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पहले टीचर, फिर नायब तहसीलदार और अब मोदीनगर की एसडीएम: जानिए PCS अधिकारी कोमल पंवार की प्रेरणादायक सफलता की कहानी

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पहले टीचर, फिर नायब तहसीलदार और अब मोदीनगर की एसडीएम: जानिए PCS अधिकारी कोमल पंवार की प्रेरणादायक सफलता की कहानी

AIN NEWS 1 गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश सरकार ने पीसीएस अधिकारी कोमल पंवार को मोदीनगर का नया उप जिलाधिकारी (SDM) नियुक्त किया है। बुधवार को उन्होंने आधिकारिक रूप से अपना कार्यभार संभाल लिया। कार्यभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकताओं में सरकारी भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराना, राजस्व मामलों का समयबद्ध निस्तारण और आम जनता की शिकायतों का पारदर्शी समाधान शामिल रहेगा।

कोमल पंवार का मोदीनगर से यह पहला परिचय नहीं है। इससे पहले वह इसी तहसील में नायब तहसीलदार के रूप में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था और क्षेत्र की समस्याओं की अच्छी समझ होने के कारण माना जा रहा है कि उनके अनुभव का लाभ मोदीनगर की जनता और प्रशासन दोनों को मिलेगा।

शिक्षक से प्रशासनिक अधिकारी तक का सफर

कोमल पंवार की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रशासनिक सेवा से नहीं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र से की थी।

दिल्ली के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में उन्होंने बतौर शिक्षिका अपनी नौकरी शुरू की। पढ़ाने का कार्य उन्हें बेहद पसंद था और उनका सपना भी शिक्षक बनने का ही था। नौकरी के साथ-साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। बीएड की शिक्षा पूरी करने के साथ उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी शुरू कर दी।

सरकारी नौकरी के साथ कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना आसान नहीं होता, लेकिन उन्होंने मेहनत और अनुशासन के बल पर इसे संभव बनाया।

किसान परिवार से निकलकर बनाई अलग पहचान

कोमल पंवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के सुनहेड़ा गांव की रहने वाली हैं। उनका परिवार खेती-किसानी से जुड़ा रहा है। उनके पिता नरेंद्र सिंह पंवार दिल्ली पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत रहे हैं, जबकि उनकी मां सुमन पंवार गृहिणी हैं।

उन्होंने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा दिल्ली के सरकारी शिक्षण संस्थानों से पूरी की। बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रहीं कोमल को किताबें पढ़ने और नई चीजें सीखने का शौक था। यही आदत आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी।

हालांकि परिवार की आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियां सामान्य थीं, लेकिन माता-पिता ने हमेशा उन्हें बेहतर शिक्षा और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

पहली सफलता मिली, लेकिन मंजिल नहीं बदली

साल 2016 में कोमल पंवार ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की परीक्षा दी। इस परीक्षा में उन्होंने 85वीं रैंक प्राप्त की और उनका चयन नायब तहसीलदार के पद पर हुआ।

पहली बड़ी सफलता मिलने के बाद अधिकांश लोग अपने करियर से संतुष्ट हो जाते हैं, लेकिन कोमल पंवार ने इसे अपनी अंतिम मंजिल नहीं माना। उन्होंने नौकरी करते हुए भी पढ़ाई जारी रखी और खुद को लगातार बेहतर बनाने का प्रयास किया।

उन्हें पहली नियुक्ति मोदीनगर तहसील में मिली, जहां उन्होंने राजस्व प्रशासन और जमीन से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण अनुभव हासिल किया।

दूसरी बार परीक्षा देकर बनीं डिप्टी कलेक्टर

नायब तहसीलदार बनने के बाद भी उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी। वर्ष 2018 में उन्होंने दोबारा यूपीपीएससी परीक्षा दी।

इस बार उनकी मेहनत और भी बेहतर परिणाम लेकर आई। उन्होंने 74वीं रैंक हासिल की और उनका चयन डिप्टी कलेक्टर (PCS) पद पर हो गया।

यह उपलब्धि उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। प्रशासनिक सेवा में उनकी जिम्मेदारियां बढ़ीं और उन्हें विभिन्न जिलों में महत्वपूर्ण दायित्व निभाने का अवसर मिला।

