AIN NEWS 1: खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने तीन कंपनियों के खिलाफ अभियोजन की कानूनी प्रक्रिया शुरू की है। इन मामलों में प्रियागोल्ड बिस्किट बनाने वाली सूर्या फूड एंड एग्रो लिमिटेड, डोडला डेयरी लिमिटेड और UEIR ऑर्गेनिक फूड्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की जांच में बिस्किट निर्माण में पशुओं के चारे के लिए निर्धारित चोकर के इस्तेमाल, दूध के एक नमूने में डिटर्जेंट या कास्टिक सोडा की मौजूदगी और पीली किशमिश में निर्धारित सीमा से अधिक कीटनाशक अवशेष मिलने की बात सामने आई है।
FSSAI ने 17 अक्टूबर 2026 को इस कार्रवाई की जानकारी दी। तीन कंपनियों के अलावा तीन अन्य खाद्य कारोबारियों को भी अलग-अलग नियामकीय खामियों के संबंध में नोटिस जारी किए गए हैं। इन मामलों ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, निर्माण प्रक्रिया और उपभोक्ताओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
प्रियागोल्ड बिस्किट बनाने वाली कंपनी पर क्यों हुई कार्रवाई?
FSSAI की कार्रवाई का पहला मामला सूर्या फूड एंड एग्रो लिमिटेड से जुड़ा है, जो प्रियागोल्ड ब्रांड के बिस्किट बनाती है। अधिकारियों के अनुसार, कंपनी के निर्माण परिसर का निरीक्षण एक उपभोक्ता की शिकायत के बाद किया गया था। जांच के दौरान खाद्य सुरक्षा से संबंधित कई गंभीर कमियां सामने आईं।
निरीक्षण में अधिकारियों ने पाया कि बिस्किट बनाने में फाइबर के स्रोत के रूप में ऐसे चोकर का इस्तेमाल किया जा रहा था, जिसे पशुओं के चारे के लिए रखा गया था। चोकर से भरी बोरियों पर भी यह संकेत मौजूद था कि सामग्री पशु आहार के लिए है, न कि इंसानों के खाने के लिए।
खाद्य पदार्थों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले प्रत्येक कच्चे माल की गुणवत्ता और उपयुक्तता महत्वपूर्ण होती है। किसी सामग्री का पशु आहार के लिए निर्धारित होना अपने आप में यह सुनिश्चित नहीं करता कि वह मानव उपभोग के लिए सुरक्षित भी है। इसके लिए खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप परीक्षण और स्वीकृति जरूरी होती है।
FSSAI के अनुसार, कंपनी के यहां मिली सामग्री मानव उपभोग के लिए निर्धारित नहीं थी। इसी आधार पर नियामक ने मामले को गंभीर खाद्य सुरक्षा उल्लंघन माना और कानूनी कार्रवाई शुरू की।
फैक्ट्री में साफ-सफाई और भंडारण की व्यवस्था पर भी सवाल
जांच के दौरान केवल कच्चे माल के इस्तेमाल में ही अनियमितता नहीं मिली, बल्कि निर्माण परिसर में साफ-सफाई और खाद्य सुरक्षा प्रबंधन से जुड़ी दूसरी कमियां भी सामने आईं।
अधिकारियों ने प्लांट की स्वच्छता, कीट नियंत्रण, कच्चे माल को रखने और अलग-अलग रखने की व्यवस्था, कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता तथा परिसर के रखरखाव में खामियां दर्ज कीं। निर्माण के दौरान तैयार किए जा रहे मध्यवर्ती मिश्रणों को संभालने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए।
खाद्य उत्पादन इकाइयों में स्वच्छता और कच्चे माल का उचित भंडारण बेहद जरूरी होता है। यदि सामग्री को गलत तरीके से रखा जाए या कीट नियंत्रण और सफाई के नियमों का पालन न हो, तो खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा बढ़ सकता है।
FSSAI ने गंभीर अनियमितताएं मिलने के बाद सूर्या फूड एंड एग्रो का लाइसेंस पहले ही निलंबित कर दिया था। अब कंपनी के खिलाफ अभियोजन की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है।
हालांकि, इस कार्रवाई को समझते समय यह अंतर ध्यान रखना जरूरी है कि नियामक द्वारा उल्लंघन दर्ज करना और अदालत द्वारा किसी कंपनी को दोषी ठहराना अलग-अलग बातें हैं। मामले का अंतिम निर्णय कानूनी प्रक्रिया के तहत होगा।
डोडला डेयरी के फुल क्रीम दूध का नमूना जांच में असुरक्षित
दूसरा मामला डोडला डेयरी लिमिटेड के फुल क्रीम दूध से संबंधित है। FSSAI ने कंपनी के दूध का एक नियामकीय नमूना लेकर जांच कराई थी। शुरुआती जांच में नमूना निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया, क्योंकि उसमें दूध की वसा यानी फैट की मात्रा तय न्यूनतम स्तर से कम थी।
