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सांसद इक़रा हसन और यूपी पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक, जानिए सहारनपुर विवाद की पूरी कहानी!

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सांसद इक़रा हसन और यूपी पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक, जानिए सहारनपुर विवाद की पूरी कहानी

AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश की कैराना लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी की सांसद Iqra Hasan एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह बनी सहारनपुर में पुलिस अधिकारियों के साथ उनकी तीखी बहस, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मामला एक युवक की संदिग्ध मौत और उसके परिवार को इंसाफ दिलाने की मांग से जुड़ा है।

मंगलवार को इक़रा हसन पीड़ित परिवार के साथ सहारनपुर स्थित डीआईजी कार्यालय पहुंचीं, जहां पुलिस प्रशासन और उनके समर्थकों के बीच तनाव की स्थिति बन गई। पुलिस ने उनके कुछ समर्थकों को हिरासत में लेकर शांति व्यवस्था भंग करने और यातायात प्रभावित करने के आरोप में कार्रवाई की। वहीं सांसद ने पुलिस प्रशासन पर पीड़ित परिवार की बात न सुनने और दबाव बनाने के आरोप लगाए।

क्या है पूरा मामला?

पूरा विवाद शामली जिले के कांधला क्षेत्र के रहने वाले युवक मोनू कश्यप की मौत से जुड़ा है। लगभग एक महीने पहले मोनू की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। परिवार का आरोप है कि यह हत्या का मामला है और मुख्य आरोपी अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।

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मृतक की मां विमलेश देवी लगातार पुलिस से कार्रवाई की मांग कर रही थीं। इसी सिलसिले में सांसद इक़रा हसन उन्हें लेकर सहारनपुर के डीआईजी कार्यालय पहुंचीं ताकि उच्च अधिकारियों के सामने परिवार अपना पक्ष रख सके।

इक़रा हसन का कहना है कि पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिल रहा और स्थानीय पुलिस मामले में गंभीरता नहीं दिखा रही। उन्होंने आरोप लगाया कि जब मृतक की मां अपनी बात रख रही थीं, तब डीआईजी ने उन्हें बाहर जाने के लिए कह दिया, जिससे माहौल गरमा गया।

डीआईजी कार्यालय में बढ़ा तनाव

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में इक़रा हसन पुलिस अधिकारियों से बहस करती नजर आईं। वीडियो में वह कहती सुनाई देती हैं:

“क्या आपके गेट पर खड़ा होना भी गुनाह है? लोग अपनी फरियाद लेकर आपके पास आएंगे भी नहीं?”

एक अन्य वीडियो में महिला पुलिस अधिकारी उनके करीब आती दिखाई देती हैं, जिस पर सांसद कहती हैं:

“हाथ मत लगाइए।”

इस घटना के बाद माहौल और तनावपूर्ण हो गया। पुलिस का आरोप है कि सांसद के समर्थकों ने कार्यालय के बाहर सड़क जाम कर दी, जिससे ट्रैफिक प्रभावित हुआ। वहीं इक़रा हसन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके समर्थक पार्किंग क्षेत्र में खड़े थे और यातायात सामान्य रूप से चल रहा था।

पुलिस का क्या कहना है?

सहारनपुर पुलिस ने बयान जारी करते हुए कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया। पुलिस के अनुसार, जिन लोगों को पकड़ा गया, उनके खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई की गई है।

पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि इक़रा हसन को हिरासत में नहीं लिया गया था। अधिकारियों का कहना है कि सांसद की वरिष्ठ अधिकारियों और मजिस्ट्रेट से बातचीत हुई और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही।

डीआईजी पर लगाए गए दुर्व्यवहार के आरोपों को भी पुलिस ने सिरे से खारिज किया है। हालांकि पुलिस ने इस बात का विस्तृत जवाब नहीं दिया कि पीड़ित परिवार को कार्यालय से बाहर जाने के लिए क्यों कहा गया।

समाजवादी पार्टी का हमला

घटना के बाद समाजवादी पार्टी ने यूपी सरकार और पुलिस प्रशासन पर हमला बोला। पार्टी अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि जब जनता की आवाज उठाने वालों को हिरासत में लिया जाता है, तो इसका मतलब है कि सरकार दबाव में है।

सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं को जनता के मुद्दे उठाने से रोका जा रहा है। वहीं भाजपा समर्थकों ने पलटवार करते हुए कहा कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी थी।

समर्थकों को संबोधित करते हुए क्या बोलीं इक़रा?

