AIN NEWS 1 भिण्ड/मिहोना। त्योहारों के मौसम में दूध और उससे बनने वाले खाद्य पदार्थों की शुद्धता को लेकर चिंता बढ़ जाती है। इसी बीच मध्य प्रदेश के भिण्ड जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई ने डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। मिहोना क्षेत्र के ग्राम चांदोख स्थित उत्तम डेयरी में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में तैयार मावा के साथ वनस्पति और ग्लूकोज पाउडर बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है।
विभाग की कार्रवाई के बाद डेयरी का खाद्य रजिस्ट्रेशन निलंबित कर दिया गया है। वहीं, मामले में लिए गए खाद्य पदार्थों के नमूनों को जांच के लिए भेजे जाने की बात सामने आई है। ऐसे में अब इस पूरे मामले में प्रयोगशाला रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि उसी के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि जब्त मावा और अन्य सामग्री खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप थी या नहीं।

चांदोख की उत्तम डेयरी पर हुई कार्रवाई
जानकारी के मुताबिक खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने मिहोना तहसील के ग्राम चांदोख में स्थित उत्तम डेयरी पर जांच की। टीम को डेयरी में मावा तैयार किए जाने की प्रक्रिया से जुड़ी सामग्री मिली। कार्रवाई के दौरान 50 किलो तैयार मावा, 32 किलो वनस्पति और 13.8 किलो ग्लूकोज पाउडर जब्त किए जाने की जानकारी है।
विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया की जांच करना था। मौके पर मौजूद सामग्री को कब्जे में लेने के साथ खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने आवश्यक नमूने भी लिए।
यहां एक बात साफ करना जरूरी है कि अभी प्रयोगशाला जांच का परिणाम सामने नहीं आया है। इसलिए जब्त मावा को सीधे तौर पर जहरीला कहना या यह दावा करना कि इससे निश्चित रूप से लोगों की सेहत को नुकसान हुआ है, तथ्यात्मक रूप से जल्दबाजी होगी।
दूध में वनस्पति और ग्लूकोज के इस्तेमाल का आरोप
खाद्य विभाग की कार्रवाई के बाद सामने आई जानकारी के अनुसार डेयरी में दूध से मावा तैयार करने के दौरान वनस्पति और ग्लूकोज पाउडर के इस्तेमाल की बात सामने आई है। यही इस कार्रवाई का सबसे अहम पहलू है।
मावा आमतौर पर दूध को गर्म करके उसमें मौजूद पानी को कम करने की प्रक्रिया से तैयार किया जाता है। इससे दूध में मौजूद ठोस पदार्थ एकत्र होकर खोया या मावा का रूप लेते हैं। लेकिन यदि किसी खाद्य उत्पाद में ऐसे पदार्थ मिलाए जाते हैं जो निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं, तो यह खाद्य सुरक्षा का गंभीर विषय बन सकता है।
हालांकि, यह भी समझना जरूरी है कि मौके से वनस्पति और ग्लूकोज पाउडर मिलना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि 50 किलो का पूरा मावा इन्हीं पदार्थों से तैयार किया गया था। अंतिम निष्कर्ष के लिए विभागीय जांच और प्रयोगशाला रिपोर्ट का इंतजार करना होगा।
50 किलो मावा, 32 किलो वनस्पति और 13.8 किलो ग्लूकोज
इस कार्रवाई में जब्त मात्रा ने इसलिए भी ध्यान खींचा है क्योंकि डेयरी से काफी मात्रा में सामग्री बरामद होने की बात कही गई है।
50 किलो मावा
32 किलो वनस्पति
13.8 किलो ग्लूकोज पाउडर
इन सभी सामग्रियों को विभाग ने कार्रवाई के दौरान जब्त किया। संबंधित खाद्य पदार्थों के नमूने भी जांच के लिए लिए गए हैं।
अब सवाल यह है कि इन सामग्रियों का इस्तेमाल किस अनुपात में और किस उद्देश्य से किया जा रहा था। इसका जवाब आधिकारिक जांच के बाद ही सामने आएगा।
डेयरी का खाद्य रजिस्ट्रेशन निलंबित
कार्रवाई के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने उत्तम डेयरी का खाद्य रजिस्ट्रेशन निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई बताती है कि विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है।
अब आगे की प्रक्रिया जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगी। यदि प्रयोगशाला जांच में खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो संबंधित व्यक्ति या प्रतिष्ठान के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत आगे कार्रवाई की जा सकती है।
होटल और ढाबों में भी पहुंची टीम
खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई केवल डेयरी तक सीमित नहीं रही। भिण्ड क्षेत्र के होटल और ढाबों में भी जांच की गई। अधिकारियों ने कई प्रतिष्ठानों से पनीर के नमूने लिए।
इस दौरान सूर्या ढाबा की रसोई में स्वच्छता से जुड़ी अनियमितताएं मिलने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद ढाबे को नोटिस जारी किए जाने की बात कही गई है।
इस कार्रवाई से साफ है कि खाद्य सुरक्षा विभाग अब दूध से बने उत्पादों के साथ-साथ होटल और ढाबों में इस्तेमाल होने वाले पनीर तथा अन्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर भी नजर रख रहा है।
‘जहर’ कहना क्यों होगा गलत?
