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त्योहारों पर महंगाई की मार! घरेलू उपकरण 7% तक महंगे, मिठाइयों के दाम 15% बढ़े, पिस्ता हुआ लगभग दोगुना, फिर भी बाजारों में रौनक

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AIN NEWS 1: नई दिल्ली। त्योहारों का मौसम आते ही बाजारों में खरीदारी की रौनक बढ़ गई है। दीपावली और अन्य त्योहारों के लिए लोग कपड़े, मिठाइयां, ड्राई फ्रूट, इलेक्ट्रॉनिक सामान और घर की जरूरत की चीजें खरीदने में जुटे हैं। बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ी है, लेकिन इस बार खरीदारी करना पिछले साल के मुकाबले कुछ महंगा पड़ रहा है। घरेलू उपकरणों से लेकर मिठाइयों और सूखे मेवों तक कई उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद बाजार में मांग बनी हुई है और व्यापारी त्योहारी सीजन से अच्छी बिक्री की उम्मीद कर रहे हैं।

इस बार महंगाई का असर केवल रसोई के बजट तक सीमित नहीं है। त्योहारों पर उपहार देने के लिए इस्तेमाल होने वाले ड्राई फ्रूट, मिठाइयां, सजावटी सामान और इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद भी लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि उत्पादन लागत, कच्चे माल, परिवहन और पैकेजिंग का खर्च बढ़ने से उन्हें कीमतों में बदलाव करना पड़ा है।

घरेलू उपकरणों की कीमतों में 7 प्रतिशत तक बढ़ोतरी

त्योहारी सीजन में टीवी, एसी, फ्रिज और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खरीदने की योजना बना रहे लोगों को इस बार ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। Moneycontrol की 2 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, कई कंपनियों ने घरेलू उपकरणों की कीमतों में लगभग 3 से 7 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की है।

Haier, LG और Blue Star जैसी कंपनियों के उत्पादों पर बढ़ती लागत का असर दिखाई दे रहा है। इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट, कच्चे माल और उत्पादन से जुड़ी लागत बढ़ने के कारण कंपनियों को कीमतों में बदलाव करना पड़ा है। इसके अलावा Havells India ने भी दिसंबर तिमाही में कुछ उत्पादों की कीमतों में 5 से 7 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की योजना जताई है।

हालांकि, ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कंपनियां त्योहारी ऑफर, कैशबैक, एक्सचेंज बोनस और आसान किस्तों की सुविधा भी दे रही हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबारियों का कहना है कि ग्राहक अब सामान खरीदने से पहले उसकी कीमत, फीचर्स और उपयोगिता की अच्छी तरह तुलना कर रहे हैं।

मिठाइयों के दाम में 10 से 15 प्रतिशत तक इजाफा

त्योहारों पर मिठाइयों की खरीदारी का विशेष महत्व होता है। घरों में मेहमानों के स्वागत से लेकर रिश्तेदारों और परिचितों को उपहार देने तक मिठाइयों की मांग बनी रहती है। लेकिन इस बार मिठाई खरीदने के लिए लोगों को पिछले साल के मुकाबले अधिक खर्च करना पड़ रहा है।

Business Standard की 17 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, देश के अलग-अलग हिस्सों में पारंपरिक मिठाइयों की कीमतों में औसतन 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है।

मिठाई बनाने में इस्तेमाल होने वाला दूध, खोया, चीनी, काजू, बादाम और अन्य मेवे महंगे होने से दुकानदारों की लागत बढ़ गई है। इसके अलावा मिठाइयों की पैकेजिंग, चांदी के वर्क और परिवहन पर होने वाला खर्च भी बढ़ा है।

कुछ मिठाई कारोबारियों ने बताया कि कीमतों में बढ़ोतरी के बाद ग्राहक पहले के मुकाबले कम मात्रा में मिठाइयां खरीद रहे हैं। वहीं, कुछ दुकानदार अपने मुनाफे में कटौती करके ग्राहकों को राहत देने की कोशिश कर रहे हैं।

ड्राई फ्रूट की कीमतों ने बढ़ाई चिंता, पिस्ता लगभग दोगुना महंगा

त्योहारों में ड्राई फ्रूट की मांग काफी बढ़ जाती है। लोग इन्हें घरों में इस्तेमाल करने के साथ-साथ गिफ्ट पैक और मिठाइयों में भी शामिल करते हैं। इस बार बादाम और पिस्ता की कीमतों में आई बढ़ोतरी ने खरीदारों का बजट प्रभावित किया है।

