ओखला की मोदी फ्लोर मिल्स का असली मालिक कौन? 1936 से दिल्ली के घरों तक पहुंचा आटा, जानिए पूरी कहानी
AIN NEWS 1 नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में बसे मोदीनगर का नाम सुनते ही सबसे पहले मोदी परिवार और उसके बड़े औद्योगिक साम्राज्य की याद आती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी कारोबारी परिवार की पहचान से जुड़ा एक पुराना औद्योगिक प्रतिष्ठान दिल्ली के ओखला इलाके में भी मौजूद है? इसे मोदी फ्लोर मिल्स के नाम से जाना जाता है।
एक समय ऐसा था जब दिल्ली में आटा, मैदा और सूजी की सप्लाई के कारोबार में इस मिल का महत्वपूर्ण स्थान माना जाता था। आज भले ही दिल्ली की पहचान बदलते हुए आधुनिक उद्योगों और बहुमंजिला इमारतों से होती हो, लेकिन ओखला का मोदी मिल्स परिसर शहर के पुराने औद्योगिक इतिहास की एक अहम कड़ी है।
गूजरमल मोदी से जुड़ता है इतिहास
मोदी परिवार के औद्योगिक सफर में राय बहादुर गूजरमल मोदी का नाम बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने 20वीं सदी के शुरुआती दशकों में कारोबार को आगे बढ़ाया और उत्तर भारत में उद्योगों की नींव मजबूत की।
गूजरमल मोदी का जन्म 9 अगस्त 1902 को हुआ था। उनके कारोबारी सफर ने आगे चलकर एक बड़े औद्योगिक समूह का रूप लिया। मोदीनगर की स्थापना और वहां उद्योग लगाने के कारण उनके परिवार का नाम उत्तर भारत के औद्योगिक इतिहास में खास तौर पर दर्ज हुआ।

मोदीनगर, जो पहले बेगमाबाद के नाम से जाना जाता था, धीरे-धीरे मोदी परिवार के उद्योगों का प्रमुख केंद्र बन गया। चीनी मिल से शुरू हुआ यह औद्योगिक विस्तार बाद में कई अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचा।
ओखला में मोदी फ्लोर मिल्स कैसे आई?
दिल्ली के ओखला इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित मोदी फ्लोर मिल्स इसी औद्योगिक विरासत से जुड़ा प्रतिष्ठान है। सरकारी और कारोबारी रिकॉर्ड में भी Modi Flour Mills का पता मोदी मिल्स कंपाउंड, ओखला इंडस्ट्रियल एरिया, नई दिल्ली-110020 के रूप में दर्ज मिलता है। दिल्ली जल बोर्ड के पुराने रिकॉर्ड में भी मोदी फ्लोर मिल्स के ओखला इंडस्ट्रियल एरिया फेज-III स्थित परिसर का उल्लेख मिलता है।
यानी यह सिर्फ नाम के आगे ‘मोदी’ लगा हुआ कोई सामान्य कारोबार नहीं है, बल्कि इसका संबंध मोदी परिवार के पुराने कारोबारी नेटवर्क से रहा है।
कभी दिल्ली के लिए बड़ा आटा सप्लायर था
पुराने दौर में दिल्ली में आज की तरह हर मोहल्ले में बड़ी संख्या में पैकेज्ड आटा कंपनियां उपलब्ध नहीं थीं। आटा, मैदा और सूजी जैसे जरूरी खाद्य पदार्थों की बड़ी मात्रा में आपूर्ति करने वाली मिलों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण थी।
मोदी फ्लोर मिल्स भी इसी व्यवस्था का हिस्सा रही। गेहूं की खरीद, उसकी सफाई, पिसाई और उससे तैयार होने वाले उत्पादों की सप्लाई मिल के कारोबार का अहम हिस्सा रहे होंगे। तैयार उत्पादों में आटा, मैदा और सूजी जैसे सामान शामिल रहे, जिनकी जरूरत घरों के साथ-साथ बेकरी, होटल और खाने-पीने से जुड़े कारोबारों में होती थी।
यही वजह है कि ओखला स्थित इस मिल का नाम लंबे समय तक दिल्ली के औद्योगिक नक्शे पर दिखाई देता रहा।
तो आखिर इसका मालिक कौन है?
