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दिल्ली और मुंबई में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स का बड़ा प्रदर्शन: काम के नियम और अधिकारों पर सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग

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AIN NEWS 1 | दिल्ली और मुंबई की सड़कों पर 17 और 18 नवंबर 2025 को एक असामान्य भीड़ देखने को मिली। यह भीड़ किसी त्योहार या राजनीतिक रैली की नहीं, बल्कि देशभर के मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स की थी, जो अपने बुनियादी अधिकारों और काम के नियमों को लेकर सरकार और कंपनियों के रवैये से नाराज़ थे। फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स’ एसोसिएशंस ऑफ इंडिया (FMRAI) के नेतृत्व में हुए इन प्रदर्शनों ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया।

इन रैलियों का केंद्र बिंदु था—लंबे समय से लटके हुए वैधानिक कार्य नियमों (Statutory Working Rules) को जल्द से जल्द अधिसूचित करने की मांग, अस्पतालों में एंट्री बैन हटाना, और नए लेबर कोड की वजह से बढ़ी असुरक्षा को खत्म करना। मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स का कहना है कि बिना स्पष्ट नियमों के काम करना उनके लिए लगातार कठिन होता जा रहा है।

मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स आखिर सड़क पर क्यों उतरे?

मेडिकल और सेल्स प्रमोशन क्षेत्र में काम करने वाले SPEs (Sales Promotion Employees) पिछले कई वर्षों से एक ही बात कह रहे हैं—स्पष्ट और मानकीकृत कार्य नियम लागू किए जाएं।

1976 में बना Sales Promotion Employees (Conditions of Service) Act इन्हें सुरक्षा देने के उद्देश्य से लाया गया था, लेकिन विडंबना यह है कि इस एक्ट के तहत आवश्यक Statutory Working Rules अब तक अधिसूचित नहीं किए गए हैं।

2017 में श्रम मंत्रालय ने इनके लिए ड्राफ्ट रूल्स जारी किए थे, लेकिन वह आज तक सिर्फ कागजों में ही कैद हैं। इस लापरवाही का नतीजा यह हुआ है कि कंपनियों ने अपने-अपने निजी नियम लागू कर दिए हैं, जो कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं।

SPEs बताते हैं कि वर्तमान स्थिति में:

  • मनमानी ट्रांसफर किए जाते हैं

  • वेतन में कटौती या रोक की शिकायतें बढ़ रही हैं

  • कई कर्मचारियों को बिना वजह नौकरी से हटाया जा रहा है

  • ऐप्स और ई-गैजेट्स से निगरानी बढ़ गई है

  • काम के घंटे तय न होने से तनाव और मानसिक दबाव बढ़ रहा है

एक कर्मचारी के शब्दों में—“हम डॉक्टरों तक दवा की जानकारी पहुंचाते हैं, लेकिन हमारे अपने अधिकारों और नौकरी की सुरक्षा की कोई जानकारी नहीं देता।”

नए लेबर कोड ने बढ़ाई नौकरी की असुरक्षा

SPEs का एक बड़ा आरोप चार नए लेबर कोड (2020) पर है, जो 29 अलग-अलग श्रम कानूनों को मिलाकर बनाए गए थे।

कर्मचारियों का कहना है कि इन नए कोड्स ने कंपनियों को कर्मचारी रखने और निकालने की अधिक शक्ति दे दी है। फिक्स्ड-टर्म कॉन्ट्रैक्ट, ठेका आधारित या अस्थायी नियुक्तियाँ तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे स्थायी रोजगार लगभग खत्म होता जा रहा है। सोशल सिक्योरिटी और स्थायी नौकरी का भरोसा लगातार कमजोर पड़ रहा है।

अस्पतालों में एंट्री बैन: नौकरी पर सीधे खतरे जैसा कदम

एक और बड़ी समस्या तब सामने आई जब CGHS ने केंद्रीय सरकारी अस्पतालों में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स के प्रवेश पर रोक लगा दी। इसके बाद कुछ राज्यों और कई निजी अस्पतालों ने भी ऐसे ही प्रतिबंध लागू कर दिए।

SPEs का कहना है कि यह पूरी तरह कानून के खिलाफ है।
उनके मुताबिक:

  • SPE Act 1976 स्पष्ट रूप से उन्हें डॉक्टरों से मिलने का अधिकार देता है

  • Magic Remedies Act 1954 भी SPEs की जिम्मेदारी को स्वीकार करता है

रिप्रेजेंटेटिव्स का कहना है कि अस्पतालों में एंट्री रोकना सिर्फ उनकी नौकरी को खतरे में डालना नहीं है, बल्कि डॉक्टरों तक जरूरी दवा संबंधी जानकारी पहुंचाने की प्रक्रिया को भी प्रभावित करता है, जिसका सीधा असर सार्वजनिक स्वास्थ्य पर पड़ेगा।

रैलियों की मुख्य मांगें — सरल शब्दों में

रैली में शामिल हजारों मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स की मुख्य मांगें थीं:

  • लंबित Statutory Working Rules तुरंत अधिसूचित किए जाएँ

  • Sales Promotion Employees Act, 1976 की सुरक्षा लागू हो और नए लेबर कोड्स को वापस लिया जाए

  • इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट की धारा 2(j)(ii)(b) का पूरी तरह पालन हो

  • अस्पतालों और संस्थानों में MR की एंट्री पर लगे प्रतिबंध हटें

  • कंपनियाँ अपनी निजी नीतियाँ जबरदस्ती न थोपें

  • ई-गैजेट्स के माध्यम से अत्यधिक निगरानी बंद हो

  • महिला मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए

“अब और नहीं”: अधिकारों और सम्मान की लड़ाई

FMRAI ने कहा कि मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि डॉक्टरों तक दवाओं की नवीनतम और सही जानकारी पहुँचे।

इसके बावजूद इन्हें लंबे समय से उत्पीड़न, काम का बढ़ता दबाव, अस्पष्ट नियम और नौकरी की असुरक्षा झेलनी पड़ रही है।

प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि यह रैली सिर्फ शुरुआत है।
यदि सरकार उनकी मांगें जल्दी नहीं मानती, तो आंदोलन को और बड़ा और तेज किया जाएगा।

एक वरिष्ठ नेता ने कहा—“हम सिर्फ अपने अधिकार मांग रहे हैं, कोई विशेष सुविधा नहीं। हमें वह मिलना चाहिए जो कानून पहले ही हमें दे चुका है।”

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