AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के सरकारी विभागों में आउटसोर्सिंग के माध्यम से काम करने वाले लाखों कर्मचारियों के लिए दिवाली से पहले बड़ी राहत की खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार ने 2.72 लाख से अधिक आउटसोर्स कर्मचारियों के मासिक पारिश्रमिक की नई दरें निर्धारित करते हुए शासनादेश जारी कर दिया है। इस फैसले से प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में सेवाएं दे रहे आउटसोर्स कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
सरकार की ओर से जारी नए आदेश की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बढ़े हुए पारिश्रमिक का लाभ 2 सितंबर 2026 से प्रभावी माना जाएगा। इसका मतलब है कि कर्मचारियों को सितंबर महीने से ही नई दरों के हिसाब से भुगतान का लाभ मिलेगा। नवंबर में अक्टूबर महीने के पारिश्रमिक के साथ सितंबर का बकाया यानी एरियर भी दिए जाने की व्यवस्था की गई है।
इस फैसले से लंबे समय से अपने पारिश्रमिक में बढ़ोतरी का इंतजार कर रहे कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। खासकर उन कर्मचारियों के लिए यह निर्णय महत्वपूर्ण है, जो विभिन्न सरकारी कार्यालयों और विभागों में नियमित रूप से सेवाएं देने के बावजूद सीमित पारिश्रमिक पर काम कर रहे हैं।
2 नवंबर को जारी हुआ शासनादेश
सचिवालय प्रशासन विभाग की ओर से 2 नवंबर 2026 को आउटसोर्स कर्मचारियों के पारिश्रमिक की नई दरों से संबंधित शासनादेश जारी किया गया। प्रमुख सचिव सचिवालय प्रशासन मनीष चौहान की ओर से जारी आदेश में कर्मचारियों को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर उनका मासिक पारिश्रमिक निर्धारित किया गया है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य आउटसोर्स कर्मचारियों के पारिश्रमिक में एकरूपता लाना और उनके भुगतान को निर्धारित मानकों के अनुरूप करना है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन कर्मचारियों को पहले से नई निर्धारित दरों से अधिक पारिश्रमिक मिल रहा है, उनके भुगतान में कमी नहीं की जाएगी।
यानी नई दरों के लागू होने का मतलब यह नहीं है कि पहले से अधिक पारिश्रमिक पाने वाले कर्मचारियों का पैसा घटा दिया जाएगा।
किस श्रेणी के कर्मचारी को कितना मिलेगा पारिश्रमिक?
नई व्यवस्था के अंतर्गत आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए चार श्रेणियां निर्धारित की गई हैं। प्रत्येक श्रेणी के लिए अलग-अलग मासिक पारिश्रमिक तय किया गया है।
श्रेणी-1: इस श्रेणी के कर्मचारियों का मासिक पारिश्रमिक 39,000 रुपये निर्धारित किया गया है। इस श्रेणी के लिए सर्विस चार्ज और UPCOS सेंटेज का भुगतान संबंधित विभाग की ओर से किया जाएगा। EPF और ESI से संबंधित व्यवस्था लागू नियमों और विभागीय आदेश के अनुसार होगी।
श्रेणी-2: इस श्रेणी के कर्मचारियों का कुल मासिक पारिश्रमिक 21,947 रुपये निर्धारित किया गया है। इसमें कर्मचारी के हिस्से का EPF और ESI अंशदान काटा जाएगा। इसके अलावा नियोक्ता की ओर से निर्धारित अंशदान भी संबंधित खाते में जमा किया जाएगा।
श्रेणी-3: इस श्रेणी के कर्मचारियों का मासिक पारिश्रमिक 19,446 रुपये तय किया गया है। इसमें भी EPF और ESI की निर्धारित कटौती लागू होगी। कर्मचारी और नियोक्ता दोनों के अंशदान की व्यवस्था की गई है।
श्रेणी-4: इस श्रेणी के कर्मचारियों का कुल मासिक पारिश्रमिक 17,646 रुपये निर्धारित किया गया है। इसमें से नियमानुसार EPF और ESI की कटौती की जाएगी। इसके बाद शेष राशि कर्मचारी को भुगतान की जाएगी।
नई दरों का पूरा विवरण इस प्रकार है:
कर्मचारी श्रेणी| कुल मासिक पारिश्रमिक
श्रेणी-1| ₹39,000
श्रेणी-2| ₹21,947
श्रेणी-3| ₹19,446
श्रेणी-4| ₹17,646
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि तालिका में दी गई राशि कुल निर्धारित पारिश्रमिक है। कर्मचारी के बैंक खाते में आने वाली वास्तविक रकम EPF और ESI की लागू कटौतियों के बाद अलग हो सकती है।
