AIN NEWS 1 मेरठ: केसरगंज मस्जिद प्रकरण को लेकर मेरठ में चल रहा विवाद अब पुलिस कार्रवाई तक पहुंच गया है। कोतवाली थाना क्षेत्र में बहुजन समाज पार्टी (BSP) के नेता और पूर्व प्रत्याशी हाजी राशिद अखलाक के खिलाफ पुलिस ने बिना अनुमति जुलूस निकालने और नारेबाजी के मामले में प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस के मुताबिक, 29 सितंबर को राशिद अखलाक करीब 40 समर्थकों के साथ जुलूस के रूप में निकले थे। इस दौरान कथित तौर पर नारेबाजी और अभद्र टिप्पणियां भी की गईं। मामले की जांच सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो के आधार पर की गई।
केसरगंज मस्जिद प्रकरण को लेकर निकाला गया था जुलूस
मिली जानकारी के अनुसार, 29 सितंबर को राशिद अखलाक अपने समर्थकों के साथ केसरगंज मस्जिद प्रकरण को लेकर सड़कों पर निकले थे। उनका उद्देश्य हिंदू रक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पिंकी चौधरी के खिलाफ कार्रवाई की मांग करना बताया गया है।
इससे पहले राशिद अखलाक की ओर से कोतवाली थाने में पिंकी चौधरी के खिलाफ तहरीर भी दी गई थी। तहरीर में सोशल मीडिया पर प्रसारित बताए जा रहे वीडियो का हवाला देते हुए पुलिस से मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की गई थी। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया था कि केसरगंज मस्जिद के सामने धार्मिक कार्यक्रम किए जाने की घोषणा से क्षेत्र में तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है।
इसी घटनाक्रम के बीच राशिद अखलाक के नेतृत्व में समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया और जुलूस निकाला। अब पुलिस ने इसी जुलूस को लेकर अलग से कार्रवाई की है।
पुलिस ने वीडियो की जांच के बाद दर्ज की FIR
पुलिस के अनुसार, जुलूस निकालने के लिए प्रशासन से पहले अनुमति नहीं ली गई थी। संबंधित विभाग को भी जुलूस की सूचना दिए जाने की बात सामने नहीं आई। पुलिस का कहना है कि जुलूस के कारण सड़क पर आवागमन प्रभावित हुआ और मार्ग बाधित होने से लोगों को परेशानी हुई।
मामले में सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो को भी जांच का आधार बनाया गया। पुलिस के मुताबिक वीडियो की पड़ताल के बाद जुलूस और उसमें हुई नारेबाजी से संबंधित तथ्यों को देखा गया। इसके बाद कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, दरोगा शुभम सेंगर की ओर से यह प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। कोतवाली क्षेत्र के सीओ संग्राम सिंह ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
नारेबाजी और अभद्र टिप्पणियों का भी आरोप
पुलिस के मुताबिक जुलूस के दौरान नारेबाजी की गई और कुछ अभद्र टिप्पणियां भी किए जाने का आरोप है। इन आरोपों की पुष्टि के लिए पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को जांच में शामिल किया है।
हालांकि, पत्रकारिता की दृष्टि से यह स्पष्ट करना जरूरी है कि वीडियो में कथित नारेबाजी या टिप्पणियों को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। इसलिए फिलहाल इन्हें पुलिस की ओर से लगाए गए आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
निषेधाज्ञा के उल्लंघन की बात भी सामने आई
पुलिस ने यह भी कहा है कि जिले में लागू निषेधाज्ञा के बावजूद जुलूस निकाला गया। उपलब्ध रिपोर्टों में इस मामले को सीधे “धारा 144” के बजाय जिले में लागू निषेधाज्ञा के उल्लंघन के रूप में बताया गया है। इसलिए मामले की खबर में बिना एफआईआर की प्रति देखे धारा 144 की सटीक कानूनी धारा लिखना उचित नहीं होगा।
पुलिस का कहना है कि ऐसे समय में बिना अनुमति भीड़ के साथ जुलूस निकालने से कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्राथमिकी दर्ज की है।
सचिन सिरोही ने की थी कार्रवाई की मांग
इस मामले में हिंदूवादी नेता सचिन सिरोही का नाम भी सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार, अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सचिन सिरोही ने केसरगंज मस्जिद प्रकरण को लेकर अपने ऊपर दर्ज मुकदमे के संबंध में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी।
