मेरठ में हनी ट्रैप गैंग का भंडाफोड़: नकली पुलिस चौकी जैसा सेटअप बनाकर लोगों से वसूली, वायरल वीडियो के बीच कई दावों की जांच जारी
AIN NEWS 1 मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से सामने आया एक सनसनीखेज मामला इन दिनों पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का खुलासा किया है, जिस पर सोशल मीडिया के जरिए लोगों को हनी ट्रैप में फंसाकर उनसे लाखों रुपये की उगाही करने का आरोप है। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि दो अन्य आरोपी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं।
मामले ने उस समय और अधिक तूल पकड़ लिया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें कथित रूप से आरोपियों का एक पुलिस अधिकारी के साथ दिखाई देने का दावा किया गया। हालांकि, इस वायरल वीडियो और उससे जुड़े दावों की अभी तक किसी भी सरकारी एजेंसी या मेरठ पुलिस द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। पुलिस का कहना है कि वायरल सामग्री की भी जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

ऐसे बिछाया जाता था हनी ट्रैप का जाल
पुलिस जांच के अनुसार आरोपी सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के माध्यम से पहले खुद को युवती बताकर लोगों से संपर्क करते थे। धीरे-धीरे दोस्ती बढ़ाई जाती थी और फिर अश्लील चैट या बातचीत के जरिए सामने वाले व्यक्ति को अपने जाल में फंसाया जाता था।
जब पीड़ित पूरी तरह उनके प्रभाव में आ जाता था, तब आरोपी उसके खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कराने, महिला उत्पीड़न या अन्य गंभीर आरोपों में फंसाने की धमकी देने लगते थे। डर के कारण कई लोग आरोपियों की बातों में आ जाते थे।
नकली पुलिस चौकी जैसा बनाया गया था पूरा माहौल
पुलिस को सूचना मिलने के बाद शनिवार सुबह करीब 11:30 बजे ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र में छापेमारी की गई। मौके पर पहुंची टीम ने देखा कि कमरे के अंदर ऐसा वातावरण तैयार किया गया था, जिससे पहली नजर में वह किसी वास्तविक पुलिस चौकी जैसा दिखाई देता था।
कमरे में टेबल-कुर्सी, पुलिस अधिकारी के बैठने की व्यवस्था, सरकारी कार्यालय जैसा माहौल तथा महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीरें लगाई गई थीं। पुलिस को वहां से पुलिस वर्दी और अन्य सामान भी मिला, जिनका इस्तेमाल कथित रूप से लोगों को डराने के लिए किया जाता था।
खुद को पुलिसकर्मी बताकर बनाते थे दबाव
जांच में सामने आया कि आरोपी खुद को इंस्पेक्टर या दरोगा बताकर पीड़ितों को बुलाते थे। उनसे कहा जाता था कि उनके खिलाफ गंभीर शिकायत दर्ज हो चुकी है और यदि समझौता नहीं किया गया तो उन्हें जेल भेज दिया जाएगा।
बताया जा रहा है कि इसी डर का फायदा उठाकर आरोपियों द्वारा बड़ी रकम की मांग की जाती थी। कई लोग सामाजिक बदनामी के डर से शिकायत तक नहीं कर पाते थे।
शिकायत के बाद खुला पूरा मामला
पुलिस अधिकारियों के अनुसार एक युवक ने पूरे घटनाक्रम की शिकायत पुलिस से की थी। शिकायत में उसने बताया कि उसे सोशल मीडिया पर लड़की बनकर संपर्क किया गया और बाद में पुलिस कार्रवाई का डर दिखाकर पैसे मांगे गए।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने योजना बनाकर छापा मारा और मौके से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है जबकि फरार आरोपियों की तलाश में कई स्थानों पर दबिश दी जा रही है।
एसपी सिटी ने क्या कहा?
मेरठ के एसपी सिटी विनायक गोपाल भोंसले ने मीडिया को बताया कि शुरुआती जांच में आरोपियों द्वारा हनी ट्रैप के जरिए लोगों से उगाही करने के तथ्य सामने आए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर जिस तरह “फर्जी पुलिस चौकी” चलाने के दावे किए जा रहे हैं, उन दावों की वास्तविकता की भी जांच की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि आरोपी पहले प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करते थे, लेकिन आर्थिक नुकसान के बाद उन्होंने अवैध तरीके से जल्दी पैसा कमाने के उद्देश्य से यह गिरोह बनाया।
वायरल वीडियो को लेकर क्या है स्थिति?
इस पूरे मामले के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो के साथ यह दावा किया जा रहा है कि गिरोह के एक सदस्य के किसी पुलिस अधिकारी से करीबी संबंध थे।
हालांकि मेरठ पुलिस ने अभी तक इस दावे की पुष्टि नहीं की है। न ही यह स्पष्ट किया गया है कि वायरल वीडियो कब का है, किस अवसर का है और उसमें दिखाई दे रहे लोगों के बीच क्या संबंध हैं। इसलिए इस तरह के दावों को फिलहाल सत्यापित नहीं माना जा सकता।
पुलिस कर रही है हर पहलू की जांच
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच कई बिंदुओं पर की जा रही है। यदि जांच में किसी सरकारी कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और उनसे कितनी रकम वसूली गई।
लोगों के लिए पुलिस की सलाह
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी अनजान व्यक्ति से व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें। यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस अधिकारी बताकर फोन पर पैसे मांगता है या किसी मामले में समझौते के नाम पर रकम मांगता है, तो उसकी सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन को दें।
किसी भी वायरल वीडियो या सोशल मीडिया पोस्ट पर बिना सत्यापन विश्वास न करें और अफवाहों को आगे साझा करने से बचें।
मेरठ में सामने आया यह मामला एक संगठित हनी ट्रैप और उगाही रैकेट की ओर संकेत करता है। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जांच आगे बढ़ा दी है, जबकि दो अन्य की तलाश जारी है। वहीं सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और पुलिस अधिकारियों से कथित संबंधों के दावों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में जांच पूरी होने तक किसी भी अपुष्ट जानकारी को तथ्य मानने से बचना चाहिए। पुलिस का कहना है कि मामले के हर पहलू की निष्पक्ष जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
Meerut Police has exposed a honey trap gang allegedly operating a fake police post-like setup to extort money from victims. The accused reportedly posed as women online, trapped young men through obscene chats, and later threatened them with fake police cases. Two suspects have been arrested while two others are still absconding. The case has gained attention after a viral video surfaced on social media, although police have clarified that several claims circulating online are still under investigation. The Meerut Honey Trap Case, Fake Police Post, Uttar Pradesh Crime News, Police Investigation, and Viral Video remain among the most searched keywords related to this incident.



















