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मेरठ में किसानों का बड़ा शक्ति प्रदर्शन: राकेश टिकैत ने सरकार को घेरा, कमिश्नरी पर रातभर चला आंदोलन; वार्ता के बाद घेराव स्थगित

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AIN NEWS 1: मेरठ में भारतीय किसान यूनियन (BKU) की ओर से 1 सितंबर 2026 को आयोजित किसान-मजदूर महापंचायत ने प्रशासन और सरकार का ध्यान एक बार फिर किसानों की लंबित समस्याओं की ओर खींचा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों से बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ मेरठ कमिश्नरी पार्क पहुंचे। किसानों ने कमिश्नरी चौराहे के आसपास डेरा डाल दिया और अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।

महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत भी पहुंचे। उन्होंने किसानों की समस्याओं को लेकर सरकार पर निशाना साधा और कहा कि जब तक उनकी समस्याओं का ठोस समाधान नहीं होता, तब तक किसानों का संघर्ष जारी रहेगा। महापंचायत के बाद कमिश्नरी का घेराव रातभर चला। हालांकि, 2 सितंबर की सुबह अधिकारियों के साथ करीब छह घंटे चली वार्ता के बाद किसानों ने घेराव को फिलहाल स्थगित कर दिया। अधिकारियों ने कई मुद्दों पर समाधान का भरोसा दिया है।

ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से कमिश्नरी पहुंचा किसानों का हुजूम

महापंचायत के लिए मेरठ की तीनों तहसीलों और आसपास के क्षेत्रों से किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सवार होकर पहुंचे। कमिश्नरी पार्क और आसपास के रास्तों पर ट्रैक्टरों की लंबी कतारें दिखाई दीं। प्रदर्शन के कारण कमिश्नरी चौराहे और आसपास के प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ। प्रशासन ने पहले से ही पुलिस और पीएसी की तैनाती की थी तथा यातायात व्यवस्था के लिए डायवर्जन प्लान लागू किया गया था।

किसानों की ओर से बिजली की समस्या, खाद की उपलब्धता, गन्ने के बकाया भुगतान, गन्ने के उचित मूल्य, कर्जमाफी और स्थानीय स्तर पर किसानों को आ रही अन्य परेशानियों को प्रमुखता से उठाया गया। भाकियू की ओर से पहले ही इन मुद्दों को लेकर आंदोलन की चेतावनी दी गई थी।

प्रदर्शन स्थल पर किसानों ने सड़क किनारे ही टेंट लगा लिए। धरना स्थल पर भंडारे की व्यवस्था की गई। रिपोर्टों के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान किसान पारंपरिक तरीके से हुक्का गुड़गुड़ाते और रागिनी सुनते भी नजर आए। इससे आंदोलन स्थल का माहौल पश्चिमी उत्तर प्रदेश की किसान पंचायतों जैसा दिखाई दिया।

राकेश टिकैत ने सरकार पर साधा निशाना

महापंचायत को संबोधित करते हुए राकेश टिकैत ने किसानों की समस्याओं को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि किसानों के मुद्दों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। टिकैत ने बिजली, खाद और गन्ना भुगतान सहित कई मुद्दों को उठाया और कहा कि किसानों को अपने अधिकारों के लिए एकजुट रहना होगा।

उन्होंने भाजपा और आरएसएस को लेकर भी राजनीतिक टिप्पणी की। टिकैत ने आरोप लगाया कि सरकारी व्यवस्था में राजनीतिक विचारधारा का प्रभाव बढ़ रहा है। शिक्षकों से जुड़े संगठन के पंजीकरण के सवाल पर उन्होंने आरएसएस के पंजीकरण को लेकर भी सवाल उठाया। इसके अलावा उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में विपक्ष के उम्मीदवारों के पर्चे रद्द किए जाने और निर्विरोध चुनाव को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।

ये सभी बातें राकेश टिकैत के मंच से दिए गए राजनीतिक वक्तव्यों के रूप में सामने आईं; इन आरोपों पर सरकार या भाजपा की ओर से इस रिपोर्ट के लिए कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

