AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र में इन दिनों एक ऐतिहासिक स्थल को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कसमंडी कला इलाके में स्थित एक परिसर को लेकर पासी समाज और मुस्लिम समाज के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। अब इस मामले ने राजनीतिक और सामाजिक रंग भी ले लिया है। हाल ही में जुमे की नमाज के बाद हुए विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने लाखन आर्मी के 15 सदस्यों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया, जिसके बाद पूरे प्रदेश में इस मुद्दे की चर्चा तेज हो गई है।
लाखन आर्मी और पासी समाज का आरोप है कि प्रशासन एकतरफा कार्रवाई कर रहा है, जबकि पुलिस का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने इलाके में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मलिहाबाद के कसमंडी कला क्षेत्र में मौजूद एक परिसर को लेकर दो अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। मुस्लिम समाज इस स्थान को मस्जिद और कब्रिस्तान का हिस्सा बता रहा है, जबकि पासी समाज का कहना है कि यह स्थान 11वीं सदी के नागवंशी शासक राजा कंस का ऐतिहासिक किला और शिव मंदिर है।
पासी समाज के लोगों का दावा है कि इस स्थल का ऐतिहासिक महत्व है और समय के साथ इसकी पहचान बदलने की कोशिश की गई। समाज के लोगों का कहना है कि यहां पुराने समय में राजा कंस का किला मौजूद था और यह स्थल हिंदू आस्था से जुड़ा हुआ है।
वहीं दूसरी ओर मुस्लिम समाज का कहना है कि यह धार्मिक स्थल लंबे समय से मस्जिद और कब्रिस्तान के रूप में इस्तेमाल होता रहा है और यहां नमाज अदा की जाती रही है।
जुमे की नमाज के बाद बढ़ा तनाव
शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद इलाके में माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। प्रशासन को आशंका थी कि स्थिति बिगड़ सकती है, इसलिए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने पूरे क्षेत्र में बैरिकेडिंग कर दी थी। सुरक्षा के लिहाज से अतिरिक्त पुलिस फोर्स भी लगाई गई। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की, लेकिन सोशल मीडिया पर लगातार वीडियो और बयान वायरल होने से विवाद और गहरा गया।
लाखन आर्मी पर पुलिस की कार्रवाई
घटना के बाद पुलिस ने लाखन आर्मी के 15 सदस्यों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। पुलिस का आरोप है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान माहौल बिगाड़ने और शांति व्यवस्था प्रभावित करने की कोशिश की गई।
इस कार्रवाई के बाद लाखन आर्मी के प्रमुख सूरज पासी ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पुलिस केवल एक पक्ष के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। सूरज पासी ने दावा किया कि उनके संगठन ने केवल ऐतिहासिक विरासत और धार्मिक पहचान की रक्षा की मांग उठाई थी।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए गए तो पूरे उत्तर प्रदेश में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
सूरज पासी का बड़ा ऐलान
लाखन आर्मी के प्रमुख सूरज पासी ने कहा कि संगठन अब “राजा कंस किला और शिव मंदिर मुक्ति अभियान” चलाएगा। इसके तहत गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक किया जाएगा और पासी समाज को अपने इतिहास के बारे में बताया जाएगा।
सूरज पासी ने आरोप लगाया कि ऐतिहासिक तथ्यों को दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि पुराने सरकारी दस्तावेजों और गजेटियर में इस स्थान का उल्लेख राजा कंस के किले के रूप में किया गया है।
उनका कहना है कि इतिहास के तथ्यों के आधार पर इस स्थल की दोबारा जांच होनी चाहिए।
गजेटियर का दिया जा रहा हवाला
पासी समाज अपनी बात को मजबूत करने के लिए पुराने गजेटियर और ऐतिहासिक दस्तावेजों का हवाला दे रहा है। समाज के लोगों का दावा है कि इन दस्तावेजों में उल्लेख मिलता है कि राजा कंस ने विदेशी आक्रांता सालार मसूद गाजी के दो सेनापतियों को इसी इलाके में हराया था।
हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इतिहासकारों और स्थानीय प्रशासन की रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो सकेगी।
प्रशासन की क्या है तैयारी?
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। इलाके में पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग भी की जा रही है ताकि अफवाहों को रोका जा सके।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी को भी कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रशासन ने साफ किया है कि शांति व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक रंग लेने लगा मामला
जैसे-जैसे विवाद बढ़ रहा है, वैसे-वैसे इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज होती जा रही है। अलग-अलग संगठनों और नेताओं ने अपनी प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया है।
कुछ लोग इसे ऐतिहासिक पहचान का मुद्दा बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने की कोशिश मान रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में यह मामला और ज्यादा चर्चा में रह सकता है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
मलिहाबाद विवाद सोशल media पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। ट्विटर, फेसबुक और यूट्यूब पर हजारों लोग इस मुद्दे पर अपनी राय रख रहे हैं। कुछ लोग लाखन आर्मी के समर्थन में पोस्ट कर रहे हैं तो कुछ लोग प्रशासन की कार्रवाई को सही बता रहे हैं।
हालांकि पुलिस ने लोगों से अपील की है कि बिना पुष्टि के किसी भी खबर या वीडियो को शेयर न करें।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल इलाके में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। प्रशासन लगातार दोनों पक्षों से बातचीत करने की कोशिश कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद का समाधान केवल कानूनी और ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर ही संभव है। यदि समय रहते मामले को शांत नहीं किया गया, तो यह विवाद और बड़ा रूप ले सकता है।
The Malihabad dispute in Lucknow, Uttar Pradesh, has gained massive attention after police registered cases against Lakhan Army members during protests over the alleged Kans Fort and Shiv Temple site. The controversy involves historical claims, religious tensions, and political reactions. Lakhan Army chief Suraj Pasi has accused the UP Police of one-sided action and announced a statewide movement. The issue surrounding Kans Fort history, mosque-temple claims, and the Pasi Samaj protest is now becoming one of the most discussed topics in Uttar Pradesh news.


















