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फर्जी ‘महामंडलेश्वर’ का जाल: सरकारी नौकरी के नाम पर 10 लाख की ठगी, FIR दर्ज!

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AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद से सामने आया एक हैरान कर देने वाला मामला लोगों को सतर्क करने वाला है। यहां एक व्यक्ति ने खुद को “महामंडलेश्वर” बताकर न केवल लोगों का भरोसा जीता, बल्कि उसी भरोसे का फायदा उठाते हुए लाखों रुपये की ठगी को अंजाम दिया। इस पूरे मामले में आरोपी ने एक महिला को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर उससे 10 लाख रुपये से अधिक की रकम ऐंठ ली।

यह मामला अब पुलिस और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की जांच के बाद पूरी तरह खुल चुका है और आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। आइए इस पूरे घटनाक्रम को विस्तार से समझते हैं।

कैसे शुरू हुआ ठगी का खेल?

मामले की शुरुआत एक आम परिवार की उस उम्मीद से हुई, जिसमें मां अपने बेटे को एक अच्छी सरकारी नौकरी में देखना चाहती थी। आरोपी, जो खुद को “योगी आनंद गिरी महाराज” बताता था, ने इसी भावनात्मक कमजोरी को निशाना बनाया।

उसने महिला को विश्वास दिलाया कि उसके पास “ऊंचे स्तर” तक पहुंच है और वह केंद्र सरकार के अंतर्गत सेक्शन ऑफिसर जैसे प्रतिष्ठित पद पर नियुक्ति दिलवा सकता है। शुरुआत में आरोपी ने अपने प्रभाव और संपर्कों का ऐसा जाल बुना कि महिला को उसकी बातों पर भरोसा हो गया।

सरकारी नौकरी का झांसा और मोटी रकम की मांग

धीरे-धीरे आरोपी ने महिला से पैसे की मांग शुरू की। उसने दावा किया कि नौकरी पक्की करने के लिए “प्रोसेसिंग फीस”, “फाइल आगे बढ़ाने” और “ऊपर तक सेटिंग” के नाम पर पैसे देने होंगे।

महिला, जो अपने बेटे के भविष्य को लेकर गंभीर थी, आरोपी के झांसे में आती चली गई। अलग-अलग किस्तों में उसने 10 लाख रुपये से अधिक की रकम आरोपी को दे दी। आरोपी हर बार नए बहाने बनाकर पैसे लेता रहा और भरोसा दिलाता रहा कि नियुक्ति जल्द हो जाएगी।

फर्जी नियुक्ति पत्र देकर किया विश्वास मजबूत

ठगी को और विश्वसनीय बनाने के लिए आरोपी ने एक कदम और आगे बढ़ाया। उसने महिला को एक “नियुक्ति पत्र” सौंपा, जो देखने में पूरी तरह असली लगता था।

इस फर्जी दस्तावेज़ में सरकारी विभाग का नाम, पद, और अन्य औपचारिकताएं शामिल थीं, जिससे महिला को यकीन हो गया कि उसके बेटे की नौकरी पक्की हो चुकी है। लेकिन असल में यह पूरा दस्तावेज नकली था।

सच सामने कैसे आया?

समय बीतने के बाद जब नौकरी से जुड़ी कोई वास्तविक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी, तो महिला को शक हुआ। उसने संबंधित विभाग से संपर्क करने की कोशिश की, जहां उसे पता चला कि ऐसा कोई नियुक्ति आदेश जारी ही नहीं किया गया है।

यहीं से महिला को ठगी का अहसास हुआ। उसने तुरंत इस मामले की शिकायत की, जिसके बाद मामला आर्थिक अपराध शाखा (EOW) तक पहुंचा।

EOW की जांच में हुआ बड़ा खुलासा

आर्थिक अपराध शाखा ने मामले की गहन जांच की। दस्तावेजों की जांच, पैसों के लेन-देन और आरोपी के बैकग्राउंड की पड़ताल के बाद यह साफ हो गया कि यह एक सुनियोजित ठगी थी।

जांच में सामने आया कि आरोपी ने न केवल खुद को “महामंडलेश्वर” बताकर धार्मिक छवि बनाई, बल्कि उसी छवि का इस्तेमाल लोगों को प्रभावित करने के लिए किया। उसके साथ उसका सहयोगी मनीष मिश्रा भी इस ठगी में शामिल पाया गया।

अंबाला में दर्ज हुई FIR

जांच के आधार पर हरियाणा के अंबाला में पुलिस ने योगी आनंद गिरी महाराज और उसके साथी मनीष मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। पीड़िता अंबाला की रहने वाली है, इसलिए मामला वहीं दर्ज किया गया।

पुलिस ने धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश जैसी धाराओं में केस दर्ज किया है।

आरोपियों की तलाश जारी

एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस अब दोनों आरोपियों की तलाश में जुट गई है। शुरुआती जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि आरोपी ने और भी लोगों को इसी तरह ठगा हो सकता है।

पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा और उनसे पूछताछ के बाद और भी मामलों का खुलासा हो सकता है।

समाज के लिए चेतावनी: ऐसे जाल से कैसे बचें?

यह मामला सिर्फ एक ठगी नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक बड़ी चेतावनी भी है। आज के समय में कई लोग सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का शिकार हो रहे हैं।

ध्यान रखने वाली बातें:

कोई भी सरकारी नौकरी पैसे देकर नहीं मिलती

किसी भी नियुक्ति पत्र को संबंधित विभाग से सत्यापित करें

अनजान लोगों पर आंख बंद करके भरोसा न करें

“ऊपर तक पहुंच” जैसे दावों से सावधान रहें

संदिग्ध मामलों की तुरंत पुलिस में शिकायत करें

गाज़ियाबाद से जुड़ा यह मामला दिखाता है कि ठग किस तरह लोगों की भावनाओं और सपनों का फायदा उठाते हैं। एक मां की अपने बेटे को अधिकारी बनाने की चाह को ही अपराधियों ने हथियार बना लिया।

पुलिस और जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं, लेकिन समाज को भी सतर्क रहना होगा। जागरूकता ही ऐसे अपराधों से बचने का सबसे बड़ा उपाय है।

A major job scam in Ghaziabad has exposed how a fake Mahamandaleshwar deceived a woman by promising a government job for her son and duped her of over ₹10 lakh. The accused provided a fake appointment letter, making the fraud appear genuine. Following an investigation by the Economic Offences Wing (EOW), an FIR has been registered in Ambala. This case highlights the growing issue of government job scams in India, fake recruitment offers, and financial frauds targeting innocent citizens.

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