थाने से बाहर आने के बाद इक़रा हसन ने अपने समर्थकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह किसी धर्म या जाति की लड़ाई नहीं है, बल्कि इंसाफ की लड़ाई है।

उन्होंने कहा:

“अगर आज हम किसी पीड़ित परिवार के साथ खड़े नहीं होंगे, तो कल हमारे साथ कुछ गलत होगा तो कोई हमारे लिए भी नहीं खड़ा होगा।”

उन्होंने पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाने का आरोप लगाया लेकिन कहा कि वे डरने वाली नहीं हैं और पीड़ित परिवार के लिए संघर्ष जारी रखेंगी।

कौन हैं इक़रा हसन?

31 वर्षीय Iqra Hasan देश की सबसे युवा सांसदों में गिनी जाती हैं। उन्होंने 2024 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की कैराना सीट से जीत हासिल कर राष्ट्रीय राजनीति में तेजी से अपनी पहचान बनाई।

इक़रा एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से आती हैं। उनके पिता चौधरी मुनव्वर हसन और मां तबस्सुम बेगम दोनों सांसद रह चुके हैं। उनके दादा अख्तर हसन भी राजनीति में सक्रिय रहे थे।

उन्होंने दिल्ली के क्वीन मैरी स्कूल और लेडी श्रीराम कॉलेज से पढ़ाई की। बाद में लंदन की SOAS यूनिवर्सिटी से इंटरनेशनल पॉलिटिक्स एंड लॉ में उच्च शिक्षा प्राप्त की।

अपने भाई नाहिद हसन के चुनावी अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाने के बाद वह खुद राजनीति में उतरीं और कम समय में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की प्रमुख युवा मुस्लिम महिला नेताओं में शामिल हो गईं।

धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों पर मुखर

इक़रा हसन अक्सर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखती हैं। हाल ही में उन्होंने बकरीद पर सड़क पर नमाज को लेकर दिए गए मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के बयान पर भी प्रतिक्रिया दी थी।

उन्होंने कहा था कि किसी एक समुदाय को निशाना बनाना सही नहीं है और संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है। उनके इस बयान पर सोशल मीडिया में काफी बहस भी हुई थी।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ मामला

सहारनपुर की यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। कुछ लोग इक़रा हसन के समर्थन में उतरे और उन्हें पीड़ित परिवार की आवाज उठाने वाली नेता बताया। वहीं कुछ लोगों ने पुलिस कार्रवाई को सही ठहराया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले समय में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है, क्योंकि इसमें कानून व्यवस्था, विपक्ष की भूमिका और प्रशासनिक रवैये जैसे कई पहलू जुड़े हुए हैं।

सहारनपुर में सांसद इक़रा हसन और पुलिस प्रशासन के बीच हुआ विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है। एक तरफ सांसद पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की बात कर रही हैं, वहीं पुलिस कानून व्यवस्था बनाए रखने की दलील दे रही है।

मोनू कश्यप मौत मामले की जांच अभी जारी है और परिवार इंसाफ की मांग कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पुलिस जांच किस दिशा में जाती है और क्या इस मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी होती है या नहीं।

Samajwadi Party MP Iqra Hasan sparked a major political controversy after her clash with Uttar Pradesh Police in Saharanpur over the Monu Kashyap death case. The Kairana MP accused police officials of ignoring the victim’s family and mishandling the investigation. Videos of Iqra Hasan arguing with police officers and protesting against alleged administrative negligence went viral on social media. The incident has intensified political debate in Uttar Pradesh, with Akhilesh Yadav and Samajwadi Party leaders criticizing the police action while authorities defended their response citing law and order

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