AIN NEWS 1: ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। यह घटना केवल एक सड़क हादसा नहीं मानी जा रही, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और अव्यवस्थाओं का नतीजा बताई जा रही है। अब इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। गौतमबुद्ध नगर की दादरी विधानसभा सीट से भाजपा विधायक तेजपाल सिंह नागर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर कई सरकारी विभागों को इस मौत का जिम्मेदार ठहराया है।
🔹 कौन थे युवराज मेहता?
युवराज मेहता एक निजी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर कार्यरत थे। वे ग्रेटर नोएडा में रहते थे और अपने करियर को लेकर बेहद गंभीर और मेहनती माने जाते थे। परिवार वालों के अनुसार युवराज रोज़ की तरह काम से लौट रहे थे, लेकिन उन्हें यह अंदाज़ा भी नहीं था कि यह सफर उनकी ज़िंदगी का आख़िरी सफर बन जाएगा।
🔹 कैसे हुई दर्दनाक मौत?
घटना सेक्टर-150 क्षेत्र की बताई जा रही है, जहाँ भारी जलभराव, अंधेरा और खराब सड़क व्यवस्था लंबे समय से स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। बताया जा रहा है कि बारिश के बाद सड़क पर पानी भरा हुआ था और स्ट्रीट लाइटें भी काम नहीं कर रही थीं। इसी दौरान युवराज एक खुले या ढके हुए गड्ढे/नाले में गिर गए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर इलाके में सही लाइटिंग होती, जलभराव की समस्या का समाधान किया गया होता और सुरक्षा के पर्याप्त इंतज़ाम होते, तो शायद युवराज की जान बच सकती थी।
🔹 BJP विधायक तेजपाल सिंह नागर का बड़ा कदम
घटना के बाद दादरी से भाजपा विधायक तेजपाल सिंह नागर ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक विस्तृत पत्र लिखा है। अपने पत्र में उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि यह घटना सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता का परिणाम है।
विधायक नागर ने निम्नलिखित विभागों को इस मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया है—
अग्निशमन विभाग
नोएडा प्राधिकरण
आपदा प्रबंधन विभाग
नगर क्षेत्र में जलभराव की समस्या
खराब और बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटें
उन्होंने लिखा कि यदि समय रहते इन विभागों ने अपनी जिम्मेदारी निभाई होती, तो आज एक युवा की जान न जाती।
🔹 लंबे समय से अनदेखी की जा रही समस्याएं
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सेक्टर-150 जैसे पॉश इलाके में भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। हर बारिश के बाद सड़कें तालाब में तब्दील हो जाती हैं। कई जगह खुले नाले या गहरे गड्ढे बिना किसी चेतावनी संकेत के मौजूद हैं।
इसके अलावा रात के समय स्ट्रीट लाइटें बंद रहती हैं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी होती है। कई बार इन समस्याओं की शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
🔹 परिवार का दर्द और सवाल
युवराज मेहता के परिवार पर इस हादसे ने दुखों का पहाड़ तोड़ दिया है। माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार का कहना है कि उनका बेटा किसी की लापरवाही की भेंट चढ़ गया। उन्होंने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और न्याय की मांग की है।
परिवार का यह भी कहना है कि यदि जिम्मेदार अधिकारियों पर पहले कार्रवाई होती, तो शायद यह हादसा टल सकता था।
🔹 प्रशासन पर बढ़ता दबाव
विधायक द्वारा मुख्यमंत्री को पत्र लिखे जाने के बाद प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक हलकों में भी इस घटना को लेकर चर्चा तेज है। विपक्षी दल भी सरकार से जवाब मांग रहे हैं और इस मुद्दे को जनसुरक्षा से जोड़कर देख रहे हैं।
🔹 क्या बदलेगा सिस्टम?
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या हमारे शहरों की बुनियादी सुविधाएं वास्तव में सुरक्षित हैं? क्या जिम्मेदार विभाग सिर्फ कागजों में ही सक्रिय हैं? युवराज मेहता की मौत ने उन तमाम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है, जो हर दिन खराब सड़कों और अव्यवस्थाओं के बीच सफर करते हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि इस दर्दनाक घटना के बाद सरकार और प्रशासन क्या ठोस कदम उठाते हैं, ताकि भविष्य में किसी और युवराज को अपनी जान न गंवानी पड़े।
The tragic death of 27-year-old software engineer Yuvraj Mehta in Greater Noida Sector 150 has raised serious concerns over administrative negligence and public safety. BJP MLA Tejpal Singh Nagar has written to Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath, holding the Noida Authority, disaster management department, fire services, waterlogging issues, and non-functional street lights responsible for the incident. The case highlights ongoing infrastructure failures in Greater Noida and has sparked political debate across Uttar Pradesh.


















