AIN NEWS 1 कटिहार, बिहार। बिहार के कटिहार जिले के कुरसेला स्थित अयोध्यागंज बाजार में शारदीय नवरात्र के दौरान मां दुर्गा की भक्ति और आस्था का अनोखा नजारा देखने को मिला। यहां स्थित करीब 100 साल पुराने मां वैष्णवी मंदिर में सप्तमी के अवसर पर मां दुर्गा को 101 प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया। इस दौरान नौ कुमारी कन्याओं को देवी के नौ स्वरूपों के रूप में सजाया गया। ढोल-नगाड़ों की गूंज और माता के जयकारों के बीच निकाली गई भव्य झांकी ने आयोजन को विशेष बना दिया।
मंदिर में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला। नवरात्र के अवसर पर मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ विशेष अनुष्ठान किए गए। 101 व्यंजनों का भोग, कन्या पूजन और धार्मिक झांकी इस आयोजन के प्रमुख आकर्षण रहे।
101 प्रकार के व्यंजनों का भोग मां को किया अर्पित
शारदीय नवरात्र के दौरान मां दुर्गा की आराधना में भोग का विशेष महत्व माना जाता है। इसी परंपरा के तहत कुरसेला के अयोध्यागंज बाजार स्थित मां वैष्णवी मंदिर में देवी को 101 प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया।
हिंदू धार्मिक मान्यताओं में देवी-देवताओं को विभिन्न प्रकार के पकवान अर्पित करना श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। नवरात्र के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थानीय परंपराओं के अनुसार विशेष भोग तैयार किए जाते हैं। कहीं हलवा-पूरी का प्रसाद चढ़ाया जाता है तो कहीं फल, मिठाइयां और अन्य पकवान देवी को अर्पित किए जाते हैं।
कटिहार के इस प्राचीन मंदिर में 101 प्रकार के व्यंजनों का भोग भी इसी धार्मिक परंपरा से जुड़ा रहा। इस आयोजन के माध्यम से श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के प्रति अपनी आस्था प्रकट की। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में सभी 101 व्यंजनों की अलग-अलग सूची का उल्लेख नहीं है।
नौ कन्याओं को देवी के नौ स्वरूपों में सजाया गया
मंदिर में आयोजित कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण नौ कुमारी कन्याओं को देवी के नौ स्वरूपों के रूप में सजाना रहा। नवरात्र के दौरान कन्या पूजन की परंपरा का विशेष महत्व होता है। इस परंपरा में छोटी बच्चियों को देवी शक्ति का प्रतीक मानकर उनका सम्मान किया जाता है।
मां दुर्गा के नौ स्वरूपों में शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री शामिल हैं। नवरात्र के नौ दिनों में इन स्वरूपों की पूजा की जाती है।
कन्या पूजन के माध्यम से नारी शक्ति के सम्मान और देवी के प्रति श्रद्धा का भाव प्रकट किया जाता है। कुरसेला के मंदिर में नौ कन्याओं को देवी के स्वरूपों में सजाए जाने से कार्यक्रम को धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान मिली।
ढोल-नगाड़ों के बीच निकाली गई भव्य झांकी
नवरात्र के इस आयोजन में धार्मिक झांकी भी आकर्षण का केंद्र रही। ढोल-नगाड़ों की गूंज और माता के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने भक्तिमय वातावरण में हिस्सा लिया।
नवरात्र के दौरान मंदिरों में विशेष पूजा, आरती, भजन-कीर्तन और झांकियों का आयोजन किया जाता है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के साथ लोगों को एकजुट होने का अवसर भी मिलता है।
कुरसेला के मां वैष्णवी मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में 101 व्यंजनों का भोग और नौ कन्याओं का देवी स्वरूप में श्रृंगार श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहा। हालांकि, झांकी में शामिल सभी पात्रों और कार्यक्रम की विस्तृत समय-सारिणी की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
करीब 100 साल पुराना है मां वैष्णवी मंदिर
कटिहार जिले के कुरसेला प्रखंड के अयोध्यागंज बाजार में स्थित मां वैष्णवी मंदिर करीब 100 साल पुराना बताया जाता है। यह मंदिर स्थानीय श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है। नवरात्र जैसे प्रमुख त्योहारों के दौरान यहां विशेष धार्मिक आयोजन किए जाते हैं।
पुराने मंदिर भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के महत्वपूर्ण केंद्र माने जाते हैं। यहां होने वाले सामूहिक कार्यक्रम लोगों को अपनी परंपराओं से जोड़ते हैं। त्योहारों के दौरान श्रद्धालु परिवार के साथ मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
मां वैष्णवी मंदिर में शारदीय नवरात्र के अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम भी इसी धार्मिक परंपरा का हिस्सा रहा। मंदिर की लगभग एक सदी पुरानी पहचान इस आयोजन को स्थानीय स्तर पर खास बनाती है।
नवरात्र की सप्तमी का क्या है महत्व?
