल पंपों से नमूने एकत्र किए गए और उनकी जांच बेंगलुरु स्थित श्रीराम रिसर्च इंस्टीट्यूट में कराई गई।

इन सात जिलों में बेंगलुरु, कोलार, चिक्कबल्लापुर, बेंगलुरु ग्रामीण, रामनगर, मंगलुरु और तुमकुरु शामिल हैं।

राज्य सरकार के अनुसार कुल 63 नमूने एकत्र किए गए थे। वहीं राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में 14 जांच किए गए नमूनों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि इनमें से 11 में एथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक मिली।

राज्य सरकार की ओर से जारी जांच विवरण में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के एक नमूने में 31.2 प्रतिशत और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के एक नमूने में 30.5 प्रतिशत एथेनॉल मिलने की बात कही गई।

इसके अलावा HPCL के एक अन्य नमूने में 27 प्रतिशत, BPCL के स्पीड पेट्रोल में 26.5 प्रतिशत, नायरा के पेट्रोल में 26.1 प्रतिशत और शेल के एक नमूने में 25.5 प्रतिशत एथेनॉल होने का दावा किया गया।

अन्य नमूनों में भी 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिलने की जानकारी सामने आई। हालांकि कुछ नमूनों में यह मात्रा 20 प्रतिशत से कम भी दर्ज की गई।

कर्नाटक सरकार ने इन नतीजों के आधार पर तेल कंपनियों से जवाब मांगा और निर्धारित सीमा से अधिक एथेनॉल मिलने की स्थिति में कार्रवाई की मांग उठाई।

राहुल गांधी ने सरकार से पूछे तीखे सवाल

राहुल गांधी ने इस रिपोर्ट को लेकर केंद्र सरकार की एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति पर निशाना साधा। उनका कहना है कि सरकार देश में E20 पेट्रोल उपलब्ध कराने की बात करती है, लेकिन यदि पेट्रोल में वास्तविक एथेनॉल की मात्रा इससे काफी ज्यादा है तो इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या देश के वाहन चालकों को यह जानकारी दी जा रही है कि उनके पेट्रोल में कितने प्रतिशत एथेनॉल मिलाया गया है?

राहुल गांधी ने यह भी पूछा कि यदि किसी कंपनी के पेट्रोल में निर्धारित सीमा से अधिक एथेनॉल मिलने की पुष्टि होती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई कब होगी।

उनका आरोप है कि अधिक एथेनॉल वाला ईंधन वाहन का माइलेज कम कर सकता है और कुछ वाहनों के ईंधन सिस्टम पर भी असर डाल सकता है। इस वजह से वाहन मालिकों को पेट्रोल पर ज्यादा खर्च करने के साथ-साथ मरम्मत का आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ सकता है।

हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं और इनकी पुष्टि के लिए निर्धारित तकनीकी मानकों के तहत स्वतंत्र जांच जरूरी है।

केंद्र सरकार ने 893 नमूनों की जांच का दिया हवाला

कर्नाटक सरकार के आरोपों के बाद पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 7 नवंबर को प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के माध्यम से विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया।

मंत्रालय के मुताबिक इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने देश के 27 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से कुल 893 E20 पेट्रोल के नमूनों की जांच की है।

इनमें इंडियन ऑयल के 330, भारत पेट्रोलियम के 280 और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के 283 नमूने शामिल बताए गए हैं।

मंत्रालय का कहना है कि इन सभी 893 नमूनों में एथेनॉल की मात्रा निर्धारित 19 से 21 प्रतिशत की सीमा के भीतर पाई गई।

कर्नाटक को लेकर भी मंत्रालय ने अलग आंकड़े पेश किए हैं। उसके अनुसार राज्य के विभिन्न स्थानों और तीनों सरकारी तेल कंपनियों से संबंधित 56 नमूनों की जांच की गई। इन सभी में एथेनॉल की मात्रा 19 से 20 प्रतिशत के बीच दर्ज हुई और औसत मात्रा 19.30 प्रतिशत रही।

केंद्र सरकार ने इन्हीं आंकड़ों के आधार पर कर्नाटक सरकार के दावों से असहमति जताई है।

तेल कंपनियों ने कर्नाटक की जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल

इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने संयुक्त रूप से कर्नाटक सरकार की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

कंपनियों का कहना है कि पेट्रोल की गुणवत्ता जांचने के लिए सरकार ने स्पष्ट कानूनी और तकनीकी प्रक्रियाएं निर्धारित की हैं। इनमें नमूने लेने, उन्हें सुरक्षित रखने, प्रयोगशाला में भेजने और जांच के नतीजे संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराने के नियम शामिल हैं।

तेल कंपनियों के अनुसार अक्टूबर 2026 में की गई नमूना संग्रह प्रक्रिया में उनके प्रतिनिधियों की भागीदारी नहीं थी। उन्हें सुरक्षित रखे गए दूसरे नमूने, पेट्रोल पंपों के अनुसार पूरा विवरण और विस्तृत प्रयोगशाला रिपोर्ट भी उपलब्ध नहीं कराई गई।