यह सवाल सबसे ज्यादा दिलचस्प है। आम बोलचाल में लोग इसे ‘मोदी ग्रुप की मिल’ कहते हैं, लेकिन किसी कंपनी की मौजूदा कानूनी स्थिति समझने के लिए उसके कॉरपोरेट रिकॉर्ड को देखना ज्यादा सही तरीका है।
उपलब्ध कॉरपोरेट रिकॉर्ड के मुताबिक Modi Flour Mills Private Limited का पंजीकृत पता मोदी मिल्स कंपाउंड, ओखला इंडस्ट्रियल एरिया, नई दिल्ली है। रिकॉर्ड में सुरेश कुमार मोदी को कंपनी के वर्तमान निदेशकों में शामिल बताया गया है। इसके अलावा कुंदन सिंह भी निदेशक के रूप में दर्ज हैं।
सुरेश कुमार मोदी का नाम दूसरी संबंधित कंपनियों में भी दिखाई देता है। कॉरपोरेट रिकॉर्ड के अनुसार वे Patiala Flour Mills Company Limited के मैनेजिंग डायरेक्टर भी रहे हैं और Modi Flour Mills Private Limited में 2008 से निदेशक के तौर पर दर्ज हैं।
इसलिए यह कहना ज्यादा सटीक होगा कि आज की कॉरपोरेट संरचना में मोदी फ्लोर मिल्स से सुरेश कुमार मोदी और उनसे जुड़े कारोबारी हितों का संबंध रिकॉर्ड में दिखाई देता है। वहीं, इसे सीधे पूरे ‘मोदी ग्रुप’ की वर्तमान स्वामित्व वाली कंपनी कहना बिना विस्तृत शेयरहोल्डिंग दस्तावेजों के उचित नहीं होगा।
1989 के बाद बदली कारोबारी तस्वीर
मोदी परिवार का कारोबारी साम्राज्य एक समय बेहद बड़ा था। परिवार में कारोबारी हिस्सेदारी और कंपनियों के नियंत्रण को लेकर हुए बंटवारे के बाद अलग-अलग उद्योग और कंपनियां परिवार की अलग-अलग शाखाओं से जुड़ गईं।
यही वजह है कि आज ‘मोदी ग्रुप’ नाम सुनने पर यह मान लेना सही नहीं होगा कि परिवार की हर पुरानी कंपनी पर एक ही व्यक्ति या एक ही कारोबारी समूह का नियंत्रण है।
मोदी फ्लोर मिल्स के मामले में भी मौजूदा कॉरपोरेट रिकॉर्ड अलग तस्वीर पेश करते हैं। रिकॉर्ड में कंपनी के निदेशक के तौर पर सुरेश कुमार मोदी का नाम दर्ज है, जबकि पुराने रिकॉर्ड में उमेश सिंह समेत कुछ अन्य नाम पूर्व निदेशकों के रूप में दिखाई देते हैं।
मोदी मिल फ्लाईओवर से भी जुड़ी पहचान
ओखला की मोदी फ्लोर मिल्स की चर्चा केवल कारोबार तक सीमित नहीं है। दिल्ली के इस इलाके में ‘मोदी मिल’ लंबे समय से एक स्थानीय लैंडमार्क के रूप में भी जाना जाता रहा है।
मोदी मिल फ्लाईओवर का नाम सुनते ही दक्षिण दिल्ली और ओखला इलाके से परिचित लोगों के सामने इस क्षेत्र की तस्वीर उभर आती है। यानी एक औद्योगिक प्रतिष्ठान का नाम धीरे-धीरे शहर के भौगोलिक संदर्भ का हिस्सा बन गया।
क्या आज भी मिल चल रही है?