सितंबर से लागू होंगी नई दरें, मिलेगा एरियर
इस पूरे फैसले में कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ी राहत इसकी पिछली तारीख से प्रभावशीलता है। सरकार ने नई दरों को 2 सितंबर 2026 से लागू करने का निर्णय लिया है।
इसका सीधा मतलब है कि सितंबर महीने में नई दरें लागू होने के बाद की अवधि का बकाया भी कर्मचारियों को दिया जाएगा। नवंबर में मिलने वाले अक्टूबर महीने के भुगतान के साथ सितंबर का एरियर दिए जाने की जानकारी शासनादेश से जुड़ी रिपोर्टों में सामने आई है।
उदाहरण के तौर पर यदि किसी कर्मचारी को पहले निर्धारित दर से कम पारिश्रमिक मिल रहा था और नई व्यवस्था के तहत उसकी श्रेणी का पारिश्रमिक बढ़ गया है, तो उसे पात्र अवधि के अंतर की राशि एरियर के रूप में मिलनी चाहिए।
हालांकि, वास्तविक एरियर की गणना कर्मचारी की श्रेणी, कार्यभार ग्रहण करने की तारीख, पहले किए गए भुगतान और लागू कटौतियों के आधार पर संबंधित विभाग करेगा।
EPF और ESI से कर्मचारियों को मिलेगा सामाजिक सुरक्षा का लाभ
सरकार की नई व्यवस्था में केवल पारिश्रमिक बढ़ाने पर ही ध्यान नहीं दिया गया है, बल्कि कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा को भी महत्व दिया गया है।
EPF यानी कर्मचारी भविष्य निधि के तहत कर्मचारी के हिस्से से सामान्यतः 12 प्रतिशत अंशदान काटा जाता है। इतनी ही दर से नियोक्ता का निर्धारित अंशदान भी जमा किया जाता है।
वहीं ESI यानी कर्मचारी राज्य बीमा के अंतर्गत कर्मचारी का अंशदान 0.75 प्रतिशत और नियोक्ता का अंशदान 3.25 प्रतिशत निर्धारित है।
इस व्यवस्था से पात्र कर्मचारियों को भविष्य निधि और कर्मचारी बीमा से जुड़े लाभ मिल सकते हैं। EPF में जमा राशि भविष्य में कर्मचारी की बचत के रूप में काम आती है। वहीं ESI के माध्यम से पात्र कर्मचारियों को निर्धारित नियमों के अनुसार चिकित्सा सुविधाएं और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ मिलते हैं।
यह समझना भी जरूरी है कि EPF और ESI की कटौती कर्मचारी के कुल पारिश्रमिक और लागू नियमों के अनुसार होगी। इसलिए सभी कर्मचारियों के बैंक खाते में आने वाली रकम एक जैसी नहीं होगी।
GST और सर्विस चार्ज का भुगतान करेंगे सरकारी विभाग
शासनादेश से जुड़ी जानकारी के अनुसार, आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाओं पर लागू 18 प्रतिशत GST का भार संबंधित सरकारी विभागों द्वारा वहन किया जाएगा।
इसके अलावा सर्विस चार्ज और उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (UPCOS) का सेंटेज चार्ज भी विभागों की ओर से दिया जाएगा।
सर्विस चार्ज अधिकतम 7 प्रतिशत तक निर्धारित किए जाने की जानकारी सामने आई है, जबकि UPCOS का सेंटेज चार्ज 1 प्रतिशत बताया गया है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एजेंसी के सर्विस चार्ज और अन्य प्रशासनिक खर्चों के कारण कर्मचारियों के निर्धारित पारिश्रमिक पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
सरकार की ओर से नियोक्ता के हिस्से का EPF और ESI अंशदान भी संबंधित नियमों के अनुसार जमा किया जाएगा।
पहले से अधिक पारिश्रमिक पाने वाले कर्मचारियों को भी राहत
नई व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण प्रावधान उन कर्मचारियों के लिए है, जिन्हें पहले से निर्धारित नई दरों से अधिक पारिश्रमिक मिल रहा है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसे कर्मचारियों के मौजूदा पारिश्रमिक में कटौती नहीं की जाएगी। उन्हें पहले से मिल रही अधिक राशि का लाभ मिलता रहेगा।
इससे कर्मचारियों को यह आशंका नहीं रहेगी कि नई श्रेणीवार दरें लागू होने के बाद उनका मौजूदा भुगतान कम कर दिया जाएगा।
दूसरी ओर, जिन विभागों में कर्मचारियों को नई निर्धारित दरों से कम भुगतान किया जा रहा था, वहां अतिरिक्त खर्च के लिए बजट की व्यवस्था करने की बात भी सामने आई है।
क्या सभी आउटसोर्स कर्मचारियों को मिलेगा लाभ?
