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जंतर-मंतर छात्र आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, सभी FIR रद्द, गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वालों पर नई FIR की अनुमति

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AIN NEWS 1 | नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली समेत देश के अलग-अलग राज्यों में दर्ज छात्र आंदोलन से जुड़ी FIR में आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए संबंधित FIR को रद्द करने का आदेश दिया है।

इस फैसले के बाद आंदोलन में शामिल रहे छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत मिली है। दिल्ली पुलिस के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और महाराष्ट्र पुलिस की ओर से भी अदालत के सामने FIR रद्द करने का अनुरोध किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों की इस मांग को स्वीकार कर लिया।

हालांकि, दिल्ली पुलिस को प्रदर्शन में शामिल ऐसे लोगों के खिलाफ नई FIR दर्ज करने की अनुमति दी गई है, जिनका गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। पुलिस ने ऐसे 2,873 लोगों का जिक्र अदालत के सामने किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत लिया फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों में अपने विशेष संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल किया। संविधान का अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को ऐसे आदेश देने की शक्ति देता है, जो किसी मामले में पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए जरूरी हों।

अदालत के फैसले के बाद संबंधित FIR में आगे जांच या कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। यह आदेश दिल्ली के साथ उन राज्यों की पुलिस पर भी लागू होगा, जिन्होंने अपने यहां दर्ज मामलों को खत्म करने की मांग की थी।

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से अनुरोध किया कि जिन राज्यों में आंदोलन को लेकर FIR दर्ज हुई हैं, वहां भी आगे किसी तरह की कार्रवाई नहीं की जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस अनुरोध को भी स्वीकार करते हुए बाकी FIR में आगे कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया।

दिल्ली में दर्ज हुई थीं 13 FIR

जुलाई में हुए छात्र आंदोलन के दौरान दिल्ली पुलिस ने 20 जुलाई से 25 जुलाई के बीच कुल 13 FIR दर्ज की थीं। इन मामलों को लेकर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच विवाद सामने आया था।

सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से इन सभी 13 FIR को रद्द करने का अनुरोध किया। पुलिस की ओर से यह भी कहा गया कि प्रदर्शन में शामिल लोगों में से जिन 2,873 लोगों का गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड है, उनके खिलाफ अलग से एक नई FIR दर्ज करने की अनुमति दी जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के इस अनुरोध को भी स्वीकार कर लिया। इसका मतलब है कि सामान्य प्रदर्शनकारियों को राहत मिलेगी, लेकिन गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुला रहेगा।

केंद्र सरकार ने छात्रों से किए थे कई वादे

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार का पक्ष अदालत के सामने रखा। उन्होंने कहा कि सरकार ने आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ कुछ आश्वासन और वादे किए थे। सरकार अब इन वादों को पूरा करना चाहती है।

इनमें छात्र आंदोलन से जुड़े मुकदमों को वापस लेना, भविष्य में इन मामलों को लेकर नई FIR दर्ज नहीं करना और आंदोलन के दौरान आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को आर्थिक मुआवजा देने जैसे मुद्दे शामिल हैं।

सॉलिसिटर जनरल ने अदालत से कहा कि सरकार छात्रों से किए गए अपने वादों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसी आधार पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से संबंधित मामलों में राहत देने का अनुरोध किया।

आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मिलेगा मुआवजा

सुनवाई के दौरान छात्रों की आत्महत्या का मुद्दा भी अदालत के सामने उठा। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि NEET परीक्षा से जुड़े तनाव के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की दिशा में सरकार काम कर रही है।

उन्होंने अदालत से फिलहाल मुआवजे की राशि को लेकर कोई अंतिम आदेश जारी नहीं करने का अनुरोध किया। सरकार का कहना था कि अदालत की ओर से दिया गया कोई भी आदेश भविष्य में होने वाली दूसरी परीक्षाओं और इसी तरह के मामलों में उदाहरण बन सकता है।

सरकार की ओर से बताया गया कि मुआवजे को लेकर एक फॉर्मूला तैयार किया जा रहा है। इसके लिए तीन महीने का समय मांगा गया। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि जल्द ही NEET परीक्षा के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे की व्यवस्था की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया और मुआवजे से जुड़े मामले में फिलहाल सरकार को समय दिया है।

