AIN NEWS 1 | गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश
गाजियाबाद के मोदीनगर में शुक्रवार रात 16 अक्टूबर को दो पक्षों के बीच हुआ विवाद मारपीट तक पहुंच गया। मंगल विहार और हनुमानपुरी कॉलोनी से जुड़ी इस घटना के दौरान एक पिता-पुत्र घायल हो गए। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन वहां भी कहासुनी और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। हालात को संभालने के लिए आसपास के थानों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा। पुलिस ने मामले में तीन लोगों को हिरासत में लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
शुरुआत में यह मामला महिला से कथित छेड़छाड़ के शक से जुड़ा बताया गया था। हालांकि, मोदीनगर के एसीपी सिद्धार्थ गौतम के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, विवाद रास्ता खाली कराने और वाहन हटाने को लेकर शुरू हुआ था। ऐसे में घटना की वास्तविक वजह और दोनों पक्षों की भूमिका को लेकर पुलिस की जांच महत्वपूर्ण है।
रेलवे लाइन के पास शुरू हुआ विवाद
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मोदीनगर क्षेत्र की एक कॉलोनी में शुक्रवार रात एक परिवार के यहां जन्मदिन की पार्टी चल रही थी। इसी दौरान रेलवे लाइन के पास मालगाड़ी खड़ी थी। शिकायतकर्ता ओमवीर सिंह के पक्ष की ओर से बताया गया कि एक महिला अपने बच्चे के साथ मालगाड़ी के नीचे से रेलवे ट्रैक पार करने की कोशिश कर रही थी।
बताया गया कि ओमवीर और उनके पुत्र ने महिला को इस तरह रेलवे ट्रैक पार करते देखा तो संभावित हादसे की आशंका के चलते उसे रोकने या टोकने की कोशिश की। इसके बाद मौके पर मौजूद लोगों के बीच कहासुनी होने का आरोप है। शुरुआती शिकायत संबंधी विवरण में महिला से छेड़छाड़ के शक का भी उल्लेख किया गया।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग विवरण सामने आए हैं। पुलिस अधिकारी के बयान पर आधारित मीडिया रिपोर्टों में विवाद की वजह रास्ता खाली कराने और ई-रिक्शा हटाने को लेकर हुई बहस बताई गई है। इसलिए छेड़छाड़ के आरोप को फिलहाल प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। पुलिस जांच के बाद ही विवाद की परिस्थितियां अधिक स्पष्ट हो सकेंगी।
कहासुनी से मारपीट तक पहुंचा मामला
बताया गया कि शुरुआती बहस के बाद विवाद बढ़ गया और दोनों पक्षों के लोगों के बीच मारपीट शुरू हो गई। शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार, ओमवीर सिंह और उनके पुत्र के साथ मारपीट की गई, जिससे दोनों को चोटें आईं।
घटना की सूचना मिलने के बाद इलाके में लोगों की भीड़ जमा हो गई। मामला बढ़ने पर तनाव की स्थिति बन गई और मौके पर मौजूद लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई। कुछ रिपोर्टों में पथराव किए जाने का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, घटना के प्रत्येक पहलू की स्वतंत्र पुष्टि और उसमें शामिल लोगों की भूमिका के बारे में पुलिस जांच के निष्कर्षों का इंतजार किया जाना चाहिए।
घायल पिता-पुत्र को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। पुलिस की ओर से उनका मेडिकल परीक्षण कराए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
पुलिस पहुंची तो वहां भी हुई धक्का-मुक्की
दो पक्षों के बीच विवाद की सूचना मिलने पर मोदीनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने दोनों पक्षों को शांत कराने और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। इसी दौरान कुछ लोगों के पुलिसकर्मियों से उलझने और धक्का-मुक्की करने की बात सामने आई।
अमर उजाला की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि मौके पर मौजूद लोगों ने पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई की और एक उपनिरीक्षक की वर्दी का बैज टूट गया। रिपोर्ट में महिलाओं द्वारा पुलिस से अभद्रता किए जाने का भी उल्लेख है। इन आरोपों की पुष्टि और संबंधित व्यक्तियों की पहचान जांच तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जानी है।
स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए दूसरे थानों से भी पुलिस बल बुलाया गया। पुलिस ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को अलग किया और हालात को नियंत्रित करने का प्रयास किया। घटना के बाद इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने पर ध्यान दिया गया।
हिंदू संगठनों के लोग भी मौके पर पहुंचे
घटना की जानकारी मिलने पर हिंदू रक्षा दल सहित कुछ हिंदू संगठनों से जुड़े लोग भी मौके पर पहुंचे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, संगठन के लोगों ने पिता-पुत्र के साथ मारपीट किए जाने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की।
मौके पर नारेबाजी और हंगामे की भी जानकारी सामने आई। घटना के दो पक्षों और अलग-अलग दावों के कारण तनाव बढ़ने की आशंका को देखते हुए पुलिस के लिए कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता बन गया।
हालांकि, किसी भी संगठन या पक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों को पुलिस की जांच से पहले अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। मामले में निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई महत्वपूर्ण है।
एसीपी सिद्धार्थ गौतम ने क्या बताया?
