AIN NEWS 1: मेरठ में पुलिसकर्मियों पर एक फर्नीचर कारोबारी को कथित तौर पर अवैध हिरासत में रखकर लाखों रुपये वसूलने का गंभीर मामला सामने आया है। नोएडा के कारोबारी शाहिद चौधरी ने मेरठ के लिसाड़ी गेट थाने में तैनात दरोगा अंकित सागर और हेड कांस्टेबल नीरज कुमार पर अभद्रता, मारपीट, निजी सामान अपने कब्जे में रखने और रुपये मांगने के आरोप लगाए हैं। कारोबारी की शिकायत के बाद दोनों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। मामले में मुजफ्फरनगर में तैनात दरोगा आरिफ अली की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। उनके खिलाफ भी अलग से कार्रवाई की गई है।
शिकायत में बैंक खातों को फ्रीज कराने, उन्हें दोबारा चालू कराने के नाम पर रकम मांगने और कथित तौर पर सोफा देने का दबाव बनाने जैसी बातें कही गई हैं। मामले की जांच वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर की जा रही है।

डीआईजी से शिकायत के बाद पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई
गौतमबुद्धनगर के सेक्टर-93 गेझा निवासी फर्नीचर कारोबारी शाहिद चौधरी ने 21 अक्टूबर 2026 को मेरठ रेंज के डीआईजी कलानिधि नैथानी से शिकायत की थी। उन्होंने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि 2 अगस्त को लिसाड़ी गेट थाने से फोन कर उन्हें मेरठ बुलाया गया। इसके बाद उन्हें थाने में रोककर कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया और उनसे रुपये देने का दबाव बनाया गया।
शिकायत सामने आने के बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया। हिन्दुस्तान और अमर उजाला की 22 अक्टूबर की रिपोर्टों के अनुसार, लिसाड़ी गेट थाने में तैनात दरोगा अंकित सागर और हेड कांस्टेबल नीरज कुमार को निलंबित कर दिया गया। दोनों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की गई है।
मेरठ के एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने मामले की जांच एसपी सिटी विनायक गोपाल भोंसले को सौंपी है। वहीं, शिकायत में अन्य लोगों की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है, जिसकी जांच की जा रही है।
थाने बुलाने के बाद हिरासत में रखने का आरोप
शाहिद चौधरी के मुताबिक, 2 अगस्त को उन्हें लिसाड़ी गेट थाने से फोन आया था। बताया गया कि दानिश नाम के युवक की शिकायत के सिलसिले में उन्हें थाने आना होगा। कारोबारी का आरोप है कि मेरठ पहुंचने पर दरोगा अंकित सागर और हेड कांस्टेबल नीरज कुमार ने उनके साथ अभद्रता की और उन्हें लॉकअप में बंद कर दिया।
शिकायत में कारोबारी ने यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान उनका आईफोन 17, घड़ी और बेल्ट अपने कब्जे में ले लिए गए। उनका कहना है कि जब उनके भाई सन्नवर और जाबिर थाने पहुंचे, तो उनसे भी रुपये मांगे गए।
शाहिद का दावा है कि उन्हें और उनके परिजनों को कार्रवाई का डर दिखाकर रकम देने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने अपनी शिकायत में कथित हिरासत और भुगतान से जुड़े घटनाक्रम का विवरण दिया है।
हालांकि, इन आरोपों के संबंध में वास्तविक परिस्थितियों और संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका का निर्धारण जांच के बाद ही हो सकेगा।
बैंक खाते में ट्रांसफर और नकद भुगतान का दावा
कारोबारी शाहिद चौधरी ने अपनी शिकायत में कथित लेनदेन का भी ब्योरा दिया है। उनके मुताबिक, 4 अगस्त को शादाब राव के बैंक खाते में 1.20 लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए। इसके बाद 2.80 लाख रुपये नकद देने का आरोप लगाया गया है।
शिकायत में बताए गए इन दोनों भुगतानों की कुल राशि चार लाख रुपये होती है। कारोबारी का आरोप है कि रकम देने के बाद उनका आईफोन 17 वापस कर दिया गया, लेकिन घड़ी और बेल्ट उन्हें नहीं लौटाई गईं।