कंपनी ने जांच के निष्कर्षों के खिलाफ अपील की। इसके बाद नमूने को रेफरल खाद्य प्रयोगशाला में भेजा गया, जहां दोबारा परीक्षण किया गया।
रेफरल प्रयोगशाला की जांच में नमूने को असुरक्षित घोषित किया गया। अधिकारियों के अनुसार, उसमें डिटर्जेंट या कास्टिक सोडा की मौजूदगी पाई गई। इसके साथ ही दूध में फैट की मात्रा भी निर्धारित न्यूनतम सीमा से कम थी।
इस रिपोर्ट के बाद डोडला डेयरी के खिलाफ भी अभियोजन की कानूनी प्रक्रिया शुरू करने की मंजूरी दी गई।
दूध रोजमर्रा के खानपान का अहम हिस्सा है। इसे बच्चों, बुजुर्गों और परिवार के अन्य सदस्यों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए इसकी गुणवत्ता और शुद्धता से जुड़ी किसी भी गंभीर अनियमितता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में जिस नमूने की जांच का उल्लेख है, वह एक विशिष्ट नियामकीय नमूना है। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए कि कंपनी के सभी उत्पादों या बाजार में उपलब्ध दूध के प्रत्येक पैकेट में ऐसी समस्या है।
पीली किशमिश में निर्धारित सीमा से अधिक कीटनाशक अवशेष
तीसरा मामला UEIR ऑर्गेनिक फूड्स प्राइवेट लिमिटेड की पीली किशमिश से जुड़ा है। FSSAI की जांच में कंपनी द्वारा बेची जा रही पीली किशमिश के एक नमूने को असुरक्षित पाया गया।
खाद्य विश्लेषक की रिपोर्ट में कीटनाशकों के अवशेष निर्धारित अधिकतम सीमा से अधिक होने की बात सामने आई। कंपनी की ओर से अपील किए जाने के बाद नमूने को रेफरल खाद्य प्रयोगशाला में भेजा गया।
रेफरल प्रयोगशाला ने भी नमूने को असुरक्षित माना। रिपोर्ट के अनुसार, थियामेथोक्साम और फ्लुओपाइराम के मेटाबोलाइट्स यानी इन रसायनों के टूटने से बनने वाले अवशेषों की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक थी।
कृषि में कीटनाशकों का इस्तेमाल फसलों को कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए किया जाता है। लेकिन खाद्य पदार्थों में इनके अवशेष निर्धारित अधिकतम सीमा के भीतर होना आवश्यक है। तय सीमा से अधिक अवशेष मिलने पर खाद्य सुरक्षा संबंधी कार्रवाई की जा सकती है।
किशमिश जैसे सूखे मेवों को अक्सर सीधे खाया जाता है या मिठाइयों, बेकरी उत्पादों और दूसरे खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए इनकी गुणवत्ता की जांच उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
FSSAI ने जांच के निष्कर्षों के आधार पर UEIR ऑर्गेनिक फूड्स के खिलाफ भी अभियोजन की कानूनी प्रक्रिया शुरू की है।
तीन अन्य खाद्य कारोबारियों को भी नोटिस
FSSAI की कार्रवाई केवल इन तीन कंपनियों तक सीमित नहीं रही। नियामक ने तीन अन्य खाद्य कारोबारियों को भी नियमों के पालन में कमियां मिलने के बाद नोटिस जारी किए हैं।
इनमें Narpadham Foods, Sun Ridges Health Carers और Sha Kantilal Jayantilal शामिल हैं।
Narpadham Foods के परिसर में लाइसेंस को प्रमुखता से प्रदर्शित न करने, पर्याप्त कार्यस्थल की कमी, धूल-मिट्टी, भंडारण व्यवस्था और साफ-सफाई से जुड़ी समस्याएं दर्ज की गईं। कच्चे माल को उचित तरीके से अलग रखने, कीट नियंत्रण और उपकरणों के रखरखाव में भी कमियां बताई गईं। कंपनी को उत्पादों के लेबल और प्रचार सामग्री पर किए गए स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी दावों की समीक्षा करने के निर्देश भी दिए गए।
Sun Ridges Health Carers के मामले में खाद्य पदार्थों को सीधे फर्श पर रखने, कीटों को रोकने के लिए दरवाजों की उचित व्यवस्था न होने और जरूरी रिकॉर्ड उपलब्ध न होने जैसी कमियां सामने आईं। खाद्य पदार्थों, पीने के पानी और कच्चे माल की जांच से संबंधित रिकॉर्ड के अलावा कर्मचारियों की स्वास्थ्य जांच और खाद्य सुरक्षा प्रबंधन से जुड़े दस्तावेजों की उपलब्धता पर भी सवाल उठे।
वहीं, Sha Kantilal Jayantilal को परिसर निरीक्षण के दौरान बंद मिलने और लाइसेंस में दर्ज कारोबारी गतिविधियों के सत्यापन के संबंध में नोटिस जारी किया गया। कारोबारी को अपनी वास्तविक गतिविधियों के समर्थन में दस्तावेज उपलब्ध कराने और लाइसेंस में सही श्रेणियां दर्ज कराने के लिए कहा गया है।
