spot_imgspot_img

गाजियाबाद फैमिली कोर्ट का बड़ा फैसला: मानसिक क्रूरता साबित होने पर पति को मिला तलाक, 2012 की शादी 2026 में कानूनी रूप से खत्म!

spot_img

Date:

गाजियाबाद फैमिली कोर्ट का अहम फैसला, मानसिक प्रताड़ना को माना तलाक का आधार

AIN NEWS 1: गाजियाबाद की अतिरिक्त परिवार न्यायालय (फैमिली कोर्ट) ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में पति के पक्ष में फैसला सुनाते हुए विवाह विच्छेद (तलाक) की याचिका स्वीकार कर ली है। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान और दोनों पक्षों की दलीलों का विस्तृत परीक्षण करने के बाद यह माना कि पत्नी का व्यवहार पति के प्रति मानसिक क्रूरता (Mental Cruelty) की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर न्यायालय ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा-13 के अंतर्गत पति को तलाक की डिक्री प्रदान कर दी।

यह फैसला उन मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनमें लंबे समय तक पति-पत्नी अलग रह रहे हों और वैवाहिक संबंध पूरी तरह समाप्त हो चुके हों।

2012 में हुई थी शादी, शुरुआती जीवन रहा सामान्य

अदालत में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, पति और पत्नी का विवाह वर्ष 2012 में दिल्ली में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुआ था। विवाह के शुरुआती कुछ वर्षों तक दोनों का वैवाहिक जीवन सामान्य बताया गया।

हालांकि, समय बीतने के साथ पति का आरोप है कि पत्नी के व्यवहार में लगातार बदलाव आने लगा। पति के अनुसार, पत्नी अक्सर उसके साथ अमर्यादित व्यवहार करती थी, विवाद करती थी और ऐसे हालात पैदा करती थी, जिससे पारिवारिक जीवन तनावपूर्ण होता चला गया।

पति ने अदालत को बताया कि लगातार मानसिक दबाव और तनाव के कारण वैवाहिक संबंध सामान्य रूप से निभाना उसके लिए कठिन हो गया था।

पति ने लगाए मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप

याचिका में पति ने कहा कि उसे लंबे समय तक मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। उसका कहना था कि पत्नी का व्यवहार केवल सामान्य वैवाहिक मतभेद तक सीमित नहीं था, बल्कि वह लगातार ऐसे आचरण का सामना कर रहा था, जिससे उसका मानसिक संतुलन और पारिवारिक जीवन दोनों प्रभावित हुए।

पति का यह भी दावा था कि पत्नी के व्यवहार के कारण उनके बीच विश्वास और आपसी सम्मान पूरी तरह समाप्त हो गया था। उसने कई बार रिश्ते को बचाने और सामान्य बनाने की कोशिश की, लेकिन परिस्थितियों में कोई सुधार नहीं आया।

मुख्यमंत्री योगी आज गाजियाबाद को देंगे 868 करोड़ रुपये की सौगात, 90 विकास परियोजनाओं का करेंगे लोकार्पण और शिलान्यास

रिश्ता बचाने के प्रयास रहे असफल

अदालत में यह भी बताया गया कि दोनों परिवारों और परिचितों के माध्यम से कई बार समझौते के प्रयास किए गए। पति का कहना था कि उसने वैवाहिक जीवन को सामान्य बनाने के लिए पर्याप्त प्रयास किए, लेकिन हर प्रयास विफल रहा।

आखिरकार दोनों के बीच मतभेद इतने अधिक बढ़ गए कि वर्ष 2018 से पति-पत्नी अलग-अलग रहने लगे। लंबे समय तक अलग रहने के बाद पति ने अदालत की शरण लेते हुए हिंदू विवाह अधिनियम की धारा-13 के तहत मानसिक क्रूरता के आधार पर तलाक की याचिका दायर की।

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुना

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पति और पत्नी दोनों पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुना। न्यायालय के समक्ष दस्तावेजी साक्ष्य, गवाहों के बयान तथा अन्य रिकॉर्ड प्रस्तुत किए गए।

सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को अपना-अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया। अदालत ने केवल आरोपों के आधार पर निर्णय नहीं दिया, बल्कि उपलब्ध साक्ष्यों की गहन जांच के बाद निष्कर्ष निकाला।

साक्ष्यों से आरोपों की हुई पुष्टि

अदालत ने अपने निर्णय में माना कि पति द्वारा लगाए गए आरोप केवल मौखिक दावे नहीं थे, बल्कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्य उनसे मेल खाते हैं।

न्यायालय ने पाया कि प्रस्तुत दस्तावेजों और गवाहों के बयानों से यह स्पष्ट होता है कि पति लंबे समय तक मानसिक तनाव और प्रताड़ना का सामना कर रहा था। इसलिए अदालत ने इसे हिंदू विवाह अधिनियम के तहत “क्रूरता” की श्रेणी में माना।

इसी आधार पर पति की तलाक याचिका स्वीकार कर ली गई और विवाह को कानूनी रूप से समाप्त करने का आदेश दिया गया।

वरिष्ठ अधिवक्ता ने क्या कहा?

पति की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता उमेश भारद्वाज ने बताया कि मामले में न्यायालय के समक्ष सभी आवश्यक दस्तावेज, गवाहों के बयान तथा सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों के महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला दिया गया।

उन्होंने कहा कि अदालत ने सभी तथ्यों और कानूनी पहलुओं का गंभीरता से परीक्षण किया। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह स्थापित हुआ कि पति के साथ मानसिक क्रूरता हुई थी और इसी कारण न्यायालय ने तलाक की डिक्री पारित की।

मानसिक क्रूरता क्या होती है?

