AIN NEWS 1: नोएडा की हाईराइज सोसायटियों में फ्लैटों को रोजाना या कुछ दिनों के लिए किराए पर देने का चलन अब सुरक्षा और निजता से जुड़े सवाल खड़े कर रहा है। खासकर उन रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स में, जहां बड़ी संख्या में परिवार रहते हैं, लगातार नए और अस्थायी लोगों का आना-जाना सोसायटी प्रबंधन के लिए चुनौती बन सकता है। इसी मुद्दे को लेकर नोएडा हाईराइज फेडरेशन (NHRF) के अध्यक्ष निखिल सिंघल ने रेजिडेंशियल सोसायटियों में शॉर्ट-टर्म रेंटल को लेकर स्पष्ट और प्रभावी नियम बनाने की जरूरत बताई है।
निखिल सिंघल का कहना है कि किसी व्यक्ति के अपने फ्लैट से कमाई करने के अधिकार पर सवाल उठाना उद्देश्य नहीं है, लेकिन रेजिडेंशियल सोसायटी में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा और निजता को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उनका मानना है कि विशेष रूप से स्टूडियो और छोटे अपार्टमेंट्स को रोजाना या बेहद कम अवधि के लिए किराए पर देने की व्यवस्था की गंभीर समीक्षा होनी चाहिए।

Supernova की घटना के बाद बढ़ी चिंता
नोएडा के सेक्टर-94 स्थित Supertech Supernova को लेकर हाल में सामने आई घटनाओं ने इस बहस को और तेज कर दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक, सोसायटी में शॉर्ट-टर्म स्टे और Airbnb, OYO तथा Booking.com जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से फ्लैटों को कम अवधि के लिए किराए पर देने को लेकर निवासियों और अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन ने सुरक्षा संबंधी चिंता जताई।
एक हालिया घटना में एक बेड एंड ब्रेकफास्ट ऑपरेटर पर सोसायटी के सुरक्षा बैरियर को वाहन से पार करने का आरोप लगा था। इसके बाद Supernova की एसोसिएशन ने शॉर्ट-टर्म रेंटल को लेकर सख्त रुख अपनाया और फ्लैट मालिकों तथा किरायेदारों को ऐसी गतिविधियों से बचने की चेतावनी दी।
इसके बाद सोसायटी में किरायेदारी और निवासियों के आचरण को नियंत्रित करने के लिए नई नीति की खबर भी सामने आई। इसमें फ्लैटों के शॉर्ट-टर्म और व्यावसायिक इस्तेमाल को नियंत्रित करने तथा रेजिडेंशियल परिसर के मूल स्वरूप को बनाए रखने पर जोर दिया गया है।
रोज बदलते मेहमानों से क्या है परेशानी?
NHRF अध्यक्ष निखिल सिंघल के मुताबिक, सामान्य किरायेदारी और रोजाना बदलने वाले मेहमानों के बीच काफी अंतर है। जब कोई परिवार या व्यक्ति कई महीनों अथवा वर्षों के लिए फ्लैट में रहता है तो उसकी पहचान, संपर्क और रहने की जानकारी सोसायटी रिकॉर्ड में दर्ज की जा सकती है।
लेकिन यदि किसी फ्लैट को एक-दो दिन या कुछ घंटों के लिए लगातार अलग-अलग लोगों को दिया जा रहा है तो हर नए व्यक्ति की पहचान और उसके आने-जाने की निगरानी करना मुश्किल हो सकता है।
ऐसी स्थिति में सुरक्षा गार्डों पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ता है। हर दिन नए वाहन, नए चेहरे और अलग-अलग मोबाइल नंबरों वाले लोगों की एंट्री होने से सोसायटी के विजिटर रिकॉर्ड और सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता प्रभावित हो सकती है।
निखिल सिंघल ने इसी वजह से कहा है कि रेजिडेंशियल सोसायटियों में इस तरह के शॉर्ट-टर्म रेंटल के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाने चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी भी नए व्यक्ति की एंट्री उचित रिकॉर्ड और सत्यापन प्रक्रिया के बाद ही हो।
पुलिस और आईडी वेरिफिकेशन पर जोर
NHRF की ओर से उठाए गए मुद्दों में पुलिस या पहचान सत्यापन को महत्वपूर्ण माना गया है। हालांकि, किसी सोसायटी में लागू होने वाले नियम और पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया स्थानीय प्रशासन, पुलिस व्यवस्था और सोसायटी के उपनियमों के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए हर सोसायटी को अपने क्षेत्र में लागू कानूनी और प्रशासनिक प्रावधानों के अनुरूप व्यवस्था तैयार करनी होगी।
नोएडा में किरायेदार और PG वेरिफिकेशन के लिए पुलिस की ऑनलाइन व्यवस्था भी उपलब्ध है। ऐसे में फ्लैट मालिकों और सोसायटी प्रबंधन के बीच बेहतर समन्वय से किरायेदारों की पहचान संबंधी रिकॉर्ड को व्यवस्थित किया जा सकता है।
सिर्फ Supernova नहीं, पहले भी सामने आते रहे हैं मामले
नोएडा की हाईराइज सोसायटियों में फ्लैटों के कमर्शियल इस्तेमाल या अत्यधिक शॉर्ट-टर्म ऑक्यूपेंसी का मुद्दा नया नहीं है। वर्ष 2025 में भी प्रशासन ने Supernova में कथित रूप से बिना पंजीकरण चल रहे कई बेड एंड ब्रेकफास्ट संचालन को लेकर नोटिस जारी किए थे। उस समय प्रशासन की कार्रवाई में ऐसे आवासों को लेकर सवाल उठाए गए थे, जो सामान्य रेजिडेंशियल इस्तेमाल के बजाय होटल या गेस्टहाउस जैसी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे।
