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“12 साल से पाक में हूं, मां से मिलने आई थी”: अटारी बॉर्डर से लौटती शर्मीन इरफान की भावुक अपील — “आतंकवाद खत्म हो, लेकिन आम लोगों को सजा क्यों?”

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Indian Woman Married in Pakistan Returns Amid Pahalgam Terror Tensions

 

AIN NEWS 1 अटारी, अमृतसर: भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक तनाव और आतंकी घटनाओं के बीच एक भावुक दृश्य सामने आया, जब दिल्ली की रहने वाली शर्मीन इरफान, जो कराची (पाकिस्तान) में अपने पति के साथ रहती हैं, भारत से पाकिस्तान वापस लौटीं। शर्मीन भारतीय पासपोर्ट धारक हैं और उनकी शादी 12 साल पहले पाकिस्तान के नागरिक से हुई थी। उनका एक छोटा बच्चा भी है।

शर्मीन हाल ही में एक महीने के लिए भारत आई थीं ताकि वह अपनी बीमार मां से मिल सकें। उन्होंने पाकिस्तानी दूतावास से वीज़ा प्राप्त किया और भारत आकर दिल्ली में अपनी मां के साथ समय बिताया। लेकिन जैसे ही पहलगाम में आतंकवादी हमला हुआ, सीमा पार रिश्तों पर तनाव और संदेह बढ़ गया।

इस हमले के बाद, पाकिस्तान दूतावास ने शर्मीन को सलाह दी कि वह जल्द से जल्द भारत से लौट जाएं। इस सलाह के अनुसार, उन्होंने अटारी सीमा से पाकिस्तान की ओर वापसी का फैसला किया। अटारी बॉर्डर पर मीडिया से बातचीत के दौरान शर्मीन काफी भावुक दिखीं।

उन्होंने कहा,

“मेरी शादी को 12 साल हो गए हैं। मैं एक महीने के लिए अपनी बीमार मां से मिलने भारत आई थी। मुझे पाकिस्तान एम्बेसी से वीज़ा मिला था और उन्होंने कहा कि आज ही वापस चली जाऊं।”

पहलगाम हमले को लेकर उन्होंने साफ शब्दों में कहा,

“जो घटना हुई वो बहुत गलत थी। आतंकवाद का खात्मा होना चाहिए, लेकिन आम आदमी को क्यों परेशान किया जा रहा है?”

उन्होंने भारत और पाकिस्तान दोनों सरकारों से अपील की कि आम नागरिकों की परेशानी को समझा जाए। उनका सवाल सीधा था — जब आतंकवादी घटनाओं के लिए ज़िम्मेदार लोग कुछ और हैं, तो सीमा पार रिश्ते निभा रहे लोग क्यों भुगतें?

शर्मीन की आपबीती:

शर्मीन का जीवन दो देशों के बीच बंटा हुआ है। एक तरफ उनका जन्म और परवरिश भारत में हुई है, वहीं दूसरी ओर उनकी शादी और वर्तमान जीवन पाकिस्तान में है। उन्होंने कहा कि वह इंसानियत और शांति में विश्वास रखती हैं और राजनीति या आतंकवाद से उनका कोई लेना-देना नहीं है।

“एक मां की बेटी के रूप में मैं अपनी मां की देखभाल के लिए आई थी। लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि जल्द लौटने को कहा गया,” उन्होंने बताया।

सीमा पर तनाव के असर:

भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले किसी भी आतंकी हमले का असर आम लोगों पर पड़ता है, खासतौर से उन पर जो दोनों देशों से जुड़े होते हैं — जैसे विवाह, पारिवारिक रिश्ते या व्यापार। अटारी बॉर्डर पर शर्मीन जैसे कई लोग रोज़ाना इस असमंजस में रहते हैं कि क्या वे सुरक्षित रूप से सीमा पार कर पाएंगे।

आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख, लेकिन आम जनता को राहत की मांग:

शर्मीन ने यह भी कहा कि सरकार को आतंकियों के खिलाफ कड़ा एक्शन लेना चाहिए, लेकिन ऐसा कदम न उठाया जाए जिससे मासूम लोगों को तकलीफ हो।

“आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन हम जैसे लोगों को क्यों सजा मिल रही है?” — शर्मीन ने सवाल उठाया।

शर्मीन इरफान की कहानी सिर्फ एक महिला की नहीं है, बल्कि वह उन सैकड़ों लोगों की आवाज़ है जो सरहद के इस पार और उस पार अपने रिश्तों और जीवन को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। राजनीतिक फैसलों और आतंकवादी घटनाओं का सीधा असर उनके जीवन पर पड़ता है, जिनका आतंकवाद या राजनीति से कोई वास्ता नहीं होता।

इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आतंक के खिलाफ लड़ाई ज़रूरी है, लेकिन इसमें मासूमों को बलि का बकरा नहीं बनाया जाना चाहिए।

Sharmeen Irfan, an Indian passport holder married to a Pakistani man in Karachi, returned to Pakistan from the Attari border after visiting her sick mother in Delhi. Speaking emotionally amid heightened India-Pakistan tensions following the Pahalgam terror attack, she condemned terrorism and called for peace. Her case highlights the plight of cross-border families and the human impact of political strife. This story sheds light on Indian-Pakistani marriages, terrorism in Kashmir, and the Attari border situation, making it a significant issue in current India-Pakistan relations.

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