मोदीनगर से पुराना रिश्ता बना नई जिम्मेदारी की ताकत

मोदीनगर में पहले नायब तहसीलदार के रूप में काम करने के कारण कोमल पंवार स्थानीय भू-राजस्व व्यवस्था, सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक चुनौतियों से पहले से परिचित हैं।

इसी अनुभव को देखते हुए प्रशासनिक हलकों में उम्मीद जताई जा रही है कि उनके नेतृत्व में लंबित राजस्व मामलों के निस्तारण और सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई में तेजी आ सकती है।

कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने साफ कहा कि सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराना और आम लोगों की समस्याओं का समय पर समाधान उनकी प्राथमिकता होगी।

पिता की प्रेरणा ने बदली जीवन की दिशा

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कोमल पंवार स्वयं लंबे समय तक शिक्षण कार्य में ही अपना करियर बनाना चाहती थीं। लेकिन उनके पिता चाहते थे कि वह प्रशासनिक सेवा में जाएं और समाज के लिए बड़े स्तर पर काम करें।

इसी प्रेरणा ने उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की ओर बढ़ने का साहस दिया। लगातार मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने एक के बाद एक सफलताएं हासिल कीं।

आज उनकी सफलता यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, धैर्य और निरंतर प्रयास किसी भी लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

युवाओं के लिए प्रेरणा बनीं कोमल पंवार

उत्तर प्रदेश में हर वर्ष लाखों छात्र यूपीपीएससी और यूपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में कोमल पंवार की कहानी युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है।

उन्होंने यह दिखाया कि नौकरी के साथ भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की जा सकती है। पहली सफलता मिलने के बाद रुकने के बजाय लगातार बेहतर करने का प्रयास ही उन्हें उच्च प्रशासनिक पद तक लेकर गया।

उनकी कहानी विशेष रूप से उन युवतियों के लिए प्रेरणादायक है जो प्रशासनिक सेवाओं में अपना करियर बनाना चाहती हैं।

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आईएएस बनने का सपना अभी भी बाकी

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पीसीएस अधिकारी बनने के बाद भी कोमल पंवार अपने सफर को पूरा नहीं मानतीं। उनका लक्ष्य भविष्य में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास कर आईएएस अधिकारी बनने का है।

उनका मानना है कि सीखने और आगे बढ़ने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती। यही सोच उन्हें लगातार नए लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित करती है।

क्या हैं उनकी प्रमुख प्राथमिकताएं?

मोदीनगर में एसडीएम का कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने जिन प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया, उनमें शामिल हैं—

सरकारी भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराना।

राजस्व मामलों का त्वरित और निष्पक्ष निस्तारण।

जनसुनवाई को प्रभावी बनाना।

आम नागरिकों की शिकायतों का समयबद्ध समाधान।

प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना।

शिक्षिका से नायब तहसीलदार, फिर डिप्टी कलेक्टर और अब मोदीनगर की एसडीएम बनने तक का कोमल पंवार का सफर मेहनत, धैर्य और लक्ष्य के प्रति समर्पण की मिसाल है। सीमित संसाधनों से निकलकर प्रशासनिक सेवा के महत्वपूर्ण पद तक पहुंचना इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास से बड़ी से बड़ी मंजिल हासिल की जा सकती है।

(नोट: इस लेख में शामिल नियुक्ति और प्रशासनिक जिम्मेदारियों से जुड़े तथ्य सार्वजनिक रूप से उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं। वहीं पारिवारिक पृष्ठभूमि, निजी जीवन और आईएएस बनने की इच्छा जैसे विवरण भी प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों के अनुसार प्रस्तुत किए गए हैं, जिनकी स्वतंत्र सरकारी पुष्टि उपलब्ध नहीं है।)

Komal Panwar, the newly appointed Modinagar SDM, has an inspiring journey from being a government school teacher to becoming a PCS officer in Uttar Pradesh. After clearing the UPPSC examination, she first served as a Naib Tehsildar and later became a Deputy Collector. Her appointment as SDM Modinagar highlights her dedication, administrative experience, and commitment to public service. Her success story is an inspiration for UPPSC and UPSC aspirants across India.

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