शाहिद ने दावा किया कि इस पूरे घटनाक्रम में थाने के सामने जनसुविधा केंद्र चलाने वाले शादाब राव उर्फ शालू की भी भूमिका थी। आरोप है कि शादाब पुलिसकर्मियों के संपर्क में था और कारोबारी से रकम लेने के मामले में उसकी भूमिका की जांच की जानी चाहिए।
बैंक ट्रांजैक्शन और नकद भुगतान से संबंधित दावों की पुष्टि के लिए संबंधित रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल उपलब्ध जानकारी शिकायत में लगाए गए आरोपों पर आधारित है।
सोफा मांगने और दो खातों में रुपये भेजने का आरोप
शाहिद चौधरी ने अपनी शिकायत में एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनके मुताबिक, कथित भुगतान के बाद उनसे अधिकारियों को देने के नाम पर सोफा मांगा गया।
कारोबारी का दावा है कि उन्हें सोफे की तस्वीर और दो क्यूआर कोड भेजे गए। इसके बाद मोहम्मद इमरान और सुशीला के नाम वाले बैंक खातों में 36-36 हजार रुपये ट्रांसफर करने के लिए कहा गया।
यदि शिकायत में बताए गए दोनों भुगतान किए गए थे, तो उनकी कुल राशि 72 हजार रुपये होती है। कारोबारी ने इस घटनाक्रम को कथित वसूली का हिस्सा बताया है।
इस मामले में यह भी जांच का विषय है कि संबंधित खातों में वास्तव में कितनी रकम भेजी गई, भुगतान किसके निर्देश पर किया गया और उसका उद्देश्य क्या था। केवल शिकायत में नाम आने से किसी व्यक्ति की संलिप्तता स्वतः सिद्ध नहीं होती।
शादाब राव की भूमिका भी जांच के दायरे में
इस मामले में शादाब राव उर्फ शालू का नाम भी सामने आया है। कारोबारी ने आरोप लगाया है कि वह लिसाड़ी गेट थाने के सामने जनसुविधा केंद्र चलाता है और पुलिसकर्मियों के संपर्क में रहता है।
शिकायत के मुताबिक, उसके बैंक खाते में 1.20 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे। कारोबारी ने दावा किया है कि उनके पास लेनदेन, कॉल डिटेल और अन्य दस्तावेज मौजूद हैं, जिन्हें जांच अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया गया है या करने की बात कही गई है।
पुलिस जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि शादाब राव की भूमिका क्या थी, रुपये किस परिस्थिति में लिए गए और क्या संबंधित लेनदेन का किसी पुलिसकर्मी से संबंध था।
इस मामले में मेरठ में पूर्व में तैनात रहे दरोगा आरिफ अली का नाम भी सामने आया है। उनके खिलाफ लगाए गए आरोप लिसाड़ी गेट प्रकरण से जुड़े आरोपों से अलग भी हैं।
मुजफ्फरनगर के दरोगा आरिफ अली पर भी एक लाख रुपये लेने का आरोप
अमर उजाला की 22 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, मुजफ्फरनगर के खतौली क्षेत्र की पमनावली चौकी प्रभारी दरोगा आरिफ अली पर कारोबारी की पत्नी का बैंक खाता दोबारा चालू कराने के नाम पर एक लाख रुपये लेने का आरोप लगाया गया है।
शाहिद चौधरी के मुताबिक, उनकी पत्नी का बैंक खाता फ्रीज होने के बाद उसे खुलवाने के नाम पर रकम मांगी गई थी। शिकायत में उनके भाई से कथित तौर पर एक लाख रुपये लिए जाने और इसके बाद भी बाकी रकम के लिए दबाव बनाने का आरोप है।
रिपोर्ट के अनुसार, आरिफ अली को भी निलंबित किया गया है और मामले की जांच कराई जा रही है। शाहिद ने कथित भुगतान से संबंधित वीडियो साक्ष्य होने का दावा भी किया है।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। लिसाड़ी गेट थाने से जुड़े प्रकरण में 4.72 लाख रुपये की कथित वसूली का विवरण दिया गया है, जबकि आरिफ अली से जुड़े मामले में एक लाख रुपये का अलग आरोप है। अमर उजाला ने दोनों को मिलाकर 5.72 लाख रुपये की रकम अपनी रिपोर्ट की हेडलाइन में बताई है। इसलिए दोनों घटनाक्रमों को एक ही भुगतान मानना उचित नहीं होगा।