एसीपी मोदीनगर सिद्धार्थ गौतम के बयान पर आधारित मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, विवाद रास्ता खाली कराने और वाहन हटाने को लेकर शुरू हुआ था। शुरुआती कहासुनी के बाद दोनों पक्षों के बीच मारपीट हुई, जिसमें शिकायतकर्ता और उनके पुत्र को चोटें आईं।
पुलिस ने घायलों का मेडिकल परीक्षण कराने और मामले में कार्रवाई करने की जानकारी दी। रिपोर्टों के अनुसार, तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस दोनों पक्षों से संबंधित घटनाक्रम की जांच कर रही है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि घटना को लेकर शुरुआती खबरों में छेड़छाड़ के शक का उल्लेख किया गया, जबकि पुलिस अधिकारी के हवाले से प्रकाशित विवरण में रास्ते और वाहन को लेकर विवाद की बात कही गई। दोनों विवरणों के बीच इस अंतर को देखते हुए घटना की वजह के बारे में किसी एक दावे को बिना आधिकारिक पुष्टि के अंतिम रूप देना उचित नहीं होगा।
सात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने के दावे की स्थिति
घटना के संबंध में सामने आए एक विवरण में मोहम्मद कैश, शहवाज, शाहिद, आबिद, परवेज, एक महिला और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने की बात कही गई है। हालांकि, उपलब्ध स्वतंत्र रिपोर्टों से इन सभी नामों, दर्ज धाराओं और प्राथमिकी की अंतिम स्थिति की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
इसलिए आरोपियों के नाम और एफआईआर से संबंधित विवरण को पुलिस की आधिकारिक जानकारी या प्राथमिकी की प्रति से मिलाना जरूरी है। तीन लोगों को हिरासत में लिए जाने की बात कई मीडिया रिपोर्टों में सामने आई है, लेकिन हिरासत में लिया जाना अपने आप में दोष सिद्ध होना नहीं है।
पुलिस जांच पर टिकी आगे की कार्रवाई
मोदीनगर की इस घटना में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि विवाद की शुरुआत किन परिस्थितियों में हुई, मारपीट में किसकी क्या भूमिका रही और पुलिस के साथ कथित धक्का-मुक्की में कौन-कौन शामिल था।
जांच में दोनों पक्षों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट, मौके पर मौजूद लोगों की जानकारी और उपलब्ध वीडियो या अन्य साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। पुलिस जांच के निष्कर्षों और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।
फिलहाल, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, घटना में पिता-पुत्र घायल हुए हैं और तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस ने विवाद के बाद स्थिति नियंत्रित करने की कार्रवाई की। मामले में छेड़छाड़ के शक से लेकर रास्ता खाली कराने तक अलग-अलग विवरण सामने आने के कारण पूरी घटना की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
AIN NEWS 1 की अपील: किसी भी घटना को लेकर अपुष्ट दावों या भ्रामक संदेशों को साझा करने से बचें। पुलिस जांच पूरी होने और तथ्य स्पष्ट होने तक किसी व्यक्ति या समुदाय को दोषी ठहराने से बचना चाहिए।
A clash was reported in Modinagar, Ghaziabad, on October 16, 2026, leaving a father and son injured. Three people were detained as Modinagar police investigated the dispute, which was initially linked to suspected molestation but was described in police-related media reports as an argument over clearing a road or moving a vehicle. The incident reportedly involved a confrontation with police personnel, prompting additional police deployment. The investigation is expected to clarify the circumstances of the Modinagar clash, the allegations made by both sides, and the legal action taken by Ghaziabad police.



















