AIN NEWS 1 गाजियाबाद। जिला मुख्यालय के बाहर अपनी मांगों को लेकर पत्रकारों का अनिश्चितकालीन धरना सातवें दिन भी जारी रहा। भीषण गर्मी, तेज आंधी और बारिश जैसी कठिन परिस्थितियों के बावजूद पत्रकार अपूर्वा चौधरी के नेतृत्व में दर्जनों पत्रकार लगातार धरना स्थल पर डटे हुए हैं। पत्रकारों का कहना है कि जब तक मामले में निष्पक्ष जांच और न्यायपूर्ण कार्रवाई नहीं होगी, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
सोमवार को आंदोलन के सातवें दिन धरना स्थल पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इस दौरान पूड़ी, सब्जी और रायते की व्यवस्था की गई, जिसमें आंदोलनकारियों के साथ-साथ धरना स्थल पर पहुंचे लोगों ने भी प्रसाद ग्रहण किया।
आंदोलन के दौरान संगठन मंत्री पवन चौधरी ने कहा कि पत्रकारों के साथ हो रहे अन्याय को किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पत्रकार समाज की समस्याओं को सामने लाने और जनता की आवाज बनने का काम करते हैं, ऐसे में यदि पत्रकारों के साथ ही अन्याय होगा तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों के सम्मान और न्याय की लड़ाई में संगठन पूरी मजबूती के साथ खड़ा है और निष्पक्ष कार्रवाई होने तक संघर्ष जारी रहेगा।
इसके बाद एक्टिव जर्नलिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री पंकज शर्मा ने भंडारे के आयोजन को लेकर अधिकारियों पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान कुछ अधिकारियों की ओर से कहा गया था कि धरना करने वाले लोग “खा-पीकर आंदोलन करें”। इसी बात को प्रतीकात्मक रूप से लेते हुए उन्होंने कहा कि अब आंदोलनकारी खुद भी खा रहे हैं और दूसरों को भी खिला रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्तिगत विवाद के लिए नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग को लेकर किया जा रहा है।
“धरना स्थल ही अब हमारा अस्थाई निवास”
आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं पत्रकार अपूर्वा चौधरी ने कहा कि सात दिनों से लगातार धरना जारी है और अब धरना स्थल ही उनका अस्थाई निवास बन चुका है। उन्होंने बताया कि सोमवार और अमावस्या के विशेष अवसर पर भंडारे का आयोजन किया गया।
अपूर्वा चौधरी ने कहा कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती।
उन्होंने प्रशासन से अपील की कि मामले में किसी भी प्रकार की लीपापोती या समझौते की कोशिश न की जाए, बल्कि पूरी निष्पक्षता के साथ जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए।
“अगर दोषी हैं तो सजा भुगतने को तैयार”
अपूर्वा चौधरी ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि जांच में वह या उनके साथी दोषी पाए जाते हैं तो वे कानून के अनुसार कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने कहा कि पुलिस को बिना जल्दबाजी के निष्पक्ष तरीके से जांच करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार मामलों में सच्चाई सामने आने के बजाय दिशा बदलने की कोशिश होती है, लेकिन पत्रकार समाज अपनी आवाज उठाता रहेगा।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पत्रकारों के सब्र का बांध टूट गया तो भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से जुड़े मामलों को सार्वजनिक किया जाएगा।
एसीपी पर लगाए गंभीर आरोप
अपूर्वा चौधरी ने गाजियाबाद पुलिस की एसीपी उपासना पांडेय पर उनकी सामाजिक और व्यावसायिक छवि को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनके लिए सबसे बड़ी चिंता सम्मान और प्रतिष्ठा की है।
उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने परिवार से भी कह दिया है कि न्याय मिलने के बाद ही घर लौटेंगी।
हालांकि, उन्होंने गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर और एडिशनल कमिश्नर केशव चौधरी पर भरोसा जताते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वरिष्ठ अधिकारी मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करेंगे।
27 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप
आंदोलनकारियों का कहना है कि जिस घटना को लेकर यह विरोध शुरू हुआ था, उसे 27 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक जांच पूरी नहीं हुई है और कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
पत्रकारों ने पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि छोटे मामलों में तुरंत कार्रवाई की जाती है, लेकिन इस मामले में लगातार समय बीतने के बावजूद कोई निर्णायक कदम नहीं उठाया गया।
उन्होंने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और पत्रकारों को न्याय दिलाया जाए।
आंदोलन को मिल रहा सामाजिक समर्थन
जैसे-जैसे आंदोलन लंबा खिंच रहा है, इसे समाज के अलग-अलग वर्गों का समर्थन भी मिल रहा है। कई सामाजिक कार्यकर्ता और वरिष्ठ नागरिक धरना स्थल पर पहुंचकर पत्रकारों की मांगों का समर्थन कर रहे हैं।
धरना स्थल पर पत्रकारों के साथ संगठन मंत्री पवन चौधरी, एक्टिव जर्नलिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री पंकज शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार संजय भाटी, विकास कुमार, ब्रजभूषण, सतीश कुमार, राजीव सिंह, रिहान जैदी, सुमन मिश्रा, उमेश त्यागी, महेश त्यागी, ब्रजभूषण शर्मा, ज्ञान भारद्वाज, सविता चौधरी, सुशील मौर्य, विपुल कुमार, अमन चौधरी और शकील सैफी सहित कई पत्रकार मौजूद रहे।
इसके अलावा समाजसेवी प्रीतपाल सिंह खोसला, संजीव तेवतिया, विनीत त्यागी और सतवीर सिंह ने भी धरना स्थल पहुंचकर आंदोलन को अपना समर्थन दिया।
पत्रकारों का कहना है कि यह संघर्ष केवल एक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि पत्रकारों के सम्मान, स्वतंत्र आवाज और निष्पक्ष व्यवस्था की मांग को लेकर है। अब सभी की नजर पुलिस प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
Ghaziabad journalists protest entered its seventh day as journalist Apurva Chaudhary continued an indefinite sit-in against alleged corruption and demanded a fair investigation. The protest at the district headquarters has gained support from journalists and social activists. The Ghaziabad police administration is facing questions over the delay in action, while protesters are demanding transparency, justice and accountability. This latest Ghaziabad news update covers the ongoing journalist movement, public support, allegations and the demand for an impartial inquiry.


















