AIN NEWS 1 इंदौर/देवास। मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई के दौरान पुलिस विभाग में पदस्थ प्रधान आरक्षक चालक फिरोज खान की संपत्तियों को लेकर लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। इंदौर स्थित पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय (PTC) में तैनात फिरोज खान से जुड़े मामले में जांच एजेंसी को अब तक कुल 38 अचल संपत्तियों की जानकारी मिली है। इन संपत्तियों में जमीन, आवासीय भूखंड और अन्य अचल संपत्तियां शामिल हैं। जांच के अनुसार, इनका सरकारी गाइडलाइन मूल्य लगभग 12.97 करोड़ रुपये, जबकि अनुमानित वर्तमान बाजार मूल्य 35.46 करोड़ रुपये से अधिक है।
लोकायुक्त ने 14 अक्टूबर 2026 को इंदौर और देवास में फिरोज खान तथा उनसे जुड़े लोगों के 15 ठिकानों पर तलाशी अभियान शुरू किया था। इसके बाद राजस्व विभाग, पंजीयन विभाग और अन्य संबंधित कार्यालयों से संपत्तियों के दस्तावेज जुटाए गए। 16 अक्टूबर तक की जांच में संपत्तियों की संख्या 33 से बढ़कर 38 हो गई। जांच एजेंसी अब इन संपत्तियों के स्वामित्व, खरीद में खर्च की गई रकम और धन के स्रोत का पता लगाने में जुटी है।
15 ठिकानों पर हुई थी लोकायुक्त की कार्रवाई
लोकायुक्त पुलिस की इंदौर और उज्जैन इकाइयों की संयुक्त टीम ने 14 अक्टूबर को यह कार्रवाई शुरू की थी। जांच का उद्देश्य फिरोज खान की ज्ञात आय, खर्च और उनके नाम से या उनसे जुड़े व्यक्तियों तथा व्यावसायिक संस्थाओं के नाम पर अर्जित संपत्तियों की पड़ताल करना है।
तलाशी के दौरान जमीन और मकानों से संबंधित दस्तावेजों के साथ बैंक खातों, वाहनों तथा व्यावसायिक फर्मों से जुड़े रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में आए। शुरुआती कार्रवाई में 33 अचल संपत्तियों की जानकारी सामने आई थी। बाद में अलग-अलग विभागों से प्राप्त रिकॉर्ड का मिलान करने पर पांच और संपत्तियों का पता चला, जिससे कुल संख्या 38 हो गई।
लोकायुक्त की टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन संपत्तियों को खरीदने के लिए धन कहां से आया और क्या संपत्तियों की खरीद में इस्तेमाल की गई रकम फिरोज खान की ज्ञात आय के अनुरूप है।
35.46 करोड़ रुपये आंकी गई संपत्तियों की बाजार कीमत
जांच में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, 38 अचल संपत्तियों का कुल सरकारी गाइडलाइन मूल्य 12,97,05,901 रुपये है। वहीं, इनका अनुमानित बाजार मूल्य 35,46,46,768 रुपये बताया गया है।
यहां यह समझना जरूरी है कि सरकारी गाइडलाइन मूल्य और बाजार मूल्य अलग-अलग होते हैं। गाइडलाइन मूल्य वह आधार होता है, जिसके अनुसार संपत्ति के पंजीयन के लिए न्यूनतम मूल्य निर्धारित किया जाता है। बाजार मूल्य संपत्ति की मौजूदा अनुमानित कीमत को दर्शाता है।
इसी कारण दोनों आंकड़ों में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। हालांकि, संपत्तियों का बाजार मूल्य अधिक होने मात्र से यह साबित नहीं होता कि पूरी रकम अवैध तरीके से अर्जित की गई है। इसके लिए जांच एजेंसी को संपत्ति खरीदने के स्रोत, भुगतान के रिकॉर्ड और आरोपी की वैध आय का आकलन करना होगा।
रोशनी वर्मा के नाम पर कृषि भूमि का रिकॉर्ड
जांच के दौरान देवास जिले के राजोदा गांव में रोशनी वर्मा के नाम पर दर्ज 1.15 हेक्टेयर कृषि भूमि की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इस जमीन की रजिस्ट्री में कीमत 62,46,562 रुपये दर्ज है।
लोकायुक्त इस संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि जमीन की खरीद में किस धनराशि का इस्तेमाल हुआ और उसका भुगतान किस माध्यम से किया गया।
किसी व्यक्ति के नाम पर संपत्ति दर्ज होने से अपने आप यह साबित नहीं होता कि संपत्ति किसी दूसरे व्यक्ति की है या संबंधित व्यक्ति किसी अपराध में शामिल है। इन पहलुओं पर निष्कर्ष दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।
साहिल ट्रेडिंग कंपनी के नाम पर मिला भूखंड
देवास की शक्ति नगर कॉलोनी में साहिल ट्रेडिंग कंपनी के नाम पर 1,250 वर्गफीट के भूखंड का रिकॉर्ड भी जांच में सामने आया है। यह कॉलोनी शक्ति नगर गृह निर्माण सहकारी संस्था द्वारा विकसित की गई बताई गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भूखंड की रजिस्ट्री में कीमत 6,16,169 रुपये दर्ज है।
लोकायुक्त की जांच में संबंधित फर्मों के वित्तीय रिकॉर्ड और संपत्तियों की खरीद से जुड़े दस्तावेज महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कंपनियों के नाम पर दर्ज संपत्तियों में निवेश की गई रकम कहां से आई और संबंधित लेनदेन का वास्तविक स्वरूप क्या था।
नफीस खान और रानु कुशवाह के नाम भी संपत्तियां
जांच के दौरान देवास की शालीमार कॉलोनी के ब्लॉक-के में नफीस खान के नाम पर 40.5 वर्गमीटर के भूखंड का रिकॉर्ड मिलने की जानकारी दी गई है। इसकी रजिस्ट्री कीमत 2,50,596 रुपये बताई गई है।