आंदोलन से जुड़े लोगों को बड़ी राहत

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को छात्र आंदोलन से जुड़े लोगों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। FIR रद्द होने के बाद उन मामलों में आरोपित प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई नहीं होगी।

हालांकि, अदालत ने गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को इस राहत से अलग रखा है। दिल्ली पुलिस को 2,873 ऐसे लोगों के खिलाफ नई FIR दर्ज करने की अनुमति दी गई है, जिनका गंभीर आपराधिक इतिहास बताया गया है।

इस तरह सुप्रीम कोर्ट के फैसले में एक तरफ आम प्रदर्शनकारियों को राहत दी गई है, वहीं गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई का विकल्प भी खुला रखा गया है।

सौरभ दास ने सुप्रीम कोर्ट का जताया आभार

सुनवाई के दौरान कोर्ट में आंदोलन से जुड़े संगठन के सह-संयोजक सौरभ दास भी मौजूद थे। उन्होंने हाथ जोड़कर सुप्रीम कोर्ट के जजों का धन्यवाद किया।

मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। सौरभ दास ने अदालत के फैसले को ऐतिहासिक बताया और कहा कि संगठन की ओर से 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च को वापस लिया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने उनके इस बयान को भी रिकॉर्ड पर लेने का निर्देश दिया। इसके बाद 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च को लेकर भी स्थिति स्पष्ट हो गई।

5 सितंबर के प्रस्तावित मार्च पर भी फैसला

छात्र आंदोलन से जुड़े लोगों की ओर से 5 सितंबर को दिल्ली में मार्च निकालने की योजना बनाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सौरभ दास ने इस प्रस्तावित मार्च को वापस लेने की घोषणा की।

अदालत ने उनके बयान को रिकॉर्ड में शामिल करने का आदेश दिया। इस तरह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आंदोलन से जुड़े मामलों में कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ प्रस्तावित मार्च को लेकर भी स्थिति साफ हो गई।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अहम बातें

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों में कई महत्वपूर्ण बातें सामने आई हैं। दिल्ली समेत कई राज्यों में दर्ज FIR में अब आगे कार्रवाई नहीं होगी। कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्ति का इस्तेमाल किया है।

दिल्ली में 20 से 25 जुलाई के बीच दर्ज की गई 13 FIR को रद्द करने का रास्ता साफ हो गया है। वहीं, गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,873 लोगों के खिलाफ नई FIR दर्ज करने की अनुमति दिल्ली पुलिस को मिली है।

केंद्र सरकार ने छात्रों से मुकदमे वापस लेने, भविष्य में FIR नहीं करने और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने का आश्वासन दिया है। मुआवजे की व्यवस्था के लिए सरकार ने तीन महीने का समय मांगा है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए छात्र आंदोलन से जुड़ी FIR में आगे की कार्रवाई रोक दी और संबंधित FIR रद्द करने का आदेश दिया।
  • दिल्ली में दर्ज 13 FIR को खत्म करने की अनुमति दी गई, लेकिन गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,873 लोगों के खिलाफ नई FIR दर्ज करने की अनुमति पुलिस को मिली।
  • केंद्र सरकार ने आंदोलन से जुड़े मुकदमे वापस लेने और NEET परीक्षा के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने का आश्वासन दिया है।

 

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Pawan Chaudhary
Pawan Chaudhary
पवन चौधरी एक सक्रिय पत्रकार एवं समाचार लेखक हैं, जो जनहित से जुड़े मुद्दों, स्थानीय घटनाक्रम और सामाजिक सरोकारों को प्रमुखता से अपनी पत्रकारिता में स्थान देते हैं। वे जमीनी स्तर की खबरों को तथ्यपरक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के माध्यम से पवन चौधरी आम लोगों की समस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों, सामाजिक मुद्दों और क्षेत्रीय घटनाओं को सामने लाने का प्रयास करते हैं। उनका उद्देश्य निष्पक्ष एवं जिम्मेदार पत्रकारिता के जरिए समाज में जागरूकता बढ़ाना और महत्वपूर्ण मुद्दों को लोगों की आवाज बनाना है।

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