मिलावट से जुड़ी खबरों में अक्सर सनसनी पैदा करने के लिए “जहर” जैसे शब्द इस्तेमाल किए जाते हैं। लेकिन पत्रकारिता में तथ्य और आरोप के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।
इस मामले में जब्त मावा या वनस्पति-ग्लूकोज पाउडर को “जहर” घोषित नहीं किया गया है। अभी तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार खाद्य विभाग ने सामग्री जब्त कर नमूने जांच के लिए लिए हैं। इसलिए खबर में “जहरीला मावा” या “जहर बनाकर बेच रहे थे” जैसी भाषा से बचना उचित होगा।
हां, यदि प्रयोगशाला जांच में किसी प्रतिबंधित या स्वास्थ्य के लिए खतरनाक पदार्थ की पुष्टि होती है, तो उसके आधार पर आगे अधिक स्पष्ट जानकारी दी जा सकती है।
त्योहारों से पहले बढ़ जाती है मिलावट की चिंता
दूध, मावा, पनीर, घी और मिठाइयों की मांग त्योहारों के आसपास तेजी से बढ़ती है। इसी वजह से खाद्य सुरक्षा विभागों द्वारा ऐसे समय में विशेष अभियान चलाए जाते हैं।
मावा और पनीर जैसे उत्पादों की बड़ी मात्रा में खपत होती है। ऐसे में उपभोक्ताओं के लिए यह जानना जरूरी है कि वे खाद्य सामग्री कहां से खरीद रहे हैं और उसकी गुणवत्ता कैसी है।
भिण्ड की इस कार्रवाई ने भी यही सवाल सामने रखा है कि बाजार में बिकने वाले दूध उत्पादों की नियमित जांच कितनी जरूरी है।
अब लैब रिपोर्ट पर टिकी नजर
उत्तम डेयरी से जब्त मावा और अन्य सामग्री के नमूनों की जांच रिपोर्ट इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होगी। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि खाद्य पदार्थों में निर्धारित मानकों का उल्लंघन हुआ था या नहीं।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना कहा जा सकता है कि भिण्ड के मिहोना क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा विभाग ने कार्रवाई करते हुए 50 किलो मावा, 32 किलो वनस्पति और 13.8 किलो ग्लूकोज पाउडर जब्त किया है। डेयरी का खाद्य रजिस्ट्रेशन निलंबित किया गया है और नमूने जांच के लिए लिए गए हैं।
इस मामले में आगे की तस्वीर जांच रिपोर्ट और विभाग द्वारा की जाने वाली कार्रवाई के बाद ही पूरी तरह साफ होगी।
फैक्ट चेक: उपलब्ध रिपोर्टों से छापेमारी और जब्ती की मुख्य जानकारी पुष्ट होती है। हालांकि, मावा को “जहरीला” बताने या यह कहने का अभी कोई आधार नहीं है कि इससे लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचा। इसलिए खबर में “कथित मिलावट”, “विभाग के अनुसार” और “जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होगी” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना उचित है।
Bhind Mawa Adulteration Case: The Food Safety Department conducted a major inspection at Uttam Dairy in Chandokh village of Mihona, Bhind, Madhya Pradesh. Officials reportedly seized 50 kg of mawa, 32 kg of vanaspati and 13.8 kg of glucose powder. The dairy’s food registration was suspended and samples were collected for laboratory testing. The final findings will determine whether food safety standards were violated.



















