साइबर फ्रॉड का पैसा आपके खाते में आया तो क्या होगा? GRM पोर्टल को लेकर जानिए पूरी बात
AIN NEWS 1: आज के डिजिटल दौर में ऑनलाइन लेन-देन जितना आसान हुआ है, साइबर फ्रॉड का खतरा भी उतना ही बढ़ा है। कई बार ठगी का पैसा सीधे ठग के खाते में न जाकर अलग-अलग बैंक खातों, UPI आईडी और वॉलेट के जरिए आगे भेजा जाता है। ऐसे मामलों में किसी ऐसे व्यक्ति का बैंक खाता भी जांच के दायरे में आ सकता है, जिसे यह जानकारी तक नहीं होती कि उसके खाते में आने वाली रकम साइबर अपराध से जुड़ी है।
यही वजह है कि पिछले कुछ समय से बैंक खातों के Lien, Hold और Freeze होने के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे मामलों से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए सरकार ने CFCFRMS Grievance Redressal Portal यानी GRM की व्यवस्था की है।
GRM पोर्टल क्या है?
GRM का संबंध Grievance Redressal Module से है। यह Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) और गृह मंत्रालय की साइबर अपराध व्यवस्था के तहत काम करने वाली शिकायत निवारण व्यवस्था है।
I4C के अनुसार साइबर वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System (CFCFRMS) बनाया गया है। इसके जरिए साइबर फ्रॉड की सत्यापित शिकायतों से जुड़ी जानकारी संबंधित बैंकों और वित्तीय संस्थानों तक पहुंचाई जाती है, ताकि संदिग्ध रकम को ट्रेस और जरूरत के अनुसार फ्रीज किया जा सके।
GRM इसी व्यवस्था में उन शिकायतों के निवारण से जुड़ा है, जिनमें बैंक खाते पर साइबर अपराध से संबंधित Lien या Freeze जैसी कार्रवाई हुई है।
सरकार ने जून 2026 में CFCFRMS के तहत विकसित Money Restoration Module (MRM) और Grievance Redressal Module (GRM) की नियमित समीक्षा और प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश भी दिए थे।
खाते में साइबर फ्रॉड का पैसा आने पर तुरंत अपराधी नहीं बन जाते
सबसे जरूरी बात यह है कि अगर किसी व्यक्ति के खाते में साइबर फ्रॉड से जुड़ी रकम पहुंच गई, तो केवल इस आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि खाताधारक ही साइबर अपराध में शामिल है।
कई मामलों में ठग दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल रकम आगे भेजने के लिए करते हैं। कुछ खाताधारकों को इस बात की जानकारी भी नहीं होती कि उन्हें मिलने वाली रकम किसी अपराध से जुड़ी है।
हालांकि, अगर किसी साइबर फ्रॉड की जांच में किसी बैंक खाते का इस्तेमाल हुआ हुआ पाया जाता है, तो जांच एजेंसी उस खाते और उसमें हुए लेन-देन की जांच कर सकती है।
बैंक खाते पर Lien क्यों लगाया जाता है?
मान लीजिए किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन फ्रॉड में 50 हजार रुपये की ठगी हुई। जांच के दौरान पता चलता है कि उस रकम का कुछ हिस्सा दूसरे बैंक खातों से होकर गुजरा है।
ऐसी स्थिति में money trail को ट्रैक करते हुए संबंधित रकम पर रोक लगाने की कार्रवाई की जा सकती है।
इसी वजह से खाते में Lien Amount दिखाई दे सकता है।
Lien का सामान्य अर्थ है कि खाते की किसी निश्चित रकम पर रोक लगा दी गई है। यह जरूरी नहीं कि पूरे बैंक खाते में मौजूद रकम अपराध की रकम हो।
उदाहरण के तौर पर अगर खाते में 80 हजार रुपये हैं और जांच में 10 हजार रुपये संदिग्ध लेन-देन से जुड़े पाए जाते हैं, तो परिस्थितियों के अनुसार उस रकम पर रोक लग सकती है।
हालांकि हर मामले में कार्रवाई की प्रकृति अलग हो सकती है। इसलिए बैंक स्टेटमेंट में केवल Lien Amount देखकर पूरे मामले का निष्कर्ष निकालना सही नहीं है।
Account Freeze और Lien में क्या अंतर है?
Lien में आम तौर पर किसी निश्चित रकम पर रोक से जुड़ी कार्रवाई होती है, जबकि Freeze की स्थिति में खाते के संचालन पर व्यापक प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
किस कार्रवाई की जरूरत है, यह संबंधित शिकायत, money trail, जांच और सक्षम प्राधिकारी के निर्देशों पर निर्भर करता है।
इसलिए अगर किसी व्यक्ति के बैंक खाते में अचानक Lien या Freeze दिखाई देता है तो सबसे पहले बैंक से इसका कारण और संबंधित शिकायत/रेफरेंस की जानकारी लेना जरूरी है।
GRM क्यों बनाया गया?
साइबर फ्रॉड के मामलों में एक बड़ी समस्या यह सामने आती रही है कि किसी व्यक्ति का बैंक खाता जांच में आने के बाद उसे अपना पक्ष रखने में परेशानी होती है।
इसी तरह की शिकायतों के समाधान के लिए CFCFRMS के तहत Grievance Redressal Portal उपलब्ध है। आधिकारिक पोर्टल पर इसे CFCFRMS Grievance Redressal Portal के रूप में दिखाया गया है और वहां वित्तीय धोखाधड़ी के लिए 1930 हेल्पलाइन की जानकारी भी दी गई है।
इसका उद्देश्य साइबर अपराध से जुड़ी बैंकिंग कार्रवाई में सामने आने वाली शिकायतों को उचित प्रक्रिया के जरिए संबंधित स्तर तक पहुंचाना है।
अगर आपके खाते में अनजान रकम आ जाए तो क्या करें?
