AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश में राज्यानुदानित मदरसों की व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। हाल ही में सामने आए एक गंभीर मामले ने शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और निगरानी प्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि कुछ मदरसों में शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम का दुरुपयोग किया गया और फर्जी हाजिरी लगाकर सरकारी धन का गबन किया गया।
जौनपुर से शुरू हुआ मामला
सबसे पहले यह मामला जौनपुर जिले के एक मदरसे से सामने आया। जानकारी के मुताबिक, मदरसा अबरे रहमत मझगवा में शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए बायोमेट्रिक मशीन का इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन जांच में सामने आया कि असली शिक्षकों की जगह प्रबंधक के चार बेटों के अंगूठों के निशान का इस्तेमाल किया गया।
यानि जिन शिक्षकों को वेतन दिया जा रहा था, वे वास्तव में उपस्थित ही नहीं थे। उनकी जगह किसी और के फिंगरप्रिंट से हाजिरी लगाई जा रही थी। इस तरह सरकारी खजाने से नियमित रूप से वेतन निकाला जाता रहा।
कैसे किया गया पूरा खेल?
जांच में सामने आया कि बायोमेट्रिक सिस्टम को धोखा देने के लिए एक सुनियोजित तरीका अपनाया गया।
प्रबंधक के बेटों के फिंगरप्रिंट को मशीन में दर्ज कराया गया
उन्हीं के जरिए रोजाना उपस्थिति लगाई जाती थी
वास्तविक शिक्षक कई बार मदरसे में आते ही नहीं थे
इसके बावजूद उनके नाम पर वेतन जारी होता रहा
इस पूरे खेल में कई महीनों तक सरकारी धन की निकासी की जाती रही।
बाराबंकी में भी सामने आया समान मामला
जौनपुर का मामला अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि अब बाराबंकी जिले से भी इसी तरह की गड़बड़ी की खबर सामने आई है। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि यहां भी बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली का दुरुपयोग किया गया।
अधिकारियों को शक है कि यहां भी फर्जी हाजिरी लगाकर वेतन निकाला गया हो सकता है। फिलहाल संबंधित विभाग द्वारा दस्तावेजों और मशीन के रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
सरकारी तंत्र पर उठे सवाल
इस घटना ने राज्य की निगरानी प्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बायोमेट्रिक सिस्टम को पारदर्शिता और धोखाधड़ी रोकने के लिए लागू किया गया था, लेकिन अगर उसी में हेराफेरी हो रही है, तो यह व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि:
केवल तकनीक लागू करना पर्याप्त नहीं है
नियमित ऑडिट और फिजिकल वेरिफिकेशन जरूरी है
जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए
कार्रवाई की तैयारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने जांच तेज कर दी है। संबंधित मदरसा प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। यदि आरोप साबित होते हैं, तो:
सरकारी धन की रिकवरी की जाएगी
दोषियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज हो सकता है
मदरसे की मान्यता तक रद्द की जा सकती है
शिक्षा व्यवस्था पर असर
इस तरह के मामलों का सीधा असर शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ता है। जब शिक्षक नियमित रूप से उपस्थित नहीं होते और केवल कागजों में काम चलता है, तो छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होती है।
ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में मदरसे शिक्षा का एक महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐसे में इस तरह की अनियमितताएं छात्रों के भविष्य को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
आगे क्या बदलाव जरूरी?
विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कुछ जरूरी कदम उठाने होंगे:
बायोमेट्रिक सिस्टम को आधार या लाइव फोटो वेरिफिकेशन से जोड़ना
समय-समय पर अचानक निरीक्षण (surprise inspection)
डिजिटल रिकॉर्ड का स्वतंत्र ऑडिट
स्थानीय प्रशासन की सक्रिय भागीदारी
जौनपुर और बाराबंकी के ये मामले केवल एक जिले तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह संकेत देते हैं कि कहीं न कहीं सिस्टम में बड़ी खामी मौजूद है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो इस तरह के घोटाले और भी जगहों पर सामने आ सकते हैं।
सरकार और प्रशासन के लिए यह एक चेतावनी है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
A major biometric attendance scam in Uttar Pradesh madrasas has exposed how fake fingerprints were used to mark teacher attendance and withdraw salaries fraudulently. The cases reported in Jaunpur and Barabanki highlight serious lapses in monitoring systems and raise concerns over misuse of government funds in the education sector. Authorities have launched investigations, and strict action is expected against those involved in this teacher salary fraud.


