2027 के चुनाव पर टिकैत का बड़ा बयान

उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भी राकेश टिकैत से सवाल किए गए। उन्होंने किसानों से कहा कि चुनाव में हर व्यक्ति अपनी पसंद के उम्मीदवार को वोट देने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन किसानों के मुद्दों पर उनकी एकजुटता बनी रहनी चाहिए।

राष्ट्रीय लोकदल के प्रमुख जयंत चौधरी को लेकर सवाल पूछे जाने पर टिकैत ने कहा कि बार-बार एक ही व्यक्ति के बारे में सवाल क्यों किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जब जयंत चौधरी के पास कृषि मंत्रालय होगा, तब उनसे कृषि से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे।

शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों को समर्थन

मेरठ के शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट का मुद्दा भी महापंचायत में उठा। राकेश टिकैत ने व्यापारियों के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि किसान और व्यापारी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और व्यापारियों की समस्याओं के समाधान के लिए भी आवाज उठाई जाएगी।

सेंट्रल मार्केट को लेकर पिछले कई महीनों से व्यापारी और स्थानीय लोग आंदोलन कर रहे हैं। इस मामले में दुकानों और मकानों से जुड़ी कार्रवाई को लेकर लोगों में चिंता बनी हुई है। अगस्त में भी व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने आंदोलन तेज करने की बात कही थी।

रवि गौतम के धरने में भी पहुंचे टिकैत

महापंचायत के दौरान राकेश टिकैत कमिश्नरी पार्क में धरने पर बैठे युवा शक्ति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट रवि गौतम से भी मिलने पहुंचे। उन्होंने उनके आंदोलन को समर्थन दिया और न्याय मिलने तक धरना जारी रखने की बात कही।

इसी दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर भी टिकैत ने अधिकारियों को चेतावनी दी। उनके बयान में प्रशासन को आंदोलनकारियों के साथ सख्ती से पेश नहीं आने की चेतावनी दी गई। हालांकि, ऐसे बयानों को आंदोलन के राजनीतिक संदर्भ में देखा जाना चाहिए और कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

रातभर चला कमिश्नरी घेराव, सुबह अधिकारियों से हुई वार्ता

महापंचायत के बाद किसानों का प्रदर्शन रात तक जारी रहा। कमिश्नरी गेट के सामने किसानों ने डेरा डाले रखा। इसके बाद प्रशासन और किसान नेताओं के बीच बातचीत का दौर चला।

2 सितंबर की सुबह करीब 7 बजे छह घंटे चली वार्ता के बाद कमिश्नरी घेराव को स्थगित करने पर सहमति बनी। मंडलायुक्त भानु गोस्वामी की अध्यक्षता में हुई बातचीत में बिजली, खाद, गन्ना भुगतान, सड़क, तालाब और पशु चिकित्सा समेत किसानों से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई। अधिकारियों की ओर से समस्याओं के समाधान का भरोसा दिए जाने के बाद आंदोलन को फिलहाल स्थगित किया गया।

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इस घटनाक्रम से साफ है कि मेरठ में किसानों का आंदोलन फिलहाल टला है, लेकिन पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा सकता। यदि किसानों को तय समय में समस्याओं के समाधान का ठोस परिणाम नहीं मिलता है तो भाकियू आगे फिर आंदोलन का रास्ता अपना सकती है। इससे पहले संगठन की ओर से मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को व्यापक करने और जेल भरो आंदोलन की चेतावनी भी दी गई थी।

फिलहाल मेरठ में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती किसानों की मांगों पर किए गए आश्वासनों को जमीन पर लागू करना है। वहीं किसान संगठन भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बिजली, खाद और गन्ना भुगतान जैसे मुद्दों पर प्रशासन कितनी तेजी से कार्रवाई करता है।

Meerut Farmers Protest 2026 witnessed a major BKU Mahapanchayat led by Rakesh Tikait, as hundreds of farmers arrived with tractors and trolleys at the Meerut Commissionerate. Farmers raised demands related to electricity supply, fertiliser availability, pending sugarcane payments, fair sugarcane prices, loan waiver and other agricultural issues. The Meerut Commissionerate Gherao continued overnight before being suspended on September 2 after a six-hour meeting between farmer representatives and officials. The latest Rakesh Tikait news highlights the continuing political and administrative importance of farmers’ issues in western Uttar Pradesh.

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