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ज्ञानवापी परिसर की दीवार पर पेंटिंग से नया विवाद: किसकी है दीवार, क्यों उठे सवाल?

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AIN NEWS 1: वाराणसी में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद परिसर एक बार फिर चर्चा में है। इस बार विवाद किसी पुराने मामले को लेकर नहीं, बल्कि एक नई पेंटिंग को लेकर सामने आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया दौरे के दौरान की गई सजावट ने अब धार्मिक और संपत्ति अधिकारों को लेकर बहस छेड़ दी है। मामला धीरे-धीरे संवेदनशील होता दिखा, लेकिन प्रशासन की सतर्कता से फिलहाल स्थिति शांत बनी हुई है

📌 क्या है पूरा मामला?

29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वाराणसी दौरा प्रस्तावित था। उनके आगमन से पहले काशी विश्वनाथ धाम और उसके आसपास के इलाकों को सजाने-संवारने का काम तेज़ी से किया गया। इसी क्रम में ज्ञानवापी परिसर के पास बैरिकेडिंग से सटी एक छोटी दीवार—लगभग डेढ़ से दो फीट ऊंची—को गेरुआ रंग से रंगा गया।

सिर्फ रंगाई ही नहीं, बल्कि इस दीवार पर पारंपरिक वारली कला की शैली में पेंटिंग भी बनाई गई। यह वही रास्ता था, जिससे होकर प्रधानमंत्री का काफिला काशी विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर 4 तक पहुंचा।

पहली नज़र में यह एक सामान्य सौंदर्यीकरण का काम लग रहा था, लेकिन कुछ ही समय में यह विवाद का कारण बन गया।

🕌 मुस्लिम पक्ष की आपत्ति क्यों?

स्थानीय मुस्लिम समुदाय और मस्जिद से जुड़े लोगों ने इस पेंटिंग पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि जिस दीवार पर रंग और चित्रकारी की गई है, वह वक्फ संपत्ति का हिस्सा है। ऐसे में बिना अनुमति उस पर कोई भी बदलाव करना उनके अधिकारों का उल्लंघन है।

मुफ्ती-ए-बनारस मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी ने इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है:

“यह जमीन हमारी है। बिना हमारी सहमति के इस पर गेरुआ रंग और पेंटिंग करना गलत है। हमने प्रशासन को पत्र लिखकर इसे हटाने की मांग की है।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका विरोध शांतिपूर्ण है और वे किसी टकराव की स्थिति नहीं चाहते। उनका मानना है कि ऐसे कदम शहर की गंगा-जमुनी तहजीब को प्रभावित कर सकते हैं, जो वाराणसी की पहचान रही है।

🏛️ प्रशासन का क्या कहना है?

विवाद बढ़ने की आशंका को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस तुरंत सक्रिय हो गई। सुरक्षा के लिहाज से ज्ञानवापी परिसर और काशी विश्वनाथ मंदिर के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया।

डीसीपी स्तर के अधिकारी ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा:

दीवार पर बनाई गई पेंटिंग में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है

यह केवल एक सामान्य सांस्कृतिक कला है

पेंटिंग परिसर की सीमा के बाहर बनाई गई है

उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति या समूह कानून हाथ में लेने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन का यह भी कहना है कि चूंकि मामला मंदिर से जुड़ा है, इसलिए अंतिम निर्णय मंदिर प्रशासन के स्तर पर लिया जा सकता है।

🛐 जुमे की नमाज के दौरान क्या हुआ?

शुक्रवार को जुमे की नमाज के दौरान किसी भी तरह के विरोध या तनाव की आशंका थी। इसे देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए।

गेट नंबर 4 के पास पुलिस, पीएसी और RAF तैनात रही

पूरे इलाके में निगरानी बढ़ा दी गई

संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त बल लगाया गया

हालांकि, सभी आशंकाओं के बीच नमाज पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। किसी भी तरह का विरोध प्रदर्शन सामने नहीं आया।

कुछ नमाजियों ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि:

“जैसी स्थिति पहले थी, उसे वैसा ही रहने देना चाहिए था। इससे सामाजिक सौहार्द बना रहता।”

⚖️ विवाद का मूल मुद्दा क्या है?

यह विवाद सिर्फ एक पेंटिंग का नहीं, बल्कि तीन बड़े मुद्दों से जुड़ा हुआ है:

1. संपत्ति का अधिकार

मुस्लिम पक्ष का दावा है कि दीवार वक्फ की जमीन पर है, जबकि प्रशासन का कहना है कि यह परिसर के बाहर है।

2. धार्मिक संवेदनशीलता

गेरुआ रंग और पारंपरिक कला को कुछ लोग धार्मिक संकेत के रूप में देख रहे हैं, जिससे आपत्ति जताई जा रही है।

3. सांस्कृतिक बनाम धार्मिक पहचान

प्रशासन इसे सांस्कृतिक सजावट बता रहा है, जबकि विरोध करने वाले इसे धार्मिक हस्तक्षेप मान रहे हैं।

🤝 गंगा-जमुनी तहजीब पर असर?

वाराणसी हमेशा से विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के मेल का प्रतीक रहा है। यहां मंदिर और मस्जिद एक-दूसरे के बेहद करीब स्थित हैं, जो इस शहर की खास पहचान है।

ऐसे में इस तरह के विवाद यह सवाल खड़ा करते हैं कि:

क्या विकास और सौंदर्यीकरण के काम में सभी पक्षों की सहमति जरूरी है?

क्या प्रशासन को संवेदनशील स्थानों पर ज्यादा सतर्कता बरतनी चाहिए?

🔍 आगे क्या हो सकता है?

मुस्लिम पक्ष ने प्रशासन को लिखित शिकायत दे दी है और मामले को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। वहीं प्रशासन फिलहाल स्थिति को शांत बनाए रखने पर ध्यान दे रहा है।

संभावना है कि:

दोनों पक्षों के बीच बातचीत हो

प्रशासन तथ्य स्पष्ट करे

आवश्यकता पड़ने पर पेंटिंग हटाने या संशोधन का फैसला लिया जाए

The Gyanvapi Mosque controversy in Varanasi has resurfaced after a wall painting was created during Prime Minister Narendra Modi’s visit to the Kashi Vishwanath corridor. The Muslim side has objected, claiming the wall belongs to Waqf property and alleging violation of religious rights. The प्रशासन maintains that the artwork is cultural and outside the mosque premises. This incident highlights ongoing tensions around religious sites, property rights, and communal harmony in Varanasi.

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