AIN NEWS 1 | मनोरंजन डेस्क
कहते हैं कि अगर हौसले मजबूत हों तो कोई भी कमी इंसान के सपनों की राह नहीं रोक सकती। बुंदेलखंड के रहने वाले दृष्टिबाधित लोकगायक सुनील लोधी की कहानी इसी बात को साबित करती है। बचपन से तंबूरा लेकर भजन और बुंदेली लोकगीत गाने वाले सुनील की आवाज अब गांव-कस्बों की चौपाल और स्थानीय मंचों से निकलकर बड़े पर्दे तक पहुंच गई है।
फिल्म ‘हनुमान अंश’ के भजन ‘मैंने तेरे ही भरोसे’ में सुनील लोधी ने अपनी आवाज दी है। इस भजन के जरिए उन्हें एक ऐसा मंच मिला है, जिसका सपना शायद उन्होंने भी कभी देखा होगा। खास बात यह है कि सुनील ने अपनी पहचान किसी बड़े फिल्मी परिवार या संगीत संस्थान के जरिए नहीं बनाई, बल्कि अपनी प्रतिभा और लगातार मेहनत के दम पर लोगों के बीच जगह बनाई।
बचपन से तंबूरा बना सुनील का साथी
सुनील लोधी बचपन से ही संगीत से जुड़े रहे हैं। दृष्टिबाधित होने के बावजूद उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। तंबूरा हाथ में लेकर वह भजन और बुंदेली लोकगीत गाते हुए अलग-अलग जगहों पर पहुंचते रहे।

स्थानीय कार्यक्रमों और धार्मिक आयोजनों में उनकी आवाज लोगों को आकर्षित करती रही। धीरे-धीरे उनके गाने रिकॉर्ड होकर सोशल मीडिया तक पहुंचने लगे और उनकी पहचान उनके क्षेत्र से बाहर भी बनने लगी।
सुनील की गायकी में बुंदेलखंड की मिट्टी की खुशबू और लोक संगीत की सहजता सुनाई देती है। यही वजह है कि उनकी आवाज लोगों से सीधे जुड़ती है।
‘मोरे संकट के कटैया’ ने दिलाई पहचान
सुनील लोधी का भजन ‘मोरे संकट के कटैया’ भी सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हुआ। इस भजन को ऑनलाइन लाखों लोगों ने देखा और सुना। इंटरनेट ने सुनील की आवाज को उन लोगों तक पहुंचा दिया, जो शायद कभी उनके स्थानीय कार्यक्रम में नहीं पहुंच सकते थे।
सोशल मीडिया पर मिले इस प्यार ने सुनील के लिए आगे बढ़ने का रास्ता तैयार किया। उनकी आवाज धीरे-धीरे संगीत से जुड़े लोगों का ध्यान आकर्षित करने लगी।
यहीं से उनके लिए फिल्मी दुनिया का रास्ता भी खुला।
एक रिकॉर्डिंग ने बदल दी जिंदगी
सुनील की आवाज से प्रभावित होकर म्यूजिक प्रोड्यूसर पंकज वीआरके का ध्यान उनकी ओर गया। इसके बाद सुनील को मुंबई बुलाया गया और उन्हें स्टूडियो में रिकॉर्डिंग का मौका मिला।
एक ग्रामीण और लोकगायक के लिए यह अनुभव अपने आप में बेहद खास था। जिस आवाज ने अब तक गांवों और स्थानीय मंचों पर लोगों का मनोरंजन किया था, वही आवाज रिकॉर्डिंग स्टूडियो में फिल्म के लिए रिकॉर्ड की जा रही थी।
सुनील ने अपनी गायकी के जरिए यह साबित किया कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती। जरूरत सिर्फ उसे सही मंच मिलने की होती है।
‘मैंने तेरे ही भरोसे’ में सुनाई दी सुनील की आवाज
फिल्म ‘हनुमान अंश’ के भजन ‘मैंने तेरे ही भरोसे’ में सुनील लोधी की आवाज सुनाई देती है। भक्ति से जुड़े इस गीत में उनकी लोकगायकी की झलक भी महसूस की जा सकती है।
भजन के फिल्म का हिस्सा बनने के बाद सुनील की पहचान एक बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंची है। उनके लिए यह सिर्फ एक गाना रिकॉर्ड करने का अवसर नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और संघर्ष का परिणाम है।
एक तरफ फिल्म के जरिए गीत को बड़ा मंच मिला है, वहीं दूसरी तरफ सुनील जैसे कलाकार की कहानी भी लोगों तक पहुंच रही है।
संघर्ष के बावजूद नहीं छोड़ा संगीत
सुनील लोधी की यात्रा को खास बनाने वाली बात सिर्फ उनका दृष्टिबाधित होना नहीं है, बल्कि यह है कि उन्होंने परिस्थितियों के बावजूद संगीत का साथ नहीं छोड़ा।
