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लखनऊ में 243 भैंसों की नीलामी पर बवाल, सपा का प्रदर्शन; पुलिस ने खदेड़ा, 12.01 लाख में 40 भैंसों की बोली

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AIN NEWS 1: लखनऊ में नगर निगम की ओर से जब्त की गई भैंसों की नीलामी को लेकर सोमवार को जमकर हंगामा हुआ। पारा क्षेत्र में नगर निगम और पुलिस टीम पर हुए हमले के बाद पकड़े गए पशुओं की नीलामी का समाजवादी पार्टी और आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विरोध किया। सपा विधायक अरमान खान समेत कई नेता और कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और नीलामी रोकने की मांग की। विरोध के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई और पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हटाकर ईको गार्डन भेज दिया।

पारा में कार्रवाई के बाद पकड़े गए थे पशु

पूरा मामला लखनऊ के पारा क्षेत्र में अवैध डेयरियों और अतिक्रमण के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई से जुड़ा है। 16 अगस्त को नगर निगम और पुलिस की टीम कार्रवाई के लिए पहुंची थी। इसी दौरान टीम पर कथित तौर पर हमला किया गया और एक दारोगा के साथ मारपीट किए जाने की बात सामने आई। इस घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज की।

इसके बाद 17 और 18 अगस्त को अभियान चलाकर बड़ी संख्या में पशुओं को कब्जे में लिया गया। रिपोर्टों के मुताबिक कुल 243 पशु, जिनमें 242 भैंस और एक भैंसा शामिल था, कांजी हाउस भेजे गए।

नगर निगम का कहना है कि यह कार्रवाई अवैध डेयरियों और सार्वजनिक स्थानों पर पशुओं से जुड़ी समस्याओं के खिलाफ की गई थी। वहीं पशुपालकों और उनके समर्थकों का आरोप है कि कार्रवाई से उनकी रोजी-रोटी पर असर पड़ा है।

नीलामी का विरोध करने पहुंचे सपा नेता

नगर निगम ने जब जब्त पशुओं की नीलामी की प्रक्रिया शुरू की तो सपा और आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ता विरोध में उतर आए। नगर निगम मुख्यालय के बाहर कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया और नीलामी रोकने की मांग की।

लखनऊ पश्चिम से सपा विधायक अरमान खान भी समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों को लिखित पत्र देकर नीलामी रोकने की मांग की। उनका तर्क था कि जिन पशुपालकों की आजीविका इन भैंसों पर निर्भर है, उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर दिया जाना चाहिए।

प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की। कुछ समय के लिए मुख्यालय के आसपास यातायात प्रभावित होने की बात भी सामने आई।

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाया

हंगामा बढ़ने की सूचना पर पुलिस बल मौके पर पहुंचा। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की। इस दौरान धक्का-मुक्की की स्थिति बनी और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर ईको गार्डन भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।

वहीं नीलामी स्थल पर भी तनाव की स्थिति बनी रही। एक रिपोर्ट के मुताबिक सीतापुर से नीलामी में शामिल होने आए एक युवक के साथ मारपीट और उसके दस्तावेज छीनने का आरोप लगाया गया। घटना के बाद वहां अफरा-तफरी मच गई।

40 भैंसों की नीलामी 12.01 लाख रुपये में

हंगामे और विरोध के बावजूद नगर निगम ने नीलामी प्रक्रिया जारी रखी। ठाकुरगंज कांजी हाउस में रखी 40 भैंसों के लिए 21 हजार रुपये प्रति भैंस बेस प्राइस रखा गया था। नीलामी में मोहम्मद शाकिर ने 12.01 लाख रुपये की सबसे ऊंची बोली लगाकर इन 40 भैंसों को खरीदा।

हालांकि, यह केवल नीलामी का एक हिस्सा था। अन्य कांजी हाउस में रखे पशुओं की नीलामी को लेकर भी विवाद सामने आया। हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, कुल 243 भैंसों की नीलामी को लेकर नगर निगम मुख्यालय में पूरे दिन तनाव बना रहा।

नीलामी प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

विरोध कर रहे सपा नेताओं और पशुपालकों का आरोप है कि नीलामी से पहले प्रभावित पशुपालकों की समस्याओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका पशुपालन पर निर्भर है, इसलिए पशुओं को वापस पाने का अवसर दिया जाना चाहिए था।

