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गाजियाबाद पुलिस का बड़ा खुलासा: 100 करोड़ रुपये की जमीन हड़पने वाले गिरोह का भंडाफोड़, रिटायर्ड लेखपाल समेत 10 आरोपी गिरफ्तार!

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उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में करोड़ों रुपये की जमीन हड़पने की साजिश का खुलासा, पुलिस की बड़ी कार्रवाई

AIN NEWS 1: गाजियाबाद पुलिस ने जमीन से जुड़े एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करते हुए ऐसे संगठित गिरोह का खुलासा किया है, जो फर्जी दस्तावेज तैयार कर करोड़ों रुपये की कीमती जमीनों पर कब्जा करने और उन्हें बेचने की साजिश रच रहा था। पुलिस की जांच में सामने आया है कि गिरोह का निशाना करीब 100 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन थी। इस मामले में पुलिस ने रिटायर्ड लेखपाल समेत 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई कई दिनों तक चली तकनीकी जांच, दस्तावेजों के सत्यापन और गोपनीय निगरानी के बाद की गई। शुरुआती जांच में मिले साक्ष्यों से संकेत मिला कि गिरोह लंबे समय से सुनियोजित तरीके से जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहा था।

शिकायत के बाद शुरू हुई जांच

मामले की शुरुआत तब हुई जब राजकुमार अग्रवाल ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि अर्थला क्षेत्र में स्थित उनकी लगभग 100 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन को फर्जी दस्तावेज तैयार कर बेचने की कोशिश की जा रही है।

शिकायत को गंभीरता से लेते हुए गाजियाबाद पुलिस ने विशेष जांच शुरू की। दस्तावेजों की जांच, डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण और संदिग्ध लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने के बाद पुलिस इस पूरे नेटवर्क तक पहुंचने में सफल रही।

ऐसे करता था गिरोह फर्जीवाड़ा

पुलिस जांच के मुताबिक आरोपी पहले ऐसी जमीनों की तलाश करते थे जिनके मालिक लंबे समय से वहां मौजूद नहीं थे या जिनकी संपत्ति के रिकॉर्ड में किसी प्रकार की कानूनी जटिलता थी।

इसके बाद गिरोह फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक दस्तावेज, नकली पहचान पत्र और जाली हस्ताक्षर तैयार करता था। इन दस्तावेजों के आधार पर जमीन के असली मालिक की पहचान बदलने की कोशिश की जाती थी। इसके बाद फर्जी विक्रेता और खरीदार खड़े कर रजिस्ट्री कराने या जमीन बेचने की योजना बनाई जाती थी।

पुलिस का कहना है कि पूरे फर्जीवाड़े को बेहद पेशेवर तरीके से अंजाम दिया जा रहा था ताकि पहली नजर में किसी को शक न हो।

रिटायर्ड लेखपाल समेत 10 आरोपी गिरफ्तार

गाजियाबाद पुलिस ने इस मामले में कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक सेवानिवृत्त लेखपाल भी शामिल है, जिस पर राजस्व रिकॉर्ड और जमीन से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने में भूमिका निभाने का आरोप है।

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गिरफ्तार आरोपियों के नाम इस प्रकार हैं—

सुरेंद्र सिंह (70 वर्ष)

रमेश पुरोहित (68 वर्ष)

वेंकटे बालकृष्ण धाकपड़े (31 वर्ष)

सतवीर सिंह (60 वर्ष) – सेवानिवृत्त लेखपाल

अरुण कुमार शिवलाल (51 वर्ष)

राजे खान (31 वर्ष)

जाकिर हुसैन (38 वर्ष)

सादिक (40 वर्ष)

हनुमान सिंह (42 वर्ष)

अली जाफर (32 वर्ष)

पुलिस को क्या-क्या मिला?

छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज, नकली पहचान पत्र, संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद किए हैं।

बरामद मोबाइल फोन, लैपटॉप और डिजिटल डाटा की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि गिरोह ने अब तक कितनी जमीनों को अपना निशाना बनाया और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।

कई और लोगों पर लटक सकती है गिरफ्तारी की तलवार

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इस गिरोह के तार अन्य जिलों या राज्यों से जुड़े हुए हैं।

यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति, सरकारी कर्मचारी या दस्तावेज तैयार करने वाले एजेंट की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल दावों को लेकर सावधानी

इस मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई पोस्ट वायरल हुईं, जिनमें विभिन्न नेताओं, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के नाम टैग किए गए। हालांकि अब तक पुलिस की ओर से जारी जानकारी और सार्वजनिक रिकॉर्ड में राजेश के. गुप्ता, सुनीता दयाल, संजीव शर्मा, सोनम चड्ढा, डीएम गाजियाबाद या अन्य टैग किए गए लोगों के आरोपी होने की पुष्टि नहीं हुई है।

इसलिए बिना आधिकारिक पुष्टि के किसी व्यक्ति को इस मामले से जोड़ना उचित नहीं माना जा सकता।

जमीन खरीदने से पहले रखें इन बातों का ध्यान

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संपत्ति की खरीद-बिक्री से पहले उसके सभी दस्तावेजों की अच्छी तरह जांच कराएं। जमीन के मालिकाना हक, खतौनी, रजिस्ट्री और राजस्व रिकॉर्ड का सत्यापन संबंधित विभाग से कराने के बाद ही किसी प्रकार का भुगतान करें।

यदि किसी व्यक्ति को जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े या संदिग्ध दस्तावेजों की जानकारी मिले तो तत्काल स्थानीय पुलिस को सूचित करें।

जांच अभी जारी

गाजियाबाद पुलिस का कहना है कि यह जांच अभी प्रारंभिक चरण में है। आरोपियों से पूछताछ और बरामद दस्तावेजों की जांच के बाद इस मामले में कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। पुलिस का दावा है कि भूमि माफिया और संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

Ghaziabad Police has cracked a major Rs 100 crore land fraud racket by arresting 10 accused, including a retired lekhpal. The accused allegedly used forged property documents, fake identity proofs, and fraudulent land records to target high-value land in Ghaziabad. The investigation is ongoing, and police are examining digital evidence to identify other members of the land fraud network. This case highlights Uttar Pradesh Police’s continued action against land mafia and property-related crimes.

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