Moneycontrol की रिपोर्ट में नट्स एंड ड्राई फ्रूट्स काउंसिल (इंडिया) की अध्यक्ष गुंजन जैन के हवाले से बताया गया है कि पिछले साल के मुकाबले बादाम की कीमतों में लगभग 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि पिस्ता लगभग दोगुना महंगा हो गया है।

रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार:

– बादाम की कीमत पिछले साल लगभग 800 से 900 रुपये प्रति किलो थी, जो अब 1,000 से 1,200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।

– पिस्ता पिछले साल लगभग 900 रुपये प्रति किलो मिल रहा था, जबकि अब इसकी कीमत 1,500 से 2,100 रुपये प्रति किलो तक बताई गई है।

ड्राई फ्रूट की कीमतें बढ़ने के पीछे प्रमुख कारण उत्पादक देशों में फसल का प्रभावित होना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर माल ढुलाई का महंगा होना बताया गया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर भी परिवहन लागत पर पड़ रहा है।

इसका सीधा असर त्योहारों पर बनने वाले गिफ्ट पैक पर दिखाई दे रहा है। कई कारोबारी महंगे ड्राई फ्रूट के विकल्प के रूप में बीजों के मिश्रण और दूसरे किफायती उत्पादों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

रसोई का बजट भी प्रभावित, खाद्य पदार्थों के भाव बढ़े

त्योहारों के अलावा रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी वस्तुओं की कीमतें भी परिवारों के बजट पर असर डाल रही हैं। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के मूल्य निगरानी पोर्टल पर 2 नवंबर 2026 को दर्ज अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमतों के अनुसार चना दाल 94.08 रुपये प्रति किलो, चावल 48.64 रुपये प्रति किलो और चीनी 59.33 रुपये प्रति किलो रही।

इसी अवधि में पैक्ड सरसों तेल की औसत कीमत 209.08 रुपये प्रति किलो और प्याज की कीमत 53.63 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई।

ये देशभर के औसत खुदरा भाव हैं। स्थानीय बाजार, उत्पाद की गुणवत्ता और शहर के हिसाब से वास्तविक कीमतों में अंतर हो सकता है।

खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर मौसम, फसल उत्पादन, मंडियों में आवक, परिवहन और अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर पड़ता है। प्याज जैसी सब्जियों में मौसमी आपूर्ति के कारण कीमतों में तेजी से बदलाव देखने को मिल सकता है।

पटाखों की खरीदारी भी पड़ सकती है महंगी

त्योहारों के दौरान पटाखों की मांग बढ़ने के साथ उनकी कीमतों को लेकर भी चर्चा है। कारोबार से जुड़ी जानकारी के मुताबिक कच्चे माल और परिवहन खर्च में बढ़ोतरी से कुछ बाजारों में पटाखों की कीमतें प्रभावित हुई हैं।

हालांकि, खुदरा बाजार में 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का आंकड़ा सभी शहरों और सभी प्रकार के पटाखों पर लागू नहीं माना जा सकता। अलग-अलग ब्रांड, उत्पाद और स्थानीय बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर हो सकता है।

इसके अलावा पटाखों की खरीदारी करते समय ग्राहकों को स्थानीय प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े नियमों का भी ध्यान रखना चाहिए।

महंगाई के बावजूद कपड़ों की खरीदारी को लेकर कारोबारियों में उत्साह

त्योहारी खरीदारी में कपड़ों का बाजार भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस बार परिधान कारोबार से जुड़े व्यापारियों को अच्छी बिक्री की उम्मीद है।

क्लोदिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CMAI) के सर्वे के अनुसार, 52 प्रतिशत कारोबारियों को इस साल पिछले साल के मुकाबले त्योहारी बिक्री बेहतर रहने की उम्मीद है। वहीं, 30 प्रतिशत कारोबारियों का मानना है कि बिक्री पिछले साल के स्तर के आसपास रह सकती है।

सर्वे में भारतीय पारंपरिक कपड़ों जैसे कुर्ता, सलवार सूट और चूड़ीदार को अच्छी मांग वाली श्रेणियों में शामिल किया गया है। इसके अलावा टी-शर्ट और डेनिम जैसे पश्चिमी परिधानों की भी मांग रहने की संभावना जताई गई है।

हालांकि, कपड़ा कारोबारियों के सामने भी कच्चे माल की बढ़ती लागत चुनौती बनी हुई है। कुछ कारोबारी कीमतें बढ़ाने के बजाय अपने मुनाफे में कटौती करके ग्राहकों को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं।

महंगाई के बीच भी बाजारों में क्यों बनी हुई है रौनक?