दूसरी तरफ नगर निगम की कार्रवाई का आधार सार्वजनिक स्थानों पर अवैध डेयरियों, पशुओं से जुड़ी समस्याओं और निगम टीम पर हुए हमले के बाद की कार्रवाई बताया जा रहा है। ऐसे में विवाद का एक बड़ा हिस्सा प्रशासनिक कार्रवाई और पशुपालकों के हितों के बीच संतुलन को लेकर है।

नीलामी हॉल में नेताओं की मौजूदगी पर भी विवाद

हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक नीलामी के दौरान सपा विधायक और कुछ पार्षदों के नीलामी हॉल के भीतर मौजूद रहने को लेकर भी सवाल उठे। आरोप है कि बाहर से आए कुछ खरीदारों पर दबाव का माहौल बना, जिससे वे खुलकर बोली नहीं लगा पाए। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का अपना-अपना पक्ष है और पूरे मामले में आधिकारिक जांच या स्पष्ट निष्कर्ष का इंतजार रहेगा।

लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल ने भी नीलामी हॉल में राजनीतिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी को लेकर अधिकारियों से रिपोर्ट मांगे जाने की बात कही है।

अखिलेश यादव ने पीड़ित परिवारों से की मुलाकात

इस विवाद के बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रभावित पशुपालक परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने परिवारों को हर संभव मदद का भरोसा दिया और पार्टी की ओर से उनके साथ खड़े रहने की बात कही। इससे मामला अब केवल नगर निगम की कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है।

सपा का कहना है कि गरीब और छोटे पशुपालकों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए प्रशासन को संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करनी चाहिए। पार्टी नेताओं ने नीलामी रोकने और प्रभावित लोगों को राहत देने की मांग उठाई है।

पुलिस पर हमले के मामले से जुड़ा है विवाद

इस पूरे विवाद की शुरुआत उस घटना से हुई जिसमें नगर निगम की कार्रवाई के दौरान पुलिस टीम पर हमला होने का आरोप लगा था। रिपोर्ट के मुताबिक पारा क्षेत्र में कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने टीम पर पथराव किया और एक दारोगा के साथ हाथापाई की। इस घटना के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू की थी।

प्रशासन के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक ओर सरकारी टीम पर हमला करने वालों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई करना है, वहीं दूसरी ओर जब्त पशुओं और उनसे जुड़े पशुपालक परिवारों के मामले को नियमानुसार निपटाना है।

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आगे क्या?

भैंसों की नीलामी को लेकर हुए राजनीतिक विरोध के बाद अब इस मामले पर प्रशासन और नगर निगम की भूमिका पर नजर रहेगी। खासतौर पर नीलामी प्रक्रिया की पारदर्शिता, पशुपालकों को दिए गए अवसर और जब्त पशुओं की कानूनी स्थिति जैसे सवाल महत्वपूर्ण हैं।

फिलहाल नगर निगम ने नीलामी प्रक्रिया आगे बढ़ाई है, जबकि समाजवादी पार्टी और प्रभावित पशुपालक इसे लेकर विरोध जारी रखने की बात कह रहे हैं। ऐसे में लखनऊ का यह मामला आने वाले दिनों में राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा में रह सकता है।

AIN NEWS 1 अपडेट: लखनऊ में दारोगा पर हमले के बाद जब्त किए गए पशुओं की नीलामी को लेकर पैदा हुए विवाद में एक तरफ नगर निगम की कार्रवाई और दूसरी तरफ पशुपालकों के हितों का सवाल सामने आया है। नीलामी के दौरान राजनीतिक विरोध, पुलिस कार्रवाई और अखिलेश यादव की मुलाकात ने मामले को और तूल दे दिया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 40 भैंसों की नीलामी 12.01 लाख रुपये में हुई है, जबकि कुल 243 पशुओं की नीलामी को लेकर विवाद सामने आया है।

Lucknow buffalo auction controversy has intensified after buffaloes were seized during an action following an alleged attack on a police team in Para area. Samajwadi Party MLA Armaan Khan and party workers protested against the Lucknow Municipal Corporation auction, while police removed protesters from the spot. SP chief Akhilesh Yadav also met affected livestock-owning families and assured them of support. The latest Lucknow News highlights the dispute over 243 seized animals, the municipal auction process and the political confrontation surrounding the case.

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