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वैश्विक मंच पर मजबूत हुआ भारत का कद, अमेरिका-रूस से रिश्तों के बीच आत्मनिर्भर रक्षा शक्ति की ओर बढ़ता देश!

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वैश्विक राजनीति में भारत की बढ़ती ताकत, दुनिया को दिख रही नई रणनीतिक शक्ति

AIN NEWS 1: पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर जिस तरह अपनी स्थिति मजबूत की है, उसने दुनिया की बड़ी ताकतों को भी भारत की भूमिका पर गंभीरता से सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। चाहे रूस से तेल खरीदने का मुद्दा हो, अमेरिका के साथ रणनीतिक संबंध हों, पड़ोसी देशों की मदद का मामला हो या फिर रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता—हर क्षेत्र में भारत ने अपनी स्वतंत्र और मजबूत नीति का परिचय दिया है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, कांग्रेस सांसद शशि थरूर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के हालिया बयान इस बात का संकेत देते हैं कि भारत अब सिर्फ क्षेत्रीय शक्ति नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रभाव डालने वाला देश बनता जा रहा है।

रूस से तेल खरीदने पर भारत का साफ संदेश

भारत ने हमेशा अपनी विदेश नीति को राष्ट्रीय हितों के आधार पर तय किया है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जब पश्चिमी देशों ने रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए, तब भारत पर भी दबाव बनाया गया कि वह रूस से तेल खरीदना कम करे। लेकिन भारत ने साफ कर दिया कि देश की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत अपने फैसले लेने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है। उन्होंने कहा कि जहां से भारत को सस्ता और लाभकारी तेल मिलेगा, भारत वहीं से तेल खरीदेगा। अगर रूस भारत को कम कीमत पर तेल उपलब्ध कराता है तो भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा।

जयशंकर का यह बयान सिर्फ ऊर्जा नीति तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता का संदेश भी माना जा रहा है। भारत ने यह दिखाया कि वह किसी भी वैश्विक दबाव में अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा।

अमेरिका के साथ मजबूत हो रहे रिश्ते

भारत और अमेरिका के संबंध पिछले कुछ वर्षों में काफी मजबूत हुए हैं। रक्षा, व्यापार, तकनीक और इंडो-पैसिफिक रणनीति जैसे कई क्षेत्रों में दोनों देशों की साझेदारी लगातार बढ़ रही है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ करते हुए कहा कि वह मोदी को पसंद करते हैं और भारत के साथ अमेरिका के संबंध पहले से कहीं अधिक मजबूत हुए हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत अमेरिका पर भरोसा कर सकता है और दोनों देशों के रिश्ते नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं।

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। अमेरिका भी भारत को एशिया में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहा है। चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने में भी भारत की भूमिका को अहम माना जा रहा है।

संकट के समय मदद कर भरोसा जीत रहा भारत

भारत की विदेश नीति सिर्फ रणनीतिक साझेदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवीय सहायता और पड़ोसी देशों के साथ सहयोग भी उसकी बड़ी ताकत बन चुका है।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मालदीव का उदाहरण देते हुए कहा कि भले ही वहां चुनाव के दौरान “इंडिया आउट” अभियान चलाया गया हो, लेकिन जब मालदीव में पानी का संकट आया तो सबसे पहले भारत ने मदद पहुंचाई।

भारत ने हमेशा अपने पड़ोसी देशों की आपदा और संकट के समय सहायता की है। चाहे नेपाल में भूकंप हो, श्रीलंका का आर्थिक संकट हो या फिर कोविड महामारी—भारत ने हर परिस्थिति में आगे बढ़कर सहयोग किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि इसी वजह से दुनिया में भारत की विश्वसनीयता लगातार बढ़ रही है। भारत को अब एक जिम्मेदार और भरोसेमंद वैश्विक शक्ति के रूप में देखा जा रहा है।

रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ा कदम

भारत अब सिर्फ कूटनीतिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि सैन्य और रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में एक गोला-बारूद निर्माण यूनिट के उद्घाटन के दौरान कहा कि आने वाले 25 से 30 वर्षों में भारत दुनिया के सबसे बड़े हथियार निर्यातकों में शामिल हो सकता है।

उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी को 50 प्रतिशत तक पहुंचाना है। इससे देश में रोजगार बढ़ेगा, नई तकनीकों का विकास होगा और भारत विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम कर सकेगा।

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में कई बड़े कदम उठाए हैं। मिसाइल सिस्टम, युद्धपोत, लड़ाकू विमान, ड्रोन और आधुनिक हथियारों के निर्माण में भारत तेजी से प्रगति कर रहा है।

भारत अब कई देशों को रक्षा उपकरण निर्यात भी कर रहा है, जिससे उसकी वैश्विक रक्षा बाजार में पहचान मजबूत हो रही है।

मोदी सरकार की विदेश नीति का असर

विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने “रणनीतिक संतुलन” की नीति अपनाई है। भारत ने एक तरफ अमेरिका के साथ रिश्ते मजबूत किए हैं, वहीं दूसरी ओर रूस के साथ भी पुराने संबंध कायम रखे हैं।

भारत ने यह साबित किया है कि वह किसी एक गुट की राजनीति का हिस्सा बनने के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार फैसले लेता है। यही वजह है कि आज दुनिया के बड़े देश भारत के साथ मजबूत संबंध बनाए रखना चाहते हैं।

दुनिया में तेजी से बढ़ रहा भारत का प्रभाव

ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा उत्पादन, मानवीय सहायता और स्वतंत्र विदेश नीति—इन सभी क्षेत्रों में भारत की बढ़ती सक्रियता ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। भारत अब केवल विकासशील देश की छवि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वह वैश्विक निर्णयों को प्रभावित करने वाली ताकत के रूप में उभर रहा है।

आने वाले वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था, सैन्य क्षमता और कूटनीतिक प्रभाव और अधिक बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। यही कारण है कि दुनिया की बड़ी शक्तियां अब भारत को नजरअंदाज नहीं कर सकतीं।

India is rapidly emerging as a global power through its independent foreign policy, strong diplomatic ties with both the United States and Russia, expanding defense manufacturing capabilities, and increasing international trust. Statements by External Affairs Minister S. Jaishankar, US President Donald Trump, Congress MP Shashi Tharoor, and Defense Minister Rajnath Singh reflect India’s growing influence in global politics, energy security, and military exports. Under Prime Minister Narendra Modi’s leadership, India continues to strengthen its strategic autonomy while becoming a key player in world affairs and defense production.

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