इस फैसले का लाभ उत्तर प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत कार्यरत पात्र कर्मचारियों को मिलने की उम्मीद है। सरकार के इस निर्णय से लगभग 2.72 लाख से अधिक कर्मचारी प्रभावित होंगे।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि किसी भी कर्मचारी को लाभ मिलने के लिए उसकी नियुक्ति, संबंधित विभाग, आउटसोर्सिंग एजेंसी, निर्धारित श्रेणी और UPCOS के अंतर्गत लागू पात्रता की जांच आवश्यक होगी।
इसलिए कर्मचारियों को अपने विभाग के कार्यालय, संबंधित एजेंसी और वेतन संबंधी दस्तावेजों से अपनी श्रेणी तथा नई दर की जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।
यदि किसी कर्मचारी को नई दर के अनुसार भुगतान नहीं मिलता है, तो वह अपने विभाग के संबंधित अधिकारी से लिखित रूप में जानकारी मांग सकता है। एरियर की गणना और भुगतान की स्थिति भी विभाग से स्पष्ट कराई जा सकती है।
लाखों कर्मचारियों के लिए राहत का फैसला
उत्तर प्रदेश सरकार का यह निर्णय आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकारी विभागों में लंबे समय से सेवाएं देने वाले इन कर्मचारियों के पारिश्रमिक को निर्धारित श्रेणियों के अनुसार बढ़ाने से उन्हें आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
सितंबर से नई दरें लागू करने और बकाया भुगतान की व्यवस्था करने से इस फैसले का महत्व और बढ़ गया है। साथ ही EPF, ESI, GST और सर्विस चार्ज को लेकर बनाई गई व्यवस्था से कर्मचारियों के पारिश्रमिक और सामाजिक सुरक्षा को बेहतर बनाने की कोशिश की गई है।
अब कर्मचारियों की निगाहें संबंधित विभागों की भुगतान प्रक्रिया पर टिकी हैं। आने वाले भुगतान में नई दरों और एरियर का लाभ वास्तव में कब और किस तरह मिलता है, यह विभागीय कार्यवाही से स्पष्ट होगा।
कुल मिलाकर, योगी सरकार का यह फैसला उत्तर प्रदेश के 2.72 लाख से अधिक पात्र आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए दिवाली से पहले बड़ी राहत लेकर आया है।
AIN NEWS 1 | लखनऊ | उत्तर प्रदेश
Uttar Pradesh outsourced employees salary hike 2026 brings financial relief to more than 2.72 lakh outsourced workers across various government departments. The Yogi Adityanath government has announced revised monthly remuneration rates effective from September 2, 2026. The UP outsourced employees new salary structure includes four categories with revised pay rates, EPF and ESI benefits, employer contributions, GST provisions and September salary arrears. Eligible outsourced employees can check their new remuneration category, monthly payment details and arrears under the latest Uttar Pradesh government order.



