बैंक खाता फ्रीज होने की वजह की भी होगी जांच
शाहिद चौधरी की शिकायत में बैंक खाते फ्रीज किए जाने का मुद्दा भी अहम है। कारोबारी का आरोप है कि खाते को फ्रीज किए जाने और बाद में उसे दोबारा चालू कराने की प्रक्रिया का इस्तेमाल उन पर आर्थिक दबाव बनाने के लिए किया गया।
इस मामले में जांच के दौरान यह देखना जरूरी होगा कि बैंक खाता किस शिकायत या जांच के आधार पर फ्रीज किया गया था। संबंधित अधिकारियों की ओर से बैंक को क्या निर्देश दिए गए, भुगतान के लिए किसने संपर्क किया और खाते को दोबारा चालू कराने के नाम पर रकम मांगे जाने के आरोपों में कितनी सच्चाई है, इन सभी पहलुओं की पड़ताल की जानी चाहिए।
कारोबारी ने 7 अगस्त को भेजे गए एक ईमेल का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार, इसमें बैंक खाते को दोबारा चालू कराने के लिए बैंक से किए गए पत्राचार की जानकारी थी। यह दस्तावेज जांच में उपयोगी हो सकता है।
शुरुआती जांच में लापरवाही पर सीओ को चेतावनी
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायत की शुरुआती जांच में कथित लापरवाही को लेकर सीओ कोतवाली संग्राम सिंह को भी डीआईजी की नाराजगी का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट में बताया गया है कि पीड़ित से बात किए बिना जांच पूरी करने के मामले में उनसे जवाब मांगा गया और अंतिम चेतावनी दी गई।
यह घटनाक्रम बताता है कि वरिष्ठ अधिकारी केवल शिकायत में लगाए गए आरोपों की ही नहीं, बल्कि शुरुआती जांच की प्रक्रिया की भी समीक्षा कर रहे हैं। हालांकि, विभागीय चेतावनी और पुलिसकर्मियों के निलंबन को अंतिम आपराधिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
अब जांच में सामने आएंगे अहम तथ्य
मेरठ के लिसाड़ी गेट थाने से जुड़ा यह मामला पुलिस की कार्यप्रणाली और शिकायतों की निष्पक्ष जांच से संबंधित गंभीर सवाल उठाता है। एक ओर कारोबारी ने कथित अवैध हिरासत, मारपीट, निजी सामान वापस नहीं करने और लाखों रुपये लेने के आरोप लगाए हैं, वहीं पुलिस विभाग ने संबंधित कर्मियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है।
अब जांच में बैंक खातों के रिकॉर्ड, कथित नकद भुगतान, क्यूआर कोड, कॉल डिटेल, ईमेल और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। साथ ही यह भी स्पष्ट करना होगा कि मेरठ और मुजफ्फरनगर से जुड़े आरोपों में किन व्यक्तियों की क्या भूमिका रही।
फिलहाल दरोगा अंकित सागर, हेड कांस्टेबल नीरज कुमार और दरोगा आरिफ अली के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की खबर प्रकाशित हुई है। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच के नतीजों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जा सकेगा।
नोट: इस खबर में अवैध हिरासत, वसूली और सोफा मांगने से संबंधित विवरण कारोबारी की शिकायत तथा प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
Meerut police news: Sub-Inspector Ankit Sagar and Head Constable Neeraj Kumar have been suspended following allegations by Noida-based furniture trader Shahid Chaudhary of illegal detention, harassment and extortion of ₹4.72 lakh at Lisadi Gate police station. The complaint also mentions an alleged demand for a sofa and transfers to multiple bank accounts. A separate allegation involving Muzaffarnagar Sub-Inspector Arif Ali concerns ₹1 lakh allegedly demanded in connection with unfreezing a bank account. The investigation is examining the allegations, financial transactions and the possible roles of other individuals.



















