AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए नकली सॉस बनाने वाले कारोबार का खुलासा किया है। यह मामला सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है, क्योंकि जिस सॉस को लोग टमाटर का समझकर रोजाना खा रहे थे, उसमें टमाटर का नामोनिशान तक नहीं मिला। जांच में पता चला कि सॉस को तैयार करने के लिए सोडियम, नमक, गाजर और कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल किया जा रहा था।
यह कार्रवाई हापुड़ के चंडी रोड इलाके में की गई, जहां खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने एक दुकान और छोटे स्तर की निर्माण इकाई पर छापा मारा। अधिकारियों को पहले से शिकायत मिल रही थी कि यहां लंबे समय से मिलावटी और नकली सॉस तैयार कर बाजार में सप्लाई किया जा रहा है। शिकायतों के आधार पर विभाग ने अचानक निरीक्षण किया और मौके पर जो कुछ मिला, उसने अधिकारियों को भी चौंका दिया।
नकली दूध का काला कारोबार: यूपी, राजस्थान और मध्यप्रदेश में सिंथेटिक दूध फैक्ट्रियों का खुलासा!
टमाटर की जगह गाजर और केमिकल का इस्तेमाल
जांच के दौरान टीम को बड़ी मात्रा में लाल रंग का तैयार सॉस मिला। पहली नजर में यह बिल्कुल बाजार में बिकने वाले ब्रांडेड टोमैटो सॉस जैसा दिखाई दे रहा था, लेकिन जब अधिकारियों ने उसकी सामग्री की जांच की तो असलियत सामने आ गई। बताया गया कि सॉस बनाने में असली टमाटर का इस्तेमाल लगभग नहीं किया जा रहा था।
इसके बजाय सॉस को गाढ़ा और लाल दिखाने के लिए गाजर, नमक, सोडियम और कृत्रिम रंगों का प्रयोग किया जा रहा था। खाद्य अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के कृत्रिम मिश्रण स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं, खासकर बच्चों के लिए, क्योंकि सॉस का इस्तेमाल सबसे ज्यादा फास्ट फूड और स्नैक्स के साथ किया जाता है।
पैकिंग देखकर कोई भी खा जाए धोखा
छापेमारी के दौरान अधिकारियों को पैकिंग सामग्री भी बड़ी मात्रा में मिली। नकली सॉस को ऐसी बोतलों और पैकेटों में भरा जा रहा था कि सामान्य ग्राहक आसानी से इसे असली और ब्रांडेड उत्पाद समझ ले। यही वजह थी कि यह सॉस बाजार में लंबे समय से बिक रहा था और लोगों को इसकी असलियत का अंदाजा तक नहीं था।
टीम को मौके से कच्चा माल, रंग, केमिकल जैसी सामग्री और तैयार सॉस की पेटियां बरामद हुईं। अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए करीब 30 पेटी सॉस को सीज कर दिया।
बच्चों और युवाओं की सेहत पर बड़ा खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मिलावटी खाद्य पदार्थ सबसे ज्यादा बच्चों और युवाओं को प्रभावित करते हैं। आजकल मोमोज, चाउमीन, समोसे, पकोड़े और दूसरे फास्ट फूड के साथ सॉस का इस्तेमाल लगभग हर जगह होता है। सड़क किनारे ठेलों से लेकर छोटे रेस्टोरेंट तक सस्ते दाम में मिलने वाला सॉस बड़ी मात्रा में खरीदा जाता है।
ऐसे में अगर सॉस में टमाटर की जगह केमिकल और कृत्रिम रंग मिले हों, तो यह लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। लगातार ऐसे उत्पाद खाने से पेट संबंधी समस्याएं, एलर्जी और अन्य स्वास्थ्य दिक्कतें हो सकती हैं।
शिकायत के बाद हुई कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा विभाग को लगातार सूचना मिल रही थी कि इलाके में नकली खाद्य उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। विभाग ने पहले गोपनीय तरीके से जानकारी जुटाई और फिर छापा मारने की योजना बनाई। जैसे ही टीम मौके पर पहुंची, वहां सॉस तैयार करने और पैकिंग का पूरा काम चलता मिला।
अधिकारियों ने तुरंत निर्माण प्रक्रिया को रुकवाया और मौके से नमूने एकत्र किए। इन सैंपलों को अब प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सहायक आयुक्त ने क्या कहा
सहायक आयुक्त खाद्य सुनील कुमार ने बताया कि मौके से लिए गए नमूनों की जांच कराई जा रही है। यदि जांच में मिलावट की पुष्टि होती है तो संबंधित कारोबारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि यह नकली सॉस किन-किन बाजारों और दुकानों तक सप्लाई किया जा रहा था।
अधिकारियों के अनुसार, यह भी जांच की जा रही है कि यह कारोबार कब से चल रहा था और इसमें कितने लोग शामिल थे। विभाग सप्लाई चेन की जानकारी जुटाने में लगा हुआ है ताकि आगे और कार्रवाई की जा सके।
खाद्य मिलावट का बढ़ता खतरा
देशभर में खाद्य पदार्थों में मिलावट के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। कभी नकली मसाले, कभी सिंथेटिक दूध, तो कभी मिलावटी मिठाइयों का कारोबार लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहा है। अब हापुड़ में नकली सॉस फैक्ट्री का मामला सामने आने के बाद लोगों की चिंता और बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ग्राहकों को हमेशा भरोसेमंद ब्रांड और लाइसेंस प्राप्त दुकानों से ही खाद्य सामग्री खरीदनी चाहिए। बेहद सस्ते दाम पर मिलने वाले उत्पादों को खरीदते समय सावधानी बरतना जरूरी है।
लोगों के मन में उठे बड़े सवाल
इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर लोग जो खा रहे हैं, वह कितना सुरक्षित है। बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। आम लोग यह जानना चाहते हैं कि उनकी थाली तक पहुंचने वाला खाना आखिर किन परिस्थितियों में तैयार हो रहा है।
हापुड़ की यह कार्रवाई केवल एक दुकान का खुलासा नहीं है, बल्कि उस बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करती है, जो मिलावटी खाद्य पदार्थों को बाजार तक पहुंचा रहा है। अब देखना होगा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद विभाग कितनी बड़ी कार्रवाई करता है और इस नेटवर्क से जुड़े कितने लोगों पर शिकंजा कसता है।
A major food adulteration case has surfaced in Hapur, Uttar Pradesh, where the Food Safety Department raided a fake tomato sauce manufacturing unit operating on Chandi Road. Officials found that the sauce was allegedly prepared using sodium, salt, carrot pulp and artificial colors instead of real tomatoes. Around 30 cartons of adulterated sauce were seized during the raid, while samples were sent for laboratory testing. Authorities are now investigating the distribution network and markets where the fake sauce was being supplied. The incident has raised serious concerns over food safety and the increasing menace of adulterated food products in India.


