अगर बैंक खाते में ऐसी रकम आती है जिसके बारे में आपको जानकारी नहीं है, तो सबसे पहले उसका रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
बिना जानकारी के उस रकम को किसी दूसरे खाते में ट्रांसफर करना या निकालना स्थिति को और जटिल बना सकता है।
ऐसी स्थिति में:
पहला कदम: बैंक से संपर्क करें और लेन-देन की जानकारी लें।
दूसरा कदम: Transaction ID या UTR नंबर सुरक्षित रखें।
तीसरा कदम: रकम किस तारीख को और किस खाते/UPI से आई, इसकी जानकारी रखें।
चौथा कदम: यदि कोई वैध लेन-देन था तो उससे जुड़े बिल, रसीद, बातचीत या अन्य दस्तावेज सुरक्षित रखें।
पांचवां कदम: यदि साइबर अपराध से जुड़ी शिकायत के कारण खाते पर कार्रवाई हुई है तो बैंक से संबंधित शिकायत या रेफरेंस की जानकारी मांगें।
Cyber Fraud होने पर 1930 पर शिकायत करें
अगर किसी व्यक्ति के साथ खुद ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी हुई है तो उसे जल्द से जल्द 1930 पर शिकायत करनी चाहिए।
I4C के अनुसार वित्तीय साइबर फ्रॉड की शिकायत 1930 हेल्पलाइन के माध्यम से की जा सकती है और शिकायत को National Cyber Crime Reporting Portal पर भी पूरा किया जा सकता है।
National Cyber Crime Reporting Portal पर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत करते समय बैंक का नाम, Transaction ID/UTR, लेन-देन की तारीख, फ्रॉड की रकम और संबंधित सबूत जैसी जानकारी तैयार रखने को कहा गया है।
GRM के नाम पर होने वाली ठगी से भी सावधान रहें
साइबर अपराध से जुड़े मामलों में एक नया खतरा यह भी है कि ठग सरकारी पोर्टल या साइबर पुलिस अधिकारी बनकर लोगों को फोन कर सकते हैं।
अगर कोई व्यक्ति यह कहकर पैसे मांगता है कि वह आपके बैंक खाते का Freeze या Lien हटवा देगा, तो सावधान रहें।
किसी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, UPI PIN, ATM PIN, CVV, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड या स्क्रीन शेयरिंग की जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।
सरकारी व्यवस्था में शिकायत का मतलब यह नहीं है कि किसी अनजान व्यक्ति को पैसे देकर खाता खुलवाया जा सकता है।
क्या GRM से तुरंत बैंक खाता Unfreeze हो जाता है?
यह समझना भी जरूरी है कि GRM कोई ऐसा सिस्टम नहीं है जिसमें शिकायत दर्ज करते ही हर बैंक खाता तुरंत Unfreeze हो जाएगा।
मामले की प्रकृति, संबंधित साइबर शिकायत, money trail और जांच एजेंसी की कार्रवाई के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
I4C की व्यवस्था में CFCFRMS का उद्देश्य साइबर फ्रॉड की रकम को ट्रैक करना, संबंधित बैंकों तक जानकारी पहुंचाना और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों की मदद करना है।
इसलिए अगर किसी निर्दोष व्यक्ति का खाता जांच में आ गया है तो उसे घबराने के बजाय दस्तावेजों के साथ उचित शिकायत निवारण प्रक्रिया अपनानी चाहिए।
साइबर फ्रॉड का पैसा किसी बैंक खाते में पहुंच जाना गंभीर मामला हो सकता है, लेकिन सिर्फ रकम खाते में आने से खाताधारक को साइबर अपराधी मान लेना सही नहीं है।
जांच में यह देखा जाता है कि पैसा कहां से आया, किस रास्ते से आया, खाताधारक की भूमिका क्या थी और उसे उस रकम की वास्तविक जानकारी थी या नहीं।
GRM यानी Grievance Redressal Module इसी तरह साइबर फ्रॉड से जुड़े बैंक खाते के Lien और Freeze जैसी शिकायतों के निवारण की व्यवस्था का हिस्सा है। वहीं साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग के लिए 1930 और National Cyber Crime Reporting Portal महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
इसलिए अगर खाते में संदिग्ध रकम आ गई है या साइबर फ्रॉड की वजह से बैंक खाते पर रोक लगी है, तो रकम को इधर-उधर करने के बजाय पहले बैंक से आधिकारिक जानकारी लें, लेन-देन के दस्तावेज सुरक्षित रखें और जरूरत पड़ने पर निर्धारित शिकायत निवारण प्रक्रिया अपनाएं।
GRM Portal and CFCFRMS are important mechanisms for handling cyber fraud-related bank account grievances in India. If cyber fraud money reaches a bank account, the account may become part of the investigation and a lien or freeze may be placed depending on the circumstances. The Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) works with banks and law enforcement agencies to trace suspicious funds, while the 1930 cyber fraud helpline and National Cyber Crime Reporting Portal help victims report financial cyber fraud quickly.



