महंगाई के बावजूद त्योहारों पर खरीदारी की परंपरा और जरूरतें बाजार को सक्रिय बनाए हुए हैं। लोग त्योहारों के लिए कपड़े, मिठाइयां, घरेलू सामान और उपहार खरीदना जरूरी मानते हैं। यही वजह है कि कीमतें बढ़ने के बावजूद बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही बनी हुई है।

हालांकि, इस बार खरीदारी के तरीके में बदलाव दिखाई दे रहा है। ग्राहक पहले की तुलना में ज्यादा सोच-समझकर खर्च कर रहे हैं। कई लोग महंगे उत्पादों के बजाय किफायती विकल्प चुन रहे हैं। कुछ परिवार खरीदारी की मात्रा कम कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग छूट और ऑफर का इंतजार कर रहे हैं।

ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों बाजारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से ग्राहकों को अलग-अलग कीमतों की तुलना करने का मौका मिल रहा है। आसान किस्तों और त्योहारी छूट के कारण इलेक्ट्रॉनिक सामान की खरीदारी में भी रुचि बनी हुई है।

आम परिवारों के बजट पर बढ़ा दबाव

इस त्योहारी सीजन की सबसे बड़ी तस्वीर यह है कि बाजार में खरीदारी तो जारी है, लेकिन ग्राहकों को हर खरीदारी से पहले अपना बजट देखना पड़ रहा है। मिठाई, ड्राई फ्रूट, कपड़े और घरेलू उपकरणों की कीमतें बढ़ने से त्योहारों का कुल खर्च बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ग्राहकों को खरीदारी से पहले अलग-अलग दुकानों में कीमतों की तुलना करनी चाहिए। जरूरत के हिसाब से सामान खरीदना और केवल छूट देखकर खरीदारी करने से बचना बेहतर रहेगा।

कुल मिलाकर इस बार त्योहारों का बाजार महंगाई और मांग के दोहरे प्रभाव से गुजर रहा है। एक तरफ कारोबारियों को अच्छी बिक्री की उम्मीद है, तो दूसरी तरफ ग्राहकों को बढ़ती कीमतों के बीच अपने खर्च का संतुलन बनाना पड़ रहा है। बाजारों में रौनक जरूर है, लेकिन इस बार त्योहारों की खरीदारी का बिल पहले से ज्यादा भारी पड़ सकता है।

Festive shopping in India has become more expensive in 2026, with home appliance prices increasing by 3% to 7%, traditional sweets becoming up to 15% costlier, and pistachio prices nearly doubling compared to last year. Rising raw material costs, poor harvests, higher transportation expenses and supply chain disruptions are affecting dry fruits, almonds, sweets, electronics and other consumer products. Despite rising prices and food inflation, Indian festive markets continue to witness strong consumer demand, with shoppers looking for affordable deals, discounts and better value for money during the Diwali shopping season.

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Pawan Chaudhary
Pawan Chaudhary
पवन चौधरी एक सक्रिय पत्रकार एवं समाचार लेखक हैं, जो जनहित से जुड़े मुद्दों, स्थानीय घटनाक्रम और सामाजिक सरोकारों को प्रमुखता से अपनी पत्रकारिता में स्थान देते हैं। वे जमीनी स्तर की खबरों को तथ्यपरक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के माध्यम से पवन चौधरी आम लोगों की समस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों, सामाजिक मुद्दों और क्षेत्रीय घटनाओं को सामने लाने का प्रयास करते हैं। उनका उद्देश्य निष्पक्ष एवं जिम्मेदार पत्रकारिता के जरिए समाज में जागरूकता बढ़ाना और महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों की आवाज बनाना है।

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