इसके अतिरिक्त देवास जिले के लोहाना गांव में रानु कुशवाह के नाम पर 0.305 हेक्टेयर कृषि भूमि का रिकॉर्ड सामने आया है। इस जमीन की रजिस्ट्री में 7,49,946 रुपये का मूल्य दर्ज होने की जानकारी उपलब्ध रिपोर्टों में दी गई है।
इन संपत्तियों को लेकर भी जांच एजेंसी दस्तावेजों और भुगतान के स्रोतों की पड़ताल कर रही है। फिलहाल इन व्यक्तियों के नाम पर संपत्ति दर्ज होने के आधार पर किसी के खिलाफ दोष सिद्ध मानना उचित नहीं होगा। जांच में सामने आने वाले वित्तीय और कानूनी साक्ष्य ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेंगे।
9 वाहन और 21 बैंक खातों की जानकारी भी मिली
लोकायुक्त की शुरुआती कार्रवाई में लगभग नौ वाहनों से जुड़े दस्तावेज भी सामने आए थे। इनमें ट्रक, कार, महिंद्रा स्कॉर्पियो, स्कूटर और मोटरसाइकिल जैसे वाहन शामिल बताए गए हैं।
इसके अलावा इंदौर, उज्जैन और देवास में फिरोज खान, उनके परिवार के सदस्यों तथा संबंधित लोगों के नाम पर लगभग 21 बैंक खातों की जानकारी सामने आने की खबरें हैं। जांच एजेंसी इन खातों से जुड़े लेनदेन और संबंधित फर्मों के वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। कुछ रिपोर्टों में खातों से निकासी पर रोक लगाए जाने की जानकारी भी दी गई है।
जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि संपत्तियों की खरीद, वाहनों की खरीद और अन्य निवेशों के लिए धन कहां से आया। बैंक खातों के लेनदेन का संपत्ति खरीद के दस्तावेजों से मिलान करने पर धन के प्रवाह को समझने में मदद मिल सकती है।
आय और खर्च के बीच अंतर की जांच
शुरुआती मीडिया रिपोर्टों में फिरोज खान की नौकरी के दौरान वेतन से हुई कमाई लगभग 75 लाख रुपये बताई गई थी। वहीं, जांच के दौरान उनकी कुल ज्ञात आय का अनुमान लगभग 1.93 करोड़ रुपये और चल-अचल संपत्तियों पर कुल खर्च का आंकड़ा लगभग 15.52 करोड़ रुपये तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
इन आंकड़ों में वेतन के अतिरिक्त आय के अन्य ज्ञात स्रोतों को भी शामिल किए जाने की बात कही गई है। इसलिए केवल वेतन और संपत्तियों की बाजार कीमत की तुलना करके अंतिम निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। जांच एजेंसी को आय के सभी वैध स्रोतों, निवेश, संपत्ति की वास्तविक खरीद कीमत और अन्य वित्तीय लेनदेन का हिसाब मिलाना होगा।
यदि जांच में ज्ञात वैध आय की तुलना में अनुपातहीन संपत्ति अर्जित किए जाने के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो संबंधित कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
कई व्यावसायिक संस्थाएं भी जांच के दायरे में
प्रारंभिक रिपोर्टों में साहिल ट्रेडिंग कंपनी, रॉयल ग्रीन रियल एस्टेट, रोशनी सेल्स एंड सर्विस, महाराजा रियल एस्टेट और ब्लैक हॉरनेट सहित कुछ व्यावसायिक संस्थाओं के नाम सामने आए हैं। जांच एजेंसी इनसे जुड़े दस्तावेजों, बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की जानकारी जुटा रही है।
इसके साथ ही कृषि भूमि के कुछ सौदों और अन्य संपत्ति लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच किए जाने की जानकारी है। हालांकि, किसी फर्म या व्यक्ति का नाम जांच में आने का अर्थ अपने आप यह नहीं है कि उसके खिलाफ अपराध साबित हो चुका है।
जांच जारी, दस्तावेजों से स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
फिरोज खान से जुड़े मामले में लोकायुक्त पुलिस की जांच का दायरा संपत्तियों, बैंक खातों, वाहनों और व्यावसायिक संस्थाओं तक फैला हुआ है। 38 अचल संपत्तियों की जानकारी सामने आने के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल इन संपत्तियों की खरीद में इस्तेमाल की गई रकम के स्रोत का है।
जांच पूरी होने और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ज्ञात आय और खर्च के बीच कितना अंतर है तथा संबंधित संपत्तियों के संबंध में कानूनी रूप से क्या कार्रवाई बनती है।
फिलहाल यह मामला आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों की जांच का है। अंतिम दोषसिद्धि सक्षम न्यायालय के निर्णय और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगी।
The Indore Lokayukta investigation into Madhya Pradesh Police head constable driver Firoz Khan has identified 38 immovable properties with an estimated market value of ₹35.46 crore. The ongoing disproportionate assets probe covers properties reportedly registered in the names of family members, associates and business entities in Indore and Dewas. Investigators are examining agricultural land, residential plots, bank accounts, vehicle records and financial transactions to determine the sources of funds used for asset acquisitions. The case has drawn attention to the Lokayukta’s anti-corruption investigation in Madhya Pradesh, with further findings expected as property documents and financial records are scrutinised.



















