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गाजियाबाद कोर्ट में तीन लाख से अधिक मुकदमे लंबित, न्यायिक व्यवस्था पर बढ़ता बोझ?

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Ghaziabad Court: Over 3.27 Lakh Pending Cases, Shocking Judicial Backlog

गाजियाबाद कोर्ट में तीन लाख से अधिक मुकदमे लंबित, न्यायिक व्यवस्था पर बढ़ता बोझ

AIN NEWS 1: गाजियाबाद की अदालतों में मुकदमों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। मौजूदा समय में 3,27,842 से अधिक मुकदमे लंबित हैं, जिनमें से 3 लाख से अधिक आपराधिक मामले हैं और 24,000 सिविल प्रकृति के हैं। इस भारी पेंडेंसी को कम करने के लिए 30 साल से अधिक पुराने मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

कोर्ट पर बढ़ता मुकदमों का दबाव

गाजियाबाद जिला न्यायालय में हर साल हजारों नए मुकदमे दाखिल हो रहे हैं। बीते साल ही 60,000 से अधिक नए केस दर्ज किए गए थे।

50,107 मुकदमे 15 साल से अधिक पुराने हैं।

17,386 मुकदमे महिलाओं द्वारा दर्ज किए गए हैं।

7,149 केस बुजुर्गों द्वारा दायर किए गए हैं।

इससे साफ है कि गाजियाबाद कोर्ट में लंबित मुकदमों की संख्या बढ़ती जा रही है, जिससे न्यायिक व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ रहा है।

न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने के प्रयास

न्यायालयों पर मुकदमों का बोझ कम करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं:

1. पुराने मामलों का निपटारा: 30 साल से अधिक पुराने मामलों को तेजी से सुलझाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

2. नए न्यायाधीशों की नियुक्ति: हाल ही में चार न्यायाधीशों का तबादला किया गया और सात नए न्यायाधीशों की तैनाती की गई है। इससे मामलों के निस्तारण में तेजी आएगी।

3. स्थाई वारंट जारी: जिन मामलों में पुलिस वर्षों से आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर पा रही, उनमें कोर्ट स्थाई वारंट जारी कर रही है।

4. राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन: छोटी-मोटी शिकायतों और विवादों के समाधान के लिए लोक अदालतें आयोजित की जा रही हैं, जिससे छोटे मुकदमों का निपटारा तेजी से हो रहा है।

मुकदमों के निपटारे में बाधाएं

गाजियाबाद कोर्ट में मुकदमों के निपटारे की गति को धीमा करने वाले कई कारण हैं:

वकीलों की हड़ताल: पिछले साल 29 अक्टूबर से 12 दिसंबर तक वकीलों की हड़ताल के कारण न्यायिक प्रक्रिया बाधित रही। इससे मुकदमों का निपटारा धीमा हो गया।

अपर्याप्त न्यायाधीश: मामलों की संख्या के अनुपात में न्यायाधीशों की कमी बनी हुई है।

पुलिस की ढील: कई मामलों में पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार करने में असमर्थ रही है, जिससे मामलों का निपटारा टलता जा रहा है।

न्यायिक सुधारों की आवश्यकता

बार एसोसिएशन का कहना है कि न्यायालयों में लंबित मुकदमों को जल्द से जल्द सुलझाने के लिए उच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं।

सभी लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा करने के लिए अतिरिक्त अदालतें स्थापित करने की जरूरत है।

हाईकोर्ट बेंच की मांग: गाजियाबाद कोर्ट में मुकदमों का बढ़ता बोझ देखते हुए वकील लंबे समय से हाईकोर्ट की स्थायी बेंच की मांग कर रहे हैं।

कोर्ट का समय बढ़ाना: एक कैलेंडर वर्ष में 265 दिन कोर्ट खुलने चाहिए, इस मानक का कड़ाई से पालन किया जा रहा है।

गाजियाबाद कोर्ट में 3.27 लाख से अधिक मुकदमों की लंबित सूची को देखते हुए, न्यायिक सुधारों की सख्त आवश्यकता है। हालांकि, लोक अदालतों, नए न्यायाधीशों की नियुक्ति और पुराने मामलों के तेजी से निपटारे से स्थिति में सुधार हो रहा है, लेकिन यह अभी भी पर्याप्त नहीं है। न्याय व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने और प्रशासनिक सुधारों को लागू करने की जरूरत है।

Ghaziabad Court is struggling with a huge judicial backlog, as over 3.27 lakh cases remain pending, including more than 3 lakh criminal cases. In the past year alone, over 60,000 new cases were filed, adding to the burden. To tackle this issue, the court is expediting cases older than 30 years. Efforts such as increasing the number of judges and organizing National Lok Adalats have helped reduce the pending cases. However, the Ghaziabad district court still faces a heavy workload, highlighting the urgent need for judicial reforms.

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