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गाज़ा पर इजरायली हमलों में सिर्फ महिलाएं और बच्चे मारे गए: संयुक्त राष्ट्र की चौंकाने वाली रिपोर्ट!

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Israeli Airstrikes in Gaza Kill Only Women and Children, Says UN Report

गाज़ा पर इजरायली हमलों में सिर्फ महिलाएं और बच्चे मारे गए: संयुक्त राष्ट्र की चौंकाने वाली रिपोर्ट

AIN NEWS 1: गाज़ा पट्टी में हालात दिन-ब-दिन और भयावह होते जा रहे हैं। एक ओर इजरायली सेना की बमबारी थमने का नाम नहीं ले रही है, वहीं दूसरी ओर आम नागरिकों को भूख और कुपोषण का सामना करना पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र की एक हालिया रिपोर्ट ने इजरायली हमलों को लेकर गंभीर खुलासा किया है।

सिर्फ महिलाएं और बच्चे बने निशाना

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, 18 मार्च से 9 अप्रैल 2025 के बीच इजरायल ने गाज़ा पर कुल 36 हवाई हमले किए। इन सभी हमलों में केवल महिलाएं और बच्चे ही मारे गए। रिपोर्ट में यह साफ तौर पर कहा गया है कि इन हमलों का मुख्य निशाना आम नागरिक थे, जो किसी भी सैन्य गतिविधि में शामिल नहीं थे।

यह रिपोर्ट उस समय सामने आई है जब गाज़ा में हालात बेहद गंभीर होते जा रहे हैं। इजरायली हमलों में मारे गए निर्दोष लोगों में बड़ी संख्या बच्चों और महिलाओं की है।

युद्धविराम का उल्लंघन

गौरतलब है कि इजरायल और हमास के बीच पहले एक युद्धविराम समझौता हुआ था, जिसके तहत इजरायली बंधकों के बदले फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई पर सहमति बनी थी। लेकिन मात्र दो महीनों के अंदर ही इजरायल ने इस समझौते को तोड़ते हुए फिर से गाज़ा पर बमबारी शुरू कर दी।

इस युद्धविराम के टूटने के बाद से अब तक करीब 1,542 लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें केवल शुक्रवार को 500 से अधिक मौतें हुईं। यह आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि गाज़ा में हिंसा एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच चुकी है।

संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों की चिंता

संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने गाज़ा में बिगड़ती स्थिति को लेकर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने इजरायल से तुरंत हमले रोकने की अपील की है। उनके अनुसार, इन हमलों में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों का गंभीर उल्लंघन हुआ है।

इन संगठनों ने इस पूरी स्थिति को “युद्ध अपराध” करार देते हुए इसकी जांच की मांग की है।

मानवीय संकट चरम पर

गाज़ा में लगातार हो रहे हमलों की वजह से वहां की बुनियादी आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। खाने-पीने का सामान, दवाइयां और पीने का पानी जैसी जरूरी चीजों की भारी कमी हो गई है।

लोग भूख से तड़प रहे हैं और अस्पतालों में घायलों का इलाज तक नहीं हो पा रहा है। इस हालात को देखते हुए इसे “भीषण मानवीय संकट” करार दिया जा रहा है।

शुक्रवार बना सबसे खतरनाक दिन

रिपोर्ट के मुताबिक, 18 मार्च से 9 अप्रैल तक के हमलों में सबसे ज्यादा मौतें शुक्रवार के दिन हुईं। सिर्फ एक ही दिन में 500 से अधिक लोगों की मौत दर्ज की गई, जो कि एक भयावह संकेत है।

इससे साफ है कि इजरायल की ओर से जानबूझकर सप्ताह के उस दिन को निशाना बनाया गया, जब आम लोग धार्मिक गतिविधियों में शामिल होते हैं और भीड़ अधिक होती है।

क्या यह एक नरसंहार है?

फिलिस्तीनी पक्ष और कई मानवाधिकार संगठन इजरायली हमलों को “नरसंहार” की संज्ञा दे रहे हैं। उनका दावा है कि यह हमले किसी सैन्य उद्देश्य के बजाय आम नागरिकों को डराने और खत्म करने के इरादे से किए जा रहे हैं।

वहीं, संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट भी इस दावे को बल देती है, क्योंकि किसी भी हमले में कोई सैन्य टारगेट नहीं बल्कि महिलाएं और बच्चे ही मारे गए हैं।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया की आवश्यकता

अब समय आ गया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति पर गंभीरता से विचार करे और इजरायल पर दबाव बनाए कि वह आम नागरिकों को निशाना बनाना बंद करे।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट को नजरअंदाज करना मानवीय मूल्यों के खिलाफ होगा। युद्ध की कोई भी परिस्थिति हो, आम नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

According to a shocking UN report, Israeli airstrikes on Gaza between March 18 and April 9 resulted in the deaths of only women and children. This highlights a severe humanitarian crisis in Gaza, with ongoing IDF bombings, acute food shortages, and civilian suffering. As the conflict between Israel and Hamas escalates, human rights organizations are urging for international intervention. The Gaza genocide is no longer a claim—data confirms civilians are being directly targeted.

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