शारदीय नवरात्र हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में शामिल है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। श्रद्धालु व्रत रखते हैं, मंदिरों में दर्शन करते हैं और घरों में विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
नवरात्र की सप्तमी तिथि पर भी देवी की विशेष पूजा की जाती है। अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय परंपराओं के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होते हैं। दुर्गा पूजा के दौरान मंदिरों में सजावट, भोग, आरती और धार्मिक झांकियों के जरिए भक्त अपनी आस्था प्रकट करते हैं।
बिहार के कटिहार जिले में भी नवरात्र के अवसर पर मंदिरों में धार्मिक गतिविधियां बढ़ जाती हैं। कुरसेला के अयोध्यागंज बाजार स्थित मां वैष्णवी मंदिर में आयोजित कार्यक्रम ने क्षेत्र में नवरात्र की धार्मिक परंपराओं की झलक पेश की।
आस्था और परंपरा का संगम बना आयोजन
मां वैष्णवी मंदिर में आयोजित इस कार्यक्रम में भोग, कन्या पूजन और धार्मिक झांकी के माध्यम से नवरात्र की परंपराओं को सामने रखा गया। मां दुर्गा को 101 प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित करना और नौ कन्याओं को देवी के नौ स्वरूपों में सजाना आयोजन की प्रमुख विशेषताएं रहीं।
नवरात्र जैसे पर्व भारतीय संस्कृति में श्रद्धा, सेवा और सम्मान का संदेश देते हैं। कन्या पूजन के माध्यम से बालिकाओं के सम्मान का भाव व्यक्त किया जाता है, जबकि सामूहिक पूजा और धार्मिक आयोजन लोगों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़े रखते हैं।
कटिहार के कुरसेला स्थित करीब 100 साल पुराने मां वैष्णवी मंदिर में हुआ यह आयोजन स्थानीय धार्मिक आस्था और परंपराओं का उदाहरण बना। 101 व्यंजनों का भोग, नौ कन्याओं का श्रृंगार और ढोल-नगाड़ों के बीच निकाली गई झांकी इस कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण रहे।
तथ्य संबंधी नोट: मंदिर की आयु, भोग के सभी व्यंजनों की सूची, श्रद्धालुओं की सटीक संख्या और आयोजन के सभी विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इनसे संबंधित अतिरिक्त दावे शामिल नहीं किए गए हैं।
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Katihar, Bihar, witnessed a special Shardiya Navratri celebration at the nearly 100-year-old Maa Vaishnavi Temple in Ayodhyaganj Bazar, Kursela. The religious event featured 101 varieties of food offered to Goddess Durga, nine young girls dressed as the nine forms of the goddess, and a grand procession accompanied by traditional drums. The celebration highlighted the region’s devotional traditions, Durga Puja rituals, Navratri Kanya Pujan, and the cultural significance of the historic Katihar temple.



