कई कलाकारों के लिए बड़े मंच तक पहुंचना आसान नहीं होता। खासकर लोक कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए लंबे समय तक स्थानीय स्तर पर काम करना पड़ता है। सुनील ने भी इसी रास्ते से अपनी पहचान बनाई।
उन्होंने तंबूरा थामा, भजन गाए और लोकगीतों को अपनी आवाज दी। धीरे-धीरे लोगों ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और सोशल मीडिया ने उनकी आवाज को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
लोक संगीत के लिए भी बड़ी उपलब्धि
सुनील लोधी की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। इसे बुंदेली लोक संगीत के लिए भी एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।
आज के दौर में जब संगीत की दुनिया तेजी से बदल रही है, क्षेत्रीय भाषाओं और लोकगीतों को भी नए मंच मिल रहे हैं। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने गांवों में मौजूद प्रतिभाओं को सीधे दर्शकों तक पहुंचने का अवसर दिया है।
सुनील की कहानी बताती है कि बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में भी ऐसी प्रतिभाएं मौजूद हैं, जिन्हें सही मंच मिलने की जरूरत है।
युवाओं के लिए प्रेरणा
सुनील लोधी की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा बन सकती है जो किसी कमी या मुश्किल परिस्थिति के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं।
उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, प्रतिभा और मेहनत के दम पर रास्ता बनाया जा सकता है। जरूरी है कि इंसान अपने हुनर पर भरोसा रखे और लगातार प्रयास करता रहे।
सुनील ने वर्षों तक छोटे मंचों पर गाया। उन्होंने लोकगीतों और भजनों को अपनी पहचान बनाया। सोशल मीडिया पर उनकी आवाज लोगों तक पहुंची और आखिरकार यही आवाज फिल्मी पर्दे तक पहुंच गई।
गांव की आवाज से बड़े पर्दे तक का सफर
सुनील लोधी के लिए ‘मैंने तेरे ही भरोसे’ सिर्फ एक भजन नहीं है। यह उनके लंबे संघर्ष, संगीत के प्रति समर्पण और अपनी प्रतिभा पर भरोसे की कहानी का अगला अध्याय है।
बुंदेलखंड की लोकधुनों से निकली उनकी आवाज अब फिल्म के जरिए बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंच रही है। उनके सफर की सबसे खूबसूरत बात यही है कि उन्होंने अपनी जड़ों को छोड़े बिना नई पहचान बनाई।
आज सुनील लोधी की कहानी लोगों को यह विश्वास दिलाती है कि सही अवसर मिलने पर छोटे से गांव या कस्बे की प्रतिभा भी बड़े मंच पर अपनी जगह बना सकती है।
फिल्म ‘हनुमान अंश’ के भजन ‘मैंने तेरे ही भरोसे’ के जरिए सुनील की आवाज अब उन लोगों तक पहुंच रही है, जो शायद उनके संघर्ष और प्रतिभा से पहले परिचित नहीं थे। उनकी कहानी आने वाले समय में कई ऐसे कलाकारों को आगे बढ़ने का हौसला दे सकती है, जो अपने सपनों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।
Hanuman Ansh song Maine Tere Hi Bharose features the soulful voice of Suneel Lodhi, a visually impaired folk singer from Bundelkhand. Known for singing Bundeli folk songs and devotional bhajans with his tambura since childhood, Suneel Lodhi gained online popularity with More Sankat Ke Kateiya before getting an opportunity to record for a Bollywood film. His inspiring journey highlights the power of talent, perseverance, folk music and digital platforms in helping regional artists reach a wider audience.



