इसी तरह नोएडा की कुछ अन्य सोसायटियों में भी फ्लैटों को PG या कई लोगों को सबलेट करने को लेकर विवाद सामने आ चुके हैं। 2022 में Emerald Court में भी कुछ फ्लैटों के PG के रूप में इस्तेमाल और अत्यधिक संख्या में लोगों के रहने को लेकर AOA स्तर पर आपत्ति जताई गई थी।
सुरक्षा के साथ निजता भी बड़ा मुद्दा
हाईराइज सोसायटियों में सुरक्षा का मतलब केवल मुख्य गेट पर गार्ड की मौजूदगी नहीं है। लिफ्ट, पार्किंग, कॉमन एरिया, क्लब, स्विमिंग पूल और दूसरे साझा स्थानों में कौन आ-जा रहा है, इसकी जानकारी भी महत्वपूर्ण होती है।
रेजिडेंट्स चाहते हैं कि उनके घर और परिवार की निजी जिंदगी सुरक्षित रहे। यदि किसी टावर में लगातार ऐसे लोग आते-जाते रहें जिनकी पहचान और रहने का उद्देश्य सोसायटी के रिकॉर्ड में स्पष्ट न हो, तो इससे निवासियों में असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है।
विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों वाले परिवारों के लिए यह चिंता और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
जवाबदेही तय करने की जरूरत
Nikhil Singhal ने साफ किया है कि उद्देश्य किसी फ्लैट मालिक के निजी व्यवसाय या कमाई के अधिकार का विरोध करना नहीं है। मुद्दा यह है कि यदि किसी रेजिडेंशियल परिसर में फ्लैट को व्यावसायिक या शॉर्ट-टर्म स्टे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, तो उससे जुड़े सुरक्षा और जवाबदेही के नियम भी स्पष्ट होने चाहिए।
इसके लिए सोसायटी स्तर पर कुछ बुनियादी व्यवस्थाएं प्रभावी की जा सकती हैं। इनमें फ्लैट मालिक की जिम्मेदारी तय करना, किरायेदार या अस्थायी मेहमान की पहचान संबंधी जानकारी दर्ज करना, विजिटर रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखना, वाहनों की जानकारी दर्ज करना और संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तत्काल सुरक्षा एजेंसी या पुलिस को सूचना देना शामिल हो सकता है।
AOAs और प्रशासन की भूमिका अहम
NHRF का मानना है कि केवल सोसायटी के सुरक्षा गार्डों पर पूरी जिम्मेदारी डालना पर्याप्त नहीं होगा। Apartment Owners Associations (AOAs), मेंटेनेंस एजेंसियों, सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय जरूरी है।
हर सोसायटी की परिस्थितियां अलग हो सकती हैं। इसलिए नियम बनाते समय यह भी ध्यान रखना होगा कि सामान्य किरायेदार, लंबे समय के लिए रहने वाले परिवार और कुछ दिनों के लिए आने वाले मेहमानों के बीच उचित अंतर किया जाए।
नियम ऐसे हों जो सुरक्षा मजबूत करें, लेकिन वैध किरायेदारी और संपत्ति मालिकों के अधिकारों को अनावश्यक रूप से प्रभावित न करें।
NHRF की अपील
निखिल सिंघल ने हाल की घटनाओं को सभी हाईराइज सोसायटियों के लिए चेतावनी के रूप में देखने की बात कही है। उनका कहना है कि किसी घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय सोसायटी प्रबंधन को पहले से सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए।
उनके मुताबिक, शॉर्ट-टर्म रेंटल के लिए स्पष्ट नियम, उचित पहचान सत्यापन, विजिटर रिकॉर्ड और जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था होनी चाहिए। इससे न केवल सुरक्षा बेहतर होगी, बल्कि किसी घटना की स्थिति में जिम्मेदार व्यक्ति तक पहुंचना भी आसान होगा।
नोएडा में लगातार बढ़ती हाईराइज आबादी और बदलती रेंटल व्यवस्था के बीच आने वाले समय में शॉर्ट-टर्म रेंटल को लेकर स्पष्ट नीति की मांग और तेज हो सकती है। सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि रेजिडेंट्स की सुरक्षा और निजता को बनाए रखते हुए संपत्ति मालिकों के वैध अधिकारों के बीच संतुलन बनाया जाए।
फिलहाल Supernova की घटनाओं के बाद उठा यह मुद्दा केवल एक सोसायटी तक सीमित नहीं दिखाई दे रहा है। NHRF की मांग है कि नोएडा की हाईराइज सोसायटियां अपनी सुरक्षा व्यवस्था, विजिटर मैनेजमेंट और शॉर्ट-टर्म रेंटल से जुड़े नियमों की समय रहते समीक्षा करें, ताकि भविष्य में किसी बड़ी घटना की स्थिति पैदा न हो।
Noida short-term rental practices in high-rise residential societies have raised fresh concerns over security, privacy and visitor management. NHRF President Nikhil Singhal has called for clearer short-term rental rules, proper tenant and guest verification, visitor records and accountability in residential communities. The recent Supernova Noida incident involving a short-term stay has further highlighted concerns around Airbnb, OYO and other temporary rental arrangements. Stronger coordination between apartment associations, property owners, security agencies and local authorities can help improve Noida high-rise society security while maintaining a balance between residents’ safety and property owners’ legitimate rights.



