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। मोदी फ्लोर मिल्स का ऐतिहासिक महत्व और मौजूदा समय में उसका वास्तविक उत्पादन स्तर दो अलग-अलग बातें हैं।
उपलब्ध रिकॉर्ड कंपनी और उसके ओखला पते की पुष्टि करते हैं, लेकिन पुराने समय की तरह आज भी दिल्ली के घर-घर में इसी मिल का आटा पहुंचता है, ऐसा दावा वर्तमान आधिकारिक उत्पादन आंकड़ों के बिना नहीं किया जा सकता। पुराने रिकॉर्ड में यह प्रतिष्ठान आटा कारोबार से जुड़ा रहा है और आज भी इसका कॉरपोरेट अस्तित्व दर्ज है।
मोदीनगर और मोदी मिल्स की एक ही कारोबारी कहानी
दिलचस्प बात यह है कि मोदीनगर की कहानी और दिल्ली की मोदी फ्लोर मिल्स की कहानी को अलग-अलग देखकर पूरी तस्वीर समझना मुश्किल है।
एक तरफ गूजरमल मोदी ने उत्तर प्रदेश में उद्योगों का ऐसा आधार तैयार किया, जिसके आसपास आगे चलकर पूरा शहर विकसित हुआ। दूसरी तरफ दिल्ली में मोदी नाम से जुड़ी औद्योगिक इकाइयों ने राजधानी के औद्योगिक विकास में अपनी जगह बनाई।
मोदीनगर आज भी अपने नाम में उस औद्योगिक विरासत को संजोए हुए है, जबकि ओखला की मोदी मिल्स दिल्ली के पुराने औद्योगिक दौर की याद दिलाती है।
आज भी क्यों चर्चा में है मोदी फ्लोर मिल्स?
आज दिल्ली में आटा और खाद्य उत्पादों का बाजार काफी बदल चुका है। बड़ी पैकेज्ड फूड कंपनियों से लेकर स्थानीय आटा मिलों तक प्रतिस्पर्धा बढ़ चुकी है। इसके बावजूद पुरानी औद्योगिक इकाइयों की कहानी लोगों की दिलचस्पी बनाए रखती है।
मोदी फ्लोर मिल्स इसी वजह से खास है। यह केवल एक आटा मिल की कहानी नहीं है, बल्कि दिल्ली के पुराने औद्योगिक विकास, मोदी परिवार की कारोबारी विरासत और बदलते भारतीय उद्योग जगत की कहानी का हिस्सा है।
निष्कर्ष: ओखला की मोदी फ्लोर मिल्स का इतिहास मोदी परिवार की औद्योगिक विरासत से जुड़ा है। 1930 और 1940 के दशक में विकसित हुए मोदी कारोबारी नेटवर्क की छाप इस प्रतिष्ठान पर भी दिखाई देती है। मौजूदा कॉरपोरेट रिकॉर्ड में Modi Flour Mills Private Limited के निदेशकों में सुरेश कुमार मोदी का नाम दर्ज है। इसलिए ‘असली मालिक’ के सवाल का सबसे जिम्मेदार जवाब यही है कि कंपनी का वर्तमान कानूनी ढांचा अलग से देखा जाना चाहिए, जबकि इसकी ऐतिहासिक पहचान मोदी परिवार और उनकी औद्योगिक विरासत से गहराई से जुड़ी हुई है।
Modi Flour Mills in Okhla, Delhi, is associated with the historic Modi business family founded by Gujarmal Modi. The mill has a long connection with flour, maida and suji production and has been an important name in Delhi’s food-processing industry. Current corporate records for Modi Flour Mills Private Limited list Suresh Kumar Modi as a director, while historical records connect the Modi Mills compound in Okhla with the Modi business interests. The story of Modi Flour Mills is also linked with the wider history of Modi Group and Modinagar.



