कंपनियों ने यह भी कहा कि तीसरी पार्टी की प्रयोगशाला से जारी प्रमाणपत्रों में एथेनॉल की मात्रा मापने के लिए इस्तेमाल की गई तकनीकी प्रक्रिया का पूरा विवरण नहीं है।

उनके मुताबिक केवल गैस क्रोमैटोग्राफी से जांच किए जाने का उल्लेख पर्याप्त नहीं है। यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि कौन-सा निर्धारित परीक्षण मानक अपनाया गया, नमूने को किस प्रक्रिया से तैयार किया गया और संदर्भ सामग्री का इस्तेमाल कैसे किया गया।

इसी आधार पर कंपनियों ने कर्नाटक सरकार से दोबारा संयुक्त नमूना संग्रह और अधिकृत प्रयोगशाला में स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।

E20 पेट्रोल क्या है और सरकार इसे क्यों बढ़ावा दे रही है?

E20 पेट्रोल ऐसा ईंधन है जिसमें लगभग 20 प्रतिशत एथेनॉल और शेष पेट्रोल होता है। एथेनॉल एक प्रकार का अल्कोहल आधारित जैव ईंधन है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है।

केंद्र सरकार ने एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को बढ़ावा देने के पीछे कई उद्देश्य बताए हैं।

पहला उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता कम करना है। दूसरा उद्देश्य देश में एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देकर किसानों के लिए अतिरिक्त बाजार तैयार करना है। इसके अलावा सरकार का मानना है कि एथेनॉल के इस्तेमाल से जीवाश्म ईंधन की खपत और उससे जुड़े कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद मिल सकती है।

E20 के लिए भारतीय मानक ब्यूरो का IS 17021 मानक लागू है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में 19 से 21 प्रतिशत को निर्धारित एथेनॉल मात्रा की सीमा बताया है।

इसलिए यह समझना जरूरी है कि E20 का मतलब निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार तैयार किया गया ईंधन है। इससे अधिक मात्रा पाए जाने की स्थिति में जांच और नियामकीय कार्रवाई का सवाल उठता है।

क्या E20 पेट्रोल से गाड़ी का माइलेज कम होता है?

E20 विवाद में आम वाहन मालिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा माइलेज और गाड़ी की सुरक्षा है।

एथेनॉल में सामान्य पेट्रोल की तुलना में प्रति लीटर ऊर्जा कम होती है। इसलिए E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर कुछ वाहनों में माइलेज की कमी हो सकती है। इसका वास्तविक असर वाहन के इंजन, तकनीकी बनावट और ईंधन के अनुकूलन पर निर्भर करता है।

पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से अगस्त 2025 में जारी स्पष्टीकरण के अनुसार E20 के लिए अनुकूल बनाए गए वाहनों में माइलेज की कमी लगभग 1 से 2 प्रतिशत हो सकती है। कुछ अन्य श्रेणी के वाहनों में यह कमी लगभग 3 से 6 प्रतिशत तक बताई गई है।

हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि हर वाहन में समान गिरावट होगी या हर वाहन को नुकसान पहुंचेगा।

विशेष रूप से पुराने वाहनों और E20 के अनुकूल नहीं बनाए गए मॉडलों को लेकर वाहन चालकों की चिंताएं सामने आती रही हैं। ऐसे में वाहन निर्माता की सलाह और वाहन के मैनुअल में दी गई ईंधन संबंधी जानकारी को ध्यान में रखना जरूरी है।

कर्नाटक सरकार ने भी आशंका जताई है कि निर्धारित सीमा से ज्यादा एथेनॉल होने पर ईंधन फिल्टर, पंप, इंजेक्टर, होज और सील जैसे कुछ हिस्सों पर असर पड़ सकता है। लेकिन इस मामले में वास्तविक नुकसान साबित करने के लिए वाहन और ईंधन की तकनीकी जांच आवश्यक होगी।

₹1.01 लाख करोड़ के नुकसान के दावे पर भी विवाद

कर्नाटक सरकार की ओर से उपभोक्ताओं को माइलेज में कमी के कारण लगभग 62 हजार करोड़ रुपये और वाहनों की मरम्मत के कारण करीब 39 हजार करोड़ रुपये के संभावित नुकसान का अनुमान पेश किया गया है।

इस तरह कुल नुकसान का आंकड़ा लगभग 1.01 लाख करोड़ रुपये बताया गया है।

हालांकि, पेट्रोलियम मंत्रालय ने इन अनुमानों पर सवाल उठाए हैं। मंत्रालय का कहना है कि पूरे देश के वाहनों पर एक समान माइलेज नुकसान मानकर इतना बड़ा आर्थिक आंकड़ा निकालना वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तरीका नहीं है।

केंद्र के अनुसार E20 के वास्तविक प्रभाव का आकलन वाहन की श्रेणी, इंजन की तकनीक, ईंधन की गुणवत्ता और वास्तविक मरम्मत संबंधी आंकड़ों के आधार पर किया जाना चाहिए।

इसलिए 1.01 लाख करोड़ रुपये के नुकसान को फिलहाल प्रमाणित आर्थिक नुकसान नहीं माना जा सकता।

अब आगे क्या होगा?