भारतीय वैवाहिक कानून में केवल शारीरिक हिंसा ही नहीं, बल्कि मानसिक प्रताड़ना भी तलाक का आधार हो सकती है।

यदि किसी पति या पत्नी के लगातार व्यवहार से दूसरे पक्ष का मानसिक जीवन असहनीय हो जाए, लगातार अपमान, तनाव, अविश्वास, झूठे आरोप, सार्वजनिक रूप से अपमानित करना या ऐसा आचरण हो जिससे वैवाहिक जीवन सामान्य रूप से चलाना संभव न रहे, तो अदालत परिस्थितियों और साक्ष्यों के आधार पर इसे मानसिक क्रूरता मान सकती है।

हालांकि, हर वैवाहिक विवाद मानसिक क्रूरता नहीं माना जाता। प्रत्येक मामले का निर्णय उसके तथ्यों और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर किया जाता है।

कानूनी दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय इस बात को दोहराता है कि परिवार न्यायालय केवल आरोपों के आधार पर तलाक नहीं देता, बल्कि साक्ष्यों और परिस्थितियों का विस्तृत मूल्यांकन करता है।

यदि किसी पक्ष द्वारा मानसिक प्रताड़ना के पर्याप्त प्रमाण प्रस्तुत किए जाते हैं और अदालत को यह संतोष हो जाता है कि वैवाहिक संबंध पूरी तरह टूट चुके हैं, तो हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक की अनुमति दी जा सकती है।

यह फैसला उन दंपतियों के मामलों में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां लंबे समय से अलगाव की स्थिति बनी हुई हो और साथ रहना व्यावहारिक रूप से संभव न हो।

फैमिली कोर्ट के फैसले का व्यापक संदेश

विशेषज्ञों का कहना है कि वैवाहिक विवादों में अदालत का उद्देश्य केवल विवाह समाप्त करना नहीं होता, बल्कि पहले संबंधों को बचाने की संभावना भी देखी जाती है। जब यह स्पष्ट हो जाता है कि रिश्ते में सुधार की कोई वास्तविक संभावना नहीं बची है और पर्याप्त कानूनी आधार मौजूद हैं, तभी न्यायालय विवाह विच्छेद का आदेश देता है।

गाजियाबाद फैमिली कोर्ट का यह फैसला भी इसी सिद्धांत पर आधारित माना जा रहा है। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों, दस्तावेजों और न्यायिक मिसालों का परीक्षण करने के बाद पति के पक्ष में निर्णय सुनाया और मानसिक क्रूरता को तलाक का पर्याप्त आधार माना।

नोट: यह निर्णय इस विशेष मामले के तथ्यों और प्रस्तुत साक्ष्यों पर आधारित है। प्रत्येक वैवाहिक विवाद की परिस्थितियां अलग होती हैं और अदालत प्रत्येक मामले का निर्णय उसके अपने तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर करती है।

The Ghaziabad Family Court has granted divorce to a husband after concluding that mental cruelty was established under Section 13 of the Hindu Marriage Act. The judgment was based on documentary evidence, witness testimonies, and relevant judicial precedents. This important divorce case in India highlights how mental harassment in marriage can be recognized as a valid legal ground for divorce when supported by sufficient evidence. The ruling is significant for understanding Indian divorce law, family court judgments, and matrimonial dispute resolution.

spot_img
spot_imgspot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_imgspot_img

Share post:

New Delhi
broken clouds
31 ° C
31.1 °
31 °
62%
2.6m/s
56%
Fri
32 °
Sat
35 °
Sun
39 °
Mon
40 °
Tue
40 °
Video thumbnail
सोनम यादव की AI वीडियो वायरल करने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी, पुलिस से सख्त एक्शन की मांग
01:59
Video thumbnail
लखनऊ: चंद्रशेखर आजाद का दावा, फार्म हाउस पर रची गई हत्या की साजिश; सरकार से जांच की मांग
02:43
Video thumbnail
क्या आरती करते समय Salman Khan से गलती हुई ?
00:31
Video thumbnail
कनॉट प्लेस में मिंटो ब्रिज के पास चलती सड़क पर गिरा रेड लाइट का खंभा
00:19
Video thumbnail
अरविंद केजरीवाल का अमित शाह पर निशाना, बोले- लॉरेंस बिश्नोई को दामाद की तरह क्यों रखा जा रहा?
00:21
Video thumbnail
Akhilesh Yadav : "जब तक ये मुख्यमंत्री रहेंगे, जब तक ये सरकार रहेगी कानून से काम नहीं होगा"
02:10
Video thumbnail
अभिनेता गुलशन पांडे और निशिकांत दीक्षित तक पहुंचा ‘पीड़ित को न्याय’ का नया अंक | AIN NEWS 1
02:16
Video thumbnail
इशारों-इशारों में फायरब्रांड Yogi ने Abhijeet Dipke को दिया मुंहतोड़ जवाब !
02:36
Video thumbnail
Meerut Kesarganj Masjid Controversy : मेरठ केसरगंज मस्जिद विवाद पर योगी से क्या बोले टी राजा सिंह ?
04:26
Video thumbnail
Hanuman Ansh Actor Gulshan Pandey in Ghaziabad | ‘हनुमान अंश’ अभिनेता गुलशन पांडे का भव्य स्वागत
04:47

Subscribe

spot_img
spot_imgspot_img

Popular

spot_img

More like this
Related