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लखनऊ अग्निकांड पर हाईकोर्ट सख्त: 15 मौतों के बाद सरकार से मांगा जवाब, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल!

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लखनऊ अग्निकांड पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, सरकार से मांगी जवाबदेही

AIN NEWS 1: लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में 22 जून 2026 को हुए भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की दर्दनाक मौत के मामले ने अब न्यायिक स्तर पर भी गंभीर मोड़ ले लिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने इस हादसे को अत्यंत चिंताजनक बताते हुए राज्य सरकार और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि बार-बार ऐसे हादसे होना इस बात का संकेत है कि मौजूदा व्यवस्था न तो पर्याप्त है और न ही प्रभावी।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से पूछा कि आखिर अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए अब तक प्रभावी व्यवस्था क्यों विकसित नहीं की जा सकी। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि समय रहते सुरक्षा मानकों का पालन कराया जाता, तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

15 युवाओं की मौत ने खड़े किए बड़े सवाल

अलीगंज में हुए इस दर्दनाक हादसे में 15 युवाओं की जान चली गई थी। इस घटना ने राजधानी लखनऊ समेत पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं केवल एक हादसा नहीं हैं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की कमजोरियों को भी उजागर करती हैं।

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अदालत ने कहा कि प्रत्येक बड़े हादसे के बाद प्रशासन सक्रिय दिखाई देता है, जांच बैठती है, अधिकारियों के दौरे होते हैं और कार्रवाई की घोषणाएं होती हैं, लेकिन कुछ समय बाद सब कुछ सामान्य हो जाता है। यदि पहले से प्रभावी निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था लागू होती, तो इस प्रकार की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता था।

लेवाना होटल अग्निकांड का भी किया उल्लेख

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने वर्ष 2022 में लखनऊ के हजरतगंज स्थित लेवाना होटल में हुए भीषण अग्निकांड का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि उस मामले में भी कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए थे और संबंधित याचिकाएं अब भी लंबित हैं।

कोर्ट ने कहा कि पुराने मामलों से पर्याप्त सबक नहीं लिया गया। यदि उन निर्देशों को पूरी गंभीरता से लागू किया गया होता, तो आज इस तरह की दूसरी बड़ी घटना शायद सामने नहीं आती।

सरकार से मांगी विस्तृत कार्ययोजना

हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह एक स्पष्ट और प्रभावी कार्यप्रणाली तैयार कर अदालत के सामने प्रस्तुत करे। इस कार्ययोजना में यह बताया जाए कि भवन निर्माण नियमों, अग्नि सुरक्षा मानकों और विद्युत सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों का पालन कैसे सुनिश्चित किया जाएगा।

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इसके साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रभावी पालन भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

कई प्रमुख विभागों को बनाया गया पक्षकार

मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने कई महत्वपूर्ण विभागों और अधिकारियों को पक्षकार बनाने का आदेश दिया है। इनमें उत्तर प्रदेश सरकार के आवास एवं शहरी विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव अथवा प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद के आयुक्त, उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक तथा प्रमुख सचिव ऊर्जा सहित अन्य संबंधित अधिकारी शामिल हैं।

इन सभी अधिकारियों को 4 अगस्त 2026 से पहले अपना विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

जनहित याचिका में स्वतंत्र जांच की मांग

यह जनहित याचिका स्थानीय अधिवक्ता शिवेंदु पांडेय द्वारा दाखिल की गई है। याचिका में मांग की गई है कि पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए। साथ ही ऐसी समिति गठित की जाए जिसकी निगरानी स्वयं हाईकोर्ट करे, ताकि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न हो सके।

याचिका में यह भी कहा गया है कि केवल इस एक घटना की जांच पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि पूरे प्रदेश में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जानी चाहिए।

कई विभागों को बनाया गया प्रतिवादी

याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार, भारत सरकार, उत्तर प्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा के महानिदेशक, लखनऊ के मुख्य अग्निशमन अधिकारी, नगर आयुक्त, लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के उपाध्यक्ष, जिलाधिकारी लखनऊ सहित पांच अन्य संबंधित प्राधिकरणों को प्रतिवादी बनाया गया है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण इस प्रकार की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

सरकार ने कोर्ट को क्या बताया?

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार सिंह ने अदालत को बताया कि सरकार इस मामले में प्रभावी कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि हादसे के कारणों की जांच की जा रही है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही भी मौजूद रहे।

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अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

इस हादसे ने एक बार फिर प्रदेश में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश इमारतों में फायर सेफ्टी ऑडिट समय पर नहीं होता, कई स्थानों पर अग्निशमन उपकरण केवल औपचारिकता बनकर रह जाते हैं और सुरक्षा नियमों का पालन भी पूरी तरह नहीं किया जाता।

यदि भवनों का नियमित निरीक्षण, विद्युत व्यवस्था की समय-समय पर जांच और अग्निशमन विभाग की सख्त निगरानी सुनिश्चित की जाए, तो इस प्रकार के बड़े हादसों की संभावना काफी कम हो सकती है।

अगली सुनवाई पर रहेगी नजर

अब पूरे मामले में सभी संबंधित विभागों को 4 अगस्त 2026 तक अपना जवाब हाईकोर्ट में दाखिल करना होगा। इसके बाद अदालत तय करेगी कि सरकार द्वारा प्रस्तुत कार्ययोजना पर्याप्त है या नहीं और भविष्य में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कौन-कौन से अतिरिक्त निर्देश जारी किए जाने चाहिए।

यह मामला केवल एक अग्निकांड तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रदेश में भवन सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में हाईकोर्ट की सुनवाई और सरकार की ओर से पेश किए जाने वाले जवाब पर सभी की नजर रहेगी।

The Allahabad High Court’s Lucknow Bench has taken a strong stand on the Aliganj fire tragedy that claimed 15 lives in Lucknow. The court questioned the effectiveness of the state’s fire safety system and directed the Uttar Pradesh Government to submit a comprehensive action plan ensuring compliance with fire safety regulations, building norms, and accountability of officials. The case, linked to a Public Interest Litigation (PIL), also references the Levana Hotel fire incident, highlighting the urgent need for stronger fire safety enforcement across Uttar Pradesh. This update covers the latest court proceedings, government response, and key developments in the Lucknow Fire Tragedy 2026

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