इस विवाद के बीच सबसे महत्वपूर्ण कदम कर्नाटक सरकार और तेल कंपनियों के बीच संयुक्त और पारदर्शी जांच है।

तेल कंपनियों ने राज्य सरकार से सभी नमूनों का रिकॉर्ड, पेट्रोल पंपों के अनुसार जांच रिपोर्ट और परीक्षण की तकनीकी जानकारी मांगी है। साथ ही सुरक्षित रखे गए नमूनों की अधिकृत प्रयोगशाला में दोबारा जांच कराने का प्रस्ताव भी रखा है।

दूसरी ओर कर्नाटक सरकार ने इस मामले में कार्रवाई की मांग उठाई है और पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर उपभोक्ताओं को अधिक जानकारी देने की जरूरत बताई है।

राज्य सरकार ने पेट्रोल पंपों पर एथेनॉल की वास्तविक मात्रा प्रदर्शित करने और अधिक एथेनॉल से प्रभावित वाहन मालिकों के लिए मुआवजा व्यवस्था बनाने जैसे सुझाव भी दिए हैं।

अब देखना होगा कि प्रस्तावित संयुक्त जांच में क्या नतीजे सामने आते हैं और क्या किसी कंपनी के खिलाफ निर्धारित मानकों के उल्लंघन की पुष्टि होती है।

आम जनता के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद?

पेट्रोल की कीमत चुकाने वाले प्रत्येक वाहन चालक का अधिकार है कि उसे निर्धारित गुणवत्ता वाला ईंधन मिले। पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा तय मानकों के अनुरूप होनी चाहिए और इसकी निगरानी भी पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए।

यदि किसी पेट्रोल पंप पर निर्धारित गुणवत्ता से अलग ईंधन मिलने की पुष्टि होती है तो संबंधित विभाग को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।

फिलहाल इस मामले में कर्नाटक सरकार और तेल कंपनियों के दावे अलग-अलग हैं। इसलिए किसी भी कंपनी को दोषी घोषित करने से पहले निष्पक्ष और मानक आधारित जांच जरूरी है।

AIN NEWS 1 का निष्कर्ष: E20 पेट्रोल विवाद ने देश में ईंधन की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं के अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कर्नाटक सरकार की जांच में 31.2 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलने का दावा सामने आया है, जबकि केंद्र सरकार ने 893 नमूनों की जांच का हवाला देते हुए निर्धारित मानकों के पालन की बात कही है। दोनों पक्षों के बीच तकनीकी विवाद का समाधान स्वतंत्र और संयुक्त जांच से ही संभव है। आम जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उसकी गाड़ी में इस्तेमाल होने वाले पेट्रोल की गुणवत्ता क्या है और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी मिलती है तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी।

The E20 petrol controversy in India has intensified after Karnataka government laboratory tests reportedly found ethanol content as high as 31.2% in certain petrol samples. Congress leader Rahul Gandhi has questioned the Modi government over alleged excess ethanol blending, raising concerns about petrol quality, vehicle mileage and consumer protection. Meanwhile, the Ministry of Petroleum and Natural Gas and public sector oil marketing companies, including Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum and Hindustan Petroleum, have challenged the findings and cited compliance results from 893 E20 fuel samples across 27 states and Union Territories. The dispute has renewed the debate over ethanol blending in petrol, fuel quality standards, vehicle compatibility and transparency in India’s E20 petrol programme.

spot_img
spot_imgspot_img
Pawan Chaudhary
Pawan Chaudhary
पवन चौधरी एक सक्रिय पत्रकार एवं समाचार लेखक हैं, जो जनहित से जुड़े मुद्दों, स्थानीय घटनाक्रम और सामाजिक सरोकारों को प्रमुखता से अपनी पत्रकारिता में स्थान देते हैं। वे जमीनी स्तर की खबरों को तथ्यपरक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के माध्यम से पवन चौधरी आम लोगों की समस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों, सामाजिक मुद्दों और क्षेत्रीय घटनाओं को सामने लाने का प्रयास करते हैं। उनका उद्देश्य निष्पक्ष एवं जिम्मेदार पत्रकारिता के जरिए समाज में जागरूकता बढ़ाना और महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों की आवाज बनाना है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

[adinserter block="1"] [adinserter block="2"]
[adinserter name="Block 2"]
spot_imgspot_img

Share post:

New Delhi
clear sky
29.4 ° C
29.4 °
29.4 °
44%
3.1m/s
0%
Sat
28 °
Sun
30 °
Mon
31 °
Tue
30 °
Wed
31 °

Subscribe

spot_img
spot_imgspot_img

Popular

spot_img
[the_ad id="1183"] [the_ad id="1189"]

More like this
Related