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गाजियाबाद में पुलिस उत्पीड़न के आरोपों को लेकर पत्रकारों का अनिश्चितकालीन धरना शुरू, न्याय की मांग तेज!

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AIN NEWS 1 गाजियाबाद: जनपद में पत्रकारों के कथित उत्पीड़न, पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली और लंबित शिकायतों को लेकर पत्रकारों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। बुधवार को जिला मुख्यालय के सामने पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लंबे समय से शिकायतें और साक्ष्य उपलब्ध कराने के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिला, जिसके चलते उन्हें धरने का रास्ता अपनाना पड़ा।

धरने का नेतृत्व कर रहीं वरिष्ठ पत्रकार अपूर्वा चौधरी ने पुलिस प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पिछले कई सप्ताह से संबंधित मामलों में कार्रवाई की मांग की जा रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा केवल आश्वासन दिए गए और ठोस कदम नहीं उठाए गए। उनका दावा है कि अनेक बार वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों को प्रस्तुत किया गया, फिर भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

अपूर्वा चौधरी के अनुसार, 11 मई को पत्रकार सुमन मिश्रा के साथ कथित रूप से अभद्रता और छेड़छाड़ की घटना हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में पुलिस को आपातकालीन नंबर और लिखित शिकायत के माध्यम से सूचित किया गया, लेकिन शुरुआती स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शिकायत के बावजूद मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया और पीड़ित पक्ष को न्याय मिलने में देरी हुई।

धरने में शामिल पत्रकारों का आरोप है कि जब उन्होंने मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया, तब उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। उनका कहना है कि पुलिस अधिकारियों और प्रशासनिक स्तर पर लगातार गुहार लगाने के बावजूद मामले को लंबित रखा गया।

प्रदर्शनकारियों ने एक अन्य मामले का भी उल्लेख किया। उनका आरोप है कि 20 मई को सिद्धार्थ विहार क्षेत्र स्थित जल निगम चौकी में एक समाचार पत्र के संपादक ललित चौधरी के साथ पुलिस द्वारा दुर्व्यवहार और मारपीट की गई। पत्रकारों का दावा है कि इस घटना के बाद वास्तविक शिकायतों पर कार्रवाई करने के बजाय उनके खिलाफ ही मुकदमा दर्ज कर दिया गया।

धरने में शामिल पत्रकारों ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ दर्ज किया गया मुकदमा तथ्यों पर आधारित नहीं है और उन्हें दबाव में लेने के उद्देश्य से दर्ज किया गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होने पर सच्चाई सामने आ जाएगी। उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराई जाए।

अपूर्वा चौधरी ने कुछ पुलिस अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि कुछ अधिकारियों ने निष्पक्षता बरतने के बजाय एक पक्ष का समर्थन किया और पत्रकारों की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

धरना स्थल पर मौजूद पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में पत्रकारों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और यदि पत्रकार ही उत्पीड़न का शिकार होंगे तो आम लोगों की आवाज उठाने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखीं। पहली मांग यह है कि उनके अनुसार दर्ज किया गया कथित फर्जी मुकदमा वापस लिया जाए। दूसरी मांग दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई और निलंबन की है। तीसरी मांग संबंधित आरोपियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारी सुनिश्चित करने की है।

धरने में शामिल लोगों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जिला स्तर पर न्याय नहीं मिला तो आंदोलन को राज्य स्तर तक ले जाया जाएगा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर वे लखनऊ स्थित पुलिस मुख्यालय के बाहर भी धरना देने पर विचार करेंगे।

धरने में एक्टिव जर्नलिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारी एवं सदस्य भी शामिल रहे। इस दौरान संगठन के महामंत्री पंकज शर्मा, संगठन मंत्री पवन चौधरी, महेश त्यागी, सतीश कुमार, राजीव सिंह, राहुल कुमार, सविता चौधरी, ऋषि अग्निहोत्री, रोहित, अश्विनी सहित अनेक पत्रकार और समाजसेवी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में निष्पक्ष जांच और न्यायपूर्ण कार्रवाई की मांग दोहराई।

फिलहाल यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक उन्हें न्याय नहीं मिल जाता। वहीं प्रशासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। यदि प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच वार्ता होती है, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन की दिशा और प्रभाव और अधिक स्पष्ट हो सकेगा।

Journalists in Ghaziabad have started an indefinite protest alleging police harassment, false criminal cases, administrative negligence, and misconduct against media professionals. The protesters claim that despite repeated complaints and requests for justice, no concrete action has been taken by senior officials. The demonstration highlights concerns related to journalist safety, media freedom, police accountability, and the protection of democratic rights in Uttar Pradesh.

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