AIN NEWS 1 मेरठ, उत्तर प्रदेश। मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया था। मर्चेंट नेवी से जुड़े रहे सौरभ राजपूत की हत्या, उनके शव को टुकड़ों में बांटकर सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपाने और फिर मामले का खुलासा होने की कहानी लंबे समय तक सुर्खियों में रही। इस मामले में सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को अदालत ने 14 अक्टूबर 2026 को मौत की सजा सुनाई।
इस मामले की कहानी केवल हत्या तक सीमित नहीं है। इसमें मुस्कान और सौरभ की प्रेम कहानी, परिवार के विरोध के बावजूद शादी, पुराने स्कूल के दोस्त साहिल से दोबारा संपर्क और आखिरकार एक गंभीर आपराधिक मामले तक पहुंचने की घटनाएं शामिल हैं।
ननिहाल में हुई थी मुस्कान और सौरभ की पहली मुलाकात
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मुस्कान रस्तोगी और सौरभ राजपूत की मुलाकात मेरठ के ब्रह्मपुरी इलाके में मुस्कान के ननिहाल में हुई थी। मुस्कान के नाना ज्योतिष का काम करते थे। सौरभ का परिवार भी इसी क्षेत्र में रहता था और उसकी मां कुंडली दिखाने के लिए वहां आती थीं।
इसी दौरान मुस्कान और सौरभ की जान-पहचान हुई। समय के साथ दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और उन्होंने शादी करने का फैसला कर लिया।
दोनों परिवारों की सहमति को लेकर विवाद होने की बातें भी सामने आई थीं। कुछ मीडिया रिपोर्टों में मुस्कान की मां कविता के हवाले से बताया गया कि परिवार इस रिश्ते के पक्ष में नहीं था और मुस्कान ने सौरभ के साथ घर छोड़ने का फैसला किया था।
हालांकि, मुस्कान के घर से दो बार भागने की बात मुख्य रूप से परिजनों के बयान के आधार पर सामने आई है। इसे स्वतंत्र रूप से प्रमाणित न्यायिक तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
साल 2016 में हुई थी लव मैरिज
मुस्कान और सौरभ ने वर्ष 2016 में प्रेम विवाह किया था। शादी के बाद दोनों के रिश्तों और पारिवारिक परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग बातें सामने आईं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सौरभ के परिवार के साथ रिश्ते सहज नहीं रहे और बाद में दोनों अलग किराये के मकान में रहने लगे।
वर्ष 2019 में दंपती के घर बेटी का जन्म हुआ। इसी दौर में सौरभ के पुराने परिचित साहिल शुक्ला का नाम मुस्कान की जिंदगी से जुड़ने की कहानी सामने आई।
स्कूल के दोस्त साहिल से दोबारा कैसे जुड़ी मुस्कान?
जांच से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मुस्कान और साहिल पहले एक ही स्कूल में पढ़ते थे। दोनों की पुरानी जान-पहचान थी। बाद में उनके रास्ते अलग हो गए और मुस्कान ने सौरभ से शादी कर ली।
रिपोर्टों में बताया गया कि वर्ष 2019 के आसपास स्कूल के पुराने साथियों के व्हाट्सऐप ग्रुप के माध्यम से मुस्कान और साहिल फिर संपर्क में आए। इसके बाद दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और उनकी नजदीकियां दोबारा बढ़ने लगीं।
उस समय सौरभ के विदेश में रहने और मुस्कान के मेरठ में रहने की परिस्थितियों का भी जिक्र मीडिया रिपोर्टों में हुआ है। हालांकि, उनके रिश्ते की शुरुआत, उसकी प्रकृति और अलग-अलग घटनाओं की सटीक समयरेखा के बारे में हर दावे को एक जैसा प्रमाणित नहीं माना जा सकता।
सौरभ को रिश्ते के बारे में पता चला तो बढ़ा विवाद
जांच के दौरान सामने आए घटनाक्रम के मुताबिक, मुस्कान और साहिल के संबंधों को लेकर सौरभ को जानकारी हुई थी। इस बात को लेकर उनके वैवाहिक रिश्ते में तनाव पैदा हुआ।
कुछ मीडिया रिपोर्टों में सौरभ के रिश्ते को लेकर नाराज होने और अलग होने पर विचार करने का भी उल्लेख किया गया। हालांकि, किसी व्यक्ति के निजी रिश्तों में तनाव को हत्या का औचित्य नहीं माना जा सकता। इस मामले में अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों को हत्या और साक्ष्य मिटाने के अपराध में दोषी ठहराया।
3 मार्च 2025 को हुई सौरभ की हत्या
सौरभ राजपूत की हत्या मार्च 2025 में मेरठ स्थित उनके आवास पर हुई। अभियोजन पक्ष के मामले के अनुसार, मुस्कान और साहिल ने मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया। हत्या के बाद सौरभ के शव को कई टुकड़ों में काटा गया और उन्हें सीमेंट से भरे नीले प्लास्टिक के ड्रम में छिपा दिया गया।