इन मामलों में नोटिस जारी होना अपने आप में दोष सिद्ध होना नहीं है। संबंधित कारोबारियों को स्पष्टीकरण देने और नियामकीय आवश्यकताओं का पालन करने का अवसर दिया जाता है। आगे की कार्रवाई उनके जवाब और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
खाद्य सुरक्षा कानून के तहत होगी आगे की कार्रवाई
FSSAI देश में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री से जुड़े मानकों की निगरानी करता है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और इसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार, असुरक्षित या निर्धारित मानकों से कम गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों के मामलों में नियामकीय कार्रवाई की जा सकती है।
तीनों कंपनियों के मामलों में सामने आए निष्कर्ष अलग-अलग हैं। प्रियागोल्ड बिस्किट निर्माता के मामले में पशु आहार के लिए निर्धारित चोकर के इस्तेमाल और फैक्ट्री की स्वच्छता से संबंधित कमियां हैं। डोडला डेयरी के मामले में दूध के नमूने में डिटर्जेंट या कास्टिक सोडा की मौजूदगी तथा कम फैट की बात सामने आई है। UEIR ऑर्गेनिक फूड्स के मामले में पीली किशमिश में कीटनाशक अवशेष निर्धारित सीमा से अधिक पाए गए।
इन निष्कर्षों के आधार पर अभियोजन की प्रक्रिया शुरू की गई है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में इन मामलों के अंतिम न्यायिक फैसले की जानकारी नहीं है। इसलिए कानूनी प्रक्रिया पूरी होने से पहले कंपनियों को दोषी करार देना उचित नहीं होगा।
उपभोक्ताओं के लिए क्या है जरूरी सलाह?
इस कार्रवाई के बाद उपभोक्ताओं को खाद्य पदार्थ खरीदते समय कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए। पैकेट पर निर्माण और समाप्ति तिथि, बैच नंबर, खाद्य लाइसेंस संबंधी जानकारी और पैकेज की सील जरूर देखें। खुले या बिना उचित लेबल वाले खाद्य पदार्थ खरीदने से बचें।
यदि किसी उत्पाद की गंध, रंग या बनावट असामान्य लगे, तो उसका सेवन न करें। किसी खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता को लेकर संदेह होने पर संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत की जा सकती है।
साथ ही, सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी भी दावे को बिना पुष्टि के सच न मानें। इस मामले में जांच के निष्कर्ष विशिष्ट नमूनों और निरीक्षणों से जुड़े हैं। उपभोक्ताओं को उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही निर्णय लेना चाहिए।
प्रियागोल्ड बिस्किट निर्माता सूर्या फूड एंड एग्रो, डोडला डेयरी और UEIR ऑर्गेनिक फूड्स के खिलाफ FSSAI की कार्रवाई खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन की अहमियत को सामने लाती है। एक मामले में पशु आहार के लिए निर्धारित चोकर के इस्तेमाल, दूसरे में दूध के नमूने में डिटर्जेंट या कास्टिक सोडा की मौजूदगी और तीसरे में पीली किशमिश में कीटनाशक अवशेषों की अधिक मात्रा की पुष्टि करने वाली प्रयोगशाला रिपोर्टों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है।
अब इन मामलों में आगे की कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया के परिणाम महत्वपूर्ण होंगे। उपभोक्ताओं के लिए जरूरी है कि वे जागरूक रहें, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर ध्यान दें और किसी भी संदिग्ध उत्पाद की शिकायत संबंधित विभाग तक पहुंचाएं।
The Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) has initiated prosecution proceedings against Surya Food & Agro, the manufacturer of Priyagold biscuits, Dodla Dairy Limited, and UEIR Organic Foods over alleged food safety violations. The cases involve cattle-feed bran used in biscuit manufacturing, detergent or caustic soda detected in a full-cream milk sample, and pesticide residues exceeding permitted limits in yellow raisins. The regulator has also issued notices to three other food businesses over hygiene, storage, sanitation and licensing issues. The action highlights the importance of food quality testing, regulatory compliance and consumer protection in India’s food industry.



