इसी दौरान उन्होंने पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए राशिद अखलाक द्वारा बिना अनुमति जुलूस निकाले जाने के मामले में भी कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद पुलिस की ओर से राशिद अखलाक के खिलाफ जुलूस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई।
3 अक्टूबर को भी मेरठ में सचिन सिरोही पर दर्ज मुकदमों को हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारियों ने पिंकी चौधरी के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग उठाई। इससे साफ है कि केसरगंज प्रकरण को लेकर अलग-अलग पक्षों की ओर से पुलिस और प्रशासन के सामने लगातार शिकायतें और मांगें रखी जा रही हैं।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
केसरगंज मस्जिद में निर्माण को लेकर पहले से विवाद चल रहा था। कुछ स्थानीय लोगों और व्यापारियों की ओर से निर्माण को लेकर आपत्ति जताई गई थी। इसके बाद मामला पुलिस और प्रशासन के संज्ञान में आया और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई।
29 सितंबर को मस्जिद के बाहर हनुमान चालीसा पढ़ने की घोषणा से मामला और संवेदनशील हो गया। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया था। इसी दौरान राशिद अखलाक ने पुलिस को तहरीर देकर संबंधित हिंदूवादी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
इसके बाद दोनों पक्षों की गतिविधियों और बयानों को लेकर पुलिस की निगरानी बढ़ी। अब बिना अनुमति जुलूस निकालने का मुकदमा दर्ज होने से मामले में एक और कानूनी कार्रवाई जुड़ गई है।
कौन हैं राशिद अखलाक?
राशिद अखलाक मेरठ में बसपा से जुड़े नेता और पूर्व प्रत्याशी के रूप में राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। वे पूर्व सांसद शाहिद अखलाक के भाई भी हैं। 29 सितंबर को उन्होंने केसरगंज मस्जिद प्रकरण को लेकर अपने समर्थकों के साथ प्रदर्शन किया था।
फिलहाल उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे में पुलिस जांच आगे बढ़ा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जांच शुरू हो चुकी है। गिरफ्तारी को लेकर इस समय कोई पुष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।
आगे क्या होगा?
पुलिस अब जुलूस से जुड़े वीडियो, मौके की परिस्थितियों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करेगी। जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि जुलूस में कौन-कौन लोग शामिल थे और किन परिस्थितियों में प्रदर्शन हुआ था।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम में एक बात महत्वपूर्ण है कि केसरगंज मस्जिद प्रकरण से जुड़े दोनों पक्षों की ओर से पुलिस-प्रशासन के सामने अपनी-अपनी शिकायतें और मांगें रखी गई हैं। ऐसे में किसी भी आरोप को अंतिम सत्य मानने के बजाय पुलिस जांच और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि 29 सितंबर को बिना पूर्व अनुमति जुलूस निकालने के मामले में राशिद अखलाक के खिलाफ कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
Meerut News: BSP leader Rashid Akhlaq has been booked by Meerut Kotwali Police for allegedly taking out a procession without prior permission during the Kesar Ganj Mosque controversy. The case relates to a procession held on September 29, 2026, with around 40 supporters. Police said the procession caused traffic disruption and involved alleged slogan-shouting and objectionable remarks. The FIR was registered after police examined a video circulating on social media. The developments also involve Hindu leader Pinki Chaudhary and Sachin Sirohi, who had sought police action in connection with the procession.



