यह घटना सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। सौरभ के परिवार की शिकायत, आरोपियों से पूछताछ और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ी।
हिमाचल प्रदेश से लौटने के बाद खुला मामला
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वारदात के बाद मुस्कान और साहिल हिमाचल प्रदेश की यात्रा पर गए थे। मेरठ लौटने के बाद मुस्कान ने अपने मायके में घटना की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस तक मामला पहुंचा।
मार्च 2025 में पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया और सौरभ के शव के अवशेष नीले ड्रम से बरामद किए। इस बरामदगी ने पूरे मामले को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया।
जांच के दौरान पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपपत्र दाखिल किया। अभियोजन पक्ष ने अदालत में इन साक्ष्यों के माध्यम से अपना मामला प्रस्तुत किया।
पड़ोसियों ने साहिल को मुस्कान का भाई समझा था
घटना के बाद कुछ मीडिया रिपोर्टों में पड़ोसियों के हवाले से बताया गया कि साहिल अक्सर मुस्कान के घर आता-जाता था। पड़ोसियों के मुताबिक, उन्हें मुस्कान ने साहिल को अपना भाई बताया था।
हालांकि, यह जानकारी पड़ोसियों के बयानों पर आधारित है। इसे हत्या में भूमिका साबित करने वाला स्वतंत्र प्रमाण नहीं माना जा सकता। अदालत में दोषसिद्धि का आधार केवल किसी व्यक्ति का घर आना-जाना नहीं, बल्कि मुकदमे में प्रस्तुत साक्ष्य और उनकी न्यायिक जांच होती है।
मुस्कान की पढ़ाई को लेकर क्या सामने आया?
मुस्कान की मां के हवाले से कुछ मीडिया रिपोर्टों में बताया गया था कि उसने नौवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। वहीं, साहिल की शिक्षा को लेकर भी अलग-अलग रिपोर्टों में सीमित जानकारी सामने आई है।
इन जानकारियों का मामले की न्यायिक स्थिति से सीधा संबंध नहीं है। इसलिए शिक्षा से जुड़ी बातों को सनसनीखेज तरीके से प्रस्तुत करने के बजाय संबंधित व्यक्ति या विश्वसनीय दस्तावेजों के हवाले से ही प्रकाशित करना उचित है।
30 सितंबर को दोषी, 14 अक्टूबर को फांसी की सजा
मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत ने 30 सितंबर 2026 को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को हत्या तथा साक्ष्य मिटाने के अपराध में दोषी ठहराया। मुकदमे में 126 सुनवाइयों और अभियोजन पक्ष के 22 गवाहों की गवाही का उल्लेख मीडिया रिपोर्टों में किया गया।
इसके बाद 14 अक्टूबर 2026 को अदालत ने दोनों को मौत की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए अधिकतम सजा की मांग की थी।
यह फैसला मामले में एक महत्वपूर्ण न्यायिक घटनाक्रम है। हालांकि, मौत की सजा के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील और मृत्युदंड की पुष्टि से संबंधित कानूनी प्रक्रिया आगे महत्वपूर्ण होगी।
मुस्कान और सौरभ की प्रेम कहानी से शुरू हुआ यह मामला पुराने स्कूल के दोस्त साहिल से दोबारा संपर्क, वैवाहिक तनाव और फिर सौरभ की हत्या तक पहुंचा। लेकिन इस कहानी के हर निजी पहलू को स्थापित तथ्य मान लेना सही नहीं है। परिवार के बयान, पड़ोसियों की बातें, पुलिस जांच और अदालत में साबित हुए आरोप अलग-अलग श्रेणियां हैं।
इस मामले में अदालत द्वारा दोनों को दोषी ठहराए जाने और मौत की सजा सुनाए जाने की पुष्टि विश्वसनीय मीडिया रिपोर्टों से होती है। वहीं, मुस्कान के दो बार घर से भागने, साहिल द्वारा नशा कराने और संबंधों की शुरुआत से जुड़ी कुछ बातों को प्रकाशित करते समय उनके स्रोत और प्रमाण की स्थिति स्पष्ट रखना जरूरी है।
The Meerut Blue Drum Murder Case involves Muskan Rastogi, her husband Saurabh Rajput, and Sahil Shukla. The case gained national attention after Saurabh Rajput, a former Merchant Navy officer, was murdered in March 2025 and his remains were concealed in a cement-filled blue drum. A Meerut court convicted Muskan Rastogi and Sahil Shukla on September 30, 2026, and sentenced both to death on October 14, 2026. The case highlights the investigation, prosecution evidence, court proceedings, and the legal process